कांग्रेस में बगावत!
Tuesday - June 4, 2019 4:07 pm ,
Category : WTN HINDI
लोकसभा चुनाव में ज़ोरदार शिकस्त के बाद कांग्रेस में ‘विरोध’ के सुर
ऐतिहासिक हार के बाद कांग्रेस नेताओं का राज्यों के नेतृत्व के ख़िलाफ़ फूटा गुस्सा
JUNE 04 (WTN) – लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक हार के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि कांग्रेस में देर से ही सही, लेकिन बगावत ज़रूर होगी। यदि कांग्रेस पार्टी के ताज़ा घटनाक्रम पर ध्यान दिया जाए तो कयास सही साबित होते नज़र आ रहे हैं। दरअसल, लोकसभा चुनाव में हार के बाद कई राज्यों में कांग्रेस पार्टी के अन्दर नेता से लेकर कार्यकर्ता तक बगावती सुर अपनाए हुए हैं। उन राज्यों में जहां पर कांग्रेस सरकार है वहां पर राज्य के मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ तो जहां पर सरकार नहीं है वहां पर प्रदेश अध्यक्ष के ख़िलाफ़ हार की ज़िम्मेदारी को लेकर बयानबाजी जारी है।
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तो साफ़ तौर पर लोकसभा चुनाव में अपने बेटे की हार के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट को ज़िम्मेदार ठहरा दिया। वहीं मध्य प्रदेश में सिर्फ़ एक सीट जीत सकी कांग्रेस में भी अंदरूनी गुटबाजी खुलकर सामने आई रही है। गुना सीट से लोकसभा चुनाव हारने वाले पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने तो कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में साफ़ कह दिया है कि मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ ठीक से प्रदर्शन नहीं कर सके हैं। हालांकि, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की हार पर किसी बड़े नेता ने सार्वजनिक बयान तो नहीं दिया है, लेकिन माना जा रहा है कि बगावत की आग छत्तीसगढ़ में भी सुलगना शुरू हो गई है।
बात करें महाराष्ट्र की तो यहां पर तो कांग्रेस नेताओं ने अपनी नाराज़गी सार्वजनिक करना भी शुरू कर दिया है। महाराष्ट्र में कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल ने अपने विधायक पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। कहा जाता है कि पाटिल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चव्हाण से नाराज़ चल रहे हैं। दरअसल, विखे पाटिल के बेटे ने लोकसभा चुनाव में भाजपा की सीट पर चुनाव में जीत हासिल की है, जिसके बाद पाटिल ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया। इस सबके बीच पाटिल ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस से मुलाक़ात की है, जिसके कई मायने निकाले जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि बेटे के भाजपा में शामिल होने के बाद पाटिल भी भाजपा में शामिल हो सकते हैं।
इधर महाराष्ट्र में कांग्रेस से निष्कासित एक अन्य विधायक अब्दुल सत्तार का दावा है कि कांग्रेस के 8 से 10 विधायक भाजपा के सम्पर्क में है। कहा जाता है कि ये विधायक कांग्रेस नेतृत्व से नाराज़ बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक़ महाराष्ट्र कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष अशोक चव्हाण के ख़िलाफ़ बगावत शुरू हो चुकी है। कई विधायक और अन्य नेता चव्हाण के काम करने के तरीक़े से खुश नहीं बताए जाते हैं।
बात करे कर्नाटक की तो यहां कांग्रेस पार्टी के नेता रोशन बेग ने राज्य नेतृत्व के ख़िलाफ़ बगावत का बिगुल फूंक दिया है। कहा जा रहा है कि बेग, लोकसभा चुनाव में राज्य में कांग्रेस करारी हार के लिए राज्य के नेतृत्व को ज़िम्मेदार मान रहे हैं। बेग ही नहीं कर्नाटक कांग्रेस के कुछ अन्य नेता भी राज्य में कांग्रेस नेतृत्व से नाराज़ बताए जाते हैं। दरअसल, राज्य के कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी की जा रही है, जिसका खामियाजा लोकसभा चुनाव में हार के रूप में उठाना पड़ा है।
जैसा कि आप जानते हैं कि कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी ने जेडीएस को सरकार बनाने के लिए समर्थन दिया है और वो खुद भी सरकार में शामिल है। लेकिन कहा जाता है कि कर्नाटक में जेडीएस-कांग्रेस की सरकार कभी भी गिर सकती है, क्योंकि दोनों ही पार्टियों के नेता एक दूसरे के साथ असहज महसूस कर रहे हैं। वैसे कर्नाटक में सरकार गिराने की कोशिशें हो चुकी हैं, लेकिन हर बार यह कोशिशें नाकामयाब ही रही हैं। पर अब कहा जा रहा है कि कांग्रेस और जेडीएस नेताओं के कारण ही किसी भी दिन सरकार गिर सकती है।
इधर गुजरात में भी कांग्रेस की हालत पहले से और भी ज़्यादा ख़राब होती जा रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस टिकट पर जीत हासिल करने वाले अल्पेश ठाकोर अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं। ठाकोर का दावा है कि गुजरात में कांग्रेस के क़रीब 15 से ज़्यादा विधायक पार्टी छोड़ सकते हैं। गुजरात में वैसे भी कांग्रेस हाशिये पर जा चुकी है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी में कभी भी गुजरात में बड़ी बगावत हो सकती है।
यानी कि कुल मिलाकर देखा जाए तो लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस पार्टी में धीरे-धीरे बगावत के सुर फूटने लगे हैं। अभी यह बगावत सिर्फ़ राज्यों तक ही सीमित है। कहा जा रहा है कि राज्यों के कांग्रेस नेता दिल्ली जाकर कांग्रेस आलाकमान से राज्य नेतृत्व की शिकायत कर सकते हैं। इस समय जबकि कांग्रेस पार्टी अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है और ज़मीनी रूप से काफ़ी कमज़ोर हो चुकी है, ऐसे में कांग्रेस नेताओं की बगावत इसे और भी कमज़ोर कर रही है। अब देखना होगा कि इस बगावत को कैसे और कितने जल्दी कांग्रेस अलाकमान शांत कर पाता है।
JUNE 04 (WTN) – लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक हार के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि कांग्रेस में देर से ही सही, लेकिन बगावत ज़रूर होगी। यदि कांग्रेस पार्टी के ताज़ा घटनाक्रम पर ध्यान दिया जाए तो कयास सही साबित होते नज़र आ रहे हैं। दरअसल, लोकसभा चुनाव में हार के बाद कई राज्यों में कांग्रेस पार्टी के अन्दर नेता से लेकर कार्यकर्ता तक बगावती सुर अपनाए हुए हैं। उन राज्यों में जहां पर कांग्रेस सरकार है वहां पर राज्य के मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ तो जहां पर सरकार नहीं है वहां पर प्रदेश अध्यक्ष के ख़िलाफ़ हार की ज़िम्मेदारी को लेकर बयानबाजी जारी है।
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तो साफ़ तौर पर लोकसभा चुनाव में अपने बेटे की हार के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट को ज़िम्मेदार ठहरा दिया। वहीं मध्य प्रदेश में सिर्फ़ एक सीट जीत सकी कांग्रेस में भी अंदरूनी गुटबाजी खुलकर सामने आई रही है। गुना सीट से लोकसभा चुनाव हारने वाले पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने तो कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में साफ़ कह दिया है कि मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ ठीक से प्रदर्शन नहीं कर सके हैं। हालांकि, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की हार पर किसी बड़े नेता ने सार्वजनिक बयान तो नहीं दिया है, लेकिन माना जा रहा है कि बगावत की आग छत्तीसगढ़ में भी सुलगना शुरू हो गई है।
बात करें महाराष्ट्र की तो यहां पर तो कांग्रेस नेताओं ने अपनी नाराज़गी सार्वजनिक करना भी शुरू कर दिया है। महाराष्ट्र में कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल ने अपने विधायक पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। कहा जाता है कि पाटिल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चव्हाण से नाराज़ चल रहे हैं। दरअसल, विखे पाटिल के बेटे ने लोकसभा चुनाव में भाजपा की सीट पर चुनाव में जीत हासिल की है, जिसके बाद पाटिल ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया। इस सबके बीच पाटिल ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस से मुलाक़ात की है, जिसके कई मायने निकाले जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि बेटे के भाजपा में शामिल होने के बाद पाटिल भी भाजपा में शामिल हो सकते हैं।
इधर महाराष्ट्र में कांग्रेस से निष्कासित एक अन्य विधायक अब्दुल सत्तार का दावा है कि कांग्रेस के 8 से 10 विधायक भाजपा के सम्पर्क में है। कहा जाता है कि ये विधायक कांग्रेस नेतृत्व से नाराज़ बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक़ महाराष्ट्र कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष अशोक चव्हाण के ख़िलाफ़ बगावत शुरू हो चुकी है। कई विधायक और अन्य नेता चव्हाण के काम करने के तरीक़े से खुश नहीं बताए जाते हैं।
बात करे कर्नाटक की तो यहां कांग्रेस पार्टी के नेता रोशन बेग ने राज्य नेतृत्व के ख़िलाफ़ बगावत का बिगुल फूंक दिया है। कहा जा रहा है कि बेग, लोकसभा चुनाव में राज्य में कांग्रेस करारी हार के लिए राज्य के नेतृत्व को ज़िम्मेदार मान रहे हैं। बेग ही नहीं कर्नाटक कांग्रेस के कुछ अन्य नेता भी राज्य में कांग्रेस नेतृत्व से नाराज़ बताए जाते हैं। दरअसल, राज्य के कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी की जा रही है, जिसका खामियाजा लोकसभा चुनाव में हार के रूप में उठाना पड़ा है।
जैसा कि आप जानते हैं कि कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी ने जेडीएस को सरकार बनाने के लिए समर्थन दिया है और वो खुद भी सरकार में शामिल है। लेकिन कहा जाता है कि कर्नाटक में जेडीएस-कांग्रेस की सरकार कभी भी गिर सकती है, क्योंकि दोनों ही पार्टियों के नेता एक दूसरे के साथ असहज महसूस कर रहे हैं। वैसे कर्नाटक में सरकार गिराने की कोशिशें हो चुकी हैं, लेकिन हर बार यह कोशिशें नाकामयाब ही रही हैं। पर अब कहा जा रहा है कि कांग्रेस और जेडीएस नेताओं के कारण ही किसी भी दिन सरकार गिर सकती है।
इधर गुजरात में भी कांग्रेस की हालत पहले से और भी ज़्यादा ख़राब होती जा रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस टिकट पर जीत हासिल करने वाले अल्पेश ठाकोर अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं। ठाकोर का दावा है कि गुजरात में कांग्रेस के क़रीब 15 से ज़्यादा विधायक पार्टी छोड़ सकते हैं। गुजरात में वैसे भी कांग्रेस हाशिये पर जा चुकी है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी में कभी भी गुजरात में बड़ी बगावत हो सकती है।
यानी कि कुल मिलाकर देखा जाए तो लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस पार्टी में धीरे-धीरे बगावत के सुर फूटने लगे हैं। अभी यह बगावत सिर्फ़ राज्यों तक ही सीमित है। कहा जा रहा है कि राज्यों के कांग्रेस नेता दिल्ली जाकर कांग्रेस आलाकमान से राज्य नेतृत्व की शिकायत कर सकते हैं। इस समय जबकि कांग्रेस पार्टी अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है और ज़मीनी रूप से काफ़ी कमज़ोर हो चुकी है, ऐसे में कांग्रेस नेताओं की बगावत इसे और भी कमज़ोर कर रही है। अब देखना होगा कि इस बगावत को कैसे और कितने जल्दी कांग्रेस अलाकमान शांत कर पाता है।