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चेक बाउंस होने पर मुआवजे के बदले ‘नियम’!

Wednesday - July 31, 2019 11:34 am , Category : WTN HINDI
‘सावधानी’ ही बचा सकती है चेक बाउंस होने से
‘सावधानी’ ही बचा सकती है चेक बाउंस होने से

चेक बाउंस होने पर शिकायतकर्ता को मिलेगा 20 प्रतिशत ‘अंतरिम मुआवजा’

JULY 31 (WTN) – आधुनिक युग में रुपयों के लेन-देन के लिए इंटरनेट बैंकिंग का प्रचलन काफ़ी बढ़ गया है। वहीं यूपीआई और अन्य मोबाइल ऐप की सहायता से आप छोटी रकम को किसी को भी ट्रांसफर कर सकते हैं। लेकिन फ़िर भी कई सरकारी लेन-देन और बड़े ट्रांजेक्शन चेक के माध्यम से ही होते हैं। लेकिन अक्सर देखा गया है कि चेक बाउंस होने पर लोगों को काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है। समय-समय पर चेक बाउंस के कई मामले देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में आए थे, जिसके बाद कोर्ट ने चेक बाउंस के नियमों में संशोधन किया है।
 
आइये सबसे पहले तो आपको बताते हैं कि आख़िर कोई चेक बाउंस कैसे होता है? चेक बाउंस होने के कई कारण हैं। उनमें से एक कारण है चेक देने वाले के अकाउंट में चेक की राशि के बराबर पैसा ना होना। जैसे अगर आपको किसी ने चेक दिया है, और आप उसको कैश कराने के लिए बैंक में जमा करते हैं तो यह ज़रूरी है कि चेक जारी करने वाले के खाते में उतने पैसे होना चाहिए जितने का चेक उसने जारी किया है। अगर चेक जारी करने वाले के खाते में उतने पैसे नहीं होते हैं तो बैंक उस चेक को dishonor कर देता है। इस तरह से चेक के dishonor होने पर चेक बाउंस हो जाता है।
 
चेक बाउंस होने के अन्य कारण भी हैं, जैसे अगर आपका अकाउंट किसी कारण से फ्रीज हो जाए तब भी आपका चेक बाउंस हो सकता है। यदि चेक पर किये गये आपके हस्ताक्षर मैच नहीं होते हैं तो भी आपका चेक बाउंस हो जाएगा। वहीं चेक में ग़लत नाम या तारीख़ लिखने, अमाउंट में कोई बदलाव करने और ओवर राइटिंग करने के कारण आपका चेक बाउंस हो सकता है।
 
चेक बाउंस के नये नियमों के अनुसार अब चेक बाउंस होने के मामले में शिकायतकर्ता को अंतरिम मुआवजा हासिल होगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट करते हुए कहा है कि चेक बाउंस के मामलों में नेगोशिएबल इंस्‍ट्रूमेंट एक्‍ट की धारा 143 ए को साल 2018 में संशोधन किया था। अब इस संशोधन के बाद शिकायत दर्ज कराने वाले शिकायतकर्ता को चेक बाउंस होने की दशा में 20 प्रतिशत अंतरिम मुआवजा हासिल करने का हक़ मिलेगा।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नेगोशिएबल इंस्‍ट्रूमेंट एक्‍ट की धारा 143 ए के तहत प्रावधान है कि चेक बाउंस होने का मामला यदि अदालत में लम्बित है तो आरोपी द्वारा शिकायतकर्ता को 20 प्रतिशत अंतरिम मुआवजा देना होगा। नेगोशिएबल इंस्‍ट्रूमेंट एक्‍ट में संशोधन कर प्रावधान किया गया था कि चेक बाउंस होने की स्थिति में आरोपी को पहले ही चेक पर अंकित राशि की 20 प्रतिशत राशि अदालत में जमा करानी होगी। अगर निचली अदालत में फ़ैसला आरोपी के ख़िलाफ़ आता है, और वह ऊपरी अदालत में अपील करता है तो इस स्थिति में उसे फिर से कुल राशि की 20 प्रतिशत राशि अदालत में जमा करानी होगी।
 
नेगोशिएबल इंस्‍ट्रूमेंट एक्‍ट की धारा 143 के तहत चेक बाउंस के मामलों में सीआरपीसी की धारा 262 से लेकर 265 के प्रावधानों के अनुसार अधिकतम एक वर्ष की जेल और अधिकतम 5000 के जुर्माने का प्रावधान है। तो हमारी आपको सलाह है कि जब भी आप किसी को चेक जारी करें तो सबसे पहले यह देख लें कि आपके बैंक अकाउंट में पर्याप्त राशि है कि नहीं। वहीं चेक जारी करते समय जिसके नाम से चेक जारी करना है उसका सही नाम, रक़म, तारीख और सबसे ख़ास आपके हस्ताक्षर सही होना चाहिए। यदि आपने इन बातों का ध्यान रखा तो आपका चेक बाउंस नहीं होगा।