एलपीजी सिलेण्डर हादसे में बिना क्लेम किये नहीं मिलता है मुआवज़ा!
Saturday - July 20, 2019 12:37 pm ,
Category : WTN HINDI
गैस सिलेण्डर ब्लास्ट में है 50 लाख रूपये तक मुआवजे का प्रावधान
एलपीजी गैस सिलेण्डर के साथ उपभोक्ता को मिलता है मुफ़्त में 50 लाख रूपये तक का बीमा
JULY 20 (WTN) – आपके घर में रसोई गैस सिलेण्डर तो होगा ही। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रसोई गैस सिलेण्डर के साथ आपको 50 लाख रूपये तक का बीमा एकदम मुफ़्त में मिलता है? जी हां यदि घरेलू गैस सिलेण्डर, जिसे कि हम आम बोलचाल की भाषा में एलपीजी सिलेण्डर कहते हैं, यदि फट जाए और इससे कोई हादसा हो जाए तो पीड़ित परिवार को 50 लाख रूपये तक के मुआवज़े का प्रावधान है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में हर साल एलपीजी सिलेण्डर फटने की कम से कम 100 घटनाएं होती हैं। इनमें लोगों की मौत से लेकर घर में आग लगने जैसी घटनाएं सामने आती हैं। लेकिन एलपीजी सिलेण्डर फटने के बाद मिलने वाले मुआवाज़े के बारे में लोगों को जानकारी नहीं होती है, इसलिए सिलेण्डर फटने का मुआवजा पीड़ित या उसके परिवार को नहीं मिल पाता है।
एलपीजी सिलेण्डर फटने पर पीड़ितों को 50 लाख रूपये तक का मुआवाज़ा बीमा कम्पनियां देती हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस सबके लिए एलपीजी कम्पनियां बीमा कम्पनियों से पब्लिक लायबिलिटी पॉलिसी लेती हैं। एलपीजी सिलेण्डर फटने के बाद मिलने वाला बीमा थर्ड पार्टी इंश्योरेंस होता है। इस बीमा के लिए एलपीजी कम्पनियां हर साल बीमा कम्पनियों को प्रीमियम के तौर पर बहुत बड़ी रक़म देती हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एलपीजी सिलेण्डर बुकिंग कराते समय एलपीजी उपभोक्ताओं को किसी भी तरह का कोई भी पैसा इस बीमा के लिए नहीं देना होता है। एलपीजी सिलेण्डर फटने के बाद मिलने वाला मुआवज़ा पब्लिक लायबिसिटी पॉलिसी के अंतर्गत होने वाला बीमा होता है, जिसके तहत किसी व्यक्ति के नाम पर बीमा नहीं किया जाता है। इस तरह का बीमा उस एलपीजी उपभोक्ता और उसके परिवार के नाम पर होता है, जिसके साथ एलपीजी सिलेण्डर फटने के बाद कोई हादसा होता है।
एलपीजी सिलेण्डर फटने के बाद यदि बीमा कम्पनी मुआवज़ा नहीं देती है, या फ़िर कम मुआवज़ा देती है तो इस स्थिति में पीड़ित पक्ष, बीमा कम्पनी के ख़िलाफ़ अदालत में जा सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एलपीजी सिलेण्डर फटने के हादसे के बाद कोर्ट मुआवज़े की राशि पीड़ित की उम्र, आय और अन्य शर्तों के आधार पर तय करती है। जैसा कि आप जानते हैं कि एलपीजी सिलेण्डर फटने के बाद लोगों की मौत हो सकती है, आग लग सकती है या फ़िर घर को नुकसान हो सकता है। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए नुकसान के आंकलन के बाद मुआवज़ा दिया जाता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एलपीजी सिलेण्डर फटने के बाद बीमा कम्पनी मुआवज़े की राशि देती है। लेकिन एलपीजी सिलेण्डर फटने से होने वाले हादसे के बाद पीड़ित या उसके परिजनों को बीमा कम्पनी के पास क्लेम करना होता है। यदि पीड़ित पक्ष ने मुआवज़े के लिए क्लेम नहीं किया तो उसे इसका कोई भी मुआवज़ा नहीं मिलता है।
आपका जानना ज़रूरी है कि यदि एलपीजी सिलेण्डर में लीकेज होता है या फ़िर वह फटता है तो इसकी पूरी ज़िम्मेदारी डीलर और गैस कम्पनी की है। मार्केटिंग डिस्प्लिन गाइडलाइंस 2014 फॉर एलपीजी डिस्ट्रिब्यूशन के तहत यह तय है कि यदि एलपीजी सिलेण्डर डीलर ने डिफेक्टिव सिलेण्डर सप्लाई किया है तो वह अपनी ज़िम्मेदारी उपभोक्ता पर नहीं डाल सकता है। गाइडलाइंस में कहा गया है कि एलपीजी सिलेण्डर की डिलेवरी से पहले सिलेण्डर को अच्छी तरह से चेक करना डीलर की ज़िम्मेदारी है।
एलपीजी सिलेण्डर फटने की स्थिति में बीमा पाने के लिए सबसे पहले पीड़ित या उसके परिजनों को इस दुर्घटना की सूचना तुरन्त ही पुलिस स्टेशन और एलपीजी डिस्ट्रिब्यूटर को देना चाहिए। सिलेण्डर फटने के बाद एफआईआर की कॉपी, घायलों के इलाज के पर्चे, मेडिकल बिल के साथ यदि दुर्घटना में किसी की मौत हुई है तो पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाणपत्र को सम्भालकर रखें।
हादसे के बाद पीड़ित या उसके परिजनों को मिलने वाला मुआवज़ा वितरक के जरिये हासिल होता है। बीमा दावे की राशि को बीमा कम्पनी सम्बन्धित गैस डीलर के पास जमा कराती है, जिसके बाद यह राशि पीड़ित या उसके परिजनों को मिलती है। तो हमारी आपको सलाह है कि एलपीजी सिलेण्डर का सावधानी से प्रयोग करें,और यदि गैस सिलेण्डर फटने का हादसा होता है तो हक़ के साथ मुआवजे के लिए बीमा कम्पनी के पास क्लेम कीजिए।
JULY 20 (WTN) – आपके घर में रसोई गैस सिलेण्डर तो होगा ही। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रसोई गैस सिलेण्डर के साथ आपको 50 लाख रूपये तक का बीमा एकदम मुफ़्त में मिलता है? जी हां यदि घरेलू गैस सिलेण्डर, जिसे कि हम आम बोलचाल की भाषा में एलपीजी सिलेण्डर कहते हैं, यदि फट जाए और इससे कोई हादसा हो जाए तो पीड़ित परिवार को 50 लाख रूपये तक के मुआवज़े का प्रावधान है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में हर साल एलपीजी सिलेण्डर फटने की कम से कम 100 घटनाएं होती हैं। इनमें लोगों की मौत से लेकर घर में आग लगने जैसी घटनाएं सामने आती हैं। लेकिन एलपीजी सिलेण्डर फटने के बाद मिलने वाले मुआवाज़े के बारे में लोगों को जानकारी नहीं होती है, इसलिए सिलेण्डर फटने का मुआवजा पीड़ित या उसके परिवार को नहीं मिल पाता है।
एलपीजी सिलेण्डर फटने पर पीड़ितों को 50 लाख रूपये तक का मुआवाज़ा बीमा कम्पनियां देती हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस सबके लिए एलपीजी कम्पनियां बीमा कम्पनियों से पब्लिक लायबिलिटी पॉलिसी लेती हैं। एलपीजी सिलेण्डर फटने के बाद मिलने वाला बीमा थर्ड पार्टी इंश्योरेंस होता है। इस बीमा के लिए एलपीजी कम्पनियां हर साल बीमा कम्पनियों को प्रीमियम के तौर पर बहुत बड़ी रक़म देती हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एलपीजी सिलेण्डर बुकिंग कराते समय एलपीजी उपभोक्ताओं को किसी भी तरह का कोई भी पैसा इस बीमा के लिए नहीं देना होता है। एलपीजी सिलेण्डर फटने के बाद मिलने वाला मुआवज़ा पब्लिक लायबिसिटी पॉलिसी के अंतर्गत होने वाला बीमा होता है, जिसके तहत किसी व्यक्ति के नाम पर बीमा नहीं किया जाता है। इस तरह का बीमा उस एलपीजी उपभोक्ता और उसके परिवार के नाम पर होता है, जिसके साथ एलपीजी सिलेण्डर फटने के बाद कोई हादसा होता है।
एलपीजी सिलेण्डर फटने के बाद यदि बीमा कम्पनी मुआवज़ा नहीं देती है, या फ़िर कम मुआवज़ा देती है तो इस स्थिति में पीड़ित पक्ष, बीमा कम्पनी के ख़िलाफ़ अदालत में जा सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एलपीजी सिलेण्डर फटने के हादसे के बाद कोर्ट मुआवज़े की राशि पीड़ित की उम्र, आय और अन्य शर्तों के आधार पर तय करती है। जैसा कि आप जानते हैं कि एलपीजी सिलेण्डर फटने के बाद लोगों की मौत हो सकती है, आग लग सकती है या फ़िर घर को नुकसान हो सकता है। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए नुकसान के आंकलन के बाद मुआवज़ा दिया जाता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एलपीजी सिलेण्डर फटने के बाद बीमा कम्पनी मुआवज़े की राशि देती है। लेकिन एलपीजी सिलेण्डर फटने से होने वाले हादसे के बाद पीड़ित या उसके परिजनों को बीमा कम्पनी के पास क्लेम करना होता है। यदि पीड़ित पक्ष ने मुआवज़े के लिए क्लेम नहीं किया तो उसे इसका कोई भी मुआवज़ा नहीं मिलता है।
आपका जानना ज़रूरी है कि यदि एलपीजी सिलेण्डर में लीकेज होता है या फ़िर वह फटता है तो इसकी पूरी ज़िम्मेदारी डीलर और गैस कम्पनी की है। मार्केटिंग डिस्प्लिन गाइडलाइंस 2014 फॉर एलपीजी डिस्ट्रिब्यूशन के तहत यह तय है कि यदि एलपीजी सिलेण्डर डीलर ने डिफेक्टिव सिलेण्डर सप्लाई किया है तो वह अपनी ज़िम्मेदारी उपभोक्ता पर नहीं डाल सकता है। गाइडलाइंस में कहा गया है कि एलपीजी सिलेण्डर की डिलेवरी से पहले सिलेण्डर को अच्छी तरह से चेक करना डीलर की ज़िम्मेदारी है।
एलपीजी सिलेण्डर फटने की स्थिति में बीमा पाने के लिए सबसे पहले पीड़ित या उसके परिजनों को इस दुर्घटना की सूचना तुरन्त ही पुलिस स्टेशन और एलपीजी डिस्ट्रिब्यूटर को देना चाहिए। सिलेण्डर फटने के बाद एफआईआर की कॉपी, घायलों के इलाज के पर्चे, मेडिकल बिल के साथ यदि दुर्घटना में किसी की मौत हुई है तो पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाणपत्र को सम्भालकर रखें।
हादसे के बाद पीड़ित या उसके परिजनों को मिलने वाला मुआवज़ा वितरक के जरिये हासिल होता है। बीमा दावे की राशि को बीमा कम्पनी सम्बन्धित गैस डीलर के पास जमा कराती है, जिसके बाद यह राशि पीड़ित या उसके परिजनों को मिलती है। तो हमारी आपको सलाह है कि एलपीजी सिलेण्डर का सावधानी से प्रयोग करें,और यदि गैस सिलेण्डर फटने का हादसा होता है तो हक़ के साथ मुआवजे के लिए बीमा कम्पनी के पास क्लेम कीजिए।