जानिए क्यों है पाकिस्तान में आईएमएफ के प्रति नाराज़गी?
Wednesday - July 24, 2019 10:42 am ,
Category : WTN HINDI
पाकिस्तानी जनता पर और भी बढ़ेगा टैक्स बोझ
आईएमएफ के बेलआउट पैकेज की शर्तों को पाकिस्तानी जनता ने बताया ‘चालबाज़ी’!
JULY 24 (WTN) – भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की खस्ता हालत किसी से छिपी नहीं है। आरोप है कि जब से इमरान ख़ान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने हैं, तभी से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कमज़ोर होती चली गई है। पिछले कुछ समय से अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले पाकिस्तानी रुपया एशिया की सबसे कमज़ोर करेंसी साबित हुआ है। इन सब के बीच इसी महीने की 3 तारीख़ को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने पाकिस्तान को 6 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज देकर पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था को थोड़ा बहुत सहारा तो दिया है, लेकिन आईएमएफ से मिले बेलआउट पैकेज के बाद पाकिस्तान की जनता में भारी नाराज़गी है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह पाकिस्तान का यह आईएमएफ से 13वां बेलआउट पैकेज है। 39 महीनों के टाइम पीरियड में बेलआउट पैकेज के समझौते के दौरान, आईएमएफ हर तीन महीने में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की प्रगति की समीक्षा करेगा। आईएमएफ ने पाकिस्तान को बड़ी ही कड़ी शर्तों पर बेलआउट दिया है, जिसमें टैक्स कलेक्शन बढ़ाने की एक बड़ी शर्त शामिल है। आईएमएफ का मानना है कि टैक्स कलेक्शन बढ़ने से पाकिस्तान विदेशी कर्ज़ के भुगतान कर सकेगा और इससे विदेशी मुद्रा भण्डार भी बढ़ेगा।
आईएमएफ ने पाकिस्तान को बेलआउट पैकेज दिया तो ज़रूर है, लेकिन समझौते की अवधि में ही पाकिस्तान को 37.35 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज चुकाने को भी कहा है। इसमें 14.68 अरब डॉलर का कर्ज़ केवल बीजिंग का ही है, जिसमें से ज़्यादातर चाइना-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के कारण से है। जैसा कि हमने आपको बताया कि आईएमएफ ने टैक्स लक्ष्य को बढ़ाने की प्रमुख शर्त पर ही पाकिस्तान को बेलआउट पैकेज दिया है, जिसके बाद पाकिस्तान केन्द्रीय राजस्व बोर्ड ने इस बार टैक्स कलेक्शन का लक्ष्य 3.94 ट्रिलियन पाकिस्तान रुपये से बढ़ाकर 5.5 ट्रिलियन कर दिया है।
कर्ज़ में डूबी पाकिस्तान सरकार ने आईएमएफ के दिशा निर्देशों के अनुसार टैक्स कलेक्शन बढ़ाना शुरू भी कर दिया है, जिसके कारण पेट्रोल और बिज़ली की दरों में वृद्धि की गई है। कहा जा रहा है कि अगले महीने पेट्रोल और बिजली के दामों में और भी वृद्धि हो सकती है। टैक्स कलेक्शन बढ़ाने के साथ-साथ आईएमएफ ने पाकिस्तान से कहा है कि वो अपने करेंसी रुपये की क़ीमत को मुक्त बाज़ार के अनुसार रखे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तानी रूपये की क़ीमत दिसम्बर 2017 के बाद से क़रीब आधे से ज़्यादा कम हो चुकी है। वहीं इस साल अप्रैल में पाकिस्तान में मुद्रास्फीति की दर 9,4 प्रतिशत थी, जो कि आईएमएफ के अनुसार 13 प्रतिशत से ऊपर पहुंच सकती है।
पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार जिस तरह से पाकिस्तानी जनता पर टैक्स का बोझ बढ़ा रही है, उससे पाकिस्तान की जनता में भारी आक्रोश है। कुछ दिनों पहले पाकिस्तान के व्यापारियों ने देशव्यापी हड़ताल की थी और इमरान ख़ान सरकार द्वारा लगाए जा रहे भारी-भरकम टैक्स का विरोध किया था। व्यापारियों के अलावा नौकरीपेशा लोगों में भी इमरान ख़ान सरकार के प्रति भारी आक्रोश है।
पाकिस्तान की जनता का कहना है कि आईएमएफ की मांग के हिसाब से टैक्स भरना पाकिस्तान की जनता की क्षमता के बाहर है। पाकिस्तान में इन दिनों इस बात की चर्चा है कि आईएमएफ ने पाकिस्तान में प्रमुख वित्त अधिकारियों के पदों पर ‘अपने लोगों’ की नियुक्तियां कराई हैं, और इन लोगों की नियुक्ति के लिए आईएमएफ ने पाकिस्तानी सरकार पर दबाव भी डाला था।
पाकिस्तान की खस्ता आर्थिक हालत पर पाकिस्तान के अर्थशास्त्रियों और पत्रकारों की राय भी पाकिस्तान के इमरान ख़ान सरकार से जुदा है। पाकिस्तान के अर्थशास्त्री, आईएमएफ के पाकिस्तानी मुद्रा की क़ीमत तय करने के तरीक़े पर सवाल खड़े कर रहे हैं। उनके मुताबिक़ पाकिस्तान में मुद्रा बाज़ार की हालत चिंताजनक है और मुद्रा को पटरी पर लाने के लिए अमेरिकी डॉलर्स से रुपया ख़रीदना पड़ेगा। लेकिन इमरान ख़ान सरकार रुपये को मुक्त छोड़ना चाहती है, यदि ऐसा किया गया तो दो दिनों के अन्दर ही पाकिस्तान का रुपया तबाह हो जाएगा।
जैसा कि आप जानते हैं कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की दशा और दिशा तय करने में वहां की सेना की एक बहुत बड़ी भूमिका रहती है। देखा गया है कि पाकिस्तान की सरकारें अर्थव्यवस्था को सम्भालने में सक्षम नहीं हैं, इसलिए समय-समय पर पाकिस्तान, आईएमएफ के पास वित्तीय सहायता के लिए पहुंच जाता है। पाकिस्तान की खस्ता आर्थिक हालत के लिए वहां की सेना और कर्ज़ का बोझ दोनों ही ज़िम्मेदार हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान के सालाना बजट का क़रीब आधा हिस्सा सेना और कर्ज़ अदायगी में ही ख़र्च हो जाता है।
पाकिस्तानी के लोगों के मन में धीरे-धीरे यह धारणा बनती जा रही है कि आईएमएफ पाकिस्तान से कुछ भू-राजनीतिक हितों की पूर्ति करवाना चाहता है। लोगों का मानना है कि आईएमएफ का बेलआउट पैकेज पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए एक हथकड़ी की तरह है। लोगों में इस बात की भी नाराज़गी है कि आईएमएफ किसी भी तरह से पाकिस्तान की समस्याएं सुलझाने की कोशिश नहीं कर रहा है। वहीं अर्थशास्त्रियों का कहना है कि आईएमएफ के बेलआउट पैकेज में कोई सुधार कार्यक्रम नहीं है, बल्कि आईएमएफ ने एक तरह के पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बंधक सा बना लिया है।
कुछ लोगों का आरोप है कि आईएमएफ बेलआउट पैकेज का इस्तेमाल करके पाकिस्तान में अमेरिकी हितों की पूर्ति करने की कोशिश कर रहा है। यह बात इस आधार पर कही जा रही है कि इसी साल के विकीलीक्स के एक दस्तावेज़ में दावा किया गया था कि अमेरिका, आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक का इस्तेमाल अपने क्षेत्रीय हितों को पूरा करने में करता है।
स्पष्ट है कि पाकिस्तान की जनता में आईएमएफ के प्रति ख़ासी नाराज़गी है। पाकिस्तानी लोगों का आरोप है कि आईएमएफ ने एक तरह के पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बंधक बना लिया है, और आईएमएफ अमेरिकी हितों की पूर्ति कर रहा है। यदि पाकिस्तान की जनता पर बेतहाशा टैक्स लगाया गया तो मुमकिन है कि वहां कि जनता विद्रोह कर दे, क्योंकि पाकिस्तान में वैसे भी ग़रीबी बहुत है और ऐसे में आईएमएफ की शर्तों के मुताबिक़ टैक्स देना पाकिस्तानी जनता के बस की बात नहीं है।
JULY 24 (WTN) – भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की खस्ता हालत किसी से छिपी नहीं है। आरोप है कि जब से इमरान ख़ान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने हैं, तभी से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कमज़ोर होती चली गई है। पिछले कुछ समय से अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले पाकिस्तानी रुपया एशिया की सबसे कमज़ोर करेंसी साबित हुआ है। इन सब के बीच इसी महीने की 3 तारीख़ को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने पाकिस्तान को 6 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज देकर पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था को थोड़ा बहुत सहारा तो दिया है, लेकिन आईएमएफ से मिले बेलआउट पैकेज के बाद पाकिस्तान की जनता में भारी नाराज़गी है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह पाकिस्तान का यह आईएमएफ से 13वां बेलआउट पैकेज है। 39 महीनों के टाइम पीरियड में बेलआउट पैकेज के समझौते के दौरान, आईएमएफ हर तीन महीने में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की प्रगति की समीक्षा करेगा। आईएमएफ ने पाकिस्तान को बड़ी ही कड़ी शर्तों पर बेलआउट दिया है, जिसमें टैक्स कलेक्शन बढ़ाने की एक बड़ी शर्त शामिल है। आईएमएफ का मानना है कि टैक्स कलेक्शन बढ़ने से पाकिस्तान विदेशी कर्ज़ के भुगतान कर सकेगा और इससे विदेशी मुद्रा भण्डार भी बढ़ेगा।
आईएमएफ ने पाकिस्तान को बेलआउट पैकेज दिया तो ज़रूर है, लेकिन समझौते की अवधि में ही पाकिस्तान को 37.35 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज चुकाने को भी कहा है। इसमें 14.68 अरब डॉलर का कर्ज़ केवल बीजिंग का ही है, जिसमें से ज़्यादातर चाइना-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के कारण से है। जैसा कि हमने आपको बताया कि आईएमएफ ने टैक्स लक्ष्य को बढ़ाने की प्रमुख शर्त पर ही पाकिस्तान को बेलआउट पैकेज दिया है, जिसके बाद पाकिस्तान केन्द्रीय राजस्व बोर्ड ने इस बार टैक्स कलेक्शन का लक्ष्य 3.94 ट्रिलियन पाकिस्तान रुपये से बढ़ाकर 5.5 ट्रिलियन कर दिया है।
कर्ज़ में डूबी पाकिस्तान सरकार ने आईएमएफ के दिशा निर्देशों के अनुसार टैक्स कलेक्शन बढ़ाना शुरू भी कर दिया है, जिसके कारण पेट्रोल और बिज़ली की दरों में वृद्धि की गई है। कहा जा रहा है कि अगले महीने पेट्रोल और बिजली के दामों में और भी वृद्धि हो सकती है। टैक्स कलेक्शन बढ़ाने के साथ-साथ आईएमएफ ने पाकिस्तान से कहा है कि वो अपने करेंसी रुपये की क़ीमत को मुक्त बाज़ार के अनुसार रखे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तानी रूपये की क़ीमत दिसम्बर 2017 के बाद से क़रीब आधे से ज़्यादा कम हो चुकी है। वहीं इस साल अप्रैल में पाकिस्तान में मुद्रास्फीति की दर 9,4 प्रतिशत थी, जो कि आईएमएफ के अनुसार 13 प्रतिशत से ऊपर पहुंच सकती है।
पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार जिस तरह से पाकिस्तानी जनता पर टैक्स का बोझ बढ़ा रही है, उससे पाकिस्तान की जनता में भारी आक्रोश है। कुछ दिनों पहले पाकिस्तान के व्यापारियों ने देशव्यापी हड़ताल की थी और इमरान ख़ान सरकार द्वारा लगाए जा रहे भारी-भरकम टैक्स का विरोध किया था। व्यापारियों के अलावा नौकरीपेशा लोगों में भी इमरान ख़ान सरकार के प्रति भारी आक्रोश है।
पाकिस्तान की जनता का कहना है कि आईएमएफ की मांग के हिसाब से टैक्स भरना पाकिस्तान की जनता की क्षमता के बाहर है। पाकिस्तान में इन दिनों इस बात की चर्चा है कि आईएमएफ ने पाकिस्तान में प्रमुख वित्त अधिकारियों के पदों पर ‘अपने लोगों’ की नियुक्तियां कराई हैं, और इन लोगों की नियुक्ति के लिए आईएमएफ ने पाकिस्तानी सरकार पर दबाव भी डाला था।
पाकिस्तान की खस्ता आर्थिक हालत पर पाकिस्तान के अर्थशास्त्रियों और पत्रकारों की राय भी पाकिस्तान के इमरान ख़ान सरकार से जुदा है। पाकिस्तान के अर्थशास्त्री, आईएमएफ के पाकिस्तानी मुद्रा की क़ीमत तय करने के तरीक़े पर सवाल खड़े कर रहे हैं। उनके मुताबिक़ पाकिस्तान में मुद्रा बाज़ार की हालत चिंताजनक है और मुद्रा को पटरी पर लाने के लिए अमेरिकी डॉलर्स से रुपया ख़रीदना पड़ेगा। लेकिन इमरान ख़ान सरकार रुपये को मुक्त छोड़ना चाहती है, यदि ऐसा किया गया तो दो दिनों के अन्दर ही पाकिस्तान का रुपया तबाह हो जाएगा।
जैसा कि आप जानते हैं कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की दशा और दिशा तय करने में वहां की सेना की एक बहुत बड़ी भूमिका रहती है। देखा गया है कि पाकिस्तान की सरकारें अर्थव्यवस्था को सम्भालने में सक्षम नहीं हैं, इसलिए समय-समय पर पाकिस्तान, आईएमएफ के पास वित्तीय सहायता के लिए पहुंच जाता है। पाकिस्तान की खस्ता आर्थिक हालत के लिए वहां की सेना और कर्ज़ का बोझ दोनों ही ज़िम्मेदार हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान के सालाना बजट का क़रीब आधा हिस्सा सेना और कर्ज़ अदायगी में ही ख़र्च हो जाता है।
पाकिस्तानी के लोगों के मन में धीरे-धीरे यह धारणा बनती जा रही है कि आईएमएफ पाकिस्तान से कुछ भू-राजनीतिक हितों की पूर्ति करवाना चाहता है। लोगों का मानना है कि आईएमएफ का बेलआउट पैकेज पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए एक हथकड़ी की तरह है। लोगों में इस बात की भी नाराज़गी है कि आईएमएफ किसी भी तरह से पाकिस्तान की समस्याएं सुलझाने की कोशिश नहीं कर रहा है। वहीं अर्थशास्त्रियों का कहना है कि आईएमएफ के बेलआउट पैकेज में कोई सुधार कार्यक्रम नहीं है, बल्कि आईएमएफ ने एक तरह के पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बंधक सा बना लिया है।
कुछ लोगों का आरोप है कि आईएमएफ बेलआउट पैकेज का इस्तेमाल करके पाकिस्तान में अमेरिकी हितों की पूर्ति करने की कोशिश कर रहा है। यह बात इस आधार पर कही जा रही है कि इसी साल के विकीलीक्स के एक दस्तावेज़ में दावा किया गया था कि अमेरिका, आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक का इस्तेमाल अपने क्षेत्रीय हितों को पूरा करने में करता है।
स्पष्ट है कि पाकिस्तान की जनता में आईएमएफ के प्रति ख़ासी नाराज़गी है। पाकिस्तानी लोगों का आरोप है कि आईएमएफ ने एक तरह के पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बंधक बना लिया है, और आईएमएफ अमेरिकी हितों की पूर्ति कर रहा है। यदि पाकिस्तान की जनता पर बेतहाशा टैक्स लगाया गया तो मुमकिन है कि वहां कि जनता विद्रोह कर दे, क्योंकि पाकिस्तान में वैसे भी ग़रीबी बहुत है और ऐसे में आईएमएफ की शर्तों के मुताबिक़ टैक्स देना पाकिस्तानी जनता के बस की बात नहीं है।