रेलवे के नये नियम से यात्रियों को हो सकती ‘परेशानी’
Saturday - June 8, 2019 10:42 am ,
Category : WTN HINDI
एयरपोर्ट की तर्ज पर होगी बड़े रेलवे स्टेशनों पर एंट्री
चुनिंदा रेलवे स्टेशनों पर बिना टिकिट प्लेटफॉर्म पर प्रवेश होगा ‘प्रतिबंधित’!
JUNE 08 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर जाने के लिए प्लेटफॉर्म टिकिट की ज़रूरत होती है। जब आप यात्रा नहीं कर रहे होते हैं तो उस दौरान किसी को ट्रेन में बिठाने या फ़िर लेने के लिए आप प्लेटफॉर्म टिकिट लेकर प्लेटफॉर्म पर जाते हैं। लेकिन अब देश के कुछ चुनिंदा स्टेशनों के प्लेटफॉर्म पर आप प्लेटफॉर्म टिकिट लेकर भी प्रवेश नहीं कर पाएंगे। ऐसा क्यों, आइये आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं।
दरअसल, सुरक्षा के मद्देनज़र और रेलवे स्टेशनों पर बढ़ती भीड़ को कम करने के लिए रेलवे अपने कुछ चुनिंदा स्टेशनों पर एयरपोर्ट जैसी एंट्री और एग्जिट की व्यवस्था करने जा रहा है। रेलवे अपने 100 दिनों के एजेंडे के तहत देश के ए-वन कैटेगिरी के रेलवे स्टेशनों को मॉर्डन करने की योजना के तहत ऐसा कर रहा है। लेकिन लोगों का मानना है कि रेलवे के इस नये नियम से यात्रियों को काफ़ी मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा, ख़ासकर उन यात्रियों को जो बुजुर्ग हैं या फ़िर बीमार।
रेलवे की नई योजना के तहत सिर्फ़ वे ही लोग रेलवे प्लेटफॉर्म पर प्रवेश कर पाएंगे, जिनके पास यात्रा की टिकिट होगी। यानि कि प्लेटफॉर्म टिकिट वालों को अब प्लेटफॉर्म पर एंट्री नहीं मिलेगी। जानकारी के मुताबिक़, सभी A और A1 कैटेगिरी के स्टेशनों पर ऑटोमेटेड गेट लगाने की व्यवस्था की जा रही है। इस योजना को शुरुआत में हबीबगंज और गांधीनगर रेलवे स्टेशनों पर लागू किया जाएगा। इस योजना की समीक्षा के बाद इसे दिल्ली और मुम्बई जैसे स्टेशनों पर भी लागू किया जाएगा।
रेलवे का दावा है कि रेलवे स्टेशनों की बेहतर सुरक्षा के लिए आरपीएफ कमाण्डो को भी एयरपोर्ट पर तैनात सीआईएसएफ कमाण्डो की तरह ट्रेनिंग दी जाएगी। इस प्रोजेक्ट के लिए रेलवे ने 115 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई है। रेलवे का तर्क है कि इस सबके पीछे मुख्य मक़सद है यात्रियों की सुरक्षा, जो कि उसकी पहली प्राथमिकता है।
वैसे पहली नज़र में तो रेलवे का यह विचार सराहनीय है कि स्टेशनों की सुरक्षा और प्लेटफॉर्मों पर बढ़ती भीड़ को नियंत्रित रखने के लिए कोई उपाय किया जाना चाहिए। लेकिन प्लेटफॉर्म टिकिट होने पर भी प्लेटफॉर्म पर प्रवेश पर रोक लगाना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है। दरअसल, अपने आप में रेलवे की योजना पूरी तरह से अव्यवहारिक है। एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन में यात्रियों के आने-जाने की व्यवस्था की तुलना किसी भी तरह से जायज नहीं है। ऐसा इसलिए, क्योंकि एयरपोर्ट शहर से दूर होते हैं और वहां पर रेलवे स्टेशन की तुलना में बहुत ही कम लोग जाते हैं, जिसके कारण एयरपोर्ट पर सभी के टिकिट चेक करने के बाद उन्हें प्रवेश दिया जा सकता है।
लेकिन बड़े रेलवे स्टेशनों पर इतनी भीड़ होती है कि टिकिट चेक कर यात्रियों को प्रवेश देना अव्यवहारिक है। वहीं बुजुर्ग या बीमार व्यक्ति ट्रेन जब ट्रेन में अकेला सफ़र करता है, तो उसे लेने के लिए प्लेटफॉर्म पर उसके परिजन या परिचित प्लेटफॉर्म टिकिट लेकर ही प्रवेश करते हैं। लेकिन यदि प्लेटफॉर्म पर यात्रियों के अलावा किसी और को प्रवेश नहीं दिया जाएगा, तो इन परिस्थितियों में अकेले यात्रा कर रहे बुजुर्ग और बीमार व्यक्तियों को स्टेशन के बाहर आने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
यह सही है कि यात्रियों की सुरक्षा करना रेलवे का पहला मकसद है। लेकिन बड़े स्टेशनों पर हर यात्री की टिकिट चेक करने के बाद उसे प्लेटफॉर्म पर प्रवेश देने के चक्कर में कई बार लोगों की ट्रेन छूटेगी, तो फ़िर ऐसे में इसकी जवाबदेही किसकी रहेगी? एयरपोर्ट से रेलवे स्टेशन की तुलना करना तो अव्यवहारिक है ही, उससे ज़्यादा अव्यवहारिक है हर यात्री की टिकिट चेक करने के बाद उसे प्लेटफॉर्म पर प्रवेश देना। बड़ा सवाल है कि सैकड़ों की तादात में आने वाले यात्रियों के लिए स्टेशनों पर इतने प्रवेश द्वार और चेक पाइंट बना पाने में रेलवे सक्षम है, ताकि टिकिट चेकिंग के कारण किसी की ट्रेन ना छूटे।
JUNE 08 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर जाने के लिए प्लेटफॉर्म टिकिट की ज़रूरत होती है। जब आप यात्रा नहीं कर रहे होते हैं तो उस दौरान किसी को ट्रेन में बिठाने या फ़िर लेने के लिए आप प्लेटफॉर्म टिकिट लेकर प्लेटफॉर्म पर जाते हैं। लेकिन अब देश के कुछ चुनिंदा स्टेशनों के प्लेटफॉर्म पर आप प्लेटफॉर्म टिकिट लेकर भी प्रवेश नहीं कर पाएंगे। ऐसा क्यों, आइये आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं।
दरअसल, सुरक्षा के मद्देनज़र और रेलवे स्टेशनों पर बढ़ती भीड़ को कम करने के लिए रेलवे अपने कुछ चुनिंदा स्टेशनों पर एयरपोर्ट जैसी एंट्री और एग्जिट की व्यवस्था करने जा रहा है। रेलवे अपने 100 दिनों के एजेंडे के तहत देश के ए-वन कैटेगिरी के रेलवे स्टेशनों को मॉर्डन करने की योजना के तहत ऐसा कर रहा है। लेकिन लोगों का मानना है कि रेलवे के इस नये नियम से यात्रियों को काफ़ी मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा, ख़ासकर उन यात्रियों को जो बुजुर्ग हैं या फ़िर बीमार।
रेलवे की नई योजना के तहत सिर्फ़ वे ही लोग रेलवे प्लेटफॉर्म पर प्रवेश कर पाएंगे, जिनके पास यात्रा की टिकिट होगी। यानि कि प्लेटफॉर्म टिकिट वालों को अब प्लेटफॉर्म पर एंट्री नहीं मिलेगी। जानकारी के मुताबिक़, सभी A और A1 कैटेगिरी के स्टेशनों पर ऑटोमेटेड गेट लगाने की व्यवस्था की जा रही है। इस योजना को शुरुआत में हबीबगंज और गांधीनगर रेलवे स्टेशनों पर लागू किया जाएगा। इस योजना की समीक्षा के बाद इसे दिल्ली और मुम्बई जैसे स्टेशनों पर भी लागू किया जाएगा।
रेलवे का दावा है कि रेलवे स्टेशनों की बेहतर सुरक्षा के लिए आरपीएफ कमाण्डो को भी एयरपोर्ट पर तैनात सीआईएसएफ कमाण्डो की तरह ट्रेनिंग दी जाएगी। इस प्रोजेक्ट के लिए रेलवे ने 115 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई है। रेलवे का तर्क है कि इस सबके पीछे मुख्य मक़सद है यात्रियों की सुरक्षा, जो कि उसकी पहली प्राथमिकता है।
वैसे पहली नज़र में तो रेलवे का यह विचार सराहनीय है कि स्टेशनों की सुरक्षा और प्लेटफॉर्मों पर बढ़ती भीड़ को नियंत्रित रखने के लिए कोई उपाय किया जाना चाहिए। लेकिन प्लेटफॉर्म टिकिट होने पर भी प्लेटफॉर्म पर प्रवेश पर रोक लगाना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है। दरअसल, अपने आप में रेलवे की योजना पूरी तरह से अव्यवहारिक है। एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन में यात्रियों के आने-जाने की व्यवस्था की तुलना किसी भी तरह से जायज नहीं है। ऐसा इसलिए, क्योंकि एयरपोर्ट शहर से दूर होते हैं और वहां पर रेलवे स्टेशन की तुलना में बहुत ही कम लोग जाते हैं, जिसके कारण एयरपोर्ट पर सभी के टिकिट चेक करने के बाद उन्हें प्रवेश दिया जा सकता है।
लेकिन बड़े रेलवे स्टेशनों पर इतनी भीड़ होती है कि टिकिट चेक कर यात्रियों को प्रवेश देना अव्यवहारिक है। वहीं बुजुर्ग या बीमार व्यक्ति ट्रेन जब ट्रेन में अकेला सफ़र करता है, तो उसे लेने के लिए प्लेटफॉर्म पर उसके परिजन या परिचित प्लेटफॉर्म टिकिट लेकर ही प्रवेश करते हैं। लेकिन यदि प्लेटफॉर्म पर यात्रियों के अलावा किसी और को प्रवेश नहीं दिया जाएगा, तो इन परिस्थितियों में अकेले यात्रा कर रहे बुजुर्ग और बीमार व्यक्तियों को स्टेशन के बाहर आने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
यह सही है कि यात्रियों की सुरक्षा करना रेलवे का पहला मकसद है। लेकिन बड़े स्टेशनों पर हर यात्री की टिकिट चेक करने के बाद उसे प्लेटफॉर्म पर प्रवेश देने के चक्कर में कई बार लोगों की ट्रेन छूटेगी, तो फ़िर ऐसे में इसकी जवाबदेही किसकी रहेगी? एयरपोर्ट से रेलवे स्टेशन की तुलना करना तो अव्यवहारिक है ही, उससे ज़्यादा अव्यवहारिक है हर यात्री की टिकिट चेक करने के बाद उसे प्लेटफॉर्म पर प्रवेश देना। बड़ा सवाल है कि सैकड़ों की तादात में आने वाले यात्रियों के लिए स्टेशनों पर इतने प्रवेश द्वार और चेक पाइंट बना पाने में रेलवे सक्षम है, ताकि टिकिट चेकिंग के कारण किसी की ट्रेन ना छूटे।