मकान मालिकों की रोकटोक से मिलेगी आज़ादी; मोदी सरकार आ रही नया क़ानून!
Thursday - July 11, 2019 3:46 pm ,
Category : WTN HINDI
मोदी सरकार लाएगा आदर्श किराया क़ानून
अब किरायेदारों के ‘अधिकारों’ की ‘रक्षा’ करेगी मोदी सरकार
JULY 11 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि देश में लाखों लोग किराये के मकाने में रहते हैं। वहीं भारत में लाखों की तादात में दुकानें किराये पर लेकर चल रही हैं। लेकिन देखा गया है कि किरायेदारों की सुरक्षा और सुविधा के लिए लिए भारत में मौजूगा क़ानून काफ़ी पुराने हैं। इन क़ानूनों में किरायेदारों के अधिकारों का सही तरीक़े से संरक्षण नहीं हो पा रहा है।
किरायेदारों के अलावा मकान मालिकों के अधिकारों के लिए भी मौजूदा किराया क़ानून में कुछ ज़्यादा प्रावधान नहीं हैं। लेकिन लोकसभा चुनाव में प्रचण्ड बहुमत से जीत हासिल करने वाली मोदी सरकार अब किरायेदारों और मकान मालिकों दोनों की सुरक्षा और सुविधा के लिए क़ानून में बदलाव करने जा रही है।
जानकारी के मुताबिक़, देश में जल्द ही मकान और दुकान किराये पर लेना-देना और भी ज़्यादा आसान हो जाएगा। मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार मॉडल किराएदार अधिनियम अंतिम चरण में है। यदि सभी कुछ योजनाबद्ध तरीक़े से चलता रहा तो इस अधिनियम को अगस्त तक कैबिनेट से मंज़ूरी मिल सकती है। अपने बजट भाषण में देश की पहली महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि सरकार रेंटल हाउसिंग के बारे में आदर्श किराया क़ानून बनाएगी, क्योंकि रेंटल हाउसिंग से जुड़े मौजूदा क़ानून काफ़ी पुराने हैं और ये क़ानून सम्पत्ति मालिक और किरायेदार दोनों की परेशानियों को दूर करने में असमर्थ हैं।
यानी कि साफ़ है कि मोदी सरकार मकान मालिक और किराएदार के बीच के वित्तीय रिश्तों और अधिकारों को नए सिरे से परिभाषित करने जा रही है। कहा जा रहा है कि नये क़ानून में किरायेदारों की सुरक्षा और सुविधा के साथ-साथ सम्पत्ति मालिक के अधिकारों पर भी ध्यान दिया गया है। नए क़ानून के प्रावधानों में कहा गया है कि मकान मालिक तीन महीने के किराये से ज़्यादा सिक्योरिटी डिपॉजिट नहीं ले सकता है। वहीं यदि मकान मालिक घर ख़ाली कराना चाहता है तो उसे एक महीने में सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस करना होगी। वहीं मकान मालिक अब मकान के नवीनीकरण के बाद ही मकान का किराया बढ़ा सकता है।
किरायेदारों की निजता का ध्यान रखते हुए नये क़ानून में प्रावधान है कि किरायेदार के मकान में आने के पहले मकान मालिक को 24 घण्टे का नोटिस देना होगा। अब यदि किसी भी कारण से मकान मालिक और किरायेदार के बीच झगड़ा होता है तो इसके लिए स्पेशल किराया ट्रिब्यूनल बनाए जाएंगे, जहां पर कि इस तरह के मामलों की सुनवाई होगी।
दरअसल, मोदी सरकार का उद्देश्य मकान मालिकों की मनमर्जी पर रोक लगाना है। देखा गया है कि मकान मालिक मनमर्जी से किराया बढ़ा देते हैं। वहीं कई मकान मालिक किरायेदारों पर काफ़ी रोकटोक लगाते हैं, जिसके कारण किरायेदारों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में नया क़ानून बनने से किरायेदारों को काफ़ी सहूलियत मिल सकती है।
हालांकि, ऐसा नहीं है कि नये क़ानून में सिर्फ़ किरायेदारों का ही ध्यान रखा जाएगा। बल्कि नये क़ानून में मकान मालिकों के वित्तीय और सम्पत्ति के अधिकारों का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा, ताकि किरायेदारों के कारण उन्हें कोई भी हानि ना हो सके। नये क़ानून में किरायेदारों के रहने के भी कुछ नियम बना जाएंगे, जिससे मकान मालिक को किसी भी करह की परेशानी का सामना ना करना पड़े।
JULY 11 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि देश में लाखों लोग किराये के मकाने में रहते हैं। वहीं भारत में लाखों की तादात में दुकानें किराये पर लेकर चल रही हैं। लेकिन देखा गया है कि किरायेदारों की सुरक्षा और सुविधा के लिए लिए भारत में मौजूगा क़ानून काफ़ी पुराने हैं। इन क़ानूनों में किरायेदारों के अधिकारों का सही तरीक़े से संरक्षण नहीं हो पा रहा है।
किरायेदारों के अलावा मकान मालिकों के अधिकारों के लिए भी मौजूदा किराया क़ानून में कुछ ज़्यादा प्रावधान नहीं हैं। लेकिन लोकसभा चुनाव में प्रचण्ड बहुमत से जीत हासिल करने वाली मोदी सरकार अब किरायेदारों और मकान मालिकों दोनों की सुरक्षा और सुविधा के लिए क़ानून में बदलाव करने जा रही है।
जानकारी के मुताबिक़, देश में जल्द ही मकान और दुकान किराये पर लेना-देना और भी ज़्यादा आसान हो जाएगा। मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार मॉडल किराएदार अधिनियम अंतिम चरण में है। यदि सभी कुछ योजनाबद्ध तरीक़े से चलता रहा तो इस अधिनियम को अगस्त तक कैबिनेट से मंज़ूरी मिल सकती है। अपने बजट भाषण में देश की पहली महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि सरकार रेंटल हाउसिंग के बारे में आदर्श किराया क़ानून बनाएगी, क्योंकि रेंटल हाउसिंग से जुड़े मौजूदा क़ानून काफ़ी पुराने हैं और ये क़ानून सम्पत्ति मालिक और किरायेदार दोनों की परेशानियों को दूर करने में असमर्थ हैं।
यानी कि साफ़ है कि मोदी सरकार मकान मालिक और किराएदार के बीच के वित्तीय रिश्तों और अधिकारों को नए सिरे से परिभाषित करने जा रही है। कहा जा रहा है कि नये क़ानून में किरायेदारों की सुरक्षा और सुविधा के साथ-साथ सम्पत्ति मालिक के अधिकारों पर भी ध्यान दिया गया है। नए क़ानून के प्रावधानों में कहा गया है कि मकान मालिक तीन महीने के किराये से ज़्यादा सिक्योरिटी डिपॉजिट नहीं ले सकता है। वहीं यदि मकान मालिक घर ख़ाली कराना चाहता है तो उसे एक महीने में सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस करना होगी। वहीं मकान मालिक अब मकान के नवीनीकरण के बाद ही मकान का किराया बढ़ा सकता है।
किरायेदारों की निजता का ध्यान रखते हुए नये क़ानून में प्रावधान है कि किरायेदार के मकान में आने के पहले मकान मालिक को 24 घण्टे का नोटिस देना होगा। अब यदि किसी भी कारण से मकान मालिक और किरायेदार के बीच झगड़ा होता है तो इसके लिए स्पेशल किराया ट्रिब्यूनल बनाए जाएंगे, जहां पर कि इस तरह के मामलों की सुनवाई होगी।
दरअसल, मोदी सरकार का उद्देश्य मकान मालिकों की मनमर्जी पर रोक लगाना है। देखा गया है कि मकान मालिक मनमर्जी से किराया बढ़ा देते हैं। वहीं कई मकान मालिक किरायेदारों पर काफ़ी रोकटोक लगाते हैं, जिसके कारण किरायेदारों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में नया क़ानून बनने से किरायेदारों को काफ़ी सहूलियत मिल सकती है।
हालांकि, ऐसा नहीं है कि नये क़ानून में सिर्फ़ किरायेदारों का ही ध्यान रखा जाएगा। बल्कि नये क़ानून में मकान मालिकों के वित्तीय और सम्पत्ति के अधिकारों का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा, ताकि किरायेदारों के कारण उन्हें कोई भी हानि ना हो सके। नये क़ानून में किरायेदारों के रहने के भी कुछ नियम बना जाएंगे, जिससे मकान मालिक को किसी भी करह की परेशानी का सामना ना करना पड़े।