स्पेस वॉर की स्थिति में मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी में भारत!
Wednesday - June 12, 2019 10:43 am ,
Category : WTN HINDI
भविष्य में स्पेस वॉर की ‘आशंका’
भविष्य में ‘सम्भावित’ अंतरिक्ष युद्ध के लिए भारत ने कसी कमर!
JUNE 12 (WTN) – आतंकियों के ख़िलाफ़ सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साबित कर दिया है कि देश की सुरक्षा के लिए वे कितने सचेत, गम्भीर और निडर हैं। प्रधानमंत्री मोदी जानते हैं कि पाकिस्तान और चीन से भारत को हमेशा ख़तरा है। जहां तक पाकिस्तान से ख़तरे की बात है तो भारत, पाकिस्तान की तुलना में रक्षा क्षेत्र में फ़िलहाल काफ़ी मज़बूत स्थिति में है। लेकिन चीन से तुलना की जाए तो भारत, चीन के मुक़ाबले अभी कमज़ोर है।
प्रधानमंत्री मोदी भविष्य की सोच रखने वाले दूरदर्शी प्रधानमंत्री हैं। मोदी जानते हैं कि आने वाले समय में यदि किन्हीं भी दो शक्तिशाली दोनों के बीच युद्ध हुआ, तो यह युद्ध स्पेस वॉर में भी बदल सकता है। स्पेस वॉर यानी कि अंतरिक्ष में युद्ध। भारत की अंतरिक्ष में सुरक्षा के मद्देनज़र ही प्रधानमंत्री मोदी ने मिशन शक्ति का परीक्षण करने की अनुमति भारतीय वैज्ञानिकों को दी थी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मिशन शक्ति भारत का वह परीक्षण थी, जिसमें भारत ने अंतरिक्ष में उपग्रह को एसेट रॉकेट से मार गिराया था।
भविष्य में अंतरिक्ष में होने वाली किसी भी तरह की सम्भावित लड़ाई के लिए भारतीय सैन्य बलों की ताक़त में वृद्धि करने के लिए मोदी सरकार ने एक बड़ा फ़ैसला लिया है, जिसके तहत अब अंतरिक्ष में सुरक्षा के लिए भारत के पास अपनी एक अलग एजेंसी होगी। इस एजेंसी का नाम रक्षा अंतरिक्ष अनुसंधान एजेंसी (डीएसआरओ) है। मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों पर कैबिनेट कमेटी (सीसीएस) ने डीएसआरओ के गठन को मंजूरी दे दी है।
इस एजेंसी को अंतरिक्ष में युद्ध के लिए तकनीकों और प्रौद्योगिकियों को विकसित करने का महत्वपूर्ण काम सौंपा गया है। यानी कि अब भारतीय सेनाएं अंतरिक्ष में भी दुश्मन को मात देने में सक्षम हो जाएंगी। जानकारी के मुताबिक़, संयुक्त सचिव स्तर के वैज्ञानिक के नेतृत्व में इस एजेंसी ने धीरे-धीरे अपना काम करना शुरू कर दिया है। इस एजेंसी में जो भी वैज्ञानिक काम करेंगे, वो तीनों सेनाएं के साथ समन्वय स्थापित कर काम करेंगे। एजेंसी में तीनों सेनाओं के सदस्यों की भी शामिल किया जाएगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बेंगलुरू स्थित डिफेंस स्पेस एजेंसी की महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी एयर वाइस मार्शल रैंक के अधिकारी को दी गई है।
दरअसल, भविष्य में ज़मीन, जल और आकाश के अलावा अंतरक्षि में भी युद्ध की पूरी आशंका है। युद्ध होने की स्थिति में किसी देश ने यदि दुश्मन देश की सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में ही मार गिराया तो दुश्मन देश की संचार व्यवस्था पूरी तरह से अस्त व्यस्त हो जाएगी। अंतरिक्ष में सैटेलाइट को मार गिराने की क्षमता अभी तक सिर्फ़ अमेरिका, रूस, चीन और जापान जैसे उन्नत तकनीकी क्षमता वाले देशों के पास ही थी, लेकिन भारत ने मिशन शक्ति के जरिये इस क्षमता को हासिल कर लिया है। भारत के पड़ोसी देश चीन की विस्तारवादी मानसिकता के देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने दूरगामी फ़ैसला लेते हुए रक्षा अंतरिक्ष अनुसंधान एजेंसी के गठन की मंजूरी दी है, जो कि अंतरिक्ष वॉर की स्थिति में मोर्चा सम्भालेगी।
जैसा कि आप जानते हैं कि इस साल मार्च में भारत ने एंटी-सैटेलाइट मिसाइल का सफल परीक्षण किया था। इस परीक्षण के साथ ही भारत ने अंतरिक्ष में किसी उपग्रह को मार गिराने की क्षमता हासिल की थी। यानी कि यदि भविष्य में कभी भी अंतरिक्ष युद्ध होता है, तो भारत ने अपने दुश्मनों के ख़िलाफ़ जवाबी कार्रवाई की क्षमता हासिल कर ली है। यदि युद्ध के दौरान दुश्मन देश ने भारतीय उपग्रहों को निशाना बनाने की कोशिश की तो भारत भी जवाब में दुश्मन देश के उपग्रहों को मार गिरा सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका ने साल 2020 तक अमेरिकी अंतरिक्ष बल बनाने की घोषणा की थी। पूरी दुनिया में अपना प्रभुत्व स्थापित करने की सोच रखना वाला अमेरिका अंतरिक्ष में भी अपना प्रभुत्व स्थापित करना चाहता है, और इसके लिए वो रूस और चीन जैसे देशों से खुद को आगे रखना चाहता है। अमेरिका की यह नई फोर्स अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन में नई एजेंसी होगी जो सैन्य अंतरिक्ष अभियानों पर नियंत्रण करेगी। अमेरिका की तर्ज पर ही भारत में भी इसी तरह की एजेंसी का गठन किया गया है।
दूरगामी सोच रखने वाले प्रधानमंत्री मोदी जानते हैं कि भविष्य में यदि युद्ध हुआ तो आने वाले समय में अंतरिक्ष वॉर की भी आशंका है। और यदि अंतरिक्ष वॉर हुआ तो दुश्मन देश भारत के सैटेलाइट्स को मार गिराने की कोशिश करेगा, जिससे भारत की संचार व्यवस्थाएं पूरी तरह से ध्वस्त हो सकती हैं। ऐसे में भारत की सैटेलाइट्स की सुरक्षा और दुश्मन देश की सैटेलाइट्स को मार गिराने के लिए ही रक्षा अंतरिक्ष अनुसंधान एजेंसी का गठन प्रधानमंत्री मोदी ने किया है ताकि सम्भावित अंतरिक्ष वॉर की परिस्थितियों में भारत अपनी रक्षा के साथ-साथ जवाबी कार्रवाई कर सके।
JUNE 12 (WTN) – आतंकियों के ख़िलाफ़ सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साबित कर दिया है कि देश की सुरक्षा के लिए वे कितने सचेत, गम्भीर और निडर हैं। प्रधानमंत्री मोदी जानते हैं कि पाकिस्तान और चीन से भारत को हमेशा ख़तरा है। जहां तक पाकिस्तान से ख़तरे की बात है तो भारत, पाकिस्तान की तुलना में रक्षा क्षेत्र में फ़िलहाल काफ़ी मज़बूत स्थिति में है। लेकिन चीन से तुलना की जाए तो भारत, चीन के मुक़ाबले अभी कमज़ोर है।
प्रधानमंत्री मोदी भविष्य की सोच रखने वाले दूरदर्शी प्रधानमंत्री हैं। मोदी जानते हैं कि आने वाले समय में यदि किन्हीं भी दो शक्तिशाली दोनों के बीच युद्ध हुआ, तो यह युद्ध स्पेस वॉर में भी बदल सकता है। स्पेस वॉर यानी कि अंतरिक्ष में युद्ध। भारत की अंतरिक्ष में सुरक्षा के मद्देनज़र ही प्रधानमंत्री मोदी ने मिशन शक्ति का परीक्षण करने की अनुमति भारतीय वैज्ञानिकों को दी थी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मिशन शक्ति भारत का वह परीक्षण थी, जिसमें भारत ने अंतरिक्ष में उपग्रह को एसेट रॉकेट से मार गिराया था।
भविष्य में अंतरिक्ष में होने वाली किसी भी तरह की सम्भावित लड़ाई के लिए भारतीय सैन्य बलों की ताक़त में वृद्धि करने के लिए मोदी सरकार ने एक बड़ा फ़ैसला लिया है, जिसके तहत अब अंतरिक्ष में सुरक्षा के लिए भारत के पास अपनी एक अलग एजेंसी होगी। इस एजेंसी का नाम रक्षा अंतरिक्ष अनुसंधान एजेंसी (डीएसआरओ) है। मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों पर कैबिनेट कमेटी (सीसीएस) ने डीएसआरओ के गठन को मंजूरी दे दी है।
इस एजेंसी को अंतरिक्ष में युद्ध के लिए तकनीकों और प्रौद्योगिकियों को विकसित करने का महत्वपूर्ण काम सौंपा गया है। यानी कि अब भारतीय सेनाएं अंतरिक्ष में भी दुश्मन को मात देने में सक्षम हो जाएंगी। जानकारी के मुताबिक़, संयुक्त सचिव स्तर के वैज्ञानिक के नेतृत्व में इस एजेंसी ने धीरे-धीरे अपना काम करना शुरू कर दिया है। इस एजेंसी में जो भी वैज्ञानिक काम करेंगे, वो तीनों सेनाएं के साथ समन्वय स्थापित कर काम करेंगे। एजेंसी में तीनों सेनाओं के सदस्यों की भी शामिल किया जाएगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बेंगलुरू स्थित डिफेंस स्पेस एजेंसी की महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी एयर वाइस मार्शल रैंक के अधिकारी को दी गई है।
दरअसल, भविष्य में ज़मीन, जल और आकाश के अलावा अंतरक्षि में भी युद्ध की पूरी आशंका है। युद्ध होने की स्थिति में किसी देश ने यदि दुश्मन देश की सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में ही मार गिराया तो दुश्मन देश की संचार व्यवस्था पूरी तरह से अस्त व्यस्त हो जाएगी। अंतरिक्ष में सैटेलाइट को मार गिराने की क्षमता अभी तक सिर्फ़ अमेरिका, रूस, चीन और जापान जैसे उन्नत तकनीकी क्षमता वाले देशों के पास ही थी, लेकिन भारत ने मिशन शक्ति के जरिये इस क्षमता को हासिल कर लिया है। भारत के पड़ोसी देश चीन की विस्तारवादी मानसिकता के देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने दूरगामी फ़ैसला लेते हुए रक्षा अंतरिक्ष अनुसंधान एजेंसी के गठन की मंजूरी दी है, जो कि अंतरिक्ष वॉर की स्थिति में मोर्चा सम्भालेगी।
जैसा कि आप जानते हैं कि इस साल मार्च में भारत ने एंटी-सैटेलाइट मिसाइल का सफल परीक्षण किया था। इस परीक्षण के साथ ही भारत ने अंतरिक्ष में किसी उपग्रह को मार गिराने की क्षमता हासिल की थी। यानी कि यदि भविष्य में कभी भी अंतरिक्ष युद्ध होता है, तो भारत ने अपने दुश्मनों के ख़िलाफ़ जवाबी कार्रवाई की क्षमता हासिल कर ली है। यदि युद्ध के दौरान दुश्मन देश ने भारतीय उपग्रहों को निशाना बनाने की कोशिश की तो भारत भी जवाब में दुश्मन देश के उपग्रहों को मार गिरा सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका ने साल 2020 तक अमेरिकी अंतरिक्ष बल बनाने की घोषणा की थी। पूरी दुनिया में अपना प्रभुत्व स्थापित करने की सोच रखना वाला अमेरिका अंतरिक्ष में भी अपना प्रभुत्व स्थापित करना चाहता है, और इसके लिए वो रूस और चीन जैसे देशों से खुद को आगे रखना चाहता है। अमेरिका की यह नई फोर्स अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन में नई एजेंसी होगी जो सैन्य अंतरिक्ष अभियानों पर नियंत्रण करेगी। अमेरिका की तर्ज पर ही भारत में भी इसी तरह की एजेंसी का गठन किया गया है।
दूरगामी सोच रखने वाले प्रधानमंत्री मोदी जानते हैं कि भविष्य में यदि युद्ध हुआ तो आने वाले समय में अंतरिक्ष वॉर की भी आशंका है। और यदि अंतरिक्ष वॉर हुआ तो दुश्मन देश भारत के सैटेलाइट्स को मार गिराने की कोशिश करेगा, जिससे भारत की संचार व्यवस्थाएं पूरी तरह से ध्वस्त हो सकती हैं। ऐसे में भारत की सैटेलाइट्स की सुरक्षा और दुश्मन देश की सैटेलाइट्स को मार गिराने के लिए ही रक्षा अंतरिक्ष अनुसंधान एजेंसी का गठन प्रधानमंत्री मोदी ने किया है ताकि सम्भावित अंतरिक्ष वॉर की परिस्थितियों में भारत अपनी रक्षा के साथ-साथ जवाबी कार्रवाई कर सके।