जानिए क्यों नाराज़ हैं डोनाल्ड ट्रम्प भारत से?
Friday - June 28, 2019 3:52 pm ,
Category : WTN HINDI
टैरिफ शुल्क के बहाने भारत से ‘खफा’ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प
मोदी सरकार की ‘राष्ट्रहित’ की नीतियों से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ‘चिढ़े’!
JUNE 28 (WTN) – सभी जानते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को गुस्सा बहुत जल्दी आता है। समय-समय पर उनके बयान और ट्वीट बता देते हैं कि वे गुस्से में हैं। वैसे इन दिनों डोनाल्ड ट्रम्प भारत से नाराज़ चल रहे हैं,और अपनी इस नाराज़गी को वे समय-समय पर बाक़ायदा ट्वीट करके जाहिर भी करते रहते हैं। जापान के ओसाका में जी 20 समिट में भारतीय प्रधानमंत्री मोदी से मुलाक़ात से पहले ट्रम्प ने एक ट्वीट करके फ़िर से भारत से नाराज़गी जताई, इस ट्वीट में ट्रम्प ने भारत पर अधिक टैरिफ वसूलने का आरोप लगाया।
यह पहली बार नहीं है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने टैरिफ शुल्क को लेकर भारत पर नाराज़गी जाहिर की ही, इससे पहले भी वे कई बार भारत को 'टैरिफ किंग' कह चुके हैं। लेकिन आख़िर क्या कारण है कि अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश का राष्ट्रपति, भारत द्वारा लगये गये टैरिफ पर इतना नाराज़ है। दरअसल, ट्रम्प की नाराज़गी की एकमात्र वजह भारत द्वारा लगाया गया टैरिफ शुल्क नहीं बल्कि कुछ और ही है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़ ट्रम्प टैरिफ जैसे मुद्दे की बजाय कुछ और दूसरी वजहों से भारत से चिढ़े हुए हैं, इसलिए वे टैरिफ के बहाने अपनी नाराज़गी जाहिर करते रहते हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हक़ीकत यह है कि भारत, विश्व व्यापार संगठन में तय किये गये आयात शुल्क से भी बेहद कम शुल्क वसूल कर रहा है। WTO में टैरिफ शुल्क 40 प्रतिशत से भी ज़्यादा की है, लेकिन भारत में उद्योगिक उत्पादों पर औसत आयात शुल्क सिर्फ़ 10.2 प्रतिशत ही लगाया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक़ हालांकि, भारत कुछ वस्तुओं के आयात पर अधिक शुल्क वसूल करता है। जैसे शराब पर भारत में 150 प्रतिशत और ऑटो मोबाइल्स पर 75 प्रतिशत टैरिफ शुल्क भारत वसूल किया जाता है, लेकिन भारत की तुलना में जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश और भी ज़्यादा शुल्क लगाते हैं। शराब पर जापान 736 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया 807 प्रतिशत टैरिफ शुल्क लगाता है। वहीं अमेरिका खुद शराब पर 300 प्रतिशत टैक्स लगाता है।
वहीं यदि भारत के औसत आयात शुल्क की तुलना दूसरे विकासशील देशों के साथ की जाए तो यह लगभग बराबर ही है। औसतन भारत 13.8 प्रतिशत टैरिफ टैक्स वसूल करता है तो वहीं दक्षिण कोरिया और अर्जेंटीना 13.7 प्रतिशत, और ब्राजील 13.4 प्रतिशत आयात शुल्क लेता है। वैसे यदि भारत, अमेरिका के कुछ सामानों पर ज़्यादा टैक्स वसूल कर रहा है तो अमेरिका भी कई भारतीय उत्पादों के आयात पर अधिक शुल्क लगाता है।
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के भारत से नाराज़ होने या फ़िर कहें कि चिढ़ने की वजह कुछ और ही समझ में आती है। जानकारों के मुताबिक़ ट्रम्प की नाराज़गी इस कारण से है कि भारत, अमेरिका से जितना सामान ख़रीदता है, उससे ज़्यादा का उसे बेचता है। साल 2018 में दोनों देशों के बीच 142.1 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था, जिसमें भारत का व्यापार 24.2 अरब डॉलर के साथ सरप्लस रहा था।
ट्रम्प की नाराज़गी के दूसरे भी अन्य कारण हैं, जैसे भारत में विदेशी निवेशकों के लिए नए ई-कॉमर्स नियमों और भारत में डेटा स्टोर करने की अनिवार्यता को लेकर ट्रम्प नाराज़ हैं, या फ़िर कहें कि बैचेन हैं, क्योंकि इन नियमों के कारण भारत में तगड़ा लाभ कमा रहीं अमेरिकी कम्पनियों को चुनौती का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में अमेरिकी कम्पनियों की हितों की रक्षा के नाम पर ट्रम्प भारत ने नाराज़गी जताते रहते हैं।
टैरिफ शुल्क के अलावा कई दूसरे भी कारण हैं, जिसके चलते अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प भारत से नाराज़ बताए जाते हैं। लेकिन मोदी सरकार ने जो फ़ैसले हैं वे राष्ट्रहित में हैं, ऐसे में लगता नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी किसी दबाव में अपनी सरकार के फ़ैसलों को वापस लेंगे। रूस के साथ एस-400 डील पर अमेरिका दबाव पर भी भारत ने अमेरिका को साफ़ कर दिया है कि भारत वही करेगा जो राष्ट्रहित में होगा। मोदी सरकार की भारत हितैषी नीतियों के कारण ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प इन दिनों भारत से नाराज चल रहे हैं, लेकिन लगता नहीं है कि मोदी सरकार ट्रम्प के सामने किसी दबाव में झुकेगी।
JUNE 28 (WTN) – सभी जानते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को गुस्सा बहुत जल्दी आता है। समय-समय पर उनके बयान और ट्वीट बता देते हैं कि वे गुस्से में हैं। वैसे इन दिनों डोनाल्ड ट्रम्प भारत से नाराज़ चल रहे हैं,और अपनी इस नाराज़गी को वे समय-समय पर बाक़ायदा ट्वीट करके जाहिर भी करते रहते हैं। जापान के ओसाका में जी 20 समिट में भारतीय प्रधानमंत्री मोदी से मुलाक़ात से पहले ट्रम्प ने एक ट्वीट करके फ़िर से भारत से नाराज़गी जताई, इस ट्वीट में ट्रम्प ने भारत पर अधिक टैरिफ वसूलने का आरोप लगाया।
यह पहली बार नहीं है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने टैरिफ शुल्क को लेकर भारत पर नाराज़गी जाहिर की ही, इससे पहले भी वे कई बार भारत को 'टैरिफ किंग' कह चुके हैं। लेकिन आख़िर क्या कारण है कि अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश का राष्ट्रपति, भारत द्वारा लगये गये टैरिफ पर इतना नाराज़ है। दरअसल, ट्रम्प की नाराज़गी की एकमात्र वजह भारत द्वारा लगाया गया टैरिफ शुल्क नहीं बल्कि कुछ और ही है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़ ट्रम्प टैरिफ जैसे मुद्दे की बजाय कुछ और दूसरी वजहों से भारत से चिढ़े हुए हैं, इसलिए वे टैरिफ के बहाने अपनी नाराज़गी जाहिर करते रहते हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हक़ीकत यह है कि भारत, विश्व व्यापार संगठन में तय किये गये आयात शुल्क से भी बेहद कम शुल्क वसूल कर रहा है। WTO में टैरिफ शुल्क 40 प्रतिशत से भी ज़्यादा की है, लेकिन भारत में उद्योगिक उत्पादों पर औसत आयात शुल्क सिर्फ़ 10.2 प्रतिशत ही लगाया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक़ हालांकि, भारत कुछ वस्तुओं के आयात पर अधिक शुल्क वसूल करता है। जैसे शराब पर भारत में 150 प्रतिशत और ऑटो मोबाइल्स पर 75 प्रतिशत टैरिफ शुल्क भारत वसूल किया जाता है, लेकिन भारत की तुलना में जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश और भी ज़्यादा शुल्क लगाते हैं। शराब पर जापान 736 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया 807 प्रतिशत टैरिफ शुल्क लगाता है। वहीं अमेरिका खुद शराब पर 300 प्रतिशत टैक्स लगाता है।
वहीं यदि भारत के औसत आयात शुल्क की तुलना दूसरे विकासशील देशों के साथ की जाए तो यह लगभग बराबर ही है। औसतन भारत 13.8 प्रतिशत टैरिफ टैक्स वसूल करता है तो वहीं दक्षिण कोरिया और अर्जेंटीना 13.7 प्रतिशत, और ब्राजील 13.4 प्रतिशत आयात शुल्क लेता है। वैसे यदि भारत, अमेरिका के कुछ सामानों पर ज़्यादा टैक्स वसूल कर रहा है तो अमेरिका भी कई भारतीय उत्पादों के आयात पर अधिक शुल्क लगाता है।
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के भारत से नाराज़ होने या फ़िर कहें कि चिढ़ने की वजह कुछ और ही समझ में आती है। जानकारों के मुताबिक़ ट्रम्प की नाराज़गी इस कारण से है कि भारत, अमेरिका से जितना सामान ख़रीदता है, उससे ज़्यादा का उसे बेचता है। साल 2018 में दोनों देशों के बीच 142.1 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था, जिसमें भारत का व्यापार 24.2 अरब डॉलर के साथ सरप्लस रहा था।
ट्रम्प की नाराज़गी के दूसरे भी अन्य कारण हैं, जैसे भारत में विदेशी निवेशकों के लिए नए ई-कॉमर्स नियमों और भारत में डेटा स्टोर करने की अनिवार्यता को लेकर ट्रम्प नाराज़ हैं, या फ़िर कहें कि बैचेन हैं, क्योंकि इन नियमों के कारण भारत में तगड़ा लाभ कमा रहीं अमेरिकी कम्पनियों को चुनौती का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में अमेरिकी कम्पनियों की हितों की रक्षा के नाम पर ट्रम्प भारत ने नाराज़गी जताते रहते हैं।
टैरिफ शुल्क के अलावा कई दूसरे भी कारण हैं, जिसके चलते अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प भारत से नाराज़ बताए जाते हैं। लेकिन मोदी सरकार ने जो फ़ैसले हैं वे राष्ट्रहित में हैं, ऐसे में लगता नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी किसी दबाव में अपनी सरकार के फ़ैसलों को वापस लेंगे। रूस के साथ एस-400 डील पर अमेरिका दबाव पर भी भारत ने अमेरिका को साफ़ कर दिया है कि भारत वही करेगा जो राष्ट्रहित में होगा। मोदी सरकार की भारत हितैषी नीतियों के कारण ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प इन दिनों भारत से नाराज चल रहे हैं, लेकिन लगता नहीं है कि मोदी सरकार ट्रम्प के सामने किसी दबाव में झुकेगी।