क्या करें और क्या ना करें राहुल गांधी?
Saturday - June 29, 2019 12:35 pm ,
Category : WTN HINDI
लोकसभा चुनाव में हार के बाद ‘पसोपेश’ में राहुल गांधी
फ़िलहाल पदयात्रा से ‘बेहतर’ 2024 के लिए एक ‘मज़बूत’ टीम तैयार करें राहुल गांधी!
JUNE 29 (WTN) – लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक बार के बाद कांग्रेस में अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद दुखी और नाराज़ राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफ़े की पेशकश कर दी है। राहुल गांधी ने साफ़ कर दिया है कि वे अब अध्यक्ष नहीं बने रहना चाहते हैं, इसलिए जल्द से जल्द कांग्रेस के वरिष्ठ नेता किसी अन्य नेता को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाए। जैसा कि आप जानते हैं कि गांधी परिवार ही कांग्रेस में एकता की धुरी है, ऐसे में सभी कांग्रेसी राहुल गांधी को मनाने में लगे हुए हैं कि वे कांग्रेस अध्यक्ष बने रहें। लेकिन जो तेवर और बॉडी लैंग्वेज राहुल गांधी की नज़र आ रही है, उससे लगता नहीं है कि वे अपना फ़ैसला बदलेंगे।
प्रधानमंत्री बनने का सपना लिये राहुल गांधी ने सोचा भी नहीं होगा कि लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी सिर्फ़ 52 सीटों पर ही सिमट कर रह जाएगी। हार से दुखी राहुल गांधी ने साफ़ कर दिया है कि वे अब कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़ रहे हैं, और ज़मीनी स्तर पर काम करेंगे। राहुल गांधी ने यह भी साफ़ कर दिया है कि वे पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलकर संगठन को मज़बूत करने का काम करेंगे।
यह तो तय है कि राहुल गांधी अध्यक्ष रहें या ना रहें, पार्टी में उनकी मर्ज़ी के बिना कोई भी फ़ैसला नहीं लिया जाएगा। यह भी तय है कि जो भी कांग्रेस अध्यक्ष बनेगा वो गांधी परिवार का क़रीबी होगा, और ऐसा होने से स्वाभाविक है कि नया कांग्रेस अध्यक्ष वही करेगा जो गांधी परिवार करने के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कहेगा।
वैसे यह तो तय है कि राहुल गांधी अब कांग्रेस अध्यक्ष पद की ज़िम्मेदारी नहीं सम्भालेंगे, लेकिन यह भी तय है कि जो भी कांग्रेस का नया अध्यक्ष बनेगा उस पर पूरा नियंत्रण राहुल गांधी के पास ही रहेगा। कहा जा रहा है कि राहुल गांधी अभी फ़िलहाल कुछ समय के लिए कांग्रेस अध्यक्ष पद से दूर रहें, और इस दौरान उनके किसी क़रीबी को अध्यक्ष पद की ज़िम्मेदारी दी जा सकती है।
लेकिन सवाल यह है कि आख़िर राहुल गांधी की जगह पर किसे कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया जाए, क्योंकि पार्टी में कई नेता हैं जो कि गांधी परिवार के क़रीबी रहे हैं। कहा जा रहा है कि संगठन में पकड़ रखने वाले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नाम पर कांग्रेस अध्यक्ष के लिए सहमति बन सकती है, क्योंकि गहलोत इन्दिरा गांधी, राहुल गांधी और सोनिया गांधी के काफ़ी क़रीबी रहे हैं।
वैसे यदि राहुल गांधी अध्यक्ष ना भी रहें तो भी कांग्रेस पार्टी में अप्रत्यक्ष रूप से उन्हीं के इशारे पर कांग्रेस के नेता काम करेंगे। कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा देकर राहुल गांधी हो सकता है कि पार्टी को मज़बूत करने और जनता से सम्वाद करने के लिए पदयात्रा पर निकल पड़ें, जैसा कि अनुमान लगाया जा रहा है।
जैसा कि आप जानते हैं कि भारत की राजनीति में यात्राओं का बड़ा ही महत्व है। लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा से लेकर जगन मोहन रेड्डी की पदयात्रा जैसी कई यात्राओं की देश की जनता गवाह रही है। इसी कड़ी में यदि राहुल गांधी पदयात्रा करते हैं तो यह कोई नई बात भारतीय राजनीति में नहीं होगी।
लेकिन यदि राहुल गांधी पदयात्रा करते भी हैं तो उनकी पदयात्रा के लिए यह समय किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं कहा जा सकता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि अभी-अभी लोकसभा चुनाव हुए हैं, और अगले लोकसभा चुनाव के लिए पूरे साढ़े चार साल का समय बाक़ी है। यदि राहुल गांधी अभी से पदयात्रा करते हैं तो अगले लोकसभा चुनाव तक देश की जनता के दिमाग से राहुल गांधी की पदयात्रा निकल चुकी होगी।
बेहतर होगा कि अभी राहुल गांधी अभी पार्टी संगठन पर ध्यान दें, और संसद में मोदी सरकार को घेरें। 2022 से यदि राहुल गांधी पदयात्रा शुरू करते हैं तो इसका काफ़ी प्रभाव देश की जनता पर पड़ सकता है, क्योंकि तब तक मोदी सरकार को तीन साल हो चुके होंगे, और इस दौरान देश की जनता मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में सरकार की नीयत और नीति से वाक़िफ हो चुकी होगी। ऐसे में यदि जनता से जुड़े मुद्दों के साथ राहुल गांधी पदयात्रा करते हुए जनता के बीच जाएंगे तो इसका ज़्यादा असर पड़ेगा।
वैसे जिस तरह के बयान पिछले दिनों में राहुल गांधी ने दिये हैं, उससे साफ़ है कि वे पार्टी नेताओं से नाराज़ चल रहे हैं। राहुल गांधी ने साफ़-साफ़ कह भी दिया है कि लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने हार की जवाबदेही ना लेकर गैर ज़िम्मेदाराना काम किया है। हालांकि, राहुल गांधी के तंज कसने के बाद अब कांग्रेस में हार की ज़िम्मेदारी लेते हुए, या फ़िर कहें कि राहुल गांधी की नज़रों में नम्बर बढ़ाने के लिए इस्तीफ़ों का दौर जारी है। लेकिन साफ़ है कि लोकसभा चुनाव में हार के बाद राहुल गांधी अपने ही नेताओं से नाराज़ आ रहे हैं।
ख़ैर अब जबकि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की क़रारी हार हो चुकी है, और कांग्रेस को अब 2024 लोकसभा चुनाव तक सत्ता के लिए इंतज़ार करना होगा। ऐसे में राहुल गांधी को कांग्रेस पार्टी को मज़बूत करने के लिए पार्टी में काफ़ी क्रांतिकारी परिवर्तन करने होंगे। भाजपा के तरह कांग्रेस को भी 75 साल से ज़्यादा उम्र के नेताओं को आराम करने की सलाह दे देना चाहिए। वहीं राजनीतिक में कम सक्रिय वरिष्ठ नेताओं को भी युवाओं के लिए मौका देने की बात कहते हुए उन्हें एक परामर्श मण्डल बनाकर उसमें शामिल करना चाहिए। साथ ही ज़रूरत है कि राहुल गांधी ज़िला स्तर से लेकर कांग्रेस वर्किंग कमेटी तक में जुझारू, कर्मठ और युवा चेहरों को मौक़ा दें, ताक़ि 2024 के लोकसभा चुनाव तक नरेन्द्र मोदी की टीम से टक्कर लेने के लिए राहुल गांधी के पास एक मज़बूत टीम तैयार हो सके।
JUNE 29 (WTN) – लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक बार के बाद कांग्रेस में अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद दुखी और नाराज़ राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफ़े की पेशकश कर दी है। राहुल गांधी ने साफ़ कर दिया है कि वे अब अध्यक्ष नहीं बने रहना चाहते हैं, इसलिए जल्द से जल्द कांग्रेस के वरिष्ठ नेता किसी अन्य नेता को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाए। जैसा कि आप जानते हैं कि गांधी परिवार ही कांग्रेस में एकता की धुरी है, ऐसे में सभी कांग्रेसी राहुल गांधी को मनाने में लगे हुए हैं कि वे कांग्रेस अध्यक्ष बने रहें। लेकिन जो तेवर और बॉडी लैंग्वेज राहुल गांधी की नज़र आ रही है, उससे लगता नहीं है कि वे अपना फ़ैसला बदलेंगे।
प्रधानमंत्री बनने का सपना लिये राहुल गांधी ने सोचा भी नहीं होगा कि लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी सिर्फ़ 52 सीटों पर ही सिमट कर रह जाएगी। हार से दुखी राहुल गांधी ने साफ़ कर दिया है कि वे अब कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़ रहे हैं, और ज़मीनी स्तर पर काम करेंगे। राहुल गांधी ने यह भी साफ़ कर दिया है कि वे पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलकर संगठन को मज़बूत करने का काम करेंगे।
यह तो तय है कि राहुल गांधी अध्यक्ष रहें या ना रहें, पार्टी में उनकी मर्ज़ी के बिना कोई भी फ़ैसला नहीं लिया जाएगा। यह भी तय है कि जो भी कांग्रेस अध्यक्ष बनेगा वो गांधी परिवार का क़रीबी होगा, और ऐसा होने से स्वाभाविक है कि नया कांग्रेस अध्यक्ष वही करेगा जो गांधी परिवार करने के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कहेगा।
वैसे यह तो तय है कि राहुल गांधी अब कांग्रेस अध्यक्ष पद की ज़िम्मेदारी नहीं सम्भालेंगे, लेकिन यह भी तय है कि जो भी कांग्रेस का नया अध्यक्ष बनेगा उस पर पूरा नियंत्रण राहुल गांधी के पास ही रहेगा। कहा जा रहा है कि राहुल गांधी अभी फ़िलहाल कुछ समय के लिए कांग्रेस अध्यक्ष पद से दूर रहें, और इस दौरान उनके किसी क़रीबी को अध्यक्ष पद की ज़िम्मेदारी दी जा सकती है।
लेकिन सवाल यह है कि आख़िर राहुल गांधी की जगह पर किसे कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया जाए, क्योंकि पार्टी में कई नेता हैं जो कि गांधी परिवार के क़रीबी रहे हैं। कहा जा रहा है कि संगठन में पकड़ रखने वाले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नाम पर कांग्रेस अध्यक्ष के लिए सहमति बन सकती है, क्योंकि गहलोत इन्दिरा गांधी, राहुल गांधी और सोनिया गांधी के काफ़ी क़रीबी रहे हैं।
वैसे यदि राहुल गांधी अध्यक्ष ना भी रहें तो भी कांग्रेस पार्टी में अप्रत्यक्ष रूप से उन्हीं के इशारे पर कांग्रेस के नेता काम करेंगे। कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा देकर राहुल गांधी हो सकता है कि पार्टी को मज़बूत करने और जनता से सम्वाद करने के लिए पदयात्रा पर निकल पड़ें, जैसा कि अनुमान लगाया जा रहा है।
जैसा कि आप जानते हैं कि भारत की राजनीति में यात्राओं का बड़ा ही महत्व है। लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा से लेकर जगन मोहन रेड्डी की पदयात्रा जैसी कई यात्राओं की देश की जनता गवाह रही है। इसी कड़ी में यदि राहुल गांधी पदयात्रा करते हैं तो यह कोई नई बात भारतीय राजनीति में नहीं होगी।
लेकिन यदि राहुल गांधी पदयात्रा करते भी हैं तो उनकी पदयात्रा के लिए यह समय किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं कहा जा सकता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि अभी-अभी लोकसभा चुनाव हुए हैं, और अगले लोकसभा चुनाव के लिए पूरे साढ़े चार साल का समय बाक़ी है। यदि राहुल गांधी अभी से पदयात्रा करते हैं तो अगले लोकसभा चुनाव तक देश की जनता के दिमाग से राहुल गांधी की पदयात्रा निकल चुकी होगी।
बेहतर होगा कि अभी राहुल गांधी अभी पार्टी संगठन पर ध्यान दें, और संसद में मोदी सरकार को घेरें। 2022 से यदि राहुल गांधी पदयात्रा शुरू करते हैं तो इसका काफ़ी प्रभाव देश की जनता पर पड़ सकता है, क्योंकि तब तक मोदी सरकार को तीन साल हो चुके होंगे, और इस दौरान देश की जनता मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में सरकार की नीयत और नीति से वाक़िफ हो चुकी होगी। ऐसे में यदि जनता से जुड़े मुद्दों के साथ राहुल गांधी पदयात्रा करते हुए जनता के बीच जाएंगे तो इसका ज़्यादा असर पड़ेगा।
वैसे जिस तरह के बयान पिछले दिनों में राहुल गांधी ने दिये हैं, उससे साफ़ है कि वे पार्टी नेताओं से नाराज़ चल रहे हैं। राहुल गांधी ने साफ़-साफ़ कह भी दिया है कि लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने हार की जवाबदेही ना लेकर गैर ज़िम्मेदाराना काम किया है। हालांकि, राहुल गांधी के तंज कसने के बाद अब कांग्रेस में हार की ज़िम्मेदारी लेते हुए, या फ़िर कहें कि राहुल गांधी की नज़रों में नम्बर बढ़ाने के लिए इस्तीफ़ों का दौर जारी है। लेकिन साफ़ है कि लोकसभा चुनाव में हार के बाद राहुल गांधी अपने ही नेताओं से नाराज़ आ रहे हैं।
ख़ैर अब जबकि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की क़रारी हार हो चुकी है, और कांग्रेस को अब 2024 लोकसभा चुनाव तक सत्ता के लिए इंतज़ार करना होगा। ऐसे में राहुल गांधी को कांग्रेस पार्टी को मज़बूत करने के लिए पार्टी में काफ़ी क्रांतिकारी परिवर्तन करने होंगे। भाजपा के तरह कांग्रेस को भी 75 साल से ज़्यादा उम्र के नेताओं को आराम करने की सलाह दे देना चाहिए। वहीं राजनीतिक में कम सक्रिय वरिष्ठ नेताओं को भी युवाओं के लिए मौका देने की बात कहते हुए उन्हें एक परामर्श मण्डल बनाकर उसमें शामिल करना चाहिए। साथ ही ज़रूरत है कि राहुल गांधी ज़िला स्तर से लेकर कांग्रेस वर्किंग कमेटी तक में जुझारू, कर्मठ और युवा चेहरों को मौक़ा दें, ताक़ि 2024 के लोकसभा चुनाव तक नरेन्द्र मोदी की टीम से टक्कर लेने के लिए राहुल गांधी के पास एक मज़बूत टीम तैयार हो सके।