अभूतपूर्व मंदी की मार झेल रही ऑटो इंडस्ट्री को मोदी सरकार से ‘आशा’!
Thursday - July 25, 2019 12:58 pm ,
Category : WTN HINDI
ऑटो सेक्टर में क़रीब 10 लाख लोग हो सकते हैं बेरोज़गार
देश की ऑटो इंडस्ट्री को ‘सहारे’ की ज़रूरत!
JULY 25 (WTN) – भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में नौकरी पाना अपने आप में काफ़ी मुश्किल काम है। सरकारी नौकरी पाने की तो बात छोड़िए, आजकल प्राइवेट नौकरी के लिए भी गला काट प्रतियोगिता रहती है। ख़ैर यदि कैसे तो भी प्राइवेट नौकरी मिल भी जाए तो हमेशा ख़तरा बना रहता है कि कहीं कम्पनी किसी ना किसी कारण से नौकरी से ना निकाल दे। कुछ ऐसा ही आने वाले समय में ऑटो इंडस्ट्री और उससे जुड़े उद्योगों में हो सकता है, जब इस सेक्टर में लगातार मंदी रहने और उत्पादन में गिरावट के कारण क़रीब 10 लाख लोगों को बेरोज़गार होना पड़ सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस समय भारतीय ऑटो इंडस्ट्री को अभूतपूर्व मंदी का सामना करना पड़ रहा है। आंकडे बताते हैं कि हर कैटेगिरी के वाहनों की बिक्री में पिछले काफ़ी समय से कमी देखी गई है। जैसा कि आप जानते हैं कि ऑटो इंडस्ट्री पर ही ऑटोपार्ट्स बनाने वाले उद्योग निर्भर रहते हैं। अब जबकि गाड़ियों की बिक्री में कमी देखी जा रही है तो इसका सीधा असर ऑटोपार्ट्स उद्योग पर भी पड़ रहा है, और वहां पर भी मंदी देखी जा रही है।
बिक्री ना होने के कारण ऑटो कम्पनियों ने अपने उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत की कटौती की है। ऐसे में ऑटोपार्ट्स उद्योग पर भी इसकी सीधी मार पड़ी है। यदि गाड़ियों की बिक्री में इसी तरह से गिरावट जारी रही तो आने वाले समय में ऑटो इंडस्ट्री और ऑटोपार्ट्स उद्योग में क़रीब 10 लाख लोग बेरोज़गार हो सकते हैं।
दरअसल, ऑटो इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि गाड़ियों की बिक्री में कमी के कई कारण हैं, जिसके कारण गाड़ियों की बिक्री में उठाव नहीं देखा जा रहा है। सबसे पहला कारण तो यह है कि इस समय भारत में कारों और बाइक्स की बिक्री में एक ठहराव सा आ गया है, क्योंकि लगभग हर घर में बाइक मौजूद है और जो लोग थोड़े से भी आर्थिक रूप से सशक्त हैं उनके पास कार है। हर देश में एक समय ऐसा आता है जब कारों और बाइक्स की बेतहाशा बिक्री के बाद एक ठहराव सा देखा जाता है।
वहीं ऑटो इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि गाड़ियों की बिक्री में तेज़ी लाने के लिए मोदी सरकार को कुछ क़दम उठाने चाहिए। इसके तहत ऑटो सेक्टर के लिए जीएसटी की दर को एक समान 18 प्रतिशत कर देना चाहिए। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जीएसटी के तहत सबसे पहले क़रीब 70 प्रतिशत ऑटोपार्ट्स पर 18 प्रतिशत की दर से टैक्स लगता है। वहीं बाकी बचे 30 प्रतिशत पार्ट्स पर 28 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगता है। वहीं गाड़ियों पर 28 प्रतिशत जीएसटी के साथ उनकी लम्बाई, इंजन के आकार-प्रकार के आधार पर 1 से 15 प्रतिशत सेस भी लगता है।
ऑटो इंडस्ट्री की मांग है कि यदि मोदी सरकार, ऑटो सेक्टर में जीएसटी की दर को एकसमान 18 प्रतिशत करती है तो इससे ऑटो इंडस्ट्री में फ़िर से तेज़ी आएगी और लाखों लोगों को बेरोज़गार नहीं होना पड़ेगा। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ऑटो इंडस्ट्री और ऑटोपार्ट्स उदयोग में मंदी के कारण यहां से कर्मचारियों की छंटनी होना शुरू भी हो गया है, और यदि मोदी सरकार ने समय रहते ऑटो इंडस्ट्री को राहत नहीं दी तो आने वाले समय में इस सेक्टर से क़रीब 10 लाख लोग बेरोज़गार हो सकते हैं।
दरअसल, ऑटो इंडस्ट्री में मंदी के कई कारण हैं। सबसे पहला कारण यह है कि भारत में गाड़ियों की बिक्री में एक स्थिरता आ गई है। वहीं भारत स्टेज-4 से भारत स्टेज-6 उत्सर्जन मानकों की गाड़ियों के आने के इंतज़ार में ग्राहक फिलहाल गाड़ी ख़रीदने से पहरेज कर रहे हैं। वहीं सरकार की ई-व्हीकल नीति को लेकर भी कोई स्पष्ट समय सीमा और स्पष्टता नहीं है, जिसके कारण इस सेक्टर में भविष्य के सभी तरह के निवेश रूक गये हैं। वहीं ई-व्हीकल आने से ऑटोपार्ट्स उद्योग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिसके कारण इस सेक्टर से लाखों लोग बेरोज़गार होंगे।
यदि ऑटो इंडस्ट्री को लगता है कि जीएसटी दर को एक समान करने से गाड़िय़ों की बिक्री में वृद्धि होगी, तो मोदी सरकार को ऑटो इंडस्ट्री की इस मांग पर गम्भीरता से विचार करना चाहिए। ऐसा इसलिए, क्योंकि यदि ऑटो इंडस्ट्री में उछाल नहीं आया तो ऑटो सेक्टर और ऑटोपार्ट्स सेक्टर से लाखों लोगों के बेरोज़गार होने का ख़तरा बना रहेगा। यह सही है कि इस समय ऑटो इंडस्ट्री में मंदी का दौर जारी है, लेकिन आने वाले समय में आशा की जा रही है कि एक बार फ़िर से इस सेक्टर में उछाल आएगा और गाड़ियों की बिक्री तेज़ी से होगी, लेकिन उसके लिए ऑटो इंडस्ट्री के साथ-साथ सरकार को भी कुछ सकारात्मक क़दम उठाने पड़ेंगे।
JULY 25 (WTN) – भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में नौकरी पाना अपने आप में काफ़ी मुश्किल काम है। सरकारी नौकरी पाने की तो बात छोड़िए, आजकल प्राइवेट नौकरी के लिए भी गला काट प्रतियोगिता रहती है। ख़ैर यदि कैसे तो भी प्राइवेट नौकरी मिल भी जाए तो हमेशा ख़तरा बना रहता है कि कहीं कम्पनी किसी ना किसी कारण से नौकरी से ना निकाल दे। कुछ ऐसा ही आने वाले समय में ऑटो इंडस्ट्री और उससे जुड़े उद्योगों में हो सकता है, जब इस सेक्टर में लगातार मंदी रहने और उत्पादन में गिरावट के कारण क़रीब 10 लाख लोगों को बेरोज़गार होना पड़ सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस समय भारतीय ऑटो इंडस्ट्री को अभूतपूर्व मंदी का सामना करना पड़ रहा है। आंकडे बताते हैं कि हर कैटेगिरी के वाहनों की बिक्री में पिछले काफ़ी समय से कमी देखी गई है। जैसा कि आप जानते हैं कि ऑटो इंडस्ट्री पर ही ऑटोपार्ट्स बनाने वाले उद्योग निर्भर रहते हैं। अब जबकि गाड़ियों की बिक्री में कमी देखी जा रही है तो इसका सीधा असर ऑटोपार्ट्स उद्योग पर भी पड़ रहा है, और वहां पर भी मंदी देखी जा रही है।
बिक्री ना होने के कारण ऑटो कम्पनियों ने अपने उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत की कटौती की है। ऐसे में ऑटोपार्ट्स उद्योग पर भी इसकी सीधी मार पड़ी है। यदि गाड़ियों की बिक्री में इसी तरह से गिरावट जारी रही तो आने वाले समय में ऑटो इंडस्ट्री और ऑटोपार्ट्स उद्योग में क़रीब 10 लाख लोग बेरोज़गार हो सकते हैं।
दरअसल, ऑटो इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि गाड़ियों की बिक्री में कमी के कई कारण हैं, जिसके कारण गाड़ियों की बिक्री में उठाव नहीं देखा जा रहा है। सबसे पहला कारण तो यह है कि इस समय भारत में कारों और बाइक्स की बिक्री में एक ठहराव सा आ गया है, क्योंकि लगभग हर घर में बाइक मौजूद है और जो लोग थोड़े से भी आर्थिक रूप से सशक्त हैं उनके पास कार है। हर देश में एक समय ऐसा आता है जब कारों और बाइक्स की बेतहाशा बिक्री के बाद एक ठहराव सा देखा जाता है।
वहीं ऑटो इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि गाड़ियों की बिक्री में तेज़ी लाने के लिए मोदी सरकार को कुछ क़दम उठाने चाहिए। इसके तहत ऑटो सेक्टर के लिए जीएसटी की दर को एक समान 18 प्रतिशत कर देना चाहिए। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जीएसटी के तहत सबसे पहले क़रीब 70 प्रतिशत ऑटोपार्ट्स पर 18 प्रतिशत की दर से टैक्स लगता है। वहीं बाकी बचे 30 प्रतिशत पार्ट्स पर 28 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगता है। वहीं गाड़ियों पर 28 प्रतिशत जीएसटी के साथ उनकी लम्बाई, इंजन के आकार-प्रकार के आधार पर 1 से 15 प्रतिशत सेस भी लगता है।
ऑटो इंडस्ट्री की मांग है कि यदि मोदी सरकार, ऑटो सेक्टर में जीएसटी की दर को एकसमान 18 प्रतिशत करती है तो इससे ऑटो इंडस्ट्री में फ़िर से तेज़ी आएगी और लाखों लोगों को बेरोज़गार नहीं होना पड़ेगा। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ऑटो इंडस्ट्री और ऑटोपार्ट्स उदयोग में मंदी के कारण यहां से कर्मचारियों की छंटनी होना शुरू भी हो गया है, और यदि मोदी सरकार ने समय रहते ऑटो इंडस्ट्री को राहत नहीं दी तो आने वाले समय में इस सेक्टर से क़रीब 10 लाख लोग बेरोज़गार हो सकते हैं।
दरअसल, ऑटो इंडस्ट्री में मंदी के कई कारण हैं। सबसे पहला कारण यह है कि भारत में गाड़ियों की बिक्री में एक स्थिरता आ गई है। वहीं भारत स्टेज-4 से भारत स्टेज-6 उत्सर्जन मानकों की गाड़ियों के आने के इंतज़ार में ग्राहक फिलहाल गाड़ी ख़रीदने से पहरेज कर रहे हैं। वहीं सरकार की ई-व्हीकल नीति को लेकर भी कोई स्पष्ट समय सीमा और स्पष्टता नहीं है, जिसके कारण इस सेक्टर में भविष्य के सभी तरह के निवेश रूक गये हैं। वहीं ई-व्हीकल आने से ऑटोपार्ट्स उद्योग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिसके कारण इस सेक्टर से लाखों लोग बेरोज़गार होंगे।
यदि ऑटो इंडस्ट्री को लगता है कि जीएसटी दर को एक समान करने से गाड़िय़ों की बिक्री में वृद्धि होगी, तो मोदी सरकार को ऑटो इंडस्ट्री की इस मांग पर गम्भीरता से विचार करना चाहिए। ऐसा इसलिए, क्योंकि यदि ऑटो इंडस्ट्री में उछाल नहीं आया तो ऑटो सेक्टर और ऑटोपार्ट्स सेक्टर से लाखों लोगों के बेरोज़गार होने का ख़तरा बना रहेगा। यह सही है कि इस समय ऑटो इंडस्ट्री में मंदी का दौर जारी है, लेकिन आने वाले समय में आशा की जा रही है कि एक बार फ़िर से इस सेक्टर में उछाल आएगा और गाड़ियों की बिक्री तेज़ी से होगी, लेकिन उसके लिए ऑटो इंडस्ट्री के साथ-साथ सरकार को भी कुछ सकारात्मक क़दम उठाने पड़ेंगे।