जानिए भारत में क्यों लॉन्च नहीं होगी फेसबुक की क्रिप्टकरेंसी लिब्रा?
Thursday - June 20, 2019 3:40 pm ,
Category : WTN HINDI
अगले साल फेसबुक लॉन्च करेगी अपनी क्रिप्टोकरेंसी लिब्रा
बिटकॉइन पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद ही तय होगी फेसबुक की क्रिप्टोकरेंसी की भारत में लॉन्चिंग
JUNE 20 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि फेसबुक पूरी दुनिया में सबसे ज़्यादा पॉपुलर सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट है। समय के साथ-साथ फेसबुक ने अपने में कई बदलाव किये हैं। इसी क्रम में फेसबुक ने अब अपनी क्रिप्टोकरेंसी लिब्रा की लॉन्चिंग की घोषणा कर दी है। जानकारी के मुताबिक़ अगले साल तक फेसबुक अपनी क्रिप्टोकरेंसी को लेकर आ जाएगी। यदि आप सोच रहे हैं कि फेसबुक की क्रिप्टोकरेंसी का लाभ आप भारत में भी उठा सकते हैं, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में फिलहाल फेसबुक इसे लॉन्च नहीं कर सकती है। क्या है क्रिप्टोकरेंसी और फेसबुक इसे भारत में फिलहाल क्यों लॉन्च नहीं कर सकती है? आइये इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।
दरअसल, क्रिप्टोकरेंसी एक डिजिटल करेंसी होती है और यह केवल ऑनलाइन ही उपलब्ध होती है। यानी कि इसे हम नोटों के रूप में प्रयोग नहीं कर सकते हैं। इस डिजिटल करेंसी का प्रयोग वस्तुओं या सेवाओं की ऑनलाइन ख़रीदी के लिये किया जा सकता है। क्रिप्टोकरेंसी पर किसी देश की सरकार का अधिकार नहीं होता है, और ना ही इस पर किसी भी बैंक का नियंत्रण रहता है। यह एक डिजिटल करेंसी है, जिसके मूल्य को रेग्युलेट नहीं किया जा सकता है।
फेसबुक की क्रिप्टोकरेंसी लिब्रा भी एक तरह की डिजिटल करेंसी ही है। लेकिन फेसबुक अपनी क्रिप्टोकरेंसी लिब्रा को फिलहाल भारत में लॉन्च नहीं कर पाएगा, क्योंकि आरबीआई ने देश में क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। दरअसल, भारतीय रिज़र्व बैंक के मौजूदा नियमों के अनुसार बैंकिंग नेटवर्क को ब्लॉकचेन ट्रांजेक्शन की अनुमति नहीं है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फेसबुक अपनी इस क्रिप्टोकरेंसी लिब्रा के लिए एक डिजिटल वॉलेट भी लॉन्च करेगी, जिसका नाम कैलिब्रा होगा। लेकिन जैसा कि हमने आपको बताया कि भारत में क्रिप्टोकरेंसी ब्लॉक होने के कारण फेसबुक का कैलिब्रा वॉलेट भारत में मौजूद नहीं होगा।
जानकारी के मुताबिक़ फेसबुक अपनी क्रिप्टोकरेंसी के डिजिटल वॉलेट कैलिब्रा को व्हाट्सएप से जोड़ना चाहता है, ताकि इसे पूरी दुनिया में उपलब्ध कराया जा सके। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फेसबुक ने अपनी क्रिप्टोकरेंसी लिब्रा का क़रार वीजा, मास्टरकार्ड, पेयू और उबर समेत 28 संस्थाओं से किया है। इन संस्थाओं से क़रार का मतलब है कि यह सभी संस्थाएं फेसबुक की क्रिप्टोकरेंसी लिब्रा का समर्थन करेंगी। क्रिप्टोकरेंसी लिब्रा, फेसबुक और व्हाट्सएप दोनों पर उपलब्ध होगी। जानकारों का मानना है कि इस करेंसी की लॉन्चिंग के समय तक इसे दुनियाभर में 100 से ज़्यादा संस्थाओं का समर्थन मिल सकता है।
फेसबुक की क्रिप्टोकरेंसी के बारे में जानकारों का कहना है कि यदि फेसबुक अपने करेंसी लिब्रा को एक क्लोज सिस्टम में रूप में लाती है, जो केवल उसे सिस्टम में काम करेगी तो ऐसे में आरबीआई को इससे ज़्यादा चिंतित होने की ज़रूरत नहीं है। ऐसा इसलिए, क्योंकि इस करेंसी का बाहरी इकोनॉमी से कोई सम्बन्ध नहीं होगा। लेकिन यह कहना ग़लत होगा, क्योंकि फेसबुक अपनी क्रिप्टोकरेंसी लिब्रा के समर्थन के लिए दुनियाभर की संस्थाओं से समर्थन के लिए क़रार कर रही है। ऐसे में यह सम्भव नहीं है कि फेसबुक की क्रिप्टोकरेंसी लिब्रा का बाहरी इकोनॉमी से कोई सम्बन्ध ना रहे।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि RBI ने पिछले साल अप्रैल में रेगुलेटेड फर्मों को तीन महीने में वर्चुअल करेंसी में डीलिंग रोकने का निर्देश दिया था। ऐसा इसलिए, क्योंकि वर्चुअल करेंसी के साथ कई जोखिम रहते हैं। लिब्रा से पहले भारत में क्रिप्टोकरेंसी के रूप में बिटकॉइन आई थी, जिस पर भी आरबीआई ने प्रतिबंध लगा दिया था। प्रतिबंध लगने के बाद बिटकॉइन की ट्रेडिंग करने वाली फर्मों ने RBI के प्रतिबंध के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट बिटकॉइन के मामले में क्या दिशा निर्देश या फ़ैसला देती है, क्योंकि बिटकॉइन पर सुप्रीम कोर्टे के रूख के बाद ही फेसबुक की क्रिप्टोकरेंसी लिब्रा की भारत में एंट्री तय हो पाएगी।
JUNE 20 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि फेसबुक पूरी दुनिया में सबसे ज़्यादा पॉपुलर सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट है। समय के साथ-साथ फेसबुक ने अपने में कई बदलाव किये हैं। इसी क्रम में फेसबुक ने अब अपनी क्रिप्टोकरेंसी लिब्रा की लॉन्चिंग की घोषणा कर दी है। जानकारी के मुताबिक़ अगले साल तक फेसबुक अपनी क्रिप्टोकरेंसी को लेकर आ जाएगी। यदि आप सोच रहे हैं कि फेसबुक की क्रिप्टोकरेंसी का लाभ आप भारत में भी उठा सकते हैं, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में फिलहाल फेसबुक इसे लॉन्च नहीं कर सकती है। क्या है क्रिप्टोकरेंसी और फेसबुक इसे भारत में फिलहाल क्यों लॉन्च नहीं कर सकती है? आइये इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।
दरअसल, क्रिप्टोकरेंसी एक डिजिटल करेंसी होती है और यह केवल ऑनलाइन ही उपलब्ध होती है। यानी कि इसे हम नोटों के रूप में प्रयोग नहीं कर सकते हैं। इस डिजिटल करेंसी का प्रयोग वस्तुओं या सेवाओं की ऑनलाइन ख़रीदी के लिये किया जा सकता है। क्रिप्टोकरेंसी पर किसी देश की सरकार का अधिकार नहीं होता है, और ना ही इस पर किसी भी बैंक का नियंत्रण रहता है। यह एक डिजिटल करेंसी है, जिसके मूल्य को रेग्युलेट नहीं किया जा सकता है।
फेसबुक की क्रिप्टोकरेंसी लिब्रा भी एक तरह की डिजिटल करेंसी ही है। लेकिन फेसबुक अपनी क्रिप्टोकरेंसी लिब्रा को फिलहाल भारत में लॉन्च नहीं कर पाएगा, क्योंकि आरबीआई ने देश में क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। दरअसल, भारतीय रिज़र्व बैंक के मौजूदा नियमों के अनुसार बैंकिंग नेटवर्क को ब्लॉकचेन ट्रांजेक्शन की अनुमति नहीं है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फेसबुक अपनी इस क्रिप्टोकरेंसी लिब्रा के लिए एक डिजिटल वॉलेट भी लॉन्च करेगी, जिसका नाम कैलिब्रा होगा। लेकिन जैसा कि हमने आपको बताया कि भारत में क्रिप्टोकरेंसी ब्लॉक होने के कारण फेसबुक का कैलिब्रा वॉलेट भारत में मौजूद नहीं होगा।
जानकारी के मुताबिक़ फेसबुक अपनी क्रिप्टोकरेंसी के डिजिटल वॉलेट कैलिब्रा को व्हाट्सएप से जोड़ना चाहता है, ताकि इसे पूरी दुनिया में उपलब्ध कराया जा सके। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फेसबुक ने अपनी क्रिप्टोकरेंसी लिब्रा का क़रार वीजा, मास्टरकार्ड, पेयू और उबर समेत 28 संस्थाओं से किया है। इन संस्थाओं से क़रार का मतलब है कि यह सभी संस्थाएं फेसबुक की क्रिप्टोकरेंसी लिब्रा का समर्थन करेंगी। क्रिप्टोकरेंसी लिब्रा, फेसबुक और व्हाट्सएप दोनों पर उपलब्ध होगी। जानकारों का मानना है कि इस करेंसी की लॉन्चिंग के समय तक इसे दुनियाभर में 100 से ज़्यादा संस्थाओं का समर्थन मिल सकता है।
फेसबुक की क्रिप्टोकरेंसी के बारे में जानकारों का कहना है कि यदि फेसबुक अपने करेंसी लिब्रा को एक क्लोज सिस्टम में रूप में लाती है, जो केवल उसे सिस्टम में काम करेगी तो ऐसे में आरबीआई को इससे ज़्यादा चिंतित होने की ज़रूरत नहीं है। ऐसा इसलिए, क्योंकि इस करेंसी का बाहरी इकोनॉमी से कोई सम्बन्ध नहीं होगा। लेकिन यह कहना ग़लत होगा, क्योंकि फेसबुक अपनी क्रिप्टोकरेंसी लिब्रा के समर्थन के लिए दुनियाभर की संस्थाओं से समर्थन के लिए क़रार कर रही है। ऐसे में यह सम्भव नहीं है कि फेसबुक की क्रिप्टोकरेंसी लिब्रा का बाहरी इकोनॉमी से कोई सम्बन्ध ना रहे।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि RBI ने पिछले साल अप्रैल में रेगुलेटेड फर्मों को तीन महीने में वर्चुअल करेंसी में डीलिंग रोकने का निर्देश दिया था। ऐसा इसलिए, क्योंकि वर्चुअल करेंसी के साथ कई जोखिम रहते हैं। लिब्रा से पहले भारत में क्रिप्टोकरेंसी के रूप में बिटकॉइन आई थी, जिस पर भी आरबीआई ने प्रतिबंध लगा दिया था। प्रतिबंध लगने के बाद बिटकॉइन की ट्रेडिंग करने वाली फर्मों ने RBI के प्रतिबंध के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट बिटकॉइन के मामले में क्या दिशा निर्देश या फ़ैसला देती है, क्योंकि बिटकॉइन पर सुप्रीम कोर्टे के रूख के बाद ही फेसबुक की क्रिप्टोकरेंसी लिब्रा की भारत में एंट्री तय हो पाएगी।