बजट से पहले मोदी सरकार ने थपथपाई खुद की पीठ!
Thursday - July 4, 2019 4:02 pm ,
Category : WTN HINDI
देश की अर्थव्यस्था का आईना होती है आर्थिक सर्वे रिपोर्ट
मोदी सरकार का दावा, देश की जीडीपी विकास दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान
JULY 04 (WTN) – मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले पूर्ण बजट पर सभी की निगाहें टिकी हुईं हैं। बजट से एक दिन पहले 4 जुलाई को देश की अर्थव्यवस्था की दिशा और दिशा को बताने वाला इकोनॉमिक सर्वे संसद में पेश किया गया। इस आर्थिक सर्वे के जरिये मोदी सरकार ने खुद की पीठ थपथपाने की कोशिश की है। इकोनॉमिक सर्वे में बताया गया है कि साल 2019-20 के लिए देश की GDP ग्रोथ रेट 7 प्रतिशत रह सकती है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विश्व की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का इकोनॉमिक सर्वे मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमणियम और उनकी टीम ने तैयार किया है। मोदी सरकार भारत को दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की कोशिशों में हैं, लेकिन कोशिशें कहां तक सफल होंगी यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन ज़रा नज़र डाल लाते हैं कि आख़िर आर्थिक सर्वे रिपोर्ट क्या कह रही है।
संसद में पेश आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि देश में पर्याप्त रूप से विदेशी मुद्रा भण्डार है, और आने वाले समय में भी इसमें कमी नहीं आएगी। सर्वे के मुताबिक़, 14 जून तक देश में कुल 42,220 करोड़ डॉलर का विदेशी मुद्रा भण्डार मौजूद था। लेकिन सरकार से सवाल है कि यदि ईरान-अमेरिका के बीच खाड़ी में युद्ध छिड़ा तो क्या इस विदेशी भण्डार का ज़्यादा से ज़्यादा उपयोग तेल ख़रीदी में किया जाएगा, जिससे देश की जनता पर तेल के दामों में बेहताशा वृद्धि का भार ना आए।
मोदी सरकार की नीतियों के आधार पर आर्थिक सर्वे के अनुसार, विदेशी निवेशकों का भरोसा भारत के घरेलू बाजार में बढ़ा है। आर्थिक सर्वे के मुताबिक़, वित्त वर्ष 2018-19 में नेट एफडीआई में 14.1 प्रतिशत की वुद्धि हुई है। यह सही है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में विदेशी निवेश बढ़ा है, लेकिन जिस अनुपात में निवेश बढ़ा है उस अनुपात में नौकरियां नहीं बढ़ी हैं। लोगों को उम्मीद थी कि देश में विदेशी निवेश बढ़ने से नौकरियों में वृद्धि होगी, लेकिन ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है।
एनपीए के बारे में भी आर्थिक सर्वे में बताया गया है। सर्वे के मुताबिक़ निजी बैंकों की तुलना में एनपीए की समस्या सरकारी बैंकों में ज़्यादा है। एनपीए ज़्यादा होने से इसका असर बैलेंसशीट पर असर पड़ा है। आर्थिक सर्वे में इस बात को स्वीकार किया गया है कि बैंकों में क्रेडिट ग्रोथ में तेज़ी देखी जा रही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकारी और सार्वजिनक बैंकों की एनपीए की समस्या सरकार के लिए काफ़ी परेशानी का कारण है।
विलफुल डिफॉल्टर्स और अन्य तरह के डिफॉल्टर्स के कारण ही इस तरह की समस्याओं का सामना बैंकों को करना पड़ रहा है। हालांकि, मोदी सरकार ने बैंकों की कर्ज़ अदायगी को लेकर नियमों में काफ़ी संशोधन किया है, लेकिन फ़िर भी एनपीए की समस्या से पार पाना मोदी सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती है।
आर्थिक सर्वे में इस बात का दावा किया है कि कंस्ट्रक्शन में तेजी आने से IIP ग्रोथ बेहतर हुई है। वहीं एमएसएमई सेक्टर को कर्ज़ देने की गति में भी वृद्धि हुई है। देश में कंस्ट्रक्शन सेक्टर में हालात पहले के काफ़ी अच्छे हुए हैं, जिसके कारण सीमेंट और स्टील की खपत बढ़ी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नोटबंद के बाद देश में कंस्ट्रक्शन सेक्टर में काफ़ी गिरावट देखी गई थी, अब जबकि इस क्षेत्र में वृद्धि देखी जा रही है तो यह मोदी सरकार के लिए राहत की ख़बर है। आर्थिक सर्वे में बताया गया है कि गैर बैंकिंग वित्तीय कम्पनियों की आर्थिक हालत बिगड़ने से ऑटो सेल्स की बिक्री में कमी देखी गई है, जो कि मोदी सरकार के लिए एक चिंता का कारण है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आर्थिक सर्वे को वित्त मंत्रालय का एक मुख्य दस्तावेज़ माना जाता है। देश की अर्थव्यवस्था के सभी पहलुओं का इसमें जिक्र करते हुए उससे सम्बन्धित आंकड़े इसमें पेश किए जाते हैं, और आर्थिक सर्वे के मुताबिक ही सरकार बजट बनाती है। सर्वे में अर्थव्यवस्था से सम्बन्धित सभी सेक्टर्स का इसमें जिक्र किया जाता है। आर्थिक सर्वे में सरकार के नीतिगत विचार तो दिखाई देते ही हैं, इसमें अर्थव्यवस्था के हर सेक्टर के हालातों के बारे में बताया जाता है और उनमें सुधार के उपायों के बारे में भी बताया जाता है। कहा जा सकता है कि आर्थिक सर्वे में बजट की झलक मिलती है। अब देखना होगा कि वित्त वर्ष 2019-20 में 7 प्रतिशत वृद्धि दर का मोदी सरकार का दावा कसौटी पर कितना ख़रा उतरता है।
JULY 04 (WTN) – मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले पूर्ण बजट पर सभी की निगाहें टिकी हुईं हैं। बजट से एक दिन पहले 4 जुलाई को देश की अर्थव्यवस्था की दिशा और दिशा को बताने वाला इकोनॉमिक सर्वे संसद में पेश किया गया। इस आर्थिक सर्वे के जरिये मोदी सरकार ने खुद की पीठ थपथपाने की कोशिश की है। इकोनॉमिक सर्वे में बताया गया है कि साल 2019-20 के लिए देश की GDP ग्रोथ रेट 7 प्रतिशत रह सकती है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विश्व की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का इकोनॉमिक सर्वे मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमणियम और उनकी टीम ने तैयार किया है। मोदी सरकार भारत को दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की कोशिशों में हैं, लेकिन कोशिशें कहां तक सफल होंगी यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन ज़रा नज़र डाल लाते हैं कि आख़िर आर्थिक सर्वे रिपोर्ट क्या कह रही है।
संसद में पेश आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि देश में पर्याप्त रूप से विदेशी मुद्रा भण्डार है, और आने वाले समय में भी इसमें कमी नहीं आएगी। सर्वे के मुताबिक़, 14 जून तक देश में कुल 42,220 करोड़ डॉलर का विदेशी मुद्रा भण्डार मौजूद था। लेकिन सरकार से सवाल है कि यदि ईरान-अमेरिका के बीच खाड़ी में युद्ध छिड़ा तो क्या इस विदेशी भण्डार का ज़्यादा से ज़्यादा उपयोग तेल ख़रीदी में किया जाएगा, जिससे देश की जनता पर तेल के दामों में बेहताशा वृद्धि का भार ना आए।
मोदी सरकार की नीतियों के आधार पर आर्थिक सर्वे के अनुसार, विदेशी निवेशकों का भरोसा भारत के घरेलू बाजार में बढ़ा है। आर्थिक सर्वे के मुताबिक़, वित्त वर्ष 2018-19 में नेट एफडीआई में 14.1 प्रतिशत की वुद्धि हुई है। यह सही है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में विदेशी निवेश बढ़ा है, लेकिन जिस अनुपात में निवेश बढ़ा है उस अनुपात में नौकरियां नहीं बढ़ी हैं। लोगों को उम्मीद थी कि देश में विदेशी निवेश बढ़ने से नौकरियों में वृद्धि होगी, लेकिन ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है।
एनपीए के बारे में भी आर्थिक सर्वे में बताया गया है। सर्वे के मुताबिक़ निजी बैंकों की तुलना में एनपीए की समस्या सरकारी बैंकों में ज़्यादा है। एनपीए ज़्यादा होने से इसका असर बैलेंसशीट पर असर पड़ा है। आर्थिक सर्वे में इस बात को स्वीकार किया गया है कि बैंकों में क्रेडिट ग्रोथ में तेज़ी देखी जा रही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकारी और सार्वजिनक बैंकों की एनपीए की समस्या सरकार के लिए काफ़ी परेशानी का कारण है।
विलफुल डिफॉल्टर्स और अन्य तरह के डिफॉल्टर्स के कारण ही इस तरह की समस्याओं का सामना बैंकों को करना पड़ रहा है। हालांकि, मोदी सरकार ने बैंकों की कर्ज़ अदायगी को लेकर नियमों में काफ़ी संशोधन किया है, लेकिन फ़िर भी एनपीए की समस्या से पार पाना मोदी सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती है।
आर्थिक सर्वे में इस बात का दावा किया है कि कंस्ट्रक्शन में तेजी आने से IIP ग्रोथ बेहतर हुई है। वहीं एमएसएमई सेक्टर को कर्ज़ देने की गति में भी वृद्धि हुई है। देश में कंस्ट्रक्शन सेक्टर में हालात पहले के काफ़ी अच्छे हुए हैं, जिसके कारण सीमेंट और स्टील की खपत बढ़ी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नोटबंद के बाद देश में कंस्ट्रक्शन सेक्टर में काफ़ी गिरावट देखी गई थी, अब जबकि इस क्षेत्र में वृद्धि देखी जा रही है तो यह मोदी सरकार के लिए राहत की ख़बर है। आर्थिक सर्वे में बताया गया है कि गैर बैंकिंग वित्तीय कम्पनियों की आर्थिक हालत बिगड़ने से ऑटो सेल्स की बिक्री में कमी देखी गई है, जो कि मोदी सरकार के लिए एक चिंता का कारण है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आर्थिक सर्वे को वित्त मंत्रालय का एक मुख्य दस्तावेज़ माना जाता है। देश की अर्थव्यवस्था के सभी पहलुओं का इसमें जिक्र करते हुए उससे सम्बन्धित आंकड़े इसमें पेश किए जाते हैं, और आर्थिक सर्वे के मुताबिक ही सरकार बजट बनाती है। सर्वे में अर्थव्यवस्था से सम्बन्धित सभी सेक्टर्स का इसमें जिक्र किया जाता है। आर्थिक सर्वे में सरकार के नीतिगत विचार तो दिखाई देते ही हैं, इसमें अर्थव्यवस्था के हर सेक्टर के हालातों के बारे में बताया जाता है और उनमें सुधार के उपायों के बारे में भी बताया जाता है। कहा जा सकता है कि आर्थिक सर्वे में बजट की झलक मिलती है। अब देखना होगा कि वित्त वर्ष 2019-20 में 7 प्रतिशत वृद्धि दर का मोदी सरकार का दावा कसौटी पर कितना ख़रा उतरता है।