बढ़ता ही जा रहा है नये कांग्रेस अध्यक्ष का इंतज़ार!
Tuesday - July 30, 2019 10:41 am ,
Category : WTN HINDI
नेतृत्वविहीन कांग्रेस में बढ़ती ‘परेशानियां’
नये कांग्रेस अध्यक्ष पर ‘सस्पेंस’ बरक़रार!
JULY 30 (WTN) – लगातार दो लोकसभा चुनावों में ऐतिहासिक पराजय के बाद कांग्रेस पार्टी इस समय नेतृत्व के संकट से जूझ रही है। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की करारी हार के बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया था, और पार्टी से गांधी परिवार के अलावा किसी अन्य नेता को अध्यक्ष चुनने को कहा था। दिन पर दिन गुजरते जा रहे हैं, लेकिन कांग्रेस पार्टी का नया अध्यक्ष कौन बनेगा इस पर सस्पेंस बना हुआ है।
यह सभी जानते हैं कि गांधी परिवार ही कांग्रेस पार्टी में सर्वोपरि है। राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफ़े के बाद कांग्रेस नेताओं ने राहुल गांधी को मनाने की काफ़ी कोशिशें की थीं, लेकिन राहुल गांधी ने अपना इस्तीफ़ा वापस नहीं लिया। इतना ही नहीं, राहुल गांधी ने साफ़ कह दिया है कि ना ही वे और ना ही गांधी परिवार का कोई भी सदस्य कांग्रेस का अध्यक्ष फ़िलहाल नहीं बनेगा। इधर राहुल गांधी अपनी जिद पर अड़े हुए हैं, लेकिन उधर उनकी बहन और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की मांग कांग्रेस पार्टी में जोर पकड़ने लगी है।
देश में सबसे ज़्यादा समय तक राज करने वाली कांग्रेस पार्टी इन दिनों नेतृत्वविहीन है। राहुल गांधी के इस्तीफ़े के बाद से गांधी परिवार के क़रीबी नेताओं को समझ नहीं आ रहा है कि पार्टी का नया अध्यक्ष बनाने की प्रक्रिया क्या हो और किसे अध्यक्ष बनाया जाए? इसी असमजंस के बीच कांग्रेस के बुजुर्ग नेताओं ने एक बार फ़िर से गांधी परिवार के प्रति अपनी आस्था दिखाई है, और वे प्रियंका गांधी वाड्रा को कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने के लिए लॉबिंग कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ़ युवा नेताओं का एक धड़ा राहुल गांधी के साथ खड़ा नज़र आ रहा है कि फ़िलहाल गांधी परिवार के किसी सदस्य को अध्यक्ष नहीं बनना चाहिए।
सोनभद्र हत्याकाण्ड के बाद जिस तरह से प्रियंका गांधी वाड्रा ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को घेरा था और जवाब देने के लिए मज़बूर कर दिया था, उसके बाद से कांग्रेस नेताओं में प्रियंका गांधी वाड्रा के रूप में एक बड़े नेता भविष्य के लिए तैयार होता दिख रहा है। कांग्रेस के कुछ नेताओं का मानना है कि प्रियंका गांधी वाड्रा में इन्दिरा गांधी की तरह तेवर हैं और वे भाजपा को कड़ी टक्कर दे सकती हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पूर्व केन्द्रीय मंत्री और तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर जैसे वरिष्ठ नेताओं ने प्रियंका गांधी वाड्रा के कांग्रेस अध्यक्ष बनने का समर्थन किया है।
यदि इस समय प्रियंका गांधी की राजनीतिक सक्रियता की बात की जाए तो उनका पूरा फोकस यूपी की भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ है। प्रियंका गांधी वाड्रा योगी सरकार की नीतियों के ख़िलाफ़ समय-समय पर आवाज़ उठा रही हैं, जिससे कांग्रेस नेताओं में संदेश जा रहा है कि वे देश के सबसे बड़े राज्य के तेज़तर्रार मुख्यमंत्री से सीधे लोहा ले रही हैं। 2019 लोकसभा चुनाव में हार से निराश और नाराज़ राहुल गांधी फ़िलहाल राजनीति में कम ही सक्रिय हैं। उनकी तुलना में प्रियंका गांधी वाड्रा ने अपने सक्रियता से साबित किया है कि हार के बाद वे निराश नहीं हैं।
कांग्रेस पार्टी में अध्यक्ष ना होने से कांग्रेस नेता निराश और हताश हैं। राज्य के कांग्रेस नेताओं को दिल्ली से सही मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है, जिसके कारण कांग्रेस को एक महत्वपूर्ण दक्षिणी राज्य कर्नाटक से हाथ धोना पड़ा है। आने वाले समय में महाराष्ट्र समेत कई अन्य राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में यदि कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष विहीन रहेगी तो स्वाभाविक है कि इन राज्यों के नेताओं में आत्मविश्वास नहीं रहेगा और उन्हें सही नेतृत्व नहीं मिल पाएगा।
प्रियंका गांधी वाड्रा को अध्यक्ष बनाए जाने की मांग के बीच कहा जा रहा है कि कर्नाटक के वरिष्ठ कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को कांग्रेस अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी सौंपी जा सकती है, क्योंकि वे गांधी परिवार के काफ़ी क़रीबी हैं। वहीं राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को उपाध्यक्ष बनाया जाए। लेकिन कहा जा रहा है कि राहुल गांधी को यह फॉर्मूला स्वीकार नहीं है।
कहा जा रहा है कि कांग्रेस में नेतृत्व संकट समाप्त करने के लिए कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक जल्द हो सकती है। अभी तक बैठक इसलिए नहीं हो पाई थी, क्योंकि राहुल गांधी अमेरिका में थे। स्वाभाविक है कि एक बार फ़िर से कांग्रेस नेता राहुल गांधी से अपील करेंगे कि वे अपने फ़ैसले पर फ़िर से विचार करें, लेकिन लगता नहीं है कि राहुल गांधी अपना फ़ैसला वापस लेंगे। अब जबकि राहुल गांधी अध्यक्ष बनने के लिए राज़ी नहीं होंगे, ऐसे में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी को इस बात के लिए राज़ी करने की कोशिश करेंगे कि प्रियंका गांधी को पार्टी अध्यक्ष बनाकर पार्टी में फ़िर से जान फूंकी जाए।
राहुल गांधी ना तो खुद पार्टी अध्यक्ष बनना चाहते हैं और ना ही अपने परिवार के किसी सदस्य को पार्टी अध्यक्ष पद पर देखना चाहते हैं। दरअसल, राहुल गांधी का मानना है कि कांग्रेस को अब गांधी परिवार पर निर्भरता धीरे-धीरे कम और आख़िर में समाप्त कर देना चाहिए। वैसे राहुल गांधी की सोच व्यवहारिक है। पर कांग्रेस पार्टी, गांधी परिवार के नेतृत्व के बिना एकता के साथ रह ही नहीं सकती है। ऐसे में आज नहीं तो कल, कभी ना कभी तो एक बार फ़िर से गांधी परिवार का कोई सदस्य फ़िर से कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष बनेगा।
JULY 30 (WTN) – लगातार दो लोकसभा चुनावों में ऐतिहासिक पराजय के बाद कांग्रेस पार्टी इस समय नेतृत्व के संकट से जूझ रही है। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की करारी हार के बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया था, और पार्टी से गांधी परिवार के अलावा किसी अन्य नेता को अध्यक्ष चुनने को कहा था। दिन पर दिन गुजरते जा रहे हैं, लेकिन कांग्रेस पार्टी का नया अध्यक्ष कौन बनेगा इस पर सस्पेंस बना हुआ है।
यह सभी जानते हैं कि गांधी परिवार ही कांग्रेस पार्टी में सर्वोपरि है। राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफ़े के बाद कांग्रेस नेताओं ने राहुल गांधी को मनाने की काफ़ी कोशिशें की थीं, लेकिन राहुल गांधी ने अपना इस्तीफ़ा वापस नहीं लिया। इतना ही नहीं, राहुल गांधी ने साफ़ कह दिया है कि ना ही वे और ना ही गांधी परिवार का कोई भी सदस्य कांग्रेस का अध्यक्ष फ़िलहाल नहीं बनेगा। इधर राहुल गांधी अपनी जिद पर अड़े हुए हैं, लेकिन उधर उनकी बहन और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की मांग कांग्रेस पार्टी में जोर पकड़ने लगी है।
देश में सबसे ज़्यादा समय तक राज करने वाली कांग्रेस पार्टी इन दिनों नेतृत्वविहीन है। राहुल गांधी के इस्तीफ़े के बाद से गांधी परिवार के क़रीबी नेताओं को समझ नहीं आ रहा है कि पार्टी का नया अध्यक्ष बनाने की प्रक्रिया क्या हो और किसे अध्यक्ष बनाया जाए? इसी असमजंस के बीच कांग्रेस के बुजुर्ग नेताओं ने एक बार फ़िर से गांधी परिवार के प्रति अपनी आस्था दिखाई है, और वे प्रियंका गांधी वाड्रा को कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने के लिए लॉबिंग कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ़ युवा नेताओं का एक धड़ा राहुल गांधी के साथ खड़ा नज़र आ रहा है कि फ़िलहाल गांधी परिवार के किसी सदस्य को अध्यक्ष नहीं बनना चाहिए।
सोनभद्र हत्याकाण्ड के बाद जिस तरह से प्रियंका गांधी वाड्रा ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को घेरा था और जवाब देने के लिए मज़बूर कर दिया था, उसके बाद से कांग्रेस नेताओं में प्रियंका गांधी वाड्रा के रूप में एक बड़े नेता भविष्य के लिए तैयार होता दिख रहा है। कांग्रेस के कुछ नेताओं का मानना है कि प्रियंका गांधी वाड्रा में इन्दिरा गांधी की तरह तेवर हैं और वे भाजपा को कड़ी टक्कर दे सकती हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पूर्व केन्द्रीय मंत्री और तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर जैसे वरिष्ठ नेताओं ने प्रियंका गांधी वाड्रा के कांग्रेस अध्यक्ष बनने का समर्थन किया है।
यदि इस समय प्रियंका गांधी की राजनीतिक सक्रियता की बात की जाए तो उनका पूरा फोकस यूपी की भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ है। प्रियंका गांधी वाड्रा योगी सरकार की नीतियों के ख़िलाफ़ समय-समय पर आवाज़ उठा रही हैं, जिससे कांग्रेस नेताओं में संदेश जा रहा है कि वे देश के सबसे बड़े राज्य के तेज़तर्रार मुख्यमंत्री से सीधे लोहा ले रही हैं। 2019 लोकसभा चुनाव में हार से निराश और नाराज़ राहुल गांधी फ़िलहाल राजनीति में कम ही सक्रिय हैं। उनकी तुलना में प्रियंका गांधी वाड्रा ने अपने सक्रियता से साबित किया है कि हार के बाद वे निराश नहीं हैं।
कांग्रेस पार्टी में अध्यक्ष ना होने से कांग्रेस नेता निराश और हताश हैं। राज्य के कांग्रेस नेताओं को दिल्ली से सही मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है, जिसके कारण कांग्रेस को एक महत्वपूर्ण दक्षिणी राज्य कर्नाटक से हाथ धोना पड़ा है। आने वाले समय में महाराष्ट्र समेत कई अन्य राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में यदि कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष विहीन रहेगी तो स्वाभाविक है कि इन राज्यों के नेताओं में आत्मविश्वास नहीं रहेगा और उन्हें सही नेतृत्व नहीं मिल पाएगा।
प्रियंका गांधी वाड्रा को अध्यक्ष बनाए जाने की मांग के बीच कहा जा रहा है कि कर्नाटक के वरिष्ठ कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को कांग्रेस अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी सौंपी जा सकती है, क्योंकि वे गांधी परिवार के काफ़ी क़रीबी हैं। वहीं राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को उपाध्यक्ष बनाया जाए। लेकिन कहा जा रहा है कि राहुल गांधी को यह फॉर्मूला स्वीकार नहीं है।
कहा जा रहा है कि कांग्रेस में नेतृत्व संकट समाप्त करने के लिए कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक जल्द हो सकती है। अभी तक बैठक इसलिए नहीं हो पाई थी, क्योंकि राहुल गांधी अमेरिका में थे। स्वाभाविक है कि एक बार फ़िर से कांग्रेस नेता राहुल गांधी से अपील करेंगे कि वे अपने फ़ैसले पर फ़िर से विचार करें, लेकिन लगता नहीं है कि राहुल गांधी अपना फ़ैसला वापस लेंगे। अब जबकि राहुल गांधी अध्यक्ष बनने के लिए राज़ी नहीं होंगे, ऐसे में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी को इस बात के लिए राज़ी करने की कोशिश करेंगे कि प्रियंका गांधी को पार्टी अध्यक्ष बनाकर पार्टी में फ़िर से जान फूंकी जाए।
राहुल गांधी ना तो खुद पार्टी अध्यक्ष बनना चाहते हैं और ना ही अपने परिवार के किसी सदस्य को पार्टी अध्यक्ष पद पर देखना चाहते हैं। दरअसल, राहुल गांधी का मानना है कि कांग्रेस को अब गांधी परिवार पर निर्भरता धीरे-धीरे कम और आख़िर में समाप्त कर देना चाहिए। वैसे राहुल गांधी की सोच व्यवहारिक है। पर कांग्रेस पार्टी, गांधी परिवार के नेतृत्व के बिना एकता के साथ रह ही नहीं सकती है। ऐसे में आज नहीं तो कल, कभी ना कभी तो एक बार फ़िर से गांधी परिवार का कोई सदस्य फ़िर से कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष बनेगा।