जानिए क्यों मंदी की मार झेल रहा है ऑटोमोबाइल सेक्टर?
Wednesday - June 12, 2019 1:04 pm ,
Category : WTN HINDI
कारों की बिक्री में रिकॉर्ड कमी
ऑटोमोबाइल सेक्टर पर लगा ग्रहण, 18 सालों में कारों की बिक्री में सबसे बड़ी गिरावट
JUNE 12 (WTN) – नई सदी में उभरते उच्च मध्यमवर्ग के कारण भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में साल 2000 के बाद से काफ़ी सुधार और विकास देखा गया था। भारत में नवधनाढ्य वर्ग ने इस दौरान जमकर पैसेंजर गाड़ियां ख़रीदीं, जिसके कारण भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में जमकर उछाल देखा गया। ऑटोमोबाइल सेक्टर में जोरदार वृद्धि के चलते कई विदेशी कम्पनियों ने भी भारत में क़दम रखा और जमकर मुनाफ़ा कमाया।
लेकिन कहते हैं ना कि हर समय एक सा नहीं होता है। एक समय था जब बुकिंग के बाद महीनों पैसेेंजर गाड़ियों की डिलेवरी नहीं मिलती थी, लेकिन आज हालत यह है कि शोरूम पर गाड़ियों के लिए ग्राहक नहीं मिल रहे हैं। इन दिनों भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में गाड़ियों की डिमाण्ड में भारी गिरावट देखने को मिल रही है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में इन दिनों पैसेंजर गाड़ियों की बिक्री में रिकॉर्ड स्तर पर कमी देखी जा रही है। इन दिनों पैसेंजर गाड़ियों की कम बिक्री के कारण डीलर्स के शोरूम पर सन्नाटा पसरा रहता है। मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, भारत में कारों की बिक्री में ज़ोरदार गिरावट दर्ज की गई है। मई के महीने में भारत में सिर्फ़ 2,39,347 कारें ही बिकीं यानी कि कारों की बिक्री में 20.55 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। कारों की बिक्री में पिछले 18 सालों में यह सबसे बड़ी गिरावट है। इससे पहले सितम्बर 2001 में पैसेंजर गाड़ियों की बिक्री में 21.91 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी।
कारों की कम बिक्री पर ऑटोमोबाइल सेक्टर में चिंता और चिंतन का दौर जारी है। कहा जा रहा है कि कारों को जीएसटी के सबसे ऊंचे स्लैब 28 प्रतिशत में रखा गया है, जिसके कारण कम्पनियों की लागत बढ़ रही है। ऐसे में कम्पनियों ने कारों के दामों में इज़ाफ़ा किया है, जिसका असर कारों की बिक्री पर पड़ रहा है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़े लोगों का कहना है कि हाई जीएसटी रेट के कारण ही कारों की बिक्री पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। ऑटोमोबाइल सेक्टर की मांग है कि सभी तरह की गाड़ियों पर लगने वाले जीएसटी की दर को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देना चाहिए। वहीं सेक्टर की मांग है कि सरकार को व्हीकल स्क्रैपेज पॉलिसी बनाना चाहिए। ऐसा होने से नई गाड़ियों के लिए बाज़ार सुचारू रूप से उपलब्ध हो सकेगा।
जैसा कि हमने आपको बताया कि ऑटोमोबाइल सेक्टर में भारी मंदी के कारण गाड़ियां की बिक्री रिकॉर्ड स्तर पर कम हो गई है। ऐसे में कई कम्पनियों जैसे मारुति सुजुकी, महिंद्रा और टाटा मोटर्स ने अपने पिछले प्रोडक्शन के स्टॉक को क्लियर करने के लिए प्रोडक्शन को रोक दिया है। वहीं होंडा, रेनो-निसान और स्कोडा ऑटो भी अपने प्रोडक्शन को 10 दिनों के लिए बंद करने की तैयारी में है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में पिछले 7 महीनों से कारों की डिमाण्ड में भारी कमी देखी गई है। कारों की बिक्री कम होने से कम्पनियों के पास क़रीब 35,000 करोड़ रुपये की बिना बिकी हुईं कारें मौजूद हैं।
वैसे कारों की कम बिक्री के पीछे के कई कारण हो सकते हैं। एक समय देश में नवधनाढ्य वर्ग ने जमकर कारों की खरीदी की लेकिन अब ख़रीदी इतनी तेजी से नहीं हो रही है, क्योंकि अब देश में कारों की ख़रीदी में स्थिरता आ गई है। वहीं पांच साल के अनिवार्य बीमा और पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ती क़ीमतों के कारण भी कारों की बिक्री को झटका लगा है। इतना ही नहीं, आजकल कारों के ग्राहक पुरानी कारों को ख़रीदने में ज़्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं, क्योंकि यह उन्हें कम क़ीमत में मिल रही हैं। यहीं वे कारण हैं जिनके कारण इन दिनों कारों की बिक्री में कमी देखी जा रही है।
देश की जीडीपी में ऑटोमोबाइल सेक्टर का भी काफ़ी योगदान रहता है। यदि इस सेक्टर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा तो इसका असर जीडीपी पर भी दिखेगा। वहीं यदि ऑटोमोबाइल सेक्टर में गिरावट देखी गई तो इस सेक्टर से लाखों लोगों की नौकरी जाने का ख़तरा बढ़ जाएगा, जोकि मोदी सरकार के लिए चिंता का कारण बन सकता है। अब देखना होगा कि मोदी सरकार ऑटोमोबाइल सेक्टर की मांगों पर कितना अमल करती है ताकि उसे फ़िर से गति मिल सके और ऑटोमोबाइल सेक्टर में महीनों से जारी मंदी में सुधार आ सके।
JUNE 12 (WTN) – नई सदी में उभरते उच्च मध्यमवर्ग के कारण भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में साल 2000 के बाद से काफ़ी सुधार और विकास देखा गया था। भारत में नवधनाढ्य वर्ग ने इस दौरान जमकर पैसेंजर गाड़ियां ख़रीदीं, जिसके कारण भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में जमकर उछाल देखा गया। ऑटोमोबाइल सेक्टर में जोरदार वृद्धि के चलते कई विदेशी कम्पनियों ने भी भारत में क़दम रखा और जमकर मुनाफ़ा कमाया।
लेकिन कहते हैं ना कि हर समय एक सा नहीं होता है। एक समय था जब बुकिंग के बाद महीनों पैसेेंजर गाड़ियों की डिलेवरी नहीं मिलती थी, लेकिन आज हालत यह है कि शोरूम पर गाड़ियों के लिए ग्राहक नहीं मिल रहे हैं। इन दिनों भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में गाड़ियों की डिमाण्ड में भारी गिरावट देखने को मिल रही है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में इन दिनों पैसेंजर गाड़ियों की बिक्री में रिकॉर्ड स्तर पर कमी देखी जा रही है। इन दिनों पैसेंजर गाड़ियों की कम बिक्री के कारण डीलर्स के शोरूम पर सन्नाटा पसरा रहता है। मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, भारत में कारों की बिक्री में ज़ोरदार गिरावट दर्ज की गई है। मई के महीने में भारत में सिर्फ़ 2,39,347 कारें ही बिकीं यानी कि कारों की बिक्री में 20.55 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। कारों की बिक्री में पिछले 18 सालों में यह सबसे बड़ी गिरावट है। इससे पहले सितम्बर 2001 में पैसेंजर गाड़ियों की बिक्री में 21.91 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी।
कारों की कम बिक्री पर ऑटोमोबाइल सेक्टर में चिंता और चिंतन का दौर जारी है। कहा जा रहा है कि कारों को जीएसटी के सबसे ऊंचे स्लैब 28 प्रतिशत में रखा गया है, जिसके कारण कम्पनियों की लागत बढ़ रही है। ऐसे में कम्पनियों ने कारों के दामों में इज़ाफ़ा किया है, जिसका असर कारों की बिक्री पर पड़ रहा है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़े लोगों का कहना है कि हाई जीएसटी रेट के कारण ही कारों की बिक्री पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। ऑटोमोबाइल सेक्टर की मांग है कि सभी तरह की गाड़ियों पर लगने वाले जीएसटी की दर को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देना चाहिए। वहीं सेक्टर की मांग है कि सरकार को व्हीकल स्क्रैपेज पॉलिसी बनाना चाहिए। ऐसा होने से नई गाड़ियों के लिए बाज़ार सुचारू रूप से उपलब्ध हो सकेगा।
जैसा कि हमने आपको बताया कि ऑटोमोबाइल सेक्टर में भारी मंदी के कारण गाड़ियां की बिक्री रिकॉर्ड स्तर पर कम हो गई है। ऐसे में कई कम्पनियों जैसे मारुति सुजुकी, महिंद्रा और टाटा मोटर्स ने अपने पिछले प्रोडक्शन के स्टॉक को क्लियर करने के लिए प्रोडक्शन को रोक दिया है। वहीं होंडा, रेनो-निसान और स्कोडा ऑटो भी अपने प्रोडक्शन को 10 दिनों के लिए बंद करने की तैयारी में है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में पिछले 7 महीनों से कारों की डिमाण्ड में भारी कमी देखी गई है। कारों की बिक्री कम होने से कम्पनियों के पास क़रीब 35,000 करोड़ रुपये की बिना बिकी हुईं कारें मौजूद हैं।
वैसे कारों की कम बिक्री के पीछे के कई कारण हो सकते हैं। एक समय देश में नवधनाढ्य वर्ग ने जमकर कारों की खरीदी की लेकिन अब ख़रीदी इतनी तेजी से नहीं हो रही है, क्योंकि अब देश में कारों की ख़रीदी में स्थिरता आ गई है। वहीं पांच साल के अनिवार्य बीमा और पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ती क़ीमतों के कारण भी कारों की बिक्री को झटका लगा है। इतना ही नहीं, आजकल कारों के ग्राहक पुरानी कारों को ख़रीदने में ज़्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं, क्योंकि यह उन्हें कम क़ीमत में मिल रही हैं। यहीं वे कारण हैं जिनके कारण इन दिनों कारों की बिक्री में कमी देखी जा रही है।
देश की जीडीपी में ऑटोमोबाइल सेक्टर का भी काफ़ी योगदान रहता है। यदि इस सेक्टर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा तो इसका असर जीडीपी पर भी दिखेगा। वहीं यदि ऑटोमोबाइल सेक्टर में गिरावट देखी गई तो इस सेक्टर से लाखों लोगों की नौकरी जाने का ख़तरा बढ़ जाएगा, जोकि मोदी सरकार के लिए चिंता का कारण बन सकता है। अब देखना होगा कि मोदी सरकार ऑटोमोबाइल सेक्टर की मांगों पर कितना अमल करती है ताकि उसे फ़िर से गति मिल सके और ऑटोमोबाइल सेक्टर में महीनों से जारी मंदी में सुधार आ सके।