क्या हम भारतीय गंदे हैं?
Thursday - June 6, 2019 12:40 pm ,
Category : WTN HINDI
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भारतीयों को बताया पर्यावरण के प्रति ‘गैरज़िम्मेदार’
भारतीयों पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने किया ‘तीखा कटाक्ष’, अप्रत्यक्ष रूप से कहा ‘लापरवाह’!
JUNE 06 (WTN) – लेख का शीर्षक पढ़कर आप सोचने लगे होंगे कि आख़िर ऐसा क्यों हमने लिखा है कि हम भारतीय गंदे हैं। दरअसल, भारतीय लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से गंदा, गैर ज़िम्मेदार और लापरवाह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है। ट्रम्प के दिये बयान पर बहस हो सकती है कि उन्होंने भारतीय लोगों के विषय में ऐसी टिप्पणी क्यों की, लेकिन यदि तटस्थ रहकर देखा जाए और सोचा जाए तो सही में भारतीय लोग गंदगी करने में सबसे आगे हैं और पर्यावरण के प्रति गैर ज़िम्मेदार और लापरवाह हैं। रास्ते में कचरा फेंकना, थूकना और गंदगी करना यह वे काम हैं जो आपको भारत के हर छोटे बड़े शहर में देखने मिल जाएंगे। हम भारतीयों की ग़लतियों के कारण ही आज भारत में साफ़ हवा और शुद्ध पानी नसीब नहीं हो पाता है।
डोनाल्ड ट्रम्प ने भारतीय लोगों पर यह तीखी टिप्पणी ब्रिटिश चैनल आईटीवी को दिये एक इंटरव्यू में की है। अमेरिका को एक ज़िम्मेदार देश बताते हुए ट्रम्प ने कहा कि पेरिस जलवायु समझौते से बाहर होने के बाद भी अमेरिका की जलवायु सबसे साफ़ है। इंटरव्यू के दौरान ट्रम्प ने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भारत के साथ-साथ चीन और रूस पर भी तंज कसा। ट्रम्प ने कहा कि भारत, चीन और रूस में साफ़ हवा और शुद्ध पानी तक नसीब नहीं होता है।
इतना ही नहीं, ट्रम्प ने रूसियों, चीनियों और भारतीयों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि इन लोगों में सफ़ाई और प्रदूषण को लेकर कोई समझ नहीं है। ट्रम्प ने वैसे किसी भारतीय शहर का नाम नहीं लिया, लेकिन कहा कि यदि आप इन शहरों में जाएं तो आप सांस तक नहीं ले सकते हैं। ट्रम्प ने कहा कि रूस, चीन और भारत जैसे देश पर्यावरण के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी को नहीं निभा रहे हैं।
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने पूर्ववर्ती राष्ट्रपति बराक ओबामा के फ़ैसले को पलटकर पेरिस समझौते से अमेरिका को अलग कर लिया था। ट्रम्प को पेरिस समझौते से आपत्ति थी, उनके अनुसार प्रदूषण फ़ैलाने के बाद भी भारत, चीन और यूरोप को समझौते में सुविधा दी गई थी, जबकि पर्यावरण के प्रति सचेत रहने वाले अमेरिका को इसमें ‘सजा’ दी गई थी। ट्रम्प के मुताबिक़ पेरिस समझौते से अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर ख़राब असर पड़ रहा था इसलिए उन्होंने अमेरिका को इस समझौते से बाहर कर लिया।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भारतीय लोगों की गंदगी करने की आदत पर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर कटाक्ष किया है, जिसके बाद हम भारतीयों को इस पर गम्भीरता से विचार करना होगा। यह सच है कि खुद के घर को साफ़ रखने में तो हम भारतीय आगे हैं और सक्रिय हैं, लेकिन गलियों, सड़कों और सार्वजनिक स्थलों को गंदा करने में हम अव्वल हैं। गलियों और सड़कों पर कचरा फेकने से लेकर थूकने तक, हम भारतीय हमेशा से ही गंदगी फ़ैलाने में संकोच नहीं करते हैं।
वहीं गाड़ियों और फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं से हमने हवा को ख़राब कर दिया है, जिसके कारण देश के बड़े शहरों में सांस लेने में परेशानी होने लगी है। वहीं नदियों को गंदा करने में भी भारतीय लोगों की कोई बराबरी नहीं है। एक जानकारी के मुताबिक़, गंगा समेत भारत की लगभग सभी बड़ी और छोटी नदियों का पानी पीने लायक नहीं बचा है। कटू सत्य है कि हम भारतीयों ने खुद ही अपने पर्यावरण का ध्यान नहीं रखा है, तभी भारत के कई शहर दुनिया के सबसे ज़्यादा प्रदूषित शहरों में आते हैं।
भारतीय लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया था, जिसको काफ़ी रिस्पांस भारत की जनता की तरफ़ से मिला। आजकल देश का बच्चा भी जागरूक हो गया है कि उसे गलियों, सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी नहीं करना चाहिए। लेकिन अभी भी देश में गंदगी दूर करने और सफाई की ज़रूरत है। केन्द्र और राज्य सरकारों को जल्द से जल्द नियमों में संशोधन कर ऐसे कानून बनाना चाहिए, जिससे हवा और पानी को दूषित करने वालों को कड़ा दण्ड मिले। आशा की जानी चाहिए कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की तीखी टिप्पणी के बाद भारतीय लोगों को 'शर्म' आएगी और वे सफाई के प्रति जागरूक होंगे, नदियों को साफ़ रखेंगे और हवा को सांस लेने लायक रहने देंगे।
JUNE 06 (WTN) – लेख का शीर्षक पढ़कर आप सोचने लगे होंगे कि आख़िर ऐसा क्यों हमने लिखा है कि हम भारतीय गंदे हैं। दरअसल, भारतीय लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से गंदा, गैर ज़िम्मेदार और लापरवाह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है। ट्रम्प के दिये बयान पर बहस हो सकती है कि उन्होंने भारतीय लोगों के विषय में ऐसी टिप्पणी क्यों की, लेकिन यदि तटस्थ रहकर देखा जाए और सोचा जाए तो सही में भारतीय लोग गंदगी करने में सबसे आगे हैं और पर्यावरण के प्रति गैर ज़िम्मेदार और लापरवाह हैं। रास्ते में कचरा फेंकना, थूकना और गंदगी करना यह वे काम हैं जो आपको भारत के हर छोटे बड़े शहर में देखने मिल जाएंगे। हम भारतीयों की ग़लतियों के कारण ही आज भारत में साफ़ हवा और शुद्ध पानी नसीब नहीं हो पाता है।
डोनाल्ड ट्रम्प ने भारतीय लोगों पर यह तीखी टिप्पणी ब्रिटिश चैनल आईटीवी को दिये एक इंटरव्यू में की है। अमेरिका को एक ज़िम्मेदार देश बताते हुए ट्रम्प ने कहा कि पेरिस जलवायु समझौते से बाहर होने के बाद भी अमेरिका की जलवायु सबसे साफ़ है। इंटरव्यू के दौरान ट्रम्प ने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भारत के साथ-साथ चीन और रूस पर भी तंज कसा। ट्रम्प ने कहा कि भारत, चीन और रूस में साफ़ हवा और शुद्ध पानी तक नसीब नहीं होता है।
इतना ही नहीं, ट्रम्प ने रूसियों, चीनियों और भारतीयों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि इन लोगों में सफ़ाई और प्रदूषण को लेकर कोई समझ नहीं है। ट्रम्प ने वैसे किसी भारतीय शहर का नाम नहीं लिया, लेकिन कहा कि यदि आप इन शहरों में जाएं तो आप सांस तक नहीं ले सकते हैं। ट्रम्प ने कहा कि रूस, चीन और भारत जैसे देश पर्यावरण के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी को नहीं निभा रहे हैं।
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने पूर्ववर्ती राष्ट्रपति बराक ओबामा के फ़ैसले को पलटकर पेरिस समझौते से अमेरिका को अलग कर लिया था। ट्रम्प को पेरिस समझौते से आपत्ति थी, उनके अनुसार प्रदूषण फ़ैलाने के बाद भी भारत, चीन और यूरोप को समझौते में सुविधा दी गई थी, जबकि पर्यावरण के प्रति सचेत रहने वाले अमेरिका को इसमें ‘सजा’ दी गई थी। ट्रम्प के मुताबिक़ पेरिस समझौते से अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर ख़राब असर पड़ रहा था इसलिए उन्होंने अमेरिका को इस समझौते से बाहर कर लिया।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भारतीय लोगों की गंदगी करने की आदत पर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर कटाक्ष किया है, जिसके बाद हम भारतीयों को इस पर गम्भीरता से विचार करना होगा। यह सच है कि खुद के घर को साफ़ रखने में तो हम भारतीय आगे हैं और सक्रिय हैं, लेकिन गलियों, सड़कों और सार्वजनिक स्थलों को गंदा करने में हम अव्वल हैं। गलियों और सड़कों पर कचरा फेकने से लेकर थूकने तक, हम भारतीय हमेशा से ही गंदगी फ़ैलाने में संकोच नहीं करते हैं।
वहीं गाड़ियों और फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं से हमने हवा को ख़राब कर दिया है, जिसके कारण देश के बड़े शहरों में सांस लेने में परेशानी होने लगी है। वहीं नदियों को गंदा करने में भी भारतीय लोगों की कोई बराबरी नहीं है। एक जानकारी के मुताबिक़, गंगा समेत भारत की लगभग सभी बड़ी और छोटी नदियों का पानी पीने लायक नहीं बचा है। कटू सत्य है कि हम भारतीयों ने खुद ही अपने पर्यावरण का ध्यान नहीं रखा है, तभी भारत के कई शहर दुनिया के सबसे ज़्यादा प्रदूषित शहरों में आते हैं।
भारतीय लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया था, जिसको काफ़ी रिस्पांस भारत की जनता की तरफ़ से मिला। आजकल देश का बच्चा भी जागरूक हो गया है कि उसे गलियों, सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी नहीं करना चाहिए। लेकिन अभी भी देश में गंदगी दूर करने और सफाई की ज़रूरत है। केन्द्र और राज्य सरकारों को जल्द से जल्द नियमों में संशोधन कर ऐसे कानून बनाना चाहिए, जिससे हवा और पानी को दूषित करने वालों को कड़ा दण्ड मिले। आशा की जानी चाहिए कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की तीखी टिप्पणी के बाद भारतीय लोगों को 'शर्म' आएगी और वे सफाई के प्रति जागरूक होंगे, नदियों को साफ़ रखेंगे और हवा को सांस लेने लायक रहने देंगे।