लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस में ज़िम्मेदारी पर ‘घमासान’!
Friday - June 28, 2019 1:08 pm ,
Category : WTN HINDI
क्या यूपी में हार की ज़िम्मेदारी लेंगे प्रियंका वाड्रा और ज्योतिरादित्य सिंधिया?
हार के बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस के नेताओं पर साधा निशाना, ‘गैरज़िम्मेदार’ होने का कराया अहसास!
JUNE 28 (WTN) – .लोकसभा चुनाव में बुरी तरह से हार के बाद कांग्रेस पार्टी में निराशा का दौर जारी है। निराशा के दौर में जहां एक तरफ़ राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा देने पर अड़े हुए हैं, तो दूसरी तरफ़ कांग्रेसी नेताओं में किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन पा रही है, जिसे अध्यक्ष बनाया जाए। 2014 के लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस और ख़ुद राहुल गांधी को आशा थी कि इस बार के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी पिछले लोकसभा चुनाव से बेहतर प्रदर्शन करेगी, लेकिन राहुल गांधी की आशा तब निराशा में बदल गई, जब कांग्रेस पार्टी इस लोकसभा चुनाव में सिर्फ 52 सीटों पर ही जीत हासिल कर सकी।
लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक हार के बाद नाराज़ राहुल गांधी ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं पर जमकर भड़ास निकाली थी, और कुछ सीटों पर हार के लिए नेताओं के पुत्र मोह को ज़िम्मेदार बताया था। लेकिन हार से दुखी राहुल गांधी ने अब ऐसी बात कही है, जिससे उनकी बहन और कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा, और राहुल गांधी के क़रीबी ज्योतिरादित्य सिंधिया पर हार की नैतिक ज़िम्मेदारी लेने, और इस्तीफ़े का दबाव पड़ गया है।
दरअसल, राहुल गांधी ने एक नया बयान देकर कांग्रेस पार्टी में एक नई बहस छेड़ दी है। अपने नये बयान में राहुल गांधी का कहना है, “मुझे इस बात का दुख है कि मेरे पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दिए जाने के बाद भी कांग्रेस शासित राज्यों के कुछ मुख्यमंत्रियों, महासचिवों, प्रभारियों और वरिष्ठ नेताओं को उनकी जवाबदेही का अहसास नहीं हुआ है।” राहुल गांधी ने इशारों-इशारों में यह बात किन नेताओं के लिए कही है यह सभी जानते हैं, लेकिन राहुल गांधी के इस बयान के बाद प्रियंका वाड्रा और ज्योतिरादित्य सिंधिया भी सवालों के घेरे में आ गये हैं।
सीटों के हिसाब से सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश से राहुल गांधी को लोकसभा चुनाव में काफ़ी आशाएं थीं। राहुल गांधी यह सोचकर चल रहे थे कि बसपा-सपा गठबंधन होने से भाजपा को वोटों को नुकसान होगा, और मुस्लिम और दलित वोट बैंक कांग्रेस की तरफ़ वापस लौटेगा। लोकसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी ने योजनाबद्ध तरीक़े से प्रियंका वाड्रा की राजनीति में सक्रिय एंट्री कराई और उन्हें यूपी में एक बड़ी ज़िम्मेदारी भी दी।
राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव में प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया को यूपी का प्रभार सौंपा, और प्रभार सौंपकर निश्चिंत हो गये कि यूपी में कम से कम 10 से 15 सीटों पर कांग्रेस जीत हासिल कर सकती है। लेकिन राहुल गांधी की सभी रणनीतियां तब धराशायी हो गईं, जब खुद राहुल गांधी अमेठी से लोकसभा चुनाव हार गये। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को यूपी की जनता ने इतनी बुरी से नकारा है कि सोनिया गांधी के अलावा कोई भी कांग्रेस प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत सका।
अब जबकि राहुल गांधी ने तीखे शब्दों में कहा है कि कांग्रेस के नेताओं को हार के बाद भी अपनी जवाबदेही का अहसास नहीं हुआ है, तो कहा जा सकता है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की बुरी तरह से हुई हार के बाद प्रियंका वाड्रा और ज्योतिरादित्य सिंधिया को हार की ज़िम्मेदारी लेना पड़ सकती है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यूपी में कांग्रेस को ज़मीनी स्तर पर मज़बूती देने के लिए प्रियंका वाड्रा को पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया था, जबकि पश्चिम यूपी का प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया को बनाया गया था। कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में राज्य की 80 में से 67 सीटों पर चुनाव लड़ा था। लेकिन ना ही प्रियंका वाड्रा और ना ही ज्योतिरादित्य सिंधिया कुछ कमाल दिखा पाए, और कांग्रेस के 67 में से 66 प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा।
राहुल गांधी की अध्यक्षता और प्रियंका वाड्रा के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे महासचिवों के दम पर कांग्रेस, यूपी में बड़ी जीत का सपना देख रही थी, लेकिन कांग्रेस की करारी हार के बाद अब प्रियंका वाड्रा और ज्योतिरादित्य सिंधिया की योग्यता पर सवाल उठने लगे हैं। यूपी में कांग्रेस पार्टी की इतनी बुरी हार हुई है कि सिर्फ़ 4 प्रत्याशी ही लोकसभा चुनाव में अपनी जमानत बचा सके हैं। वहीं 10 सीटों पर तो कांग्रेस प्रत्याशी को कुल पड़े वोटों के 2 प्रतिशत से भी कम वोट मिले हैं।
यूपी में कांग्रेस पार्टी की बुरी तरह से हार, और उसके बाद राहुल गांधी के तंज के बाद कहा जा रहा है कि प्रियंका वाड्रा और ज्योतिरादित्य सिंधिया पर हार की ज़िम्मेदारी लेने का नैतिक दबाव बढ़ गया है। यूपी एक समय कांग्रेस का गढ़ माना जाता था, लेकिन अब कांग्रेस की यूपी में यह हालत हो गई है कि लोकसभा चुनाव में सिर्फ़ 4 प्रत्याशी ही अपनी जमानत बचा पा रहे हैं।
अब देखना होगा कि यूपी में कांग्रेस की बुरी तरह से हार के बाद प्रियंका वाड्रा और ज्योतिरादित्य सिंधिया हार की जिम्मेदारी लेते हैं कि नहीं, और अपने-अपने पदों से इस्तीफ़ा देते हैं कि नहीं। लोकसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस पार्टी के नेताओं के गैरज़िम्मेदाराना रवैये ने राहुल गांधी को और भी निराश और हताश कर दिया है। यदि प्रियंका वाड्रा ख़ुद आगे आकर हार की ज़िम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफ़ा देती हैं, तो हो सकता है कि इससे कांग्रेस के अन्य नेताओं को कोई सबक मिले, और वे लोकसभा चुनाव में करारी बार के बाद अपनी ज़िम्मेदारियां समझें।
JUNE 28 (WTN) – .लोकसभा चुनाव में बुरी तरह से हार के बाद कांग्रेस पार्टी में निराशा का दौर जारी है। निराशा के दौर में जहां एक तरफ़ राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा देने पर अड़े हुए हैं, तो दूसरी तरफ़ कांग्रेसी नेताओं में किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन पा रही है, जिसे अध्यक्ष बनाया जाए। 2014 के लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस और ख़ुद राहुल गांधी को आशा थी कि इस बार के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी पिछले लोकसभा चुनाव से बेहतर प्रदर्शन करेगी, लेकिन राहुल गांधी की आशा तब निराशा में बदल गई, जब कांग्रेस पार्टी इस लोकसभा चुनाव में सिर्फ 52 सीटों पर ही जीत हासिल कर सकी।
लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक हार के बाद नाराज़ राहुल गांधी ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं पर जमकर भड़ास निकाली थी, और कुछ सीटों पर हार के लिए नेताओं के पुत्र मोह को ज़िम्मेदार बताया था। लेकिन हार से दुखी राहुल गांधी ने अब ऐसी बात कही है, जिससे उनकी बहन और कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा, और राहुल गांधी के क़रीबी ज्योतिरादित्य सिंधिया पर हार की नैतिक ज़िम्मेदारी लेने, और इस्तीफ़े का दबाव पड़ गया है।
दरअसल, राहुल गांधी ने एक नया बयान देकर कांग्रेस पार्टी में एक नई बहस छेड़ दी है। अपने नये बयान में राहुल गांधी का कहना है, “मुझे इस बात का दुख है कि मेरे पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दिए जाने के बाद भी कांग्रेस शासित राज्यों के कुछ मुख्यमंत्रियों, महासचिवों, प्रभारियों और वरिष्ठ नेताओं को उनकी जवाबदेही का अहसास नहीं हुआ है।” राहुल गांधी ने इशारों-इशारों में यह बात किन नेताओं के लिए कही है यह सभी जानते हैं, लेकिन राहुल गांधी के इस बयान के बाद प्रियंका वाड्रा और ज्योतिरादित्य सिंधिया भी सवालों के घेरे में आ गये हैं।
सीटों के हिसाब से सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश से राहुल गांधी को लोकसभा चुनाव में काफ़ी आशाएं थीं। राहुल गांधी यह सोचकर चल रहे थे कि बसपा-सपा गठबंधन होने से भाजपा को वोटों को नुकसान होगा, और मुस्लिम और दलित वोट बैंक कांग्रेस की तरफ़ वापस लौटेगा। लोकसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी ने योजनाबद्ध तरीक़े से प्रियंका वाड्रा की राजनीति में सक्रिय एंट्री कराई और उन्हें यूपी में एक बड़ी ज़िम्मेदारी भी दी।
राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव में प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया को यूपी का प्रभार सौंपा, और प्रभार सौंपकर निश्चिंत हो गये कि यूपी में कम से कम 10 से 15 सीटों पर कांग्रेस जीत हासिल कर सकती है। लेकिन राहुल गांधी की सभी रणनीतियां तब धराशायी हो गईं, जब खुद राहुल गांधी अमेठी से लोकसभा चुनाव हार गये। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को यूपी की जनता ने इतनी बुरी से नकारा है कि सोनिया गांधी के अलावा कोई भी कांग्रेस प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत सका।
अब जबकि राहुल गांधी ने तीखे शब्दों में कहा है कि कांग्रेस के नेताओं को हार के बाद भी अपनी जवाबदेही का अहसास नहीं हुआ है, तो कहा जा सकता है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की बुरी तरह से हुई हार के बाद प्रियंका वाड्रा और ज्योतिरादित्य सिंधिया को हार की ज़िम्मेदारी लेना पड़ सकती है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यूपी में कांग्रेस को ज़मीनी स्तर पर मज़बूती देने के लिए प्रियंका वाड्रा को पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया था, जबकि पश्चिम यूपी का प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया को बनाया गया था। कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में राज्य की 80 में से 67 सीटों पर चुनाव लड़ा था। लेकिन ना ही प्रियंका वाड्रा और ना ही ज्योतिरादित्य सिंधिया कुछ कमाल दिखा पाए, और कांग्रेस के 67 में से 66 प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा।
राहुल गांधी की अध्यक्षता और प्रियंका वाड्रा के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे महासचिवों के दम पर कांग्रेस, यूपी में बड़ी जीत का सपना देख रही थी, लेकिन कांग्रेस की करारी हार के बाद अब प्रियंका वाड्रा और ज्योतिरादित्य सिंधिया की योग्यता पर सवाल उठने लगे हैं। यूपी में कांग्रेस पार्टी की इतनी बुरी हार हुई है कि सिर्फ़ 4 प्रत्याशी ही लोकसभा चुनाव में अपनी जमानत बचा सके हैं। वहीं 10 सीटों पर तो कांग्रेस प्रत्याशी को कुल पड़े वोटों के 2 प्रतिशत से भी कम वोट मिले हैं।
यूपी में कांग्रेस पार्टी की बुरी तरह से हार, और उसके बाद राहुल गांधी के तंज के बाद कहा जा रहा है कि प्रियंका वाड्रा और ज्योतिरादित्य सिंधिया पर हार की ज़िम्मेदारी लेने का नैतिक दबाव बढ़ गया है। यूपी एक समय कांग्रेस का गढ़ माना जाता था, लेकिन अब कांग्रेस की यूपी में यह हालत हो गई है कि लोकसभा चुनाव में सिर्फ़ 4 प्रत्याशी ही अपनी जमानत बचा पा रहे हैं।
अब देखना होगा कि यूपी में कांग्रेस की बुरी तरह से हार के बाद प्रियंका वाड्रा और ज्योतिरादित्य सिंधिया हार की जिम्मेदारी लेते हैं कि नहीं, और अपने-अपने पदों से इस्तीफ़ा देते हैं कि नहीं। लोकसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस पार्टी के नेताओं के गैरज़िम्मेदाराना रवैये ने राहुल गांधी को और भी निराश और हताश कर दिया है। यदि प्रियंका वाड्रा ख़ुद आगे आकर हार की ज़िम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफ़ा देती हैं, तो हो सकता है कि इससे कांग्रेस के अन्य नेताओं को कोई सबक मिले, और वे लोकसभा चुनाव में करारी बार के बाद अपनी ज़िम्मेदारियां समझें।