‘बर्बादी’ की ओर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था
Wednesday - June 5, 2019 11:10 am ,
Category : WTN HINDI
पाकिस्तान में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची महंगाई
बेतहाशा महंगाई के कारण ‘बेनूर’ रही पाकिस्तान में ईद की रौनक
JUNE 05 (WTN) – आतंकवाद को बढ़ावा देने, भारत से कोई बराबरी ना होने के बाद भी भारत से मुक़ाबला करने, सेना के शासन में हस्तक्षेप और ग़लत आर्थिक नीतियों के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की हालत इतनी दयनीय हो गई है कि वहां के नागरिकों को कंगाली में ईद मनानी पड़ रही है। एक दौर था जब ईद के मौक़े पर पाकिस्तान के बाज़ारों में रौनक रहा करती थी और करोड़ों का व्यापार होता था। लेकिन कर्ज़ में डूबे पाकिस्तान की यह हालत हो गई है कि वहां के कई शहरों में ईद के मौक़े पर बाज़ारों से रौनक गायब रही तो वहीं शॉपिंग मॉल भी ग्राहकों का इंतज़ार करते रहे।
मुद्रास्फीति के कारण पाकिस्तान में महंगाई ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये हैं। हालात यह हो गए हैं कि वस्तुओं के दाम कई गुना तक बढ़ गये हैं। पाकिस्तान में महंगाई ने हालत यह कर दी है कि आम ज़रूरतों की वस्तुओं भी काफ़ी महंगी हो गई हैं, जिससे पाकिस्तान की निम्न मध्यमवर्गीय जनता का जीना दूभर हो गया है। पाकिस्तान में महंगाई इतनी भयावह हो चुकी है कि गहने और कपड़ों की ख़रीदी बस अमीरी लोग ही कर पा रहे हैं। ईद जैसे त्यौहार पर भी अच्छे कपड़े ग़रीबों की पहुंच से बाहर हैं।
अच्छे कपड़े और गहने तो दूर की बात है, पाकिस्तान में जूते इतने महंगे हो गये हैं कि इन्हें ख़रीदने की हिम्मत एक आम पाकिस्तानी नहीं उठा पा रहा है। पाकिस्तान में मेहंदी और चूड़ियों के दाम भी इतने बढ़ चुके हैं कि महिलाएं परेशान हो रही हैं। पाकिस्तान की ख़राब आर्थिक हालत के कारण इस साल पाकिस्तान में ईद के मौक़े पर ग़रीबों के चेहरे पर मायूसी ही देखी गई। दरअसल, पाकिस्तान में दामों को नियंत्रित करने के लिए कोई नियायक संस्था नहीं है जो बढ़ती महंगाई के मद्देनज़र वस्तुओं की क़ीमतों पर नियंत्रण रख सके।
बढ़ती महंगाई के कारण पाकिस्तान के व्यापारी भी काफ़ी परेशान हैं। वस्तुओं के दामों में बेतहाशा वृद्धि के कारण दुकानों पर ग्राहक कम आ रहे हैं, जिसके कारण व्यापारियों को घाटा उठाना पड़ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि पाकिस्तान की इमरान खान सरकार ने देश की जनता से जो वायदे किये थे वे कहीं से भी पूरे होते नहीं दिख रहे हैं। पाकिस्तान के कई शहरों में तो मज़दूरों की हालत काफ़ी ख़राब है, क्योंकि महंगाई के कारण निर्माण कार्य ठप सा पड़ा हुआ है और मज़दूरों को काम नहीं मिल पा रहा है। कई शहरों में तो मज़दूरों को दो वक़्त का खाना तक नसीब नहीं हो पा रहा है।
इमरान खान सरकार की ग़लत आर्थिक नीतियों का ही नतीजा है कि पिछले एक महीने में पाकिस्तान की करेंसी अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले सबसे ज़्यादा कमज़ोर हुई है। पाकिस्तान की कमज़ोर करेंसी का नुकसान ही आम पाकिस्तानी को उठाना पड़ रहा है, जिसके कारण महंगाई ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गई है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान में महंगाई दर 8.82 प्रतिशत से बढ़कर 9.11 प्रतिशत हो गई है। डॉलर महंगा होने से पाकिस्तान में पेट्रोल और डीज़ल के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके हैं। वहीं ईंधन महंगा होने से पाकिस्तान में सभी वस्तुएं और सेवाएं भी महंगी हो गई हैं।
इस दयनीय आर्थिक हालत से निकलने के लिए पाकिस्तान की इमरान खान सरकार, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से 6 अरब डॉलर का बैल आउट पैकेज ले रही है। लेकिन कहा जा रहा है कि आईएमएफ की शर्तें इतनी कड़ी हैं कि जिन्हें अपनाने पर पाकिस्तान में महंगाई और बढ़ेगी। आईएमएफ की शर्तों पर यदि पाकिस्तान ने अमल किया, तो कुछ ही महीनों में पाकिस्तान का मध्यम वर्ग पूरी तरह से तबाह हो जाएगा।
वैसे जब से इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने हैं, तब से पाकिस्तान की आर्थिक हालत और भी ज़्यादा ख़राब हो गई है। कहा जाता है कि इमरान खान पाकिस्तान की सेना की कठपुतली की तरह काम कर रहे हैं। इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने के बाद पाकिस्तान की सेना ने आतंक को बढ़ावा देने और हथियार ख़रीदी पर ज़्यादा ध्यान दिया है। पाकिस्तान की ग़लत आर्थिक नीतियों के कारण ही पिछले नौ महीनों में पाकिस्तान पर कर्ज़ 28 हजार अरब रुपये से ज़्यादा हो गया है।
अंतर्राष्ट्रीय अर्थशास्त्र के जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान की आर्थिक हालत में सुधार निकट भविष्य में तो सम्भव नहीं दिख रहा है। आईएमएफ की कड़ी शर्तों पर मिल रहे बैलआउट पैकेज से पाकिस्तान की आम जनता को काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। अगले वित्तीय वर्ष में पाकिस्तान में महंगाई की दर 12 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया जा रहा है। वहीं पाकिस्तान का शेयर मार्केट भी तबाह हुआ पड़ा है। यानी कि कुल मिलाकर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था किसी भी दिन धराशायी हो सकती है, और यदि ऐसा होता है इसके लिए खुद पाकिस्तान ही ज़िम्मेदार है।
JUNE 05 (WTN) – आतंकवाद को बढ़ावा देने, भारत से कोई बराबरी ना होने के बाद भी भारत से मुक़ाबला करने, सेना के शासन में हस्तक्षेप और ग़लत आर्थिक नीतियों के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की हालत इतनी दयनीय हो गई है कि वहां के नागरिकों को कंगाली में ईद मनानी पड़ रही है। एक दौर था जब ईद के मौक़े पर पाकिस्तान के बाज़ारों में रौनक रहा करती थी और करोड़ों का व्यापार होता था। लेकिन कर्ज़ में डूबे पाकिस्तान की यह हालत हो गई है कि वहां के कई शहरों में ईद के मौक़े पर बाज़ारों से रौनक गायब रही तो वहीं शॉपिंग मॉल भी ग्राहकों का इंतज़ार करते रहे।
मुद्रास्फीति के कारण पाकिस्तान में महंगाई ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये हैं। हालात यह हो गए हैं कि वस्तुओं के दाम कई गुना तक बढ़ गये हैं। पाकिस्तान में महंगाई ने हालत यह कर दी है कि आम ज़रूरतों की वस्तुओं भी काफ़ी महंगी हो गई हैं, जिससे पाकिस्तान की निम्न मध्यमवर्गीय जनता का जीना दूभर हो गया है। पाकिस्तान में महंगाई इतनी भयावह हो चुकी है कि गहने और कपड़ों की ख़रीदी बस अमीरी लोग ही कर पा रहे हैं। ईद जैसे त्यौहार पर भी अच्छे कपड़े ग़रीबों की पहुंच से बाहर हैं।
अच्छे कपड़े और गहने तो दूर की बात है, पाकिस्तान में जूते इतने महंगे हो गये हैं कि इन्हें ख़रीदने की हिम्मत एक आम पाकिस्तानी नहीं उठा पा रहा है। पाकिस्तान में मेहंदी और चूड़ियों के दाम भी इतने बढ़ चुके हैं कि महिलाएं परेशान हो रही हैं। पाकिस्तान की ख़राब आर्थिक हालत के कारण इस साल पाकिस्तान में ईद के मौक़े पर ग़रीबों के चेहरे पर मायूसी ही देखी गई। दरअसल, पाकिस्तान में दामों को नियंत्रित करने के लिए कोई नियायक संस्था नहीं है जो बढ़ती महंगाई के मद्देनज़र वस्तुओं की क़ीमतों पर नियंत्रण रख सके।
बढ़ती महंगाई के कारण पाकिस्तान के व्यापारी भी काफ़ी परेशान हैं। वस्तुओं के दामों में बेतहाशा वृद्धि के कारण दुकानों पर ग्राहक कम आ रहे हैं, जिसके कारण व्यापारियों को घाटा उठाना पड़ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि पाकिस्तान की इमरान खान सरकार ने देश की जनता से जो वायदे किये थे वे कहीं से भी पूरे होते नहीं दिख रहे हैं। पाकिस्तान के कई शहरों में तो मज़दूरों की हालत काफ़ी ख़राब है, क्योंकि महंगाई के कारण निर्माण कार्य ठप सा पड़ा हुआ है और मज़दूरों को काम नहीं मिल पा रहा है। कई शहरों में तो मज़दूरों को दो वक़्त का खाना तक नसीब नहीं हो पा रहा है।
इमरान खान सरकार की ग़लत आर्थिक नीतियों का ही नतीजा है कि पिछले एक महीने में पाकिस्तान की करेंसी अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले सबसे ज़्यादा कमज़ोर हुई है। पाकिस्तान की कमज़ोर करेंसी का नुकसान ही आम पाकिस्तानी को उठाना पड़ रहा है, जिसके कारण महंगाई ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गई है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान में महंगाई दर 8.82 प्रतिशत से बढ़कर 9.11 प्रतिशत हो गई है। डॉलर महंगा होने से पाकिस्तान में पेट्रोल और डीज़ल के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके हैं। वहीं ईंधन महंगा होने से पाकिस्तान में सभी वस्तुएं और सेवाएं भी महंगी हो गई हैं।
इस दयनीय आर्थिक हालत से निकलने के लिए पाकिस्तान की इमरान खान सरकार, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से 6 अरब डॉलर का बैल आउट पैकेज ले रही है। लेकिन कहा जा रहा है कि आईएमएफ की शर्तें इतनी कड़ी हैं कि जिन्हें अपनाने पर पाकिस्तान में महंगाई और बढ़ेगी। आईएमएफ की शर्तों पर यदि पाकिस्तान ने अमल किया, तो कुछ ही महीनों में पाकिस्तान का मध्यम वर्ग पूरी तरह से तबाह हो जाएगा।
वैसे जब से इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने हैं, तब से पाकिस्तान की आर्थिक हालत और भी ज़्यादा ख़राब हो गई है। कहा जाता है कि इमरान खान पाकिस्तान की सेना की कठपुतली की तरह काम कर रहे हैं। इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने के बाद पाकिस्तान की सेना ने आतंक को बढ़ावा देने और हथियार ख़रीदी पर ज़्यादा ध्यान दिया है। पाकिस्तान की ग़लत आर्थिक नीतियों के कारण ही पिछले नौ महीनों में पाकिस्तान पर कर्ज़ 28 हजार अरब रुपये से ज़्यादा हो गया है।
अंतर्राष्ट्रीय अर्थशास्त्र के जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान की आर्थिक हालत में सुधार निकट भविष्य में तो सम्भव नहीं दिख रहा है। आईएमएफ की कड़ी शर्तों पर मिल रहे बैलआउट पैकेज से पाकिस्तान की आम जनता को काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। अगले वित्तीय वर्ष में पाकिस्तान में महंगाई की दर 12 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया जा रहा है। वहीं पाकिस्तान का शेयर मार्केट भी तबाह हुआ पड़ा है। यानी कि कुल मिलाकर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था किसी भी दिन धराशायी हो सकती है, और यदि ऐसा होता है इसके लिए खुद पाकिस्तान ही ज़िम्मेदार है।