विश्व बैंक ने खोली पाकिस्तान के वित्तीय प्रबंधन की पोल!
Saturday - July 27, 2019 11:07 am ,
Category : WTN HINDI
बदहाल पाकिस्तान के आर्थिक प्रबंधन पर विश्व बैंक ने जारी की रिपोर्ट
पाकिस्तान सरकार के बजट ने खोई अपनी 'विश्वसनीयता'!
JULY 27 (WTN) – जब से इमरान ख़ान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने हैं, तब से ना तो पाकिस्तान के और ना ही इमरान ख़ान के दिन अच्छे चल रहे हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इन दिनों अपने सबसे ख़राब दौर से गुजर रही है। अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले लगातार कमज़ोर होते पाकिस्तानी रूपये, घटते निर्यात और अन्य आर्थिक कारणों के चलते पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बर्बाद होने की कगार पर है। हाल यह है कि पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से कड़ी आर्थिक शर्तों पर बेलआउट पैकेज लेना पड़ा है।
आईएमएफ ने काफ़ी कड़ी शर्तों पर पाकिस्तान को बेलआउट पैकेज दिया है। इन शर्तों में पाकिस्तान में बिजली की दरें बढ़ाना, टैक्स कलेक्शन में वृद्धि समेत कई अन्य शर्तें शामिल हैं। इन शर्तों के कारण पहले से ही पाकिस्तान की ग़रीब जनता को बेतहाशा महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। आईएमएफ की शर्त है कि किश्तों में पाकिस्तान को दिये जाने वाले बेलआउट पैकेज की निश्चित समयांतराल में समीक्षा की जाएगी। इस समीक्षा में यह देखा जाएगा कि पाकिस्तान उसकी शर्तों पर आर्थिक सुधार कर रहा है कि नहीं, और पाकिस्तान का आर्थिक प्रबंधन किस तरह का है।
लेकिन इससे पहले की आईएमएफ पाकिस्तान की आर्थिक हालातों की समीक्षा करे, विश्व बैक की एक ड्राफ्ट रिपोर्ट ने पाकिस्तान के आर्थिक प्रबंधन की पोल खोलकर रख दी है। जानकारी के मुताबिक़, विश्व बैंक की ड्राफ्ट रिपोर्ट में आर्थिक प्रबंधन के सभी 31 पैमानों पर पाकिस्तान की रैंकिंग में काफ़ी गिरावट दर्ज की गई है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विश्व बैंक के इस मूल्यांकन के बाद पाकिस्तान सरकार के बजट ने अपनी विश्वसनीयता खो दी है, क्योंकि विश्व बैंक ने पाकिस्तान सरकार के आर्थिक प्रबंधन को पूरी तरह से असफल बताया है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विश्व बैंक ने जून महीने में पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर 'सार्वजनिक व्यय और वित्तीय जिम्मेदारी' (PEFA) द्वारा तैयार किए गए फाइनल ड्राफ्ट को सार्वजनिक किया है। इस महत्वपूर्ण आर्थिक रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2015-16 से लेकर 2017-18 के दौरान पाकिस्तान के बजट और आर्थिक प्रबंधन का मूल्यांकन किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक़ पाकिस्तान का वित्त मंत्रालय अपने वित्तीय उत्तरदायित्व को निभाने में नाकामयाब रहा है। आलोचना समय में पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने वित्तीय नियमों का गम्भीर रूप से उल्लंघन होने दिया और उस तरफ़ कोई ध्यान नहीं दिया।
दरअसल, आरोप है कि विश्व बैंक को अपनी रिपोर्ट में नरमी बरतने के लिए पाकिस्तान दबाव की राजनीति कर रहा था। लेकिन पाकिस्तान का विश्व बैंक पर दबाव काम ना आ सका, क्योंकि विश्व बैंक अपनी रिपोर्ट फाइनल कर चुका है। दरअसल, भारत में आतंक फैलाने में अपनी आर्थिक शक्ति बर्बाद करने वाले पाकिस्तान को विश्व बैंक ने आईना दिखाया है कि उसका वित्तीय प्रबंधन कितना ख़राब और अविश्वनसीय है।
विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक़, पाकिस्तान सरकार बजट अनुशासन को बरकरार नहीं रख सकी है वहीं सरकार की ओर से पारदर्शिता का भी अभाव देखा गया। विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि फाइनेंशियल ऑपरेशन समेत आर्थिक प्रबंधन के सभी संकेतों पर पाकिस्तान का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में वित्तीय अनुशासन में कमी देखी गई है, वहीं टैक्स कलेक्शन में भी पाकिस्तान की स्थिति निराशाजनक है। इतना ही नहीं राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता भारी कमी देखी गई है। इन सभी कारणों से पाकिस्तान को बजट की विश्वसनीयता पर सबसे ख़राब ग्रेड ‘डी’ मिली है।
विश्व बैंक की रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान में वित्तीय प्रबंधन सबसे ख़राब दौर में है। पाकिस्तान को आईएमएफ ने जिन शर्तों पर कर्ज़ दिया है उसमें वित्तीय प्रबंधन भी एक महत्वपूर्ण शर्त है। लेकिन विश्व बैंक की रिपोर्ट पाकिस्तान के वित्तीय प्रबंधन की सच्चाई बयां कर रही है। अब देखना होगा कि आईएमएफ की कड़ी शर्तों पर पाकिस्तान कितना ख़रा उतर पाता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि यदि पाकिस्तान आईएमएफ की शर्तों को सही तरीक़े से लागू नहीं कर पाया तो उसके बेलआउट पैकेज की बाक़ी किश्तों पर आईएमएफ का सख्त रूख हो सकता है। ख़ैर लेकिन यदि पाकिस्तान को भारत में आतंक फैलाने से फुर्सत मिले तो वो इस तरफ़ भी कुछ ध्यान दे।
JULY 27 (WTN) – जब से इमरान ख़ान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने हैं, तब से ना तो पाकिस्तान के और ना ही इमरान ख़ान के दिन अच्छे चल रहे हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इन दिनों अपने सबसे ख़राब दौर से गुजर रही है। अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले लगातार कमज़ोर होते पाकिस्तानी रूपये, घटते निर्यात और अन्य आर्थिक कारणों के चलते पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बर्बाद होने की कगार पर है। हाल यह है कि पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से कड़ी आर्थिक शर्तों पर बेलआउट पैकेज लेना पड़ा है।
आईएमएफ ने काफ़ी कड़ी शर्तों पर पाकिस्तान को बेलआउट पैकेज दिया है। इन शर्तों में पाकिस्तान में बिजली की दरें बढ़ाना, टैक्स कलेक्शन में वृद्धि समेत कई अन्य शर्तें शामिल हैं। इन शर्तों के कारण पहले से ही पाकिस्तान की ग़रीब जनता को बेतहाशा महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। आईएमएफ की शर्त है कि किश्तों में पाकिस्तान को दिये जाने वाले बेलआउट पैकेज की निश्चित समयांतराल में समीक्षा की जाएगी। इस समीक्षा में यह देखा जाएगा कि पाकिस्तान उसकी शर्तों पर आर्थिक सुधार कर रहा है कि नहीं, और पाकिस्तान का आर्थिक प्रबंधन किस तरह का है।
लेकिन इससे पहले की आईएमएफ पाकिस्तान की आर्थिक हालातों की समीक्षा करे, विश्व बैक की एक ड्राफ्ट रिपोर्ट ने पाकिस्तान के आर्थिक प्रबंधन की पोल खोलकर रख दी है। जानकारी के मुताबिक़, विश्व बैंक की ड्राफ्ट रिपोर्ट में आर्थिक प्रबंधन के सभी 31 पैमानों पर पाकिस्तान की रैंकिंग में काफ़ी गिरावट दर्ज की गई है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विश्व बैंक के इस मूल्यांकन के बाद पाकिस्तान सरकार के बजट ने अपनी विश्वसनीयता खो दी है, क्योंकि विश्व बैंक ने पाकिस्तान सरकार के आर्थिक प्रबंधन को पूरी तरह से असफल बताया है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विश्व बैंक ने जून महीने में पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर 'सार्वजनिक व्यय और वित्तीय जिम्मेदारी' (PEFA) द्वारा तैयार किए गए फाइनल ड्राफ्ट को सार्वजनिक किया है। इस महत्वपूर्ण आर्थिक रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2015-16 से लेकर 2017-18 के दौरान पाकिस्तान के बजट और आर्थिक प्रबंधन का मूल्यांकन किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक़ पाकिस्तान का वित्त मंत्रालय अपने वित्तीय उत्तरदायित्व को निभाने में नाकामयाब रहा है। आलोचना समय में पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने वित्तीय नियमों का गम्भीर रूप से उल्लंघन होने दिया और उस तरफ़ कोई ध्यान नहीं दिया।
दरअसल, आरोप है कि विश्व बैंक को अपनी रिपोर्ट में नरमी बरतने के लिए पाकिस्तान दबाव की राजनीति कर रहा था। लेकिन पाकिस्तान का विश्व बैंक पर दबाव काम ना आ सका, क्योंकि विश्व बैंक अपनी रिपोर्ट फाइनल कर चुका है। दरअसल, भारत में आतंक फैलाने में अपनी आर्थिक शक्ति बर्बाद करने वाले पाकिस्तान को विश्व बैंक ने आईना दिखाया है कि उसका वित्तीय प्रबंधन कितना ख़राब और अविश्वनसीय है।
विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक़, पाकिस्तान सरकार बजट अनुशासन को बरकरार नहीं रख सकी है वहीं सरकार की ओर से पारदर्शिता का भी अभाव देखा गया। विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि फाइनेंशियल ऑपरेशन समेत आर्थिक प्रबंधन के सभी संकेतों पर पाकिस्तान का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में वित्तीय अनुशासन में कमी देखी गई है, वहीं टैक्स कलेक्शन में भी पाकिस्तान की स्थिति निराशाजनक है। इतना ही नहीं राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता भारी कमी देखी गई है। इन सभी कारणों से पाकिस्तान को बजट की विश्वसनीयता पर सबसे ख़राब ग्रेड ‘डी’ मिली है।
विश्व बैंक की रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान में वित्तीय प्रबंधन सबसे ख़राब दौर में है। पाकिस्तान को आईएमएफ ने जिन शर्तों पर कर्ज़ दिया है उसमें वित्तीय प्रबंधन भी एक महत्वपूर्ण शर्त है। लेकिन विश्व बैंक की रिपोर्ट पाकिस्तान के वित्तीय प्रबंधन की सच्चाई बयां कर रही है। अब देखना होगा कि आईएमएफ की कड़ी शर्तों पर पाकिस्तान कितना ख़रा उतर पाता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि यदि पाकिस्तान आईएमएफ की शर्तों को सही तरीक़े से लागू नहीं कर पाया तो उसके बेलआउट पैकेज की बाक़ी किश्तों पर आईएमएफ का सख्त रूख हो सकता है। ख़ैर लेकिन यदि पाकिस्तान को भारत में आतंक फैलाने से फुर्सत मिले तो वो इस तरफ़ भी कुछ ध्यान दे।