क्या अमेरिका को युद्ध के लिए ‘उकसा’ रहा है ईरान?
Friday - June 14, 2019 3:47 pm ,
Category : WTN HINDI
एक बार फ़िर अमेरिका और ईरान ‘आमने-सामने’
तेल टैंकरों में ‘विस्फोट’ के बाद खाड़ी में बड़ा ‘तनाव’!
JUNE 14 (WTN) – आख़िरकार क्या अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध होने जा रहा है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि ओमान की खाड़ी में दो तेल टैंकरों में ‘विस्फोट’ होने के बाद मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ गया है। अमेरिका ने तेल टैंकरों में हुए ‘विस्फोट’ को ‘हमला’ करार दिया है और इसके लिए साफ़ तौर पर ईरान को ज़िम्मेदार बताया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ओमान की खाड़ी में टैंकरों पर हुए विस्फोट काफ़ी खतरनाक थे। हालांकि, कई घंटों के बाद भी ‘विस्फोट’ का कोई कारण साफ़ नहीं हो सका है।
तेल टैंकरों में हुए ‘विस्फोट’ के बाद ईरान का दावा है कि उसने कोकुका करेजियस टैंकर के बोर्ड से 21 लोगों को और 23 लोगों को फ्रंट अल्टायर से सुरक्षित निकाला है। वहीं अमेरिका का दावा है कि उसकी नौसेना ने भी कुछ लोगों की जानें बचाईं हैं। वैसे इन दोनों जहाजों से पर हुए ‘विस्फोट’ के बाद तेल की क़ीमतों में क़रीब तीन प्रतिशत की वृद्धि हो गई।
इधर, अमेरिकी रक्षा मंत्री माइक पोम्पियो का कहना है कि अमेरिकी इंटेलिजेंस से मिली जानकारियों के अनुसार दोनों जहाजों में ‘विस्फोट’ के पीछे ईरान का हाथ है, और ईरान ने इन जहाजों पर ‘हमला’ किया है। अमेरिका ने सबूत के तौर पर एक वीडियो भी जारी किया। इस वीडियो में ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स की पेट्रोल बोट, कोकुका करेजियस शिप के पास एक माइन को हटाते नज़र आ रही है।
इधर, जहाज की मालिकाना हक़ वाली कम्पनी फ्रंट अल्तायर ने पुष्टि की कि उसके जहाज में आग लगी थी, जिसके बाद क्रू सदस्यों को लाइफबोट्स में सुरक्षित निकाला गया। वैसे ऑपरेटर कम्पनियों ने इसे जहाज पर एक ‘नियोजित हमला’ बताया है। कम्पनी को आशंका है कि इस पर टॉरपीडो से ‘हमला’ किया गया है।
तेल उद्योग से जुड़े विशेषकों का मानना है कि इस रास्ते से दुनिया भर का क़रीब 30 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। अगर यहां से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर हमले होते हैं, तो यह समुद्री रास्ता ‘असुरक्षित’ हो जाएगा। यदि ऐसा होता है तो पश्चिमी दुनिया को हो रही तेल आपूर्ति को ‘गम्भीर ख़तरा’ हो सकता है, जिसके कारण अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध भी छिड़ सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इससे पहले भी चार तेल टैंकरों पर ‘हमला’ हुआ था और अमेरिका ने इसके लिए ईरान को ही ज़िम्मेदार ठहराया था। हालांकि, तमाम तरह के आरोपों के बाद ईरान ने पिछली बार की तरह इस बार भी टैंकरों पर हुए कथित हमले में किसी तरह की भूमिका होने से इनकार किया है। इन जहाजों पर यह ‘हमला’ स्ट्रेट ऑफ होर्मूज में हुआ है। इसी रास्ते से होकर दुनिया भर के तेल टैंकर और पोत गुजरते हैं।
फारस की खाड़ी एक महत्वपूर्ण तेल रास्ता होने के साथ-साथ इस क्षेत्र में शत्रु देशों को भी अलग करती है। फारस की खाड़ी की एक तरफ़ ईरान है तो दूसरी तरफ़ अमेरिका समर्थित देश सऊदी अरब और यूएई हैं। इधर ईरान के मुताबिक़, टैंकरों पर हुए नए ‘हमले’ शत्रु देशों की पूर्वनियोजित साजिश का नतीज़ा हो सकते हैं। इस ‘हमले’ के पीछे ईरान ने अप्रत्यक्ष तौर पर अमेरिका के सहयोगी देशों सऊदी अरब, यूएई और इजरायल को षड़यंत्रकारी बताया है। ऐसा इसलिए, क्योंकि ईरान का मानना है कि अमेरिका के यह सहयोगी देश उसके ख़िलाफ़ ‘सख्त’ कार्रवाई के लिए अमेरिका पर दबाव डालते रहते हैं।
खाड़ी देशों की अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के जानकारों का मानना है कि जहाजों में आग लगने की घटना ‘हमला’ है या फ़िर ‘दुर्घटना’, इसके जानकारी तो बाद में पता चलेगी। लेकिन यदि यह सब ईरान ने किया है तो वह अपनी ‘क्षमता’ का प्रदर्शन कर रहा है। लेकिन यदि ईरान ने सच में ऐसा किया है तो खाड़ी में एक बार फ़िर से अमेरिका युद्ध के मैदान में उतर सकता है, क्योंकि ऐसा करके ईरान, अमेरिका को युद्ध के लिए उकसा रहा है।
अमेरिका और ईरान के बीच ‘तनाव’ काफ़ी दिनों से जारी है। ईरान से बढ़ते तनाव को देखते हुए ही अमेरिकी ने फारस की खाड़ी में एक युद्धपोत, बी-2 बमवर्षक विमान, पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम की तैनात कर रखी हैं। वैसे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने पिछले महीने ही ट्वीट करके ईरान को चेतावनी दी थी कि अगर ईरान लड़ाई करना चाहता है तो फिर यह उसका ‘आधिकारिक अंत’ होगा।
उधर अमेरिका की चेतावनी के बाद ईरानी नेताओं ने होर्मूज स्ट्रेट को ‘ब्लॉक’ करने की धमकी दी थी, जो कि पश्चिम के देशों के लिए तेल परिवहन के लिए अहम रास्ता है। युद्ध के लिए उकसाने वाले विश्व के सबसे संवदेनशील क्षेत्रों में से एक खाड़ी क्षेत्र में हर एक ‘घटना’ या ‘दुर्घटना’ के काफ़ी मायने हैं।
यदि ईरान की किसी भी ‘साजिश’ के कारण अमेरिका समेत पश्चिमी देशों को कच्चे तेल की आपूर्ति में बाधा उत्पन्न होती है, तो अमेरिका ईरान से इसका ‘बदला’ ज़रूर लेगा। वैसे भी अमेरिका साफ़ कर चुका है कि यदि ईरान ने युद्ध किया तो यह उसका ‘आख़िरी युद्ध’ होगा। अब देखना होगा कि ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच खाड़ी क्षेत्र में कब तक ‘शान्ति’ रह पाती है।
JUNE 14 (WTN) – आख़िरकार क्या अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध होने जा रहा है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि ओमान की खाड़ी में दो तेल टैंकरों में ‘विस्फोट’ होने के बाद मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ गया है। अमेरिका ने तेल टैंकरों में हुए ‘विस्फोट’ को ‘हमला’ करार दिया है और इसके लिए साफ़ तौर पर ईरान को ज़िम्मेदार बताया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ओमान की खाड़ी में टैंकरों पर हुए विस्फोट काफ़ी खतरनाक थे। हालांकि, कई घंटों के बाद भी ‘विस्फोट’ का कोई कारण साफ़ नहीं हो सका है।
तेल टैंकरों में हुए ‘विस्फोट’ के बाद ईरान का दावा है कि उसने कोकुका करेजियस टैंकर के बोर्ड से 21 लोगों को और 23 लोगों को फ्रंट अल्टायर से सुरक्षित निकाला है। वहीं अमेरिका का दावा है कि उसकी नौसेना ने भी कुछ लोगों की जानें बचाईं हैं। वैसे इन दोनों जहाजों से पर हुए ‘विस्फोट’ के बाद तेल की क़ीमतों में क़रीब तीन प्रतिशत की वृद्धि हो गई।
इधर, अमेरिकी रक्षा मंत्री माइक पोम्पियो का कहना है कि अमेरिकी इंटेलिजेंस से मिली जानकारियों के अनुसार दोनों जहाजों में ‘विस्फोट’ के पीछे ईरान का हाथ है, और ईरान ने इन जहाजों पर ‘हमला’ किया है। अमेरिका ने सबूत के तौर पर एक वीडियो भी जारी किया। इस वीडियो में ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स की पेट्रोल बोट, कोकुका करेजियस शिप के पास एक माइन को हटाते नज़र आ रही है।
इधर, जहाज की मालिकाना हक़ वाली कम्पनी फ्रंट अल्तायर ने पुष्टि की कि उसके जहाज में आग लगी थी, जिसके बाद क्रू सदस्यों को लाइफबोट्स में सुरक्षित निकाला गया। वैसे ऑपरेटर कम्पनियों ने इसे जहाज पर एक ‘नियोजित हमला’ बताया है। कम्पनी को आशंका है कि इस पर टॉरपीडो से ‘हमला’ किया गया है।
तेल उद्योग से जुड़े विशेषकों का मानना है कि इस रास्ते से दुनिया भर का क़रीब 30 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। अगर यहां से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर हमले होते हैं, तो यह समुद्री रास्ता ‘असुरक्षित’ हो जाएगा। यदि ऐसा होता है तो पश्चिमी दुनिया को हो रही तेल आपूर्ति को ‘गम्भीर ख़तरा’ हो सकता है, जिसके कारण अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध भी छिड़ सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इससे पहले भी चार तेल टैंकरों पर ‘हमला’ हुआ था और अमेरिका ने इसके लिए ईरान को ही ज़िम्मेदार ठहराया था। हालांकि, तमाम तरह के आरोपों के बाद ईरान ने पिछली बार की तरह इस बार भी टैंकरों पर हुए कथित हमले में किसी तरह की भूमिका होने से इनकार किया है। इन जहाजों पर यह ‘हमला’ स्ट्रेट ऑफ होर्मूज में हुआ है। इसी रास्ते से होकर दुनिया भर के तेल टैंकर और पोत गुजरते हैं।
फारस की खाड़ी एक महत्वपूर्ण तेल रास्ता होने के साथ-साथ इस क्षेत्र में शत्रु देशों को भी अलग करती है। फारस की खाड़ी की एक तरफ़ ईरान है तो दूसरी तरफ़ अमेरिका समर्थित देश सऊदी अरब और यूएई हैं। इधर ईरान के मुताबिक़, टैंकरों पर हुए नए ‘हमले’ शत्रु देशों की पूर्वनियोजित साजिश का नतीज़ा हो सकते हैं। इस ‘हमले’ के पीछे ईरान ने अप्रत्यक्ष तौर पर अमेरिका के सहयोगी देशों सऊदी अरब, यूएई और इजरायल को षड़यंत्रकारी बताया है। ऐसा इसलिए, क्योंकि ईरान का मानना है कि अमेरिका के यह सहयोगी देश उसके ख़िलाफ़ ‘सख्त’ कार्रवाई के लिए अमेरिका पर दबाव डालते रहते हैं।
खाड़ी देशों की अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के जानकारों का मानना है कि जहाजों में आग लगने की घटना ‘हमला’ है या फ़िर ‘दुर्घटना’, इसके जानकारी तो बाद में पता चलेगी। लेकिन यदि यह सब ईरान ने किया है तो वह अपनी ‘क्षमता’ का प्रदर्शन कर रहा है। लेकिन यदि ईरान ने सच में ऐसा किया है तो खाड़ी में एक बार फ़िर से अमेरिका युद्ध के मैदान में उतर सकता है, क्योंकि ऐसा करके ईरान, अमेरिका को युद्ध के लिए उकसा रहा है।
अमेरिका और ईरान के बीच ‘तनाव’ काफ़ी दिनों से जारी है। ईरान से बढ़ते तनाव को देखते हुए ही अमेरिकी ने फारस की खाड़ी में एक युद्धपोत, बी-2 बमवर्षक विमान, पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम की तैनात कर रखी हैं। वैसे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने पिछले महीने ही ट्वीट करके ईरान को चेतावनी दी थी कि अगर ईरान लड़ाई करना चाहता है तो फिर यह उसका ‘आधिकारिक अंत’ होगा।
उधर अमेरिका की चेतावनी के बाद ईरानी नेताओं ने होर्मूज स्ट्रेट को ‘ब्लॉक’ करने की धमकी दी थी, जो कि पश्चिम के देशों के लिए तेल परिवहन के लिए अहम रास्ता है। युद्ध के लिए उकसाने वाले विश्व के सबसे संवदेनशील क्षेत्रों में से एक खाड़ी क्षेत्र में हर एक ‘घटना’ या ‘दुर्घटना’ के काफ़ी मायने हैं।
यदि ईरान की किसी भी ‘साजिश’ के कारण अमेरिका समेत पश्चिमी देशों को कच्चे तेल की आपूर्ति में बाधा उत्पन्न होती है, तो अमेरिका ईरान से इसका ‘बदला’ ज़रूर लेगा। वैसे भी अमेरिका साफ़ कर चुका है कि यदि ईरान ने युद्ध किया तो यह उसका ‘आख़िरी युद्ध’ होगा। अब देखना होगा कि ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच खाड़ी क्षेत्र में कब तक ‘शान्ति’ रह पाती है।