एक महिला होकर महिलाओं के लिए बजट में काफ़ी कुछ दे सकती हैं निर्मला सीतारमण!
Wednesday - July 3, 2019 12:23 pm ,
Category : WTN HINDI
महिलाओं की महिला वित्त मंत्री से बजट को लेकर काफ़ी उम्मीदें
क्या महिलाओं की आशा पर ख़रा उतरेंगी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण?
JULY 03 (WTN) – कहते हैं कि घर का बजट घर की महिलाएं ही बेहतर तरीक़े से सम्भालती हैं। कुछ इसी तरह इस बार देश के आम बजट में होने जा रहा है, क्योंकि इस बार देश का आम बजट एक महिला सम्भाल रही हैं, और उसे पेश करने जा रही हैं। जीहां विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के इतिहास में ऐसा पहली बार होने जा रहा है कि कोई पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री बजट पेश करने जा रही हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 5 जुलाई को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट पेश करेंगी। हालांकि, इससे पहले एक महिला के रूप में इन्दिरा गांधी ने साल 1970 में बजट पेश किया था, लेकिन तब वे सिर्फ़ कार्यवाहक वित्त मंत्री थीं।
अब जबकि देश का बजट एक महिला पेश करने जा रही हैं, तो इस बजट से महिलाओं को काफ़ी आशाएं हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि महिलाओं का मानना है कि एक महिला ही दूसरी महिला की परेशानी को समझ सकती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बजट पूर्व चर्चा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने महिलाओं से भी उनकी राय जानी है। वैसे तो हर बजट से महिलाओं को वित्त मंत्री से काफ़ी उम्मीदें रहती हैं, और उनकी काफ़ी मांगें भी होती हैं। लेकिन चुंकि इस बार वित्त मंत्री स्वयं महिला हैं, तो महिलाएं इस बार के आम बजट को लेकर कुछ ज़्यादा ही उत्साहित हैं। महिलाओं को उम्मीद है कि महंगाई कम करने के साथ-साथ टैक्स के बोझ से कामकाजी महिलाओं को वित्त मंत्री राहत देंगी।
वैसे मोदी सरकार ने अंतरिम बजट 2019-20 में महिलाओं के हित की कई योजनाओं के लिए आवंटित राशि में वृद्धि की थी। जैसे महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का आवंटन 20 प्रतिशत बढ़ाकर 29,000 करोड़ रूपये कर दिया गया था। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के आवंटन को 1200 करोड़ से बढ़ाकर 2,500 करोड़ रूपये कर दिया गया था। पिछले साल के बजट में महिलाओं के लिए चलाई जा रही कई योजनाओं के बजट में वृद्धि की गई थी। हालांकि, कुछ योजनाओं के बजट में कटौती भी मोदी सरकार ने की थी। पर कुल मिलाकर महिलाओं की सभी योजनाओं में बजट को 4 प्रतिशत बढ़ाया गया था।
चुंकि इस बार एक महिला वित्त मंत्री बजट पेश कर रही हैं तो देश की महिलाओं को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से काफी आशाएं हैं। महिलाओं की पहली मांग है कि वित्त मंत्री कामकाजी महिलाओं को टैक्स से कुछ और राहत दें। वैसे इस साल के अंतरिम बजट में मोदी सरकार ने महिलाओं के लिए ईपीएफ में कटौती करते हुए उसे 12 प्रतिशत से कम करके 8 प्रतिशत कर दिया था। अंतरिम बजट में मोदी सरकार के इस क़दम की सभी ने तारीफ़ की थी, जिसके बाद उम्मीद है कि मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल के पहले पूर्ण बजट में महिलाओं को टैक्स में और राहत देकर उन्हें वित्तीय रूप से ज़्यादा मज़बूत करने के लिए कुछ फ़ैसले ले सकती है।
वहीं महिलाओं को उम्मीद है कि वित्त मंत्री टैक्स नियमों में महिलाओं के लिए कुछ राहत देंगी। महिलाओं की मांग है कि 80सी के तहत महिलाओं को मिलने वाली आयकर छूट की सीमा को बढ़ाया जाना चाहिए। कहा जा रहा है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण महिलाओं द्वारा बच्चों की केयर सुविधा पर खर्च होने वाली रकम में भी टैक्स छूट दे सकती हैं।
कहा जाता है कि एनडीए की लगातार दूसरी बार लोकसभा चुनाव जीत में महिलाओं का काफ़ी योगदान रहा है। राजनीतिक के जानकारों का मानना है कि मोदी सरकार की उज्ज्वला योजना काफ़ी सफल रही है, जिसके कारण महिलाओं ने खुलकर लोकसभा चुनाव में भाजपा को वोट दिया। मोदी सरकार का दावा है कि उज्जवला योजना का सबसे ज़्यादा फ़ायदा ग़रीब महिलाओं को हुआ है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी की महत्वाकांक्षी उज्ज्वला योजना में सरकार ने 8 करोड़ गैस कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा है। मोदी सरकार का दावा है उनकी यह योजना काफ़ी सफल और लोकप्रिय है। लेकिन इस योजना का लाभ उठा रहीं कुछ महिलाओं की शिकायत है कि उन्हें गैस सिलेण्डर रिफिल कराने में काफ़ी दिक्क़तों का सामना करना पड़ता है। अब देखना होगा कि वित्त मंत्री उज्जवला योजना हितग्राहियों की इस समस्या के समाधान के लिए कोई घोषणा बजट में करती हैं कि नहीं।
महिलाओं की सुरक्षा महिलाओं की पहली मांग है। अब जबकि वित्त मंत्री स्वयं एक महिला हैं तो देश की महिलाओं को आशा है कि वे महिला सुरक्षा को लेकर बजट में अलग से कुछ आवंटन करेंगी। इस बजट राशि का उपयोग महिला सुरक्षा बलों को बढ़ाने के साथ सार्वजनिक जगहों और ट्रांसपोर्ट में सीसीटीवी कैमरे लगाने में किया जा सकता है। वहीं महिलाओं को आशा है कि कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा और उन्हें कार्यस्थल पर अनुकूल वातावरण देने के लिए कुछ नीतियों की घोषणा भी वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को करना चाहिए। ख़ैर महिलाओं को वित्त मंत्री से काफ़ी आशाएं हैं, लेकिन अब यह तो बजट के बाद ही पता चल सकेगा कि महिलाओं की आशाओं पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कितना ख़रा उतर पाती हैं।
JULY 03 (WTN) – कहते हैं कि घर का बजट घर की महिलाएं ही बेहतर तरीक़े से सम्भालती हैं। कुछ इसी तरह इस बार देश के आम बजट में होने जा रहा है, क्योंकि इस बार देश का आम बजट एक महिला सम्भाल रही हैं, और उसे पेश करने जा रही हैं। जीहां विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के इतिहास में ऐसा पहली बार होने जा रहा है कि कोई पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री बजट पेश करने जा रही हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 5 जुलाई को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट पेश करेंगी। हालांकि, इससे पहले एक महिला के रूप में इन्दिरा गांधी ने साल 1970 में बजट पेश किया था, लेकिन तब वे सिर्फ़ कार्यवाहक वित्त मंत्री थीं।
अब जबकि देश का बजट एक महिला पेश करने जा रही हैं, तो इस बजट से महिलाओं को काफ़ी आशाएं हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि महिलाओं का मानना है कि एक महिला ही दूसरी महिला की परेशानी को समझ सकती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बजट पूर्व चर्चा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने महिलाओं से भी उनकी राय जानी है। वैसे तो हर बजट से महिलाओं को वित्त मंत्री से काफ़ी उम्मीदें रहती हैं, और उनकी काफ़ी मांगें भी होती हैं। लेकिन चुंकि इस बार वित्त मंत्री स्वयं महिला हैं, तो महिलाएं इस बार के आम बजट को लेकर कुछ ज़्यादा ही उत्साहित हैं। महिलाओं को उम्मीद है कि महंगाई कम करने के साथ-साथ टैक्स के बोझ से कामकाजी महिलाओं को वित्त मंत्री राहत देंगी।
वैसे मोदी सरकार ने अंतरिम बजट 2019-20 में महिलाओं के हित की कई योजनाओं के लिए आवंटित राशि में वृद्धि की थी। जैसे महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का आवंटन 20 प्रतिशत बढ़ाकर 29,000 करोड़ रूपये कर दिया गया था। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के आवंटन को 1200 करोड़ से बढ़ाकर 2,500 करोड़ रूपये कर दिया गया था। पिछले साल के बजट में महिलाओं के लिए चलाई जा रही कई योजनाओं के बजट में वृद्धि की गई थी। हालांकि, कुछ योजनाओं के बजट में कटौती भी मोदी सरकार ने की थी। पर कुल मिलाकर महिलाओं की सभी योजनाओं में बजट को 4 प्रतिशत बढ़ाया गया था।
चुंकि इस बार एक महिला वित्त मंत्री बजट पेश कर रही हैं तो देश की महिलाओं को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से काफी आशाएं हैं। महिलाओं की पहली मांग है कि वित्त मंत्री कामकाजी महिलाओं को टैक्स से कुछ और राहत दें। वैसे इस साल के अंतरिम बजट में मोदी सरकार ने महिलाओं के लिए ईपीएफ में कटौती करते हुए उसे 12 प्रतिशत से कम करके 8 प्रतिशत कर दिया था। अंतरिम बजट में मोदी सरकार के इस क़दम की सभी ने तारीफ़ की थी, जिसके बाद उम्मीद है कि मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल के पहले पूर्ण बजट में महिलाओं को टैक्स में और राहत देकर उन्हें वित्तीय रूप से ज़्यादा मज़बूत करने के लिए कुछ फ़ैसले ले सकती है।
वहीं महिलाओं को उम्मीद है कि वित्त मंत्री टैक्स नियमों में महिलाओं के लिए कुछ राहत देंगी। महिलाओं की मांग है कि 80सी के तहत महिलाओं को मिलने वाली आयकर छूट की सीमा को बढ़ाया जाना चाहिए। कहा जा रहा है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण महिलाओं द्वारा बच्चों की केयर सुविधा पर खर्च होने वाली रकम में भी टैक्स छूट दे सकती हैं।
कहा जाता है कि एनडीए की लगातार दूसरी बार लोकसभा चुनाव जीत में महिलाओं का काफ़ी योगदान रहा है। राजनीतिक के जानकारों का मानना है कि मोदी सरकार की उज्ज्वला योजना काफ़ी सफल रही है, जिसके कारण महिलाओं ने खुलकर लोकसभा चुनाव में भाजपा को वोट दिया। मोदी सरकार का दावा है कि उज्जवला योजना का सबसे ज़्यादा फ़ायदा ग़रीब महिलाओं को हुआ है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी की महत्वाकांक्षी उज्ज्वला योजना में सरकार ने 8 करोड़ गैस कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा है। मोदी सरकार का दावा है उनकी यह योजना काफ़ी सफल और लोकप्रिय है। लेकिन इस योजना का लाभ उठा रहीं कुछ महिलाओं की शिकायत है कि उन्हें गैस सिलेण्डर रिफिल कराने में काफ़ी दिक्क़तों का सामना करना पड़ता है। अब देखना होगा कि वित्त मंत्री उज्जवला योजना हितग्राहियों की इस समस्या के समाधान के लिए कोई घोषणा बजट में करती हैं कि नहीं।
महिलाओं की सुरक्षा महिलाओं की पहली मांग है। अब जबकि वित्त मंत्री स्वयं एक महिला हैं तो देश की महिलाओं को आशा है कि वे महिला सुरक्षा को लेकर बजट में अलग से कुछ आवंटन करेंगी। इस बजट राशि का उपयोग महिला सुरक्षा बलों को बढ़ाने के साथ सार्वजनिक जगहों और ट्रांसपोर्ट में सीसीटीवी कैमरे लगाने में किया जा सकता है। वहीं महिलाओं को आशा है कि कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा और उन्हें कार्यस्थल पर अनुकूल वातावरण देने के लिए कुछ नीतियों की घोषणा भी वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को करना चाहिए। ख़ैर महिलाओं को वित्त मंत्री से काफ़ी आशाएं हैं, लेकिन अब यह तो बजट के बाद ही पता चल सकेगा कि महिलाओं की आशाओं पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कितना ख़रा उतर पाती हैं।