रियल एस्टेट सेक्टर में मंदी ‘ख़त्म’ करने मोदी सरकार की ‘प्लानिंग’!
Friday - June 14, 2019 1:06 pm ,
Category : WTN HINDI
नोटबंदी के बाद मंदी के दौर से गुजर रहा रियल एस्टेट सेक्टर
होम लोन से घर ख़रीदने वालों को ‘राहत’ देने की तैयारी में मोदी सरकार
JUNE 14 (WTN) – लोकसभा चुनाव में प्रचण्ड जीत हासिल करने के बाद मोदी सरकार देश की जनता को नई-नई सौगातें देने जा रही है। किसानों से लेकर व्यापारियों और युवाओं से लेकर महिलाओं तक सभी को फ़ायदा पहुंचाने के लिए मोदी सरकार कई तरह की योजनाएं ला रही है। 5 जुलाई को मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट पेश कर रही है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, मोदी सरकार अपने इस कार्यकाल के पहले पूर्ण बजट में होम लोन से घर ख़रीदने वालों को एक बड़ी राहत दे सकती है। ऐसा करने से नोटबंदी के बाद से मंदी के दौर में चल रहे रियल एस्टेट सेक्टर को काफ़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
कहा जा रहा है कि 5 जुलाई को पेश होने वाले बजट में होम लोन लेने वालों को मोदी सरकार बड़ी राहत दे सकती है। जानकारी के अनुसार, मोदी सरकार होम लोन लेने पर मूलधन और ब्याज पर टैक्स छूट बढ़ाने का फ़ैसला ले सकती है। यदि ऐसा होता है तो मध्यमवर्गीय लोगों को इससे काफ़ी फ़ायदा होगा। चुनावी दृष्टिकोण से भी यह मोदी सरकार का एक बड़ा दांव हो सकता है, क्योंकि देश का विशाल मध्यमवर्ग हमेशा से ही भाजपा का वोट बैंक रहा है। ऐसे में अपने वोट बैंक को खुश रखने के लिए मोदी सरकार होम लोन लेने पर मूलधन और ब्याज पर टैक्स छूट को बढ़ा सकती है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, वित्त मंत्रालय ने CREDAI (Confederation of Real Estate Developers) से कुछ आंकड़े मांगे हैं, जिनके आधार पर वित्त मंत्रालय टैक्स छूट के बोझ का आकलन कर रहा है। दरअसल, नोटबंदी के बाद से रियल एस्टेट सेक्टर में मंदी का दौर देखा जा रहा है। ऐसा इसलिए, क्योंकि नोटबंदी के बाद हुए कई बदलावों के कारण काले धन का इन्वेस्टमेंट रियल एस्टेट सेक्टर में नहीं हो पा रहा है। ऐसे में इस सेक्टर में छाई मंदी को दूर करने के लिए मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल के पहले पूर्ण बजट में कोई बड़ी छूट होम लोन से घर ख़रीदने वालों को दे सकती है।
कहा जा रहा है कि सरकार घर ख़रीदी करने वालों के लिए होम लेने के ब्याज दर में और मूलधन पर टैक्स छूट की सीमा बढ़ा सकती है। जानकारी के मुताबिक़, वित्त मंत्रालय ने रियल एस्टेट संगठनों की संस्था CREDAI से इस बारे में जानकारी मांगी है कि अभी तक कितने घर हैं जिस पर होम लोन चल रहा है, और कितने घर बनाकर तैयार होने वाले हैं जिन पर होमलोन लिया जा सकता है। इन्हीं सब आंकड़ों के आधार पर वित्त मंत्रालय यह आकलन करेगा कि यदि टैक्स छूट की सीमा बढ़ाई जाती है तो इससे खजाने पर कितना बोझ पड़ेगा। जानकारों के मुताबिक मोदी सरकार होम लोन के ब्याज पर इनकम टैक्स छूट की सीमा को 2 लाख रुपए से बढ़ाकर 3 लाख रुपए कर सकती है।
जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि नोटबंदी के बाद से रियल एस्टेट सेक्टर में काफ़ी मंदी देखी जा रही है। दरअसल, रियल एस्टेट सेक्टर में नोटबंदी के पहले कालेधन को ख़पाने के लिए जमकर नकदी का प्रयोग किया जाता था। लेकिन नोटबंदी के बाद बड़े ट्रांजेक्शन चेक या फ़िर ऑनलाइन होने के कारण रियल एस्टेट सेक्टर में काले धन की खपत में बहुत कमी आई है। बेनामी ट्रांजेक्शन पर लगाम लगाने के सरकारी प्रयासों और नोटबंदी के कारण रियल एस्टेट सेक्टर में नकदी के चलन में जमकर कमी दर्ज की गई है।
जैसा कि आप जानते हैं कि नोटबंदी के कारण देश में तरलता का गम्भीर संकट खड़ा हो गया था। इस दौरान बिल्डर्स और काले धन से घर ख़रीदने वाले दोनों को ही नकदी संकट का सामना करना पड़ा, जिसके कारण घरों की बिक्री में जोरदार गिरावट आई। वैसे जो बिल्डर्स पहले से ही पारदर्शी तरीक़े से अपना बिजनेस कर रहे थे, उन पर नोटबंदी का ज़्यादा असर नहीं पड़ा।
नोटबंदी के पहले रियल एस्टेट सेक्टर कालेधन को खपाने के लिए सबसे बढ़िया और बड़ा जरिया था। लेकिन नोटबंदी के बाद चूंकि मनी ट्रांजेक्शन पर सरकार की कड़ी निगाहें हैं, ऐसे में रियल एस्टेट सेक्टर में घर ख़रीदी अब ज़्यादातर होम लोन के जरिये ही हो रही है। ऐसे में होमलोन के जरिये घर ख़रीदी को बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार इसमें कुछ छूट बजट में दे सकती है।
JUNE 14 (WTN) – लोकसभा चुनाव में प्रचण्ड जीत हासिल करने के बाद मोदी सरकार देश की जनता को नई-नई सौगातें देने जा रही है। किसानों से लेकर व्यापारियों और युवाओं से लेकर महिलाओं तक सभी को फ़ायदा पहुंचाने के लिए मोदी सरकार कई तरह की योजनाएं ला रही है। 5 जुलाई को मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट पेश कर रही है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, मोदी सरकार अपने इस कार्यकाल के पहले पूर्ण बजट में होम लोन से घर ख़रीदने वालों को एक बड़ी राहत दे सकती है। ऐसा करने से नोटबंदी के बाद से मंदी के दौर में चल रहे रियल एस्टेट सेक्टर को काफ़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
कहा जा रहा है कि 5 जुलाई को पेश होने वाले बजट में होम लोन लेने वालों को मोदी सरकार बड़ी राहत दे सकती है। जानकारी के अनुसार, मोदी सरकार होम लोन लेने पर मूलधन और ब्याज पर टैक्स छूट बढ़ाने का फ़ैसला ले सकती है। यदि ऐसा होता है तो मध्यमवर्गीय लोगों को इससे काफ़ी फ़ायदा होगा। चुनावी दृष्टिकोण से भी यह मोदी सरकार का एक बड़ा दांव हो सकता है, क्योंकि देश का विशाल मध्यमवर्ग हमेशा से ही भाजपा का वोट बैंक रहा है। ऐसे में अपने वोट बैंक को खुश रखने के लिए मोदी सरकार होम लोन लेने पर मूलधन और ब्याज पर टैक्स छूट को बढ़ा सकती है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, वित्त मंत्रालय ने CREDAI (Confederation of Real Estate Developers) से कुछ आंकड़े मांगे हैं, जिनके आधार पर वित्त मंत्रालय टैक्स छूट के बोझ का आकलन कर रहा है। दरअसल, नोटबंदी के बाद से रियल एस्टेट सेक्टर में मंदी का दौर देखा जा रहा है। ऐसा इसलिए, क्योंकि नोटबंदी के बाद हुए कई बदलावों के कारण काले धन का इन्वेस्टमेंट रियल एस्टेट सेक्टर में नहीं हो पा रहा है। ऐसे में इस सेक्टर में छाई मंदी को दूर करने के लिए मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल के पहले पूर्ण बजट में कोई बड़ी छूट होम लोन से घर ख़रीदने वालों को दे सकती है।
कहा जा रहा है कि सरकार घर ख़रीदी करने वालों के लिए होम लेने के ब्याज दर में और मूलधन पर टैक्स छूट की सीमा बढ़ा सकती है। जानकारी के मुताबिक़, वित्त मंत्रालय ने रियल एस्टेट संगठनों की संस्था CREDAI से इस बारे में जानकारी मांगी है कि अभी तक कितने घर हैं जिस पर होम लोन चल रहा है, और कितने घर बनाकर तैयार होने वाले हैं जिन पर होमलोन लिया जा सकता है। इन्हीं सब आंकड़ों के आधार पर वित्त मंत्रालय यह आकलन करेगा कि यदि टैक्स छूट की सीमा बढ़ाई जाती है तो इससे खजाने पर कितना बोझ पड़ेगा। जानकारों के मुताबिक मोदी सरकार होम लोन के ब्याज पर इनकम टैक्स छूट की सीमा को 2 लाख रुपए से बढ़ाकर 3 लाख रुपए कर सकती है।
जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि नोटबंदी के बाद से रियल एस्टेट सेक्टर में काफ़ी मंदी देखी जा रही है। दरअसल, रियल एस्टेट सेक्टर में नोटबंदी के पहले कालेधन को ख़पाने के लिए जमकर नकदी का प्रयोग किया जाता था। लेकिन नोटबंदी के बाद बड़े ट्रांजेक्शन चेक या फ़िर ऑनलाइन होने के कारण रियल एस्टेट सेक्टर में काले धन की खपत में बहुत कमी आई है। बेनामी ट्रांजेक्शन पर लगाम लगाने के सरकारी प्रयासों और नोटबंदी के कारण रियल एस्टेट सेक्टर में नकदी के चलन में जमकर कमी दर्ज की गई है।
जैसा कि आप जानते हैं कि नोटबंदी के कारण देश में तरलता का गम्भीर संकट खड़ा हो गया था। इस दौरान बिल्डर्स और काले धन से घर ख़रीदने वाले दोनों को ही नकदी संकट का सामना करना पड़ा, जिसके कारण घरों की बिक्री में जोरदार गिरावट आई। वैसे जो बिल्डर्स पहले से ही पारदर्शी तरीक़े से अपना बिजनेस कर रहे थे, उन पर नोटबंदी का ज़्यादा असर नहीं पड़ा।
नोटबंदी के पहले रियल एस्टेट सेक्टर कालेधन को खपाने के लिए सबसे बढ़िया और बड़ा जरिया था। लेकिन नोटबंदी के बाद चूंकि मनी ट्रांजेक्शन पर सरकार की कड़ी निगाहें हैं, ऐसे में रियल एस्टेट सेक्टर में घर ख़रीदी अब ज़्यादातर होम लोन के जरिये ही हो रही है। ऐसे में होमलोन के जरिये घर ख़रीदी को बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार इसमें कुछ छूट बजट में दे सकती है।