जानिए अपराधों की जानकारी जुटाने भारत सरकार ने व्हाट्सएप से की है किस फ़ीचर की मांग ?
Saturday - June 22, 2019 4:00 pm ,
Category : WTN HINDI
व्हाट्सएप का एन्ड-टू-एन्ड एन्क्रिप्शन से मिलती है यूजर्स को प्राइवेसीफफ
गुनहगारों को ट्रैक करने सरकार ने मांगा व्हाट्सएप से डिजिटल फिंगरप्रिंट फ़ीचर!
JUNE 22 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि भारत में व्हाट्सएप काफ़ी बड़ी तादात में लोग यूज करते हैं। लेकिन व्हाट्सएप पर फेक न्यूज़ और ग़लत जानकारियां सेंड और शेयर करना भारतीय लोगों के लिए आम बात है। लेकिन जनता की यही आम बात या फ़िर कहें लापरवाही भारत सरकार के लिए एक बहुत बड़ा सिरदर्द है। जैसा कि आप जानते हैं कि व्हाट्सएप के जरिये फेक न्यूज़ फैलाना काफ़ी आसान है। फेक न्यूज़ के कारण ही भारत में लिचिंग की कई घटनाएं सामने आई हैं।
लेकिन व्हाट्सएप पर किसने किसे कौन सी न्यूज़ सेंड की है या शेयर की है यह न्यूज़ के डिलिट करने के बाद पता करना मुश्किल है। साथ ही यह किसी भी सॉफ्टवेयर से भी पता करना नामुमकिन है कि कौन से कौन सी न्यूज़ सेंड की है। ऐसा इसलिए, क्योंकि व्हाट्सएप अपने यूजर्स को एन्ड-टू-एन्ड एन्क्रिप्शन की सहूलियत प्रदान करता है, जिसके कारण यह पता करना मुश्किल है कि कौन सी न्यूज़ कौन ने सेंड या शेयर की। इस सबके बीच भारत सरकार ने व्हाट्सएप से एक नया फ़ीचर लेकर आने को कहा है। इस फ़ीचर के तहत व्हाट्सएप के एण्ड-टू-एण्ड एन्क्रिप्शन को हटाए बिना मैसेज के सोर्स को ट्रैक किया जा सकेगा।
दरअसल, केन्द्र सरकार ने व्हाट्सएप से एण्ड-टू-एण्ड एन्क्रिप्शन को हटाए बिना डिजिटल फिंगरप्रिंट फ़ीचर एड करने कहा है। सरकार चाहती है की हर व्हाट्सएप मैसेज में यह डिजिटल फिंगरप्रिंट एड हो। इससे व्हाट्सएप पर किसी मैसज को सबसे पहले किसने भेजा है, यह पता लगाया जा सकेगा। सरकार का तर्क है कि इस नये फ़ीचर की मदद से ज़रूरत पड़ने पर व्हाट्सएप पर ओरिजिनल मैसेज सेन्डर की जानकारी मिल सकेगी। वहीं सम्बन्धित मैसेज को कितने लोगों ने पढ़ा और उसे कितने बार फॉरवर्ड किया गया है इस तरह की पूरी जानकारी व्हाट्सएप सरकार को उपलब्ध करा सकेगा।
नागरिकों की प्राइवेसी के सवाल पर सरकार का कहना है कि व्हाट्सएप के डिजिटल फिंगरप्रिंट फ़ीचर से वो किसी के भी व्हाट्सएप चैट को पढ़ नहीं पाएगी। इतना ही नहीं, पुलिस या अन्य क़ानूनी एजेंसियों के अलावा किसी के भी पास कंटेंट का एक्सेस नहीं होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फिलहाल, पुलिस फ़ोन नम्बर, प्रोफाइल पिक्चर, ग्रुप मेम्बर्स के नाम, कॉन्टेक्ट्स, लोकेशन, आईपी एड्रेस जैसी व्हाट्सएप की मेटाडाटा जानकारी पर काम करती है। सरकार का तर्क है कि व्हाट्सएप की सिर्फ़ मेटाडाटा की जानकारी से गुनहगारों को ट्रैक करना आसान नहीं है।
इस बारे में जानकारों की राय है कि व्हाट्सएप के हर मैसेज को डिजिटली फिंगरप्रिंट करना मुश्किल है। वहीं व्हाट्सएप का इस बारे में कहना है कि मैसेजिंग ऐप के मैसेजेज को ट्रैक करने की क्षमता से एण्ड-टू-एण्ड एन्क्रिप्शन की महत्ता कम हो जाएगी, और यदि ऐसा होता है तो इसे सरकारी निगरानी का रिस्क बढ़ जाएगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत ऐसा पहला देश नहीं है, जिसने व्हाट्सएप मैसेजेज के एक्सेस की मांग की हो। ऑस्ट्रेलिया ने हाल ही में एक क़ानून पेश किया है, जिसमें पुलिस बिना एन्क्रिप्शन के एक्सेस कर सकती है। वहीं एशियाई देश सिंगापुर के नए क़ानून के मुताबिक़, पुलिस प्राइवेट चैट ग्रुप्स मॉनिटर कर सकती है।
वैसे सरकार का तर्क सही है कि गुनहगारों को ट्रैक करने के लिए पुलिस और क़ानूनी एजेंसियों को कुछ और सोर्स व्हाट्सएप पर मिलना चाहिए। लेकिन व्हाट्सएप की एण्ड-टू-एण्ड एन्क्रिप्शन के कारण ऐसा होना सम्भव नहीं है। व्हाट्सएप का कहना है कि यूजर्स की प्राइवेसी उसकी सबसे पहली ड्यूटी है, और वो इससे समझौता नहीं करेगी। अब देखना होगा कि भारत सरकार की डिजिटल फिंगरप्रिंट की मांग पर व्हाट्सएप का क्या रूख रहता है।
JUNE 22 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि भारत में व्हाट्सएप काफ़ी बड़ी तादात में लोग यूज करते हैं। लेकिन व्हाट्सएप पर फेक न्यूज़ और ग़लत जानकारियां सेंड और शेयर करना भारतीय लोगों के लिए आम बात है। लेकिन जनता की यही आम बात या फ़िर कहें लापरवाही भारत सरकार के लिए एक बहुत बड़ा सिरदर्द है। जैसा कि आप जानते हैं कि व्हाट्सएप के जरिये फेक न्यूज़ फैलाना काफ़ी आसान है। फेक न्यूज़ के कारण ही भारत में लिचिंग की कई घटनाएं सामने आई हैं।
लेकिन व्हाट्सएप पर किसने किसे कौन सी न्यूज़ सेंड की है या शेयर की है यह न्यूज़ के डिलिट करने के बाद पता करना मुश्किल है। साथ ही यह किसी भी सॉफ्टवेयर से भी पता करना नामुमकिन है कि कौन से कौन सी न्यूज़ सेंड की है। ऐसा इसलिए, क्योंकि व्हाट्सएप अपने यूजर्स को एन्ड-टू-एन्ड एन्क्रिप्शन की सहूलियत प्रदान करता है, जिसके कारण यह पता करना मुश्किल है कि कौन सी न्यूज़ कौन ने सेंड या शेयर की। इस सबके बीच भारत सरकार ने व्हाट्सएप से एक नया फ़ीचर लेकर आने को कहा है। इस फ़ीचर के तहत व्हाट्सएप के एण्ड-टू-एण्ड एन्क्रिप्शन को हटाए बिना मैसेज के सोर्स को ट्रैक किया जा सकेगा।
दरअसल, केन्द्र सरकार ने व्हाट्सएप से एण्ड-टू-एण्ड एन्क्रिप्शन को हटाए बिना डिजिटल फिंगरप्रिंट फ़ीचर एड करने कहा है। सरकार चाहती है की हर व्हाट्सएप मैसेज में यह डिजिटल फिंगरप्रिंट एड हो। इससे व्हाट्सएप पर किसी मैसज को सबसे पहले किसने भेजा है, यह पता लगाया जा सकेगा। सरकार का तर्क है कि इस नये फ़ीचर की मदद से ज़रूरत पड़ने पर व्हाट्सएप पर ओरिजिनल मैसेज सेन्डर की जानकारी मिल सकेगी। वहीं सम्बन्धित मैसेज को कितने लोगों ने पढ़ा और उसे कितने बार फॉरवर्ड किया गया है इस तरह की पूरी जानकारी व्हाट्सएप सरकार को उपलब्ध करा सकेगा।
नागरिकों की प्राइवेसी के सवाल पर सरकार का कहना है कि व्हाट्सएप के डिजिटल फिंगरप्रिंट फ़ीचर से वो किसी के भी व्हाट्सएप चैट को पढ़ नहीं पाएगी। इतना ही नहीं, पुलिस या अन्य क़ानूनी एजेंसियों के अलावा किसी के भी पास कंटेंट का एक्सेस नहीं होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फिलहाल, पुलिस फ़ोन नम्बर, प्रोफाइल पिक्चर, ग्रुप मेम्बर्स के नाम, कॉन्टेक्ट्स, लोकेशन, आईपी एड्रेस जैसी व्हाट्सएप की मेटाडाटा जानकारी पर काम करती है। सरकार का तर्क है कि व्हाट्सएप की सिर्फ़ मेटाडाटा की जानकारी से गुनहगारों को ट्रैक करना आसान नहीं है।
इस बारे में जानकारों की राय है कि व्हाट्सएप के हर मैसेज को डिजिटली फिंगरप्रिंट करना मुश्किल है। वहीं व्हाट्सएप का इस बारे में कहना है कि मैसेजिंग ऐप के मैसेजेज को ट्रैक करने की क्षमता से एण्ड-टू-एण्ड एन्क्रिप्शन की महत्ता कम हो जाएगी, और यदि ऐसा होता है तो इसे सरकारी निगरानी का रिस्क बढ़ जाएगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत ऐसा पहला देश नहीं है, जिसने व्हाट्सएप मैसेजेज के एक्सेस की मांग की हो। ऑस्ट्रेलिया ने हाल ही में एक क़ानून पेश किया है, जिसमें पुलिस बिना एन्क्रिप्शन के एक्सेस कर सकती है। वहीं एशियाई देश सिंगापुर के नए क़ानून के मुताबिक़, पुलिस प्राइवेट चैट ग्रुप्स मॉनिटर कर सकती है।
वैसे सरकार का तर्क सही है कि गुनहगारों को ट्रैक करने के लिए पुलिस और क़ानूनी एजेंसियों को कुछ और सोर्स व्हाट्सएप पर मिलना चाहिए। लेकिन व्हाट्सएप की एण्ड-टू-एण्ड एन्क्रिप्शन के कारण ऐसा होना सम्भव नहीं है। व्हाट्सएप का कहना है कि यूजर्स की प्राइवेसी उसकी सबसे पहली ड्यूटी है, और वो इससे समझौता नहीं करेगी। अब देखना होगा कि भारत सरकार की डिजिटल फिंगरप्रिंट की मांग पर व्हाट्सएप का क्या रूख रहता है।