5जी टेक्नोलॉजी से नुकसान को लेकर सभी के अपने-अपने दावे!
Thursday - July 4, 2019 10:49 am ,
Category : WTN HINDI
5जी टेक्नोलॉजी से लोगों को सेहत की चिन्ता
जानिए क्या है 5जी टेक्नोलॉजी को लेकर जानकारों की ‘राय’
JULY 04 (WTN) – मोबाइल की 5जी टेक्नोलॉजी के बारे में तो आपने सुना ही होगा, और इसके लिए आप काफ़ी रोमांचिक भी होंगे कि 5जी टेक्नोलॉजी आने के बाद आख़िर किस तरह से मोबाइल की दुनिया बदल जाएगी। जैसा कि आप जानते हैं कि समय के साथ-साथ परिवर्तन होते रहते हैं। ऐसा ही कुछ हुआ है, और कुछ ही सालों के अन्दर टेक्नोलॉजी 2जी से लेकर 4जी पर आ गई। अब सभी बेसब्री से 5जी का इंतज़ार कर रहे हैं। यह सही है कि 5जी मानव की ज़िन्दगी में ऐसा परिवर्तन कर देगा, जिससे उसके काफ़ी काम सुविधाजनक तरीक़े से जल्द से जल्द हो जाएंगे। लेकिन 5जी टेक्नोलॉजी को लेकर कुछ आशंकाएं भी व्यक्त की जा रही हैं।
कहा जा रहा है कि 5जी टेक्नोलॉजी के आने के बाद सबसे बड़ी चिन्ता इंसान की सेहत को लेकर है। लेकिन इसके बारे में सभी की अलग-अलग राय है। आइये आज हम आपको बताते हैं कि 5जी टेक्नोलॉजी और मोबाइल टावर के बारे में क्या कुछ बातें निकलकर सामने आ रही हैं। कहा जा रहा है कि 5जी टेक्नोलॉजी के लिए जो टावर लगाए जाएंगे, उनके पास रेडिएशन की फ्रिक्वेंसी इतनी ज़्यादा होगी, जिसके साइड इफेक्ट इंसान की सेहत को लेकर काफ़ी नुकसानदेह हैं। हालांकि, इस बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भारत में सुरक्षा मानकों का सही तरह से पालन किया जाता है तो ऐसी किसी भी समस्या का सामना शायद ना करना पड़े।
वैसे 5जी टेक्नोलॉजी के आने के बाद उससे जुड़ी आशंकाओं के बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि वैसे तो रेडियो फ्रिक्वेंसी का कुछ ज़्यादा असर मानव शरीर पर नहीं पड़ेगा, लेकिन हां इससे मानव शरीर का तापमान ज़रूर बढ़ जाएगा। हालांकि, यह इतना नुकसान दायक नहीं है।
जहां एक तरफ़ 5जी टेक्नोलॉजी को लेकर इंसान की सेहत को लेकर कई तरह की आशंकाएं लोगों के मन में हैं, तो वही दूसरी तरफ़ दावा किया जा रहा है कि 5जी टेक्नोलॉजी से स्वास्थ्य सेवाओं को और भी बेहतर बनाया जा सकेगा। 5जी टेक्नोलॉजी के जानकारों का मानना है कि 5जी टेक्नोलॉजी से डरने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि यह इंसान की ज़िन्दगी को बदलकर रख देगा। विशेषज्ञों का दावा है कि 5जी टेक्नोलॉजी की मदद से रिमोट रोबोटिक सर्जरी करना बेहद आसान हो जाएगा।
वैसा कहा जा रहा है कि 5जी टेक्नोलॉजी आने से पक्षियों को सबसे ज़्यादा ख़तरा है। पर्यावरण मामलों के कई वैज्ञानिकों का कहना है कि 5जी टेक्नोलॉजी में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन का इस्तेमाल किया जाता है, जो कि बहुत तेज़ी से पक्षियों की स्किन को प्रभावित करता है। एक ख़बर के मुताबिक़ नीदरलैण्ड्स में 5जी सर्विस की टेस्टिंग के दौरान क़रीब 300 पक्षियों की मौत की बात सामने आई थी। हालांकि, यह साबित नहीं हो सका है कि इन पक्षियों की मौत 5जी सर्विस की टेस्टिंग के कारण ही हुई है।
वैसे कई बार यह दावा किया गया है कि मोबाइल टावर से निकलने वाली तरंगों से इंसान को कैंसर का ख़तरा रहता है। लेकिन अब इस आशंका को भी वैज्ञानिकों ने दूर कर दिया है। दरअसल मोबाइल टावर्स से लो-फ्रीक्वेंसी की तरंगे निकलती हैं, और इन तरंगों में इतनी ऊर्जा नहीं होती है कि ये किसी जीव के DNA मॉलिक्यूल्स को प्रभावित कर सकें, और उसके शरीर में कैंसर समेत दूसरी अन्य बीमारियों को जन्म दे सकें।
वैज्ञानिकों का दावा है कि इंसान के शरीर को आयोनाइज़िंग नेचर वाली फ्रिक्वेंसी ही नुकसान पहुंचाती हैं, जबकि मोबाइल से निकलने वाली फ्रिक्वेंसी नॉन आयोनाइज़िंग नेचर की होती है, और यह इंसानी शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाती हैं। जानकारों का मानना है कि फ़िलहाल अभी तक ऐसा कोई भी डेटा कलेक्ट नहीं हो सका है जिससे यह पता चल सके कि 5जी रेडिएशन की वजह से स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है।
वैसे सभी के अपने-अपने दावे हैं। किसी का तर्क है कि 5जी टेक्नोलॉजी और मोबाइल टावर्स से इंसान की सेहत और पशु-पक्षियों को काफ़ी ख़तरा है। तो वहीं जानकारों का मानना है कि इस तरह की आशंका के लिए कोई भी डेटा कलेक्ट नहीं हो सका हो, जिससे ठोस आधार पर कहा जा सके कि 5जी टेक्नोलॉजी और मोबाइल टावर्स कैंसर समेत दूसरी बीमारियों का कारण बन सकते हैं। ख़ैर यह तो आने वाला वक़्त ही बताएगा कि 5जी टेक्नोलॉजी इंसान के शरीर के लिए ख़तरनाक है कि नहीं।
JULY 04 (WTN) – मोबाइल की 5जी टेक्नोलॉजी के बारे में तो आपने सुना ही होगा, और इसके लिए आप काफ़ी रोमांचिक भी होंगे कि 5जी टेक्नोलॉजी आने के बाद आख़िर किस तरह से मोबाइल की दुनिया बदल जाएगी। जैसा कि आप जानते हैं कि समय के साथ-साथ परिवर्तन होते रहते हैं। ऐसा ही कुछ हुआ है, और कुछ ही सालों के अन्दर टेक्नोलॉजी 2जी से लेकर 4जी पर आ गई। अब सभी बेसब्री से 5जी का इंतज़ार कर रहे हैं। यह सही है कि 5जी मानव की ज़िन्दगी में ऐसा परिवर्तन कर देगा, जिससे उसके काफ़ी काम सुविधाजनक तरीक़े से जल्द से जल्द हो जाएंगे। लेकिन 5जी टेक्नोलॉजी को लेकर कुछ आशंकाएं भी व्यक्त की जा रही हैं।
कहा जा रहा है कि 5जी टेक्नोलॉजी के आने के बाद सबसे बड़ी चिन्ता इंसान की सेहत को लेकर है। लेकिन इसके बारे में सभी की अलग-अलग राय है। आइये आज हम आपको बताते हैं कि 5जी टेक्नोलॉजी और मोबाइल टावर के बारे में क्या कुछ बातें निकलकर सामने आ रही हैं। कहा जा रहा है कि 5जी टेक्नोलॉजी के लिए जो टावर लगाए जाएंगे, उनके पास रेडिएशन की फ्रिक्वेंसी इतनी ज़्यादा होगी, जिसके साइड इफेक्ट इंसान की सेहत को लेकर काफ़ी नुकसानदेह हैं। हालांकि, इस बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भारत में सुरक्षा मानकों का सही तरह से पालन किया जाता है तो ऐसी किसी भी समस्या का सामना शायद ना करना पड़े।
वैसे 5जी टेक्नोलॉजी के आने के बाद उससे जुड़ी आशंकाओं के बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि वैसे तो रेडियो फ्रिक्वेंसी का कुछ ज़्यादा असर मानव शरीर पर नहीं पड़ेगा, लेकिन हां इससे मानव शरीर का तापमान ज़रूर बढ़ जाएगा। हालांकि, यह इतना नुकसान दायक नहीं है।
जहां एक तरफ़ 5जी टेक्नोलॉजी को लेकर इंसान की सेहत को लेकर कई तरह की आशंकाएं लोगों के मन में हैं, तो वही दूसरी तरफ़ दावा किया जा रहा है कि 5जी टेक्नोलॉजी से स्वास्थ्य सेवाओं को और भी बेहतर बनाया जा सकेगा। 5जी टेक्नोलॉजी के जानकारों का मानना है कि 5जी टेक्नोलॉजी से डरने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि यह इंसान की ज़िन्दगी को बदलकर रख देगा। विशेषज्ञों का दावा है कि 5जी टेक्नोलॉजी की मदद से रिमोट रोबोटिक सर्जरी करना बेहद आसान हो जाएगा।
वैसा कहा जा रहा है कि 5जी टेक्नोलॉजी आने से पक्षियों को सबसे ज़्यादा ख़तरा है। पर्यावरण मामलों के कई वैज्ञानिकों का कहना है कि 5जी टेक्नोलॉजी में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन का इस्तेमाल किया जाता है, जो कि बहुत तेज़ी से पक्षियों की स्किन को प्रभावित करता है। एक ख़बर के मुताबिक़ नीदरलैण्ड्स में 5जी सर्विस की टेस्टिंग के दौरान क़रीब 300 पक्षियों की मौत की बात सामने आई थी। हालांकि, यह साबित नहीं हो सका है कि इन पक्षियों की मौत 5जी सर्विस की टेस्टिंग के कारण ही हुई है।
वैसे कई बार यह दावा किया गया है कि मोबाइल टावर से निकलने वाली तरंगों से इंसान को कैंसर का ख़तरा रहता है। लेकिन अब इस आशंका को भी वैज्ञानिकों ने दूर कर दिया है। दरअसल मोबाइल टावर्स से लो-फ्रीक्वेंसी की तरंगे निकलती हैं, और इन तरंगों में इतनी ऊर्जा नहीं होती है कि ये किसी जीव के DNA मॉलिक्यूल्स को प्रभावित कर सकें, और उसके शरीर में कैंसर समेत दूसरी अन्य बीमारियों को जन्म दे सकें।
वैज्ञानिकों का दावा है कि इंसान के शरीर को आयोनाइज़िंग नेचर वाली फ्रिक्वेंसी ही नुकसान पहुंचाती हैं, जबकि मोबाइल से निकलने वाली फ्रिक्वेंसी नॉन आयोनाइज़िंग नेचर की होती है, और यह इंसानी शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाती हैं। जानकारों का मानना है कि फ़िलहाल अभी तक ऐसा कोई भी डेटा कलेक्ट नहीं हो सका है जिससे यह पता चल सके कि 5जी रेडिएशन की वजह से स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है।
वैसे सभी के अपने-अपने दावे हैं। किसी का तर्क है कि 5जी टेक्नोलॉजी और मोबाइल टावर्स से इंसान की सेहत और पशु-पक्षियों को काफ़ी ख़तरा है। तो वहीं जानकारों का मानना है कि इस तरह की आशंका के लिए कोई भी डेटा कलेक्ट नहीं हो सका हो, जिससे ठोस आधार पर कहा जा सके कि 5जी टेक्नोलॉजी और मोबाइल टावर्स कैंसर समेत दूसरी बीमारियों का कारण बन सकते हैं। ख़ैर यह तो आने वाला वक़्त ही बताएगा कि 5जी टेक्नोलॉजी इंसान के शरीर के लिए ख़तरनाक है कि नहीं।