मोदी सरकार लॉन्च करेगी व्हाट्सएप की तरह ख़ुद का मैसेजिंग ऐप!
Friday - June 28, 2019 10:36 am ,
Category : WTN HINDI
हुवावे जासूसी काण्ड से ‘सतर्क’ हुई मोदी सरकार
सरकारी एजेंसियों के बीच हो सकता है ‘स्वदेशी’ ऐप से कम्युनिकेशन!
JUNE 28 (WTN) – व्हाट्सएप पूरी दुनिया में सबसे ज़्यादा उपयोग में लाया जाने वाला इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप है। जिस किसी के भी पास स्मार्टफोन है वो अपने स्मार्टफोन में व्हाट्सएप का प्रयोग ज़रूर करता है। भारत में आजकल व्हाट्सएप का प्रयोग करने वाले क़रीब 20 करोड़ यूज़र्स हैं। लेकिन यदि हम आपसे कहें कि मोदी सरकार व्हाट्सएप की तरह अपना ख़ुद का एक ऐप लॉन्च करने वाली है तो यह पढ़कर आपको आश्चर्य हुआ होगा। आपका आश्चर्यचकित होना सही भी है, लेकिन क्या है यह पूरा मामला आइये आपको विस्तार से बताते हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मोदी सरकार ऐसा इसलिए कर रही है, क्योकि सरकार को आशंका है कि व्हाट्सएप और अन्य दूसरे विदेश मैसेजिंग ऐप से सरकारी एजेंसियों की जासूसी हो सकती है। दरअसल, अमेरिका ने चीनी कम्पनी हुवावे को जासूसी के आरोप में अपने देश में बैन कर दिया है। इस मामले में अमेरिका के वाणिज्य विभाग का आरोप है कि हुवावे की गतिविधियां अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के हितों के ख़िलाफ़ है।
अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के हितों के लिए अमेरिका इतना सजग है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिकी कम्पनियों को विदेश में निर्मित दूरसंचार उपकरणों को लगाने से रोकने के लिए बाक़ायदा सरकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर दिये हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति का यह फ़ैसला हुवावे को अमेरिकी नेटवर्क से दूर रखने के उद्देश्य से लिया गया है। हालांकि, चीन ने अमेरिका के इस फ़ैसले का कड़ा विरोध किया है, लेकिन चीन की आपत्ति को दरकिनार करते हुए अमेरिका ने भारत समेत दुनिया के कई देशों की कम्पनियों को चेतावनी दी है कि यदि उन कम्पनियों ने हुवावे या उसकी सहयोगी कम्पनियों को अमेरिका में बने पार्ट्स या प्रॉडक्ट्स सप्लाई किये तो उनके ख़िलाफ़ भी कार्रवाई हो सकती है।
अमेरिकी में चीनी कम्पनी हुवावे पर जासूसी के आरोप लगने के बाद मोदी सरकार सजग और सतर्क हो गई है। इस घटनाक्रम के बाद मोदी सरकार ने फ़ैसला लिया है कि कम्युनिकेशन के लिए कोई ऐसा ऐप लॉन्च किया जाना चाहिए, जिसका डेटा भारत में ही स्टोर किया जा सके। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, मोदी सरकार, सरकारी एजेंसियों के बीच कम्युनिकेशन के लिए एक ऐप लॉन्च करना चाह रही है। इस ऐप में ई-मेल और मैसेजिंग जैसी सुविधाएं होंगी। देश की सुरक्षा के लिए चिंतित मोदी सरकार का मानना है कि देश में आधिकारिक संचार के लिए एक सुरक्षित और स्वदेशी नेटवर्क होना चाहिए, जिससे उसकी जासूसी ना हो सके।
इसी कड़ी में मोदी सरकार व्हाट्सएप की तरह एक ऐप लॉन्च करने की तैयारी में है। इस ऐप का उपयोग शुरूआत में सरकारी एजेंसियों के बीच संचार के लिए होगा। सफ़ल होने के बाद इस ऐप का प्रयोग आम लोग भी कर सकेंगे। जैसा कि आप जानते हैं कि भारत एक परमाणु शक्ति सम्पन्न देश है, वहीं प्रधानमंत्री मोदी की इच्छाशक्ति के बाद भारत स्पेस वॉर की तैयारी में भी जुटा हुआ है। ऐसे में देश की सरकारी एजेंसियों के बीच हो रहे सभी तरह के कम्युनिकेशन पूरी तरह से सुरक्षित रहें, और उसकी कई जासूसी ना कर सके इसलिए मोदी सरकार ऐसा ऐप बनाने की दिशा में काम रही है, जो स्वेदशी हो और उसका पूरा डेटा भारत में ही स्टोर किया जाता हो।
वैसे व्हाट्सएप का दावा है कि उसके हर मैसेज सिक्योर रहता है, और उसे कोई पढ़ नहीं सकता है। व्हाट्सएप कम्पनी के मताबिक़, उसके ऐप पर भेजा गया हर मैसेज एण्ड-टू-एण्ड एन्क्रिप्शन से सम्ब्धित है। यानी कि व्हाट्सएप की हर चैटिंग के मैसेज कोड होकर दिखाई देते हैं, और उन्हें डिकोड नहीं किया जा सकता है यानी कि कोई भी दूसरा मैसेज को पढ़ नहीं सकता है। लेकिन व्हाट्सएप के दावे पर मोदी सरकार को लगता है भरोसा नहीं है। जिस तरह से हुवावे की जासूसी का मामला सामने आया है, उसके बाद मोदी सरकार ने आधिकारिक संचार के लिए एक सुरक्षित और स्वदेशी नेटवर्क को शुरू करने का फ़ैसला लिया है, जिससे कोई भी विदेशी कम्पनी किसी भी तरह की जासूसी ना कर सके।
JUNE 28 (WTN) – व्हाट्सएप पूरी दुनिया में सबसे ज़्यादा उपयोग में लाया जाने वाला इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप है। जिस किसी के भी पास स्मार्टफोन है वो अपने स्मार्टफोन में व्हाट्सएप का प्रयोग ज़रूर करता है। भारत में आजकल व्हाट्सएप का प्रयोग करने वाले क़रीब 20 करोड़ यूज़र्स हैं। लेकिन यदि हम आपसे कहें कि मोदी सरकार व्हाट्सएप की तरह अपना ख़ुद का एक ऐप लॉन्च करने वाली है तो यह पढ़कर आपको आश्चर्य हुआ होगा। आपका आश्चर्यचकित होना सही भी है, लेकिन क्या है यह पूरा मामला आइये आपको विस्तार से बताते हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मोदी सरकार ऐसा इसलिए कर रही है, क्योकि सरकार को आशंका है कि व्हाट्सएप और अन्य दूसरे विदेश मैसेजिंग ऐप से सरकारी एजेंसियों की जासूसी हो सकती है। दरअसल, अमेरिका ने चीनी कम्पनी हुवावे को जासूसी के आरोप में अपने देश में बैन कर दिया है। इस मामले में अमेरिका के वाणिज्य विभाग का आरोप है कि हुवावे की गतिविधियां अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के हितों के ख़िलाफ़ है।
अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के हितों के लिए अमेरिका इतना सजग है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिकी कम्पनियों को विदेश में निर्मित दूरसंचार उपकरणों को लगाने से रोकने के लिए बाक़ायदा सरकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर दिये हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति का यह फ़ैसला हुवावे को अमेरिकी नेटवर्क से दूर रखने के उद्देश्य से लिया गया है। हालांकि, चीन ने अमेरिका के इस फ़ैसले का कड़ा विरोध किया है, लेकिन चीन की आपत्ति को दरकिनार करते हुए अमेरिका ने भारत समेत दुनिया के कई देशों की कम्पनियों को चेतावनी दी है कि यदि उन कम्पनियों ने हुवावे या उसकी सहयोगी कम्पनियों को अमेरिका में बने पार्ट्स या प्रॉडक्ट्स सप्लाई किये तो उनके ख़िलाफ़ भी कार्रवाई हो सकती है।
अमेरिकी में चीनी कम्पनी हुवावे पर जासूसी के आरोप लगने के बाद मोदी सरकार सजग और सतर्क हो गई है। इस घटनाक्रम के बाद मोदी सरकार ने फ़ैसला लिया है कि कम्युनिकेशन के लिए कोई ऐसा ऐप लॉन्च किया जाना चाहिए, जिसका डेटा भारत में ही स्टोर किया जा सके। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, मोदी सरकार, सरकारी एजेंसियों के बीच कम्युनिकेशन के लिए एक ऐप लॉन्च करना चाह रही है। इस ऐप में ई-मेल और मैसेजिंग जैसी सुविधाएं होंगी। देश की सुरक्षा के लिए चिंतित मोदी सरकार का मानना है कि देश में आधिकारिक संचार के लिए एक सुरक्षित और स्वदेशी नेटवर्क होना चाहिए, जिससे उसकी जासूसी ना हो सके।
इसी कड़ी में मोदी सरकार व्हाट्सएप की तरह एक ऐप लॉन्च करने की तैयारी में है। इस ऐप का उपयोग शुरूआत में सरकारी एजेंसियों के बीच संचार के लिए होगा। सफ़ल होने के बाद इस ऐप का प्रयोग आम लोग भी कर सकेंगे। जैसा कि आप जानते हैं कि भारत एक परमाणु शक्ति सम्पन्न देश है, वहीं प्रधानमंत्री मोदी की इच्छाशक्ति के बाद भारत स्पेस वॉर की तैयारी में भी जुटा हुआ है। ऐसे में देश की सरकारी एजेंसियों के बीच हो रहे सभी तरह के कम्युनिकेशन पूरी तरह से सुरक्षित रहें, और उसकी कई जासूसी ना कर सके इसलिए मोदी सरकार ऐसा ऐप बनाने की दिशा में काम रही है, जो स्वेदशी हो और उसका पूरा डेटा भारत में ही स्टोर किया जाता हो।
वैसे व्हाट्सएप का दावा है कि उसके हर मैसेज सिक्योर रहता है, और उसे कोई पढ़ नहीं सकता है। व्हाट्सएप कम्पनी के मताबिक़, उसके ऐप पर भेजा गया हर मैसेज एण्ड-टू-एण्ड एन्क्रिप्शन से सम्ब्धित है। यानी कि व्हाट्सएप की हर चैटिंग के मैसेज कोड होकर दिखाई देते हैं, और उन्हें डिकोड नहीं किया जा सकता है यानी कि कोई भी दूसरा मैसेज को पढ़ नहीं सकता है। लेकिन व्हाट्सएप के दावे पर मोदी सरकार को लगता है भरोसा नहीं है। जिस तरह से हुवावे की जासूसी का मामला सामने आया है, उसके बाद मोदी सरकार ने आधिकारिक संचार के लिए एक सुरक्षित और स्वदेशी नेटवर्क को शुरू करने का फ़ैसला लिया है, जिससे कोई भी विदेशी कम्पनी किसी भी तरह की जासूसी ना कर सके।