जानिए ट्रेड वॉर खत्म करने पर क्यों राज़ी हुए अमेरिका और चीन?
Saturday - June 29, 2019 3:41 pm ,
Category : WTN HINDI
फ़िर से व्यापार वार्ता शुरू करेंगे अमेरिका और चीन
कम्पनियों का ‘दबाव’ आया काम, अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर पर लगेगा ‘विराम’!
JUNE 29 (WTN) – क्या दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर जल्द ख़त्म होने जा रहा है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि जापान के ओसाका में चल रही जी-20 समिट के दौरान अमरीका और चीन में इसको लेकर सहमति बनती दिख रही है। अमेरिका और चीन के बीच चल रहे ट्रेड वॉर पर दोनों ही देश बातचीत के लिए तैयार हो गए हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीन के राष्ट्रपति शी जिंगपिंग अमेरिका-चीन व्यापार वार्ता फ़िर से शुरू करने के लिए राज़ी हो गए हैं। यानी कि साफ़ है कि अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर पर विराम लगता दिख रहा है।
दरअसल, अमेरिका और चीन जैसी आर्थिक शक्तियां एक दूसरे के ख़िलाफ़ नये तरीक़े का वॉर लड़ रही हैं। इस वॉर में अमेरिका और चीन दोनों ही देश अपने-अपने कारोबारी हितों को पूरा करने के लिए एक दूसरे के माल पर भारी शुल्क लगा रहे थे। लेकिन जानकारी के मुताबिक़, अमेरिका, चीन के निर्यात पर नया शुल्क नहीं लगाने के लिए राज़ी हो गया है। पर बड़ा सवाल है कि आख़िर क्या कारण है कि दोनों ही देश ट्रेड वॉर को ख़त्म करने के लिए राज़ी होते दिख रहे हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दोनों देशों के बीच चल रहे ट्रेड वॉर के कारण अमेरिका ने चीनी सामान पर टैरिफ 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया था, जिसके बाद चीन ने भी जवाब में अमेरिकी उत्पादों पर भारी शुल्क लगा दिया था। इस बारे में जानकारों का कहना है कि अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर रुकने से भारत समेत दुनिया के कई देशों को इससे राहत मिलेगी। इस ट्रेड वॉर के रुकने से भारत की कम्पनियां अपने उत्पादों को आसानी से दूसरे देशों को निर्यात कर पाएंगी। हालांकि, अमेरिका-चीन के बीच चल रहे ट्रेड वॉर से भारत को काफ़ी फ़ायदा भी हुआ था, और इसके कारण भारत का अमेरिका और चीन दोनों ही देशों से व्यापार काफ़ी बढ़ा था।
चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, समानता और आपसी सम्मान के आधार पर दोनों देश इस मामले में दोबारा बातचीत शुरू करेंगे। यदि दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू होती है तो इससे कई कम्पनियों के साथ-साथ निवेशकों को काफ़ी राहत मिलेगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिकी कम्पनी एप्पल, चीन के साथ अमेरिका के ट्रेड वॉर का सबसे बड़ा शिकार हुई है। अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर के कारण एप्पल की बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसी कारण से कई बार एप्पल कम्पनी ने अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की चीन के साथ आर्थिक नीतियों का कड़ा विरोध किया है।
बात करें चीन की कम्पनी की तो अमेरिका ने स्मार्टफोन बनाने वाली चीन की बड़ी कम्पनी हुवावे पर जासूसी का आरोप लगाते हुए बैन लगा दिया है। इतना ही नहीं, अमेरिका ने दुनिया भर की कम्पनियों को चेतावनी दी है कि वे अमेरिकी पार्ट्स को हुवावे और उसकी सहायक कम्पानियों को नहीं बेचे। अमेरिका और चीन की कई कम्पनियां दोनों देशों के बीच जारी ट्रेड वॉर के कारण बिक्री में गिरावट का सामना कर रही थीं। इसके अलावा दोनों ही देशों के बीच व्यापार में भारी शुल्क लगने के बाद आयातित माल महंगा बिक रहा था। कहा जा सकता है कि अमेरिका और चीन की सरकारों पर वहां की कम्पनियों का भारी दबाव रहा होगा, जिसके बाद दोनों ही देशों की सरकारों ने फ़ैसला लिया है कि ट्रेड वॉर को ख़त्म किया जाए।
यानी कि साफ़ है कि अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर के कारण कई देशों की कई कम्पनियों को नुकसान उठाना पड़ा है। अब जबकि अमेरिका, चीन पर कोई नया शुल्क नहीं लगाने पर राज़ी हो गया है तो ऐसे में कहा जा सकता है कि दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता भी जल्द शुरू हो, और सकारात्मक रहे। यदि ऐसा होता है तो इससे अमेरिका औऱ चीन को तो लाभ होगा ही, बाक़ी अन्य देशों को भी इन दोनों देशों के बीच चल रहे ट्रेड वॉर से होने वाले नुकसान से राहत मिलेगी।
JUNE 29 (WTN) – क्या दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर जल्द ख़त्म होने जा रहा है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि जापान के ओसाका में चल रही जी-20 समिट के दौरान अमरीका और चीन में इसको लेकर सहमति बनती दिख रही है। अमेरिका और चीन के बीच चल रहे ट्रेड वॉर पर दोनों ही देश बातचीत के लिए तैयार हो गए हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीन के राष्ट्रपति शी जिंगपिंग अमेरिका-चीन व्यापार वार्ता फ़िर से शुरू करने के लिए राज़ी हो गए हैं। यानी कि साफ़ है कि अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर पर विराम लगता दिख रहा है।
दरअसल, अमेरिका और चीन जैसी आर्थिक शक्तियां एक दूसरे के ख़िलाफ़ नये तरीक़े का वॉर लड़ रही हैं। इस वॉर में अमेरिका और चीन दोनों ही देश अपने-अपने कारोबारी हितों को पूरा करने के लिए एक दूसरे के माल पर भारी शुल्क लगा रहे थे। लेकिन जानकारी के मुताबिक़, अमेरिका, चीन के निर्यात पर नया शुल्क नहीं लगाने के लिए राज़ी हो गया है। पर बड़ा सवाल है कि आख़िर क्या कारण है कि दोनों ही देश ट्रेड वॉर को ख़त्म करने के लिए राज़ी होते दिख रहे हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दोनों देशों के बीच चल रहे ट्रेड वॉर के कारण अमेरिका ने चीनी सामान पर टैरिफ 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया था, जिसके बाद चीन ने भी जवाब में अमेरिकी उत्पादों पर भारी शुल्क लगा दिया था। इस बारे में जानकारों का कहना है कि अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर रुकने से भारत समेत दुनिया के कई देशों को इससे राहत मिलेगी। इस ट्रेड वॉर के रुकने से भारत की कम्पनियां अपने उत्पादों को आसानी से दूसरे देशों को निर्यात कर पाएंगी। हालांकि, अमेरिका-चीन के बीच चल रहे ट्रेड वॉर से भारत को काफ़ी फ़ायदा भी हुआ था, और इसके कारण भारत का अमेरिका और चीन दोनों ही देशों से व्यापार काफ़ी बढ़ा था।
चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, समानता और आपसी सम्मान के आधार पर दोनों देश इस मामले में दोबारा बातचीत शुरू करेंगे। यदि दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू होती है तो इससे कई कम्पनियों के साथ-साथ निवेशकों को काफ़ी राहत मिलेगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिकी कम्पनी एप्पल, चीन के साथ अमेरिका के ट्रेड वॉर का सबसे बड़ा शिकार हुई है। अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर के कारण एप्पल की बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसी कारण से कई बार एप्पल कम्पनी ने अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की चीन के साथ आर्थिक नीतियों का कड़ा विरोध किया है।
बात करें चीन की कम्पनी की तो अमेरिका ने स्मार्टफोन बनाने वाली चीन की बड़ी कम्पनी हुवावे पर जासूसी का आरोप लगाते हुए बैन लगा दिया है। इतना ही नहीं, अमेरिका ने दुनिया भर की कम्पनियों को चेतावनी दी है कि वे अमेरिकी पार्ट्स को हुवावे और उसकी सहायक कम्पानियों को नहीं बेचे। अमेरिका और चीन की कई कम्पनियां दोनों देशों के बीच जारी ट्रेड वॉर के कारण बिक्री में गिरावट का सामना कर रही थीं। इसके अलावा दोनों ही देशों के बीच व्यापार में भारी शुल्क लगने के बाद आयातित माल महंगा बिक रहा था। कहा जा सकता है कि अमेरिका और चीन की सरकारों पर वहां की कम्पनियों का भारी दबाव रहा होगा, जिसके बाद दोनों ही देशों की सरकारों ने फ़ैसला लिया है कि ट्रेड वॉर को ख़त्म किया जाए।
यानी कि साफ़ है कि अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर के कारण कई देशों की कई कम्पनियों को नुकसान उठाना पड़ा है। अब जबकि अमेरिका, चीन पर कोई नया शुल्क नहीं लगाने पर राज़ी हो गया है तो ऐसे में कहा जा सकता है कि दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता भी जल्द शुरू हो, और सकारात्मक रहे। यदि ऐसा होता है तो इससे अमेरिका औऱ चीन को तो लाभ होगा ही, बाक़ी अन्य देशों को भी इन दोनों देशों के बीच चल रहे ट्रेड वॉर से होने वाले नुकसान से राहत मिलेगी।