जानिए भारत में क्यों गठित होते हैं केन्द्र शासित प्रदेश?
Monday - August 5, 2019 3:37 pm ,
Category : WTN HINDI
भारत में होंगे अब 9 केन्द्र शासित प्रदेश
जम्मू कश्मीर और लद्दाख होंगे देश के दो ‘नये’ केन्द्र शासित प्रदेश
AUG 05 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि भारतीय संविधान के अनुसार हमारा देश भारत राज्यों का एक संघ है। अभी तक भारत में 29 राज्य और 7 केन्द्र शासित प्रदेश हैं, लेकिन अब भारत में 7 नहीं बल्कि 9 केन्द्र शासित प्रदेश होंगे। ऐसा इसलिए, क्योंकि अब जम्मू कश्मीर और लद्दाख भी केन्द्र शासित प्रदेश घोषित कर दिये गये हैं। केन्द्र की मोदी सरकार ने ऐतिहासिक फ़ैसला लेते हुए जम्मू कश्मीर राज्य में संविधान के अनुच्छेद 370 के सभी खण्ड लागू नहीं करने की घोषणा की है। वहीं मोदी सरकार ने राज्य पुनर्गठन बिल भी पेश किया है, जिससे जम्मू कश्मीर राज्य को दो हिस्सों में बांट दिया गया है।
अब जम्मू कश्मीर से लद्दाख को अलग कर एक नया केन्द्र शासित प्रदेश बनाया जाएगा, जहां पर कि विधानसभा नहीं रहेगी। वहीं अब जम्मू कश्मीर भी केन्द्र शासित प्रदेश होगा, लेकिन यहां पर विधानसभा होगा। लद्दाख में जहां उपराज्यपाल की नियुक्ति की जाएगी, वहीं जम्मू कश्मीर में राज्यपाल की नियुक्ति होगी। यानी कि भारत में अब 7 नहीं बल्कि 9 केन्द्र शासित प्रदेश होंगे। ये केन्द्र शासित प्रदेश होंगे; अण्डमान और निकोबार द्वीप, दिल्ली, पुदुचेरी, दमन और दीव, दादर नगर हवेली, लक्षद्वीप, चण्डीगढ़, जम्मू कश्मीर और लद्दाख
आइये आपको बताते हैं कि आख़िर केन्द्र शासित प्रदेश क्या होते हैं। दरअसल, केन्द्र शासित प्रदेश या संघ-राज्यक्षेत्र भारत के संघीय प्रशासनिक ढांचे की एक उप-राष्ट्रीय प्रशासनिक इकाई है। जैसा कि आप जानते हैं कि भारत के राज्यों की अपनी चुनी हुई सरकारें होती हैं, लेकिन केन्द्र शासित प्रदेशों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भारत सरकार का शासन होता है। संविधान के अनुसार भारत का राष्ट्रपति हर केन्द्र शासित प्रदेश का एक सरकारी प्रशासक या उप राज्यपाल नामित करता है।
आपके मन में यह सवाल तो उठता होगा कि आख़िर भारत में केन्द्र शासित प्रदेश क्यों बनाये गए हैं? दरअसल, इसका कोई स्पष्ट एक कारण नहीं है बल्कि इसके पीछे कई कारण हैं। इसमें कुछ महत्वपूर्ण कारण हैं जैसे कि छोटे आकार का क्षेत्र, कम जनसंख्या होना, संस्कृति महत्व, प्रशासनिक महत्व या फ़िर सामरिक दृष्टिकोण से संवेदनशील होना आदि।
भारत के केन्द्र शासित प्रदेशों का अध्ययन किया जाए तो साफ़ जाहिर होता है कि अलग-अलग कारणों से भारत में कुछ इलाकों को केन्द्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया है। सबसे पहले दिल्ली का उदाहरण लेते हैं। दिल्ली राज्य का क्षेत्रफल उतना बड़ा नहीं है कि उसे पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जा सके इसलिए उसे केन्द्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया है। वैसे दिल्ली इसमें एक अपवाद है, क्योंकि दिल्ली की जनसंख्या बाकी केन्द्र शासित राज्यों की तुलना में काफ़ी ज़्यादा है इसलिए यहां पर विधानसभा का गठन किया गया है। अब चुंकि अन्य केन्द्र शासित प्रदेशों में अलग से विधानसभा का गठन करने और मंत्रीपरिषद चलाने पर सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, इसलिए इसे केन्द्र के द्वारा द्वारा शासित किया जाता है।
चंडीगढ़ की बात की जाए तो इसके बारे में आपको बताते हैं कि एक नवम्बर 1966 को हरियाणा राज्य अस्तित्व में आया था, लेकिन चण्डीगढ़ का प्रशासनिक महत्व इतना था कि इसे पंजाब और हरियाणा दोनों में से कोई भी छोड़ने को तैयार नहीं था। ऐसे में तत्कालीन केन्द्र सरकार ने चण्डीगढ़ को केन्द्र शासित प्रदेश घोषित कर दिया, साथ ही इसे पंजाब और हरियाणा दोनों की ही राजधानी घोषित कर दिया।
जैसा कि आप जानते हैं कि लक्षद्वीप और अंडमान निकोबार दो ऐसे क्षेत्र हैं जो भारत की मुख्य भूमि से सुदूर स्थित हैं। सामरिक दृष्टि से यह दोनों ही क्षेत्र भारत के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इन दोनों ही इलाकों में भी विधानसभा का गठन कर एक अलग राज्य संचालित करना आसान नहीं है। लेकिन केन्द्र सरकार के जरिये वहां पर सीधे तौर पर वहां शासन आसान है और यह रणनीतिक रूप से भी काफ़ी अहम है। आपातकालीन स्थिति में भारत सरकार वहां पर कोई भी कार्रवाई कर सकती है, लेकिन एक राज्य में सरकार ऐसा नहीं कर सकती। इसी तरह से दमन एवं दीव, दादर नगर हवेली और पुदुचेरी को भी अलग-अलग कारणों से केन्द्र शासित प्रदेश बनाया गया है।
AUG 05 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि भारतीय संविधान के अनुसार हमारा देश भारत राज्यों का एक संघ है। अभी तक भारत में 29 राज्य और 7 केन्द्र शासित प्रदेश हैं, लेकिन अब भारत में 7 नहीं बल्कि 9 केन्द्र शासित प्रदेश होंगे। ऐसा इसलिए, क्योंकि अब जम्मू कश्मीर और लद्दाख भी केन्द्र शासित प्रदेश घोषित कर दिये गये हैं। केन्द्र की मोदी सरकार ने ऐतिहासिक फ़ैसला लेते हुए जम्मू कश्मीर राज्य में संविधान के अनुच्छेद 370 के सभी खण्ड लागू नहीं करने की घोषणा की है। वहीं मोदी सरकार ने राज्य पुनर्गठन बिल भी पेश किया है, जिससे जम्मू कश्मीर राज्य को दो हिस्सों में बांट दिया गया है।
अब जम्मू कश्मीर से लद्दाख को अलग कर एक नया केन्द्र शासित प्रदेश बनाया जाएगा, जहां पर कि विधानसभा नहीं रहेगी। वहीं अब जम्मू कश्मीर भी केन्द्र शासित प्रदेश होगा, लेकिन यहां पर विधानसभा होगा। लद्दाख में जहां उपराज्यपाल की नियुक्ति की जाएगी, वहीं जम्मू कश्मीर में राज्यपाल की नियुक्ति होगी। यानी कि भारत में अब 7 नहीं बल्कि 9 केन्द्र शासित प्रदेश होंगे। ये केन्द्र शासित प्रदेश होंगे; अण्डमान और निकोबार द्वीप, दिल्ली, पुदुचेरी, दमन और दीव, दादर नगर हवेली, लक्षद्वीप, चण्डीगढ़, जम्मू कश्मीर और लद्दाख
आइये आपको बताते हैं कि आख़िर केन्द्र शासित प्रदेश क्या होते हैं। दरअसल, केन्द्र शासित प्रदेश या संघ-राज्यक्षेत्र भारत के संघीय प्रशासनिक ढांचे की एक उप-राष्ट्रीय प्रशासनिक इकाई है। जैसा कि आप जानते हैं कि भारत के राज्यों की अपनी चुनी हुई सरकारें होती हैं, लेकिन केन्द्र शासित प्रदेशों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भारत सरकार का शासन होता है। संविधान के अनुसार भारत का राष्ट्रपति हर केन्द्र शासित प्रदेश का एक सरकारी प्रशासक या उप राज्यपाल नामित करता है।
आपके मन में यह सवाल तो उठता होगा कि आख़िर भारत में केन्द्र शासित प्रदेश क्यों बनाये गए हैं? दरअसल, इसका कोई स्पष्ट एक कारण नहीं है बल्कि इसके पीछे कई कारण हैं। इसमें कुछ महत्वपूर्ण कारण हैं जैसे कि छोटे आकार का क्षेत्र, कम जनसंख्या होना, संस्कृति महत्व, प्रशासनिक महत्व या फ़िर सामरिक दृष्टिकोण से संवेदनशील होना आदि।
भारत के केन्द्र शासित प्रदेशों का अध्ययन किया जाए तो साफ़ जाहिर होता है कि अलग-अलग कारणों से भारत में कुछ इलाकों को केन्द्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया है। सबसे पहले दिल्ली का उदाहरण लेते हैं। दिल्ली राज्य का क्षेत्रफल उतना बड़ा नहीं है कि उसे पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जा सके इसलिए उसे केन्द्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया है। वैसे दिल्ली इसमें एक अपवाद है, क्योंकि दिल्ली की जनसंख्या बाकी केन्द्र शासित राज्यों की तुलना में काफ़ी ज़्यादा है इसलिए यहां पर विधानसभा का गठन किया गया है। अब चुंकि अन्य केन्द्र शासित प्रदेशों में अलग से विधानसभा का गठन करने और मंत्रीपरिषद चलाने पर सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, इसलिए इसे केन्द्र के द्वारा द्वारा शासित किया जाता है।
चंडीगढ़ की बात की जाए तो इसके बारे में आपको बताते हैं कि एक नवम्बर 1966 को हरियाणा राज्य अस्तित्व में आया था, लेकिन चण्डीगढ़ का प्रशासनिक महत्व इतना था कि इसे पंजाब और हरियाणा दोनों में से कोई भी छोड़ने को तैयार नहीं था। ऐसे में तत्कालीन केन्द्र सरकार ने चण्डीगढ़ को केन्द्र शासित प्रदेश घोषित कर दिया, साथ ही इसे पंजाब और हरियाणा दोनों की ही राजधानी घोषित कर दिया।
जैसा कि आप जानते हैं कि लक्षद्वीप और अंडमान निकोबार दो ऐसे क्षेत्र हैं जो भारत की मुख्य भूमि से सुदूर स्थित हैं। सामरिक दृष्टि से यह दोनों ही क्षेत्र भारत के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इन दोनों ही इलाकों में भी विधानसभा का गठन कर एक अलग राज्य संचालित करना आसान नहीं है। लेकिन केन्द्र सरकार के जरिये वहां पर सीधे तौर पर वहां शासन आसान है और यह रणनीतिक रूप से भी काफ़ी अहम है। आपातकालीन स्थिति में भारत सरकार वहां पर कोई भी कार्रवाई कर सकती है, लेकिन एक राज्य में सरकार ऐसा नहीं कर सकती। इसी तरह से दमन एवं दीव, दादर नगर हवेली और पुदुचेरी को भी अलग-अलग कारणों से केन्द्र शासित प्रदेश बनाया गया है।