जानिए भारत ने क्यों रद्द की इज़रायल से हज़ारों करोड़ की हथियारों की डील?
Monday - June 24, 2019 12:48 pm ,
Category : WTN HINDI
मेक-इन-इंडिया विजन के तहत डीआरडीओ बनाएगा एंटी टैंक मिसाइल
राफेल विवाद के साये में भारत ने रद्द किया इज़रायल से एंटी टैंक मिसाइल का सौदा, मेक-इन-इंडिया को तरजीह देना एक वज़ह
JUNE 24 (WTN) – भारत ने हाल ही में इज़रायल से 35,000 करोड़ रूपयों की हथियारों की डील रद्द कर दी है। आख़िर भारत सरकार ने ऐसा क्यों किया और इसके पीछे क्या कारण हैं? आइये आपको इसकी जानकारी विस्तार से देते हैं। सबसे पहले आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यदि सभी कुछ योजना के अनुसार ही रहा तो आने वाले दो सालों में भारत मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) बनाने में सक्षम हो जाएगा। देश में ही हथियार बनाने की कड़ी में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन का यह एक महत्वपूर्ण क़दम है। यदि ऐसा होता है तो आने वाले सालों में भारत हथियार बनाने वाले देशों की क्षेणी में खड़ा होगा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत ने इज़रायल से 500 मिलियन डॉलर यानी कि क़रीब 35 हज़ार करोड़ रूपयों की हथियारों की एक डील की थी। इस डील में भारत, इज़रायल से स्पाइक एंटी-टैंक मिसाइलों को ख़रीदता। लेकिन ऐन वक़्त पर भारत ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के एक ‘वादे’ पर यह डील रद्द कर दी है, और डीआरडीओ का यह ‘वादा’ है कि वह दो सालों के अन्दर इज़रायल की स्पाइक एंटी टैंक मिसाइल के जैसी ही मिसाइलें बनाकर देगा।
डीआरडीओ के ‘वादे’ के बाद भारत सरकार ने इज़रायल को इस डील को रद्द किये जाने की सूचना दे दी है। जानकारी के मुताबिक़, डीआरडीओ ने वीईएम टेक्नोलॉजी लिमिटेड के साथ मिलकर बिल्कुल वैसी ही मिसाइल बनाने का ‘वादा’ किया है जो कि भारत, इज़रायल से ख़रीद रहा था। डीआरडीओ का ‘दावा’ और ‘वादा’ है कि मिसाइल को विकसित करने में इज़रायल से मिसाइल ख़रीदी की तुलना में कम पैसे खर्च होंगे।
लेकिन बड़ा सवाल है कि आख़िर मोदी सरकार ने डीआरडीओ के वादे पर ‘विश्वास’ कैसे किया। दरअसल, इसके पीछे कई कारण हैं। सबसे पहला तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मेक-इन-इंडिया विजन को साकार करने की दिशा में यह एक बड़ा क़दम है, जिसमें भारत में ही हथियारों को बनाने के लिए ‘प्राथमिकता’ दी जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी के मेक-इन-इंडिया विजन के तहत भारत दूसरों से रक्षा सामग्रियां आयात करने के बजाए ख़ुद अपने देश में ऐसी मिसाइल और टैंक बनाने पर ध्यान केन्द्रित करेगा जो कि वो अब तक आयात कर रहा था।
वहीं डीआरडीओ के वादे पर ‘विश्वास’ करने के पीछे एक बहुत बड़ा कारण इज़रायल से हथियारों के सौदे के राफेल विमानों के सौदे की तरह ‘विवादित’ होने की आशंका भी है। कहा जा रहा है कि डीआरडीओ के इस वादे के बाद कि वो इज़रायल से हुए सौदे से कम पैसों में उसी तरह की मिसाइल बना सकता है, सरकार नहीं चाहती थी कि राफेल विमान ख़रीदी जैसा कोई विवाद फ़िर से हो। जैसा कि आप जानते हैं कि लोकसभा चुनाव 2019 में राफेल विवाद विमान सौदा एक बहुत बड़ा ‘मुद्दा’ बन गया था। राफेल मामले में विपक्ष का ‘आरोप’ है कि हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) जो विमान बना सकता था, उस विमान को बनाने का समझौता मोदी सरकार ने एचएएल से ना करके अनिल अम्बानी की निजी क्षेत्र की कम्पनी से किया।
राफेल विमान विवाद के बाद मोदी सरकार चुनाव के पहले तो आक्रामक मोड पर थी, लेकिन अब लगता है कि वो डिफेंसिव मोड पर चली गई है। मोदी सरकार नहीं चाहती है कि एक बार फ़िर से राफेल विमान ख़रीदी जैसा कोई विवाद सामने आए, जिससे सरकार पर फ़िर से आरोप लगें। इसलिए कहा जा रहा है कि मोदी सरकार ने डीआरडीओ के वादे पर विश्वास करते हुए इज़रायल से मिसाइल ख़रीदी की डील रद्द कर दी।
वैसे कहा जा रहा है कि भारत के घरेलू रक्षा हथियारों को विकसित करने वाला डीआरडीओ, मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) बनाने की दिशा में बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। जानकारी के मुताबिक़ डीआरडीओ इससे सम्बन्धित कई परीक्षण भी कर चुका है। डीआरडीओ का दावा है कि इस मिसाइल को लेकर एक सफ़ल परीक्षण पिछले साल सितम्बर में अहमदनगर में किया जा चुका है।
जानकारी के मुताबिक़, इस बहुप्रतीक्षित मिसाइल को लेकर भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने डीआरडीओ से चर्चा की है। कहा यह भी जा रहा है कि डीआरडीओ ने सेना को इन मिसाइलों को बनाकर देने की एक तारीख़ भी दे दी है। अब देखना होगा कि प्रधानमंत्री मोदी के मेक-एन-इंडिया विजन में कितना सहयोग डीआरडीओ इन मिसाइलों को समय पर बनाकर कर पाता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि यदि तय समय में और इज़रायल से हथियार ख़रीदी के सौदे की क़ीमत से कम क़ीमत पर डीआरडीओ इन मिसाइलों को बनाने में सफ़ल हो गया, तो एक तो इससे राफेल जैसे विवाद से मोदी सरकार बच जाएगी और दूसरा प्रधानमंत्री मोदी के मेक-इन-इंडिया विजन को नई दिशा मिलेगी।
JUNE 24 (WTN) – भारत ने हाल ही में इज़रायल से 35,000 करोड़ रूपयों की हथियारों की डील रद्द कर दी है। आख़िर भारत सरकार ने ऐसा क्यों किया और इसके पीछे क्या कारण हैं? आइये आपको इसकी जानकारी विस्तार से देते हैं। सबसे पहले आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यदि सभी कुछ योजना के अनुसार ही रहा तो आने वाले दो सालों में भारत मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) बनाने में सक्षम हो जाएगा। देश में ही हथियार बनाने की कड़ी में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन का यह एक महत्वपूर्ण क़दम है। यदि ऐसा होता है तो आने वाले सालों में भारत हथियार बनाने वाले देशों की क्षेणी में खड़ा होगा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत ने इज़रायल से 500 मिलियन डॉलर यानी कि क़रीब 35 हज़ार करोड़ रूपयों की हथियारों की एक डील की थी। इस डील में भारत, इज़रायल से स्पाइक एंटी-टैंक मिसाइलों को ख़रीदता। लेकिन ऐन वक़्त पर भारत ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के एक ‘वादे’ पर यह डील रद्द कर दी है, और डीआरडीओ का यह ‘वादा’ है कि वह दो सालों के अन्दर इज़रायल की स्पाइक एंटी टैंक मिसाइल के जैसी ही मिसाइलें बनाकर देगा।
डीआरडीओ के ‘वादे’ के बाद भारत सरकार ने इज़रायल को इस डील को रद्द किये जाने की सूचना दे दी है। जानकारी के मुताबिक़, डीआरडीओ ने वीईएम टेक्नोलॉजी लिमिटेड के साथ मिलकर बिल्कुल वैसी ही मिसाइल बनाने का ‘वादा’ किया है जो कि भारत, इज़रायल से ख़रीद रहा था। डीआरडीओ का ‘दावा’ और ‘वादा’ है कि मिसाइल को विकसित करने में इज़रायल से मिसाइल ख़रीदी की तुलना में कम पैसे खर्च होंगे।
लेकिन बड़ा सवाल है कि आख़िर मोदी सरकार ने डीआरडीओ के वादे पर ‘विश्वास’ कैसे किया। दरअसल, इसके पीछे कई कारण हैं। सबसे पहला तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मेक-इन-इंडिया विजन को साकार करने की दिशा में यह एक बड़ा क़दम है, जिसमें भारत में ही हथियारों को बनाने के लिए ‘प्राथमिकता’ दी जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी के मेक-इन-इंडिया विजन के तहत भारत दूसरों से रक्षा सामग्रियां आयात करने के बजाए ख़ुद अपने देश में ऐसी मिसाइल और टैंक बनाने पर ध्यान केन्द्रित करेगा जो कि वो अब तक आयात कर रहा था।
वहीं डीआरडीओ के वादे पर ‘विश्वास’ करने के पीछे एक बहुत बड़ा कारण इज़रायल से हथियारों के सौदे के राफेल विमानों के सौदे की तरह ‘विवादित’ होने की आशंका भी है। कहा जा रहा है कि डीआरडीओ के इस वादे के बाद कि वो इज़रायल से हुए सौदे से कम पैसों में उसी तरह की मिसाइल बना सकता है, सरकार नहीं चाहती थी कि राफेल विमान ख़रीदी जैसा कोई विवाद फ़िर से हो। जैसा कि आप जानते हैं कि लोकसभा चुनाव 2019 में राफेल विवाद विमान सौदा एक बहुत बड़ा ‘मुद्दा’ बन गया था। राफेल मामले में विपक्ष का ‘आरोप’ है कि हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) जो विमान बना सकता था, उस विमान को बनाने का समझौता मोदी सरकार ने एचएएल से ना करके अनिल अम्बानी की निजी क्षेत्र की कम्पनी से किया।
राफेल विमान विवाद के बाद मोदी सरकार चुनाव के पहले तो आक्रामक मोड पर थी, लेकिन अब लगता है कि वो डिफेंसिव मोड पर चली गई है। मोदी सरकार नहीं चाहती है कि एक बार फ़िर से राफेल विमान ख़रीदी जैसा कोई विवाद सामने आए, जिससे सरकार पर फ़िर से आरोप लगें। इसलिए कहा जा रहा है कि मोदी सरकार ने डीआरडीओ के वादे पर विश्वास करते हुए इज़रायल से मिसाइल ख़रीदी की डील रद्द कर दी।
वैसे कहा जा रहा है कि भारत के घरेलू रक्षा हथियारों को विकसित करने वाला डीआरडीओ, मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) बनाने की दिशा में बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। जानकारी के मुताबिक़ डीआरडीओ इससे सम्बन्धित कई परीक्षण भी कर चुका है। डीआरडीओ का दावा है कि इस मिसाइल को लेकर एक सफ़ल परीक्षण पिछले साल सितम्बर में अहमदनगर में किया जा चुका है।
जानकारी के मुताबिक़, इस बहुप्रतीक्षित मिसाइल को लेकर भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने डीआरडीओ से चर्चा की है। कहा यह भी जा रहा है कि डीआरडीओ ने सेना को इन मिसाइलों को बनाकर देने की एक तारीख़ भी दे दी है। अब देखना होगा कि प्रधानमंत्री मोदी के मेक-एन-इंडिया विजन में कितना सहयोग डीआरडीओ इन मिसाइलों को समय पर बनाकर कर पाता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि यदि तय समय में और इज़रायल से हथियार ख़रीदी के सौदे की क़ीमत से कम क़ीमत पर डीआरडीओ इन मिसाइलों को बनाने में सफ़ल हो गया, तो एक तो इससे राफेल जैसे विवाद से मोदी सरकार बच जाएगी और दूसरा प्रधानमंत्री मोदी के मेक-इन-इंडिया विजन को नई दिशा मिलेगी।