सावधान! पोर्न वेबसाइट्स पर आपकी एक्टिविटी हो रही है ट्रैक
Saturday - July 20, 2019 3:43 pm ,
Category : WTN HINDI
एक स्टडी का दावा; यूज़र्स की पोर्न वेबसाइट्स एक्टिविटी की जा रही है थर्ड पार्टी को लीक
गूगल, फेसबुक और ओरेकल क्लाउड पर लगा ‘जासूसी’ का आरोप
JULY 20 (WTN) – यदि आप पोर्न वेबसाइट्स को देखने के शौकीन हैं तो ज़रा सावधान रहें! हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि हो सकता है कि आप जिन पोर्न वेबसाइट्स को देख रहे हैं उन्हें ट्रैक किया जा रहा हो। यह पढ़कर आप चौक गये होंगे कि आख़िर यह पूरा मसला क्या है। दरअसल, माइक्रोसॉफ्ट, कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया द्वारा की गई एक स्टडी का दावा है कि गूगल, फेसबुक और ओरेकल क्लाउड जैसी कम्पनियां यूज़र्स के द्वारा देखी गई पोर्न साइट्स को गुपचुप तरीक़े से ट्रैक करती हैं।
इस स्टडी का दावा है कि यदि कोई इंटरनेट यूज़र Incognito मोड में भी पोर्न साइट्स देखता है तो भी उसकी पूरी ऑनलाइन एक्टिविटी को ट्रैक किया जा सकता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि Incognito मोड में सिर्फ़ आपकी सर्च हिस्ट्री आपकी डिवाइस में सेव नहीं होती है, लेकिन इसे ट्रैक किया जा सकता है।
स्टडी में 22,484 पोर्न वेबसाइट्स की जांच की गई, जिसके बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि इनमें से 93 प्रतिशत पोर्न वेबसाइट्स को ट्रैक किया जाता है। इतना ही नहीं इन पोर्न वेबसाइट्स को ट्रैक करने के बाद इस डेटा को थर्ड पार्टी को लीक कर दिया जाता है। पोर्न वेबसाइट्स का अध्ययन करने वाली स्टडी का दावा है कि केवल 17 प्रतिशत पोर्न वेबसाइट्स ही ऐसी हैं जो कि एनक्रिप्शन का इस्तेमाल करती हैं।
पोर्न वेबसाइट्स की स्टडी में गूगल को नम्बर वन थर्ड पार्टी कम्पनी माना गया है, जो कि यूज़र्स की पोर्न वेबसाइट्स पर एक्टिविटी को ट्रैक करती है। रिसर्च के मुताबिक़, गूगल या इसकी सब्सिडियरी एडवरटाइजिंग प्लेटफॉर्म, डबल क्लिक ने 74 प्रतिशत पोर्न वेबसाइट्स को ट्रैक किया है। वहीं ओरेकल क्लाउड ने 24 प्रतिशत और फेसबुक ने 10 प्रतिशत पोर्न वेबसाइट्स को ट्रैक किया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अधिकतर पॉर्नोग्राफिक कम्पनियां यूरोप में बेस्ड हैं।
हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि गूगल, फेसबुक और ओरेकेल क्लाउड, पोर्न वेबसाइट्स के डेटा को ट्रैक करने के बाद उसका क्या करती हैं। पर इस बारे में रिसर्चर्स का कहना है कि गूगल और फेसबुक जैसे कम्पनियां पोर्न वेबसाइट्स से लिए गये यूज़र डेटा का इस्तेमाल एडवरटाइजिंग प्रोफाइल डिवेलप करने के लिए इस्तेमाल करती होंगी। हालांकि, इसका सिर्फ़ अनुमान लगाया गया है और यह अनुमान सही साबित हो यह कहा नहीं जा सकता है।
यूज़र्स की पोर्न वेबसाइट्स पर एक्टिविटी को ट्रैक करने के आरोपों पर गूगल ने अपनी सफ़ाई दी है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, इन आरोपों के बारे में गूगल का कहना है, “हम यूज़र्स की यौन इच्छा या ऑनलाइन एक्टिविटी के आधार पर किसी भी प्रकार के एडवरटाइजिंग प्रोफाइल को डिवेलप करने में यकीन नहीं रखते हैं। हम किसी भी एडल्ट कंटेंट वाली वेबसाइट्स पर गूगल ऐड्स दिखाने के ख़िलाफ़ हैं।”
वहीं यूज़र्स की पोर्न वेबसाइट्स पर एक्टिविटी को ट्रैक करने के आरोपों पर फेसबुक ने भी गूगल की तरह ही जवाब दिया है। फेसबुक ने अपनी स्पष्टीकरण में साफ़ कहा है कि बिज़नेस उपयोग के लिए एडल्ट वेबसाइट को ट्रैक करने की इजाज़त फेसबुक कम्पनी नहीं देती है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मोबाइल क्रांन्ति होने के बाद से पोर्न वेबसाइट्स पर हिट्स की संख्या अरबों में पहुंच गई है। साल 2017 में पोर्नहब वेबसाइट पर 28.5 अरब विज़िट किए गए। यानी कि हर सेकेण्ड में 50 हज़ार यूज़र्स ने पोर्नहब वेबसाइट पर जाकर पोर्न सर्च किया। इस समय इंटरनेट पर हज़ारों की तादात में पोर्न वेबसाइट्स हैं, जिन पर करोड़ों की तादात में लोग रोज पोर्न कंटेंट देखते हैं। भारत जैसे देश में भी धीरे-धीरे पोर्न वेबसाइट्स देखने वालों की तादात बढ़ रही है। एक अध्ययन के मुताबिक़ भारत में पोर्न वेबसाइट्स देखने के मामले में पुरूष और महिलाएं दोनों ही सक्रिय हैं।
दिनों-दिनों पोर्न वेबसाइट्स पर विजिट बढ़ती ही जा रही है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि हर महीने नेटफ्लिक्स, अमेज़न और ट्विटर पर कुल मिलाकर जितने लोग विज़िट नहीं करते हैं, उससे कहीं ज़्यादा लोग पोर्न वेबसाइट्स पर विज़िट करते हैं। ख़ैर माइक्रोसॉफ्ट, कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया का दावा है कि गूगल, फेसबुक और ओरेकल क्लाउड जैसी कम्पनियां यूज़र्स की पोर्न वेबसाइट्स पर एक्टिविटी को ट्रैक कर रही हैं, तो वहीं दूसरी तरफ गूगल और फेसबुक ने अध्ययन के दावों को ख़ारिज किया है।
लेकिन इस पूरे मामले में जानकारों की राय है कि यूज़र्स की कोई भी ऑनलाइन एक्टिविटी सुरक्षित नहीं है। यूज़र्स की ऑनलाइन एक्टिविटी हैक, ट्रैक या फ़िर रिकॉर्ड हो सकती है। ऐसे में यह सब यूज़र्स के बुद्धि विवेक पर निर्भर करता है कि वो इंटरनेट पर क्या देखता है और क्या नहीं।
JULY 20 (WTN) – यदि आप पोर्न वेबसाइट्स को देखने के शौकीन हैं तो ज़रा सावधान रहें! हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि हो सकता है कि आप जिन पोर्न वेबसाइट्स को देख रहे हैं उन्हें ट्रैक किया जा रहा हो। यह पढ़कर आप चौक गये होंगे कि आख़िर यह पूरा मसला क्या है। दरअसल, माइक्रोसॉफ्ट, कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया द्वारा की गई एक स्टडी का दावा है कि गूगल, फेसबुक और ओरेकल क्लाउड जैसी कम्पनियां यूज़र्स के द्वारा देखी गई पोर्न साइट्स को गुपचुप तरीक़े से ट्रैक करती हैं।
इस स्टडी का दावा है कि यदि कोई इंटरनेट यूज़र Incognito मोड में भी पोर्न साइट्स देखता है तो भी उसकी पूरी ऑनलाइन एक्टिविटी को ट्रैक किया जा सकता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि Incognito मोड में सिर्फ़ आपकी सर्च हिस्ट्री आपकी डिवाइस में सेव नहीं होती है, लेकिन इसे ट्रैक किया जा सकता है।
स्टडी में 22,484 पोर्न वेबसाइट्स की जांच की गई, जिसके बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि इनमें से 93 प्रतिशत पोर्न वेबसाइट्स को ट्रैक किया जाता है। इतना ही नहीं इन पोर्न वेबसाइट्स को ट्रैक करने के बाद इस डेटा को थर्ड पार्टी को लीक कर दिया जाता है। पोर्न वेबसाइट्स का अध्ययन करने वाली स्टडी का दावा है कि केवल 17 प्रतिशत पोर्न वेबसाइट्स ही ऐसी हैं जो कि एनक्रिप्शन का इस्तेमाल करती हैं।
पोर्न वेबसाइट्स की स्टडी में गूगल को नम्बर वन थर्ड पार्टी कम्पनी माना गया है, जो कि यूज़र्स की पोर्न वेबसाइट्स पर एक्टिविटी को ट्रैक करती है। रिसर्च के मुताबिक़, गूगल या इसकी सब्सिडियरी एडवरटाइजिंग प्लेटफॉर्म, डबल क्लिक ने 74 प्रतिशत पोर्न वेबसाइट्स को ट्रैक किया है। वहीं ओरेकल क्लाउड ने 24 प्रतिशत और फेसबुक ने 10 प्रतिशत पोर्न वेबसाइट्स को ट्रैक किया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अधिकतर पॉर्नोग्राफिक कम्पनियां यूरोप में बेस्ड हैं।
हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि गूगल, फेसबुक और ओरेकेल क्लाउड, पोर्न वेबसाइट्स के डेटा को ट्रैक करने के बाद उसका क्या करती हैं। पर इस बारे में रिसर्चर्स का कहना है कि गूगल और फेसबुक जैसे कम्पनियां पोर्न वेबसाइट्स से लिए गये यूज़र डेटा का इस्तेमाल एडवरटाइजिंग प्रोफाइल डिवेलप करने के लिए इस्तेमाल करती होंगी। हालांकि, इसका सिर्फ़ अनुमान लगाया गया है और यह अनुमान सही साबित हो यह कहा नहीं जा सकता है।
यूज़र्स की पोर्न वेबसाइट्स पर एक्टिविटी को ट्रैक करने के आरोपों पर गूगल ने अपनी सफ़ाई दी है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, इन आरोपों के बारे में गूगल का कहना है, “हम यूज़र्स की यौन इच्छा या ऑनलाइन एक्टिविटी के आधार पर किसी भी प्रकार के एडवरटाइजिंग प्रोफाइल को डिवेलप करने में यकीन नहीं रखते हैं। हम किसी भी एडल्ट कंटेंट वाली वेबसाइट्स पर गूगल ऐड्स दिखाने के ख़िलाफ़ हैं।”
वहीं यूज़र्स की पोर्न वेबसाइट्स पर एक्टिविटी को ट्रैक करने के आरोपों पर फेसबुक ने भी गूगल की तरह ही जवाब दिया है। फेसबुक ने अपनी स्पष्टीकरण में साफ़ कहा है कि बिज़नेस उपयोग के लिए एडल्ट वेबसाइट को ट्रैक करने की इजाज़त फेसबुक कम्पनी नहीं देती है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मोबाइल क्रांन्ति होने के बाद से पोर्न वेबसाइट्स पर हिट्स की संख्या अरबों में पहुंच गई है। साल 2017 में पोर्नहब वेबसाइट पर 28.5 अरब विज़िट किए गए। यानी कि हर सेकेण्ड में 50 हज़ार यूज़र्स ने पोर्नहब वेबसाइट पर जाकर पोर्न सर्च किया। इस समय इंटरनेट पर हज़ारों की तादात में पोर्न वेबसाइट्स हैं, जिन पर करोड़ों की तादात में लोग रोज पोर्न कंटेंट देखते हैं। भारत जैसे देश में भी धीरे-धीरे पोर्न वेबसाइट्स देखने वालों की तादात बढ़ रही है। एक अध्ययन के मुताबिक़ भारत में पोर्न वेबसाइट्स देखने के मामले में पुरूष और महिलाएं दोनों ही सक्रिय हैं।
दिनों-दिनों पोर्न वेबसाइट्स पर विजिट बढ़ती ही जा रही है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि हर महीने नेटफ्लिक्स, अमेज़न और ट्विटर पर कुल मिलाकर जितने लोग विज़िट नहीं करते हैं, उससे कहीं ज़्यादा लोग पोर्न वेबसाइट्स पर विज़िट करते हैं। ख़ैर माइक्रोसॉफ्ट, कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया का दावा है कि गूगल, फेसबुक और ओरेकल क्लाउड जैसी कम्पनियां यूज़र्स की पोर्न वेबसाइट्स पर एक्टिविटी को ट्रैक कर रही हैं, तो वहीं दूसरी तरफ गूगल और फेसबुक ने अध्ययन के दावों को ख़ारिज किया है।
लेकिन इस पूरे मामले में जानकारों की राय है कि यूज़र्स की कोई भी ऑनलाइन एक्टिविटी सुरक्षित नहीं है। यूज़र्स की ऑनलाइन एक्टिविटी हैक, ट्रैक या फ़िर रिकॉर्ड हो सकती है। ऐसे में यह सब यूज़र्स के बुद्धि विवेक पर निर्भर करता है कि वो इंटरनेट पर क्या देखता है और क्या नहीं।