जानिए क्यों लगने वाली है जंक फूड के विज्ञापनों पर यहां रोक?
Saturday - June 15, 2019 10:57 am ,
Category : WTN HINDI
जंक फूड और सॉफ्ट ड्रिंक से हो रहे हैं बच्चे ‘बीमार’
जंक फूड पर FSSAI हुआ सख्त, उठाने जा रहा है सख्त क़दम!
JUNE 15 (WTN) – जल्द ही जंक फूड वाले विज्ञापनों पर कुछ स्थान विशेष पर रोक लग सकती है। दरअसल, जंक फूड और सॉफ्ट ड्रिंक के ज़्यादा इस्तेमाल से बच्चों में मोटापा और कई अन्य बीमारियां हो रही हैं, जिसको ध्यान में रखते हुए एफएसएसएआई यानि कि भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) स्कूलों के आसपास जंक फूड के विज्ञापनों पर रोक लगाने के प्रस्ताव पर विचार किया है।
डॉक्टरों के मुताबिक़, भारत में इन दिनों मध्यमवर्गीय परिवारों में फास्ट फूड कल्चर काफ़ी तेज़ी से बढ़ रहा है, जिसके कारण छोटे-छोटे बच्चों में मोटापा, डायबिटीज और दिल से जुड़ी गम्भीर बीमारियों का ख़तरा अभी से बढ़ने लगा है। इस बारे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है यदि भारतीय परिवारों में खाने पीने की यही आदतें बनी रहीं, तो 2030 तक हर तीन में से एक भारतीय व्यक्ति मोटापे का शिकार होगा।
जंक फूड और सॉफ्ट ड्रिंक के कारण बच्चों में बढ़ती बीमारियों को देखते हुए न्यूट्रिशयन्स का कहना है कि बच्चों को पूरक पोषण दिये जाने की बेहद ज़रूरत है। बच्चों के पूरक पोषण को ध्यान में रखते हुए ही राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 को पारित किया गया था। इस अधिनियम के अनुसार बच्चों के खान-पान पर ध्यान देना अनिवार्य है। डॉक्टरों के मुताबिक़, बच्चों को होने वाले दस में से छह रोग आहार से सम्बन्धित होते हैं।
भारत में बढ़ते नवधनाढ्य वर्ग के कारण पिज्जा, बर्गर, चिप्स, मीठा कार्बोनेटेड और गैर-कार्बोनेटेड पेय समेत नूडल्स का उपयोग बच्चों के खाने पीने में हो रहा है। घर से लेकर स्कूल तक बच्चे जंक फूड खा रहे हैं और सॉफ्ट ड्रिंक पी रहे हैं। बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ही भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानि की एफएसएसएआई स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में गैर स्वास्थकारी खाद्य पदार्थो के विज्ञापनों और प्रचार पर रोक लगाने की तैयारी में है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि डॉक्टरों की सलाह है कि सुरक्षित और स्वस्थ भोजन के जरिये ही बच्चों को स्वस्थ रख सकते हैं। यदि आहार सही होगा तो बीमार होने की आशंका कम हो जाती है। इसी के चलते एफएसएसएआई ने स्कूलों में बच्चों को सुरक्षित, पौष्टिक और पूर्ण भोजन को बढ़ावा देने के लिए काफ़ी प्रयास किये हैं ताकि बच्चों में खाने-पीने के कारण होने वाली बीमारियों को रोका जा सके।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मार्च 2015 में दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण से स्कूली बच्चों के लिए पौष्टिक खाद्य को प्रोत्साहन देने के लिए नियम बनाने कहा था। इसी के मद्देनज़र स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में गैर स्वास्थकारी खाद्य पदार्थो के विज्ञापनों और प्रचार पर रोक लगाने की तैयारी की जा रही है, जिससे कम से कम स्कूल के समय में तो बच्चे जंक फूड और सॉफ्ट ड्रिंक से दूर रहें।
दरअसल, यह ज़रूरी नहीं है कि बच्चों के लिए जो खाद्य पादर्थ बहुराष्ट्रीय कम्पनियां बेच रही हैं वे सभी स्वास्थ्य के लिए ख़राब हैं, कुछ भारतीय भोजन भी बच्चों के लिए अस्वस्थकारी हो सकते हैं। नियामक की कोशिश है कि भारतीय माता-पिता में यह समझ पैदा की जाए कि कौन सी खाने-पीने की वस्तुएं उनसे बच्चों के लिए उचित है और कौन सी अनुचित। जब माता-पिता इस बारे में जागरूक होंगे तो वे बच्चों में भी इसकी समझ पैदा कर सकेंगे कि उन्हें क्या खाना-पीना चाहिए और क्या नहीं।
JUNE 15 (WTN) – जल्द ही जंक फूड वाले विज्ञापनों पर कुछ स्थान विशेष पर रोक लग सकती है। दरअसल, जंक फूड और सॉफ्ट ड्रिंक के ज़्यादा इस्तेमाल से बच्चों में मोटापा और कई अन्य बीमारियां हो रही हैं, जिसको ध्यान में रखते हुए एफएसएसएआई यानि कि भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) स्कूलों के आसपास जंक फूड के विज्ञापनों पर रोक लगाने के प्रस्ताव पर विचार किया है।
डॉक्टरों के मुताबिक़, भारत में इन दिनों मध्यमवर्गीय परिवारों में फास्ट फूड कल्चर काफ़ी तेज़ी से बढ़ रहा है, जिसके कारण छोटे-छोटे बच्चों में मोटापा, डायबिटीज और दिल से जुड़ी गम्भीर बीमारियों का ख़तरा अभी से बढ़ने लगा है। इस बारे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है यदि भारतीय परिवारों में खाने पीने की यही आदतें बनी रहीं, तो 2030 तक हर तीन में से एक भारतीय व्यक्ति मोटापे का शिकार होगा।
जंक फूड और सॉफ्ट ड्रिंक के कारण बच्चों में बढ़ती बीमारियों को देखते हुए न्यूट्रिशयन्स का कहना है कि बच्चों को पूरक पोषण दिये जाने की बेहद ज़रूरत है। बच्चों के पूरक पोषण को ध्यान में रखते हुए ही राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 को पारित किया गया था। इस अधिनियम के अनुसार बच्चों के खान-पान पर ध्यान देना अनिवार्य है। डॉक्टरों के मुताबिक़, बच्चों को होने वाले दस में से छह रोग आहार से सम्बन्धित होते हैं।
भारत में बढ़ते नवधनाढ्य वर्ग के कारण पिज्जा, बर्गर, चिप्स, मीठा कार्बोनेटेड और गैर-कार्बोनेटेड पेय समेत नूडल्स का उपयोग बच्चों के खाने पीने में हो रहा है। घर से लेकर स्कूल तक बच्चे जंक फूड खा रहे हैं और सॉफ्ट ड्रिंक पी रहे हैं। बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ही भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानि की एफएसएसएआई स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में गैर स्वास्थकारी खाद्य पदार्थो के विज्ञापनों और प्रचार पर रोक लगाने की तैयारी में है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि डॉक्टरों की सलाह है कि सुरक्षित और स्वस्थ भोजन के जरिये ही बच्चों को स्वस्थ रख सकते हैं। यदि आहार सही होगा तो बीमार होने की आशंका कम हो जाती है। इसी के चलते एफएसएसएआई ने स्कूलों में बच्चों को सुरक्षित, पौष्टिक और पूर्ण भोजन को बढ़ावा देने के लिए काफ़ी प्रयास किये हैं ताकि बच्चों में खाने-पीने के कारण होने वाली बीमारियों को रोका जा सके।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मार्च 2015 में दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण से स्कूली बच्चों के लिए पौष्टिक खाद्य को प्रोत्साहन देने के लिए नियम बनाने कहा था। इसी के मद्देनज़र स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में गैर स्वास्थकारी खाद्य पदार्थो के विज्ञापनों और प्रचार पर रोक लगाने की तैयारी की जा रही है, जिससे कम से कम स्कूल के समय में तो बच्चे जंक फूड और सॉफ्ट ड्रिंक से दूर रहें।
दरअसल, यह ज़रूरी नहीं है कि बच्चों के लिए जो खाद्य पादर्थ बहुराष्ट्रीय कम्पनियां बेच रही हैं वे सभी स्वास्थ्य के लिए ख़राब हैं, कुछ भारतीय भोजन भी बच्चों के लिए अस्वस्थकारी हो सकते हैं। नियामक की कोशिश है कि भारतीय माता-पिता में यह समझ पैदा की जाए कि कौन सी खाने-पीने की वस्तुएं उनसे बच्चों के लिए उचित है और कौन सी अनुचित। जब माता-पिता इस बारे में जागरूक होंगे तो वे बच्चों में भी इसकी समझ पैदा कर सकेंगे कि उन्हें क्या खाना-पीना चाहिए और क्या नहीं।