जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ‘अकेला’ हुआ पाकिस्तान!
Tuesday - August 6, 2019 1:03 pm ,
Category : WTN HINDI
प्रधानमंत्री मोदी की ‘कूटनीति’ से पाकिस्तान को मिला ‘सबक’
कश्मीर मुद्दे पर ना ही मुस्लिम देशों और ना ही चीन ने दिया पाकिस्तान का ‘साथ’!
AUG 06 (WTN) – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दृढ इच्छाशक्ति दिखाते हुए जम्मू कश्मीर के लिए जो फ़ैसला लिया है वो अपने आप में ऐतिहासिक है। जैसा कि आप जानते हैं कि भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के एक खण्ड के अलावा सभी खण्डों को ख़त्म कर दिया है। भारत सरकार के इस फ़ैसले पर सबसे ज़्यादा आपत्ति जताई है पाकिस्तान ने। आर्थिक रूप से बदहाली की क़गार पर पहुंच चुके पाकिस्तान ने भारत सरकार के आंतरिक मसले पर मुस्लिम देशों और अपने मित्र देशों से दखलंदाज़ी की गुजारिश की थी। लेकिन आईएमएफ से बेलआउट पैकेज की भीख मांगने वाला पाकिस्तान इस मसले पर अलग-थलग पड़ गया है।
यह सर्वविदित है कि कश्मीर भारत का हिस्सा है और इस पर किसी भी तरह के क़ानून बनाने का हक़ भारत सरकार को है। अपनी सम्प्रभुता के दायरे में भारत सरकार ने कश्मीर पर जो फ़ैसला लिया है वो फ़ैसला लेने का हक़ भारत सरकार को है। लेकिन भारत से हर क्षेत्र में मार खाए पाकिस्तान ने इस मसले पर दुनिया भर में मदद मांगी, लेकिन किसी ने भी पाकिस्तान का साथ नहीं दिया। जम्मू कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, “ भारत अधिकृत जम्मू-कश्मीर अंतर्राष्ट्रीय तौर पर विवादित क्षेत्र है। इस अंतर्राष्ट्रीय विवाद में एक पक्ष होने के कारण पाकिस्तान इस अनुचित क़दम का विरोध करने के लिए हर विकल्प का इस्तेमाल करेगा।”
जैसा कि आप जानते हैं कि पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे को बार-बार अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उठाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अब इस्लामाबाद को इसका क़रारा जवाब मिला है। पाकिस्तान में ही पाकिस्तान सरकार पर सवाल उठ रहे हैं कि पाकिस्तान के इंटेलिजेंस के डायरेक्टर को यह भनक क्यों नहीं लग पाई कि भारत सरकार कश्मीर में क्या करने की योजना बना रही है?
दरअसल, भारत सरकार के जम्मू-कश्मीर का विभाजन करने के फ़ैसले का विरोध पाकिस्तान इसलिए भी मज़बूत तरीक़े से नहीं कर सकता है, क्योंकि 1970 में उसने पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) से एक हिस्सा अलग कर नॉर्दर्न एरिया बना दिया था। बाद में 2009 में पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने नॉर्दर्न एरिया का नाम बदलकर गिलगिट-बाल्टिस्तान कर दिया था। भारत सरकार ने भी जम्मू-कश्मीर से लद्दाख को अलग कर उसे केन्द्र शासित प्रदेश घोषित कर पाकिस्तान को ज़ोरदार तरीक़े से सबक सिखाया है।
कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ खड़े होने वाले इस्लामिक सहयोग संगठन की तरफ़ से भी अनुच्छेद-370 खत्म किए जाने को लेकर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, 4 अगस्त को ही इस्लामिक देशों के संगठन ने कहा था, “भारत अधिकृत जम्मू-कश्मीर में बिगड़ते हालात चिंताजनक हैं।” पाकिस्तान का दोस्त बनकर भी उसे कर्ज़ में डूबाने वाले चीन ने भी अभी तक इस मसले पर चुप्पी साधी हुई है। इस पूरे मामले पर अभी तक चीन की चुप्पी आश्चर्यजनक है, क्योंकि भारत सरकार ने लद्दाख का भी दर्जा बदल दिया है, जबकि चीन लद्दाख के एक बड़े हिस्से जैसे अक्साई चिन पर अपना दावा करता रहता है।
अमेरिका, जिसकी आर्थिक सहायता से पाकिस्तान के ग़रीबों को दो वक़्त की रोटी नसीब हो पा रही है, उसने अनुच्छेद-370 को ख़त्म किया जाने के भारत सरकार के फ़ैसले को भारत सरकार का आंतरिक मामला माना है। अमेरिका के मुताबिक़, “हम जम्मू-कश्मीर के घटनाक्रमों पर क़रीब से नज़र बनाए हुए हैं। हम इस बात का संज्ञान लेते हैं कि जम्मू-कश्मीर का संवैधानिक दर्जा बदलने के फ़ैसले को भारत ने सख्त तौर पर अपना आंतरिक मामला करार दिया है।”
भारत से हर युद्ध में हारे पाकिस्तान को अपनी भारत विरोधी मुहिम में केवल एकमात्र देश तुर्की का साथ मिला है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगान को फोन कर मदद मांगी और उन्होंने कश्मीर में बदलते हालात पर पाकिस्तान को मदद देने का आश्वासन दिया।
जैसा कि आप जानते हैं कि मोदी सरकार की कूटनीति के कारण ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान अब अलग-थलग पड़ता जा रहा है। पाकिस्तान को यदि लगता है कि मुस्लिम देश भारत के अंदरुनी मसले पर पाकिस्तान का खुलकर साथ देंगे तो पाकिस्तान सपने देख रहा है। चीन में उइगर मुस्लिमों के साथ हो रहे अमानवीय अत्याचारों पर सऊदी अरब समेत कई मुस्लिम देशों ने चीन का विरोध नहीं किया तो ऐसे में भारत के आतंरिक मसले पर मुस्लिम देश शायद ही भारत के विरोध में आएं।
AUG 06 (WTN) – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दृढ इच्छाशक्ति दिखाते हुए जम्मू कश्मीर के लिए जो फ़ैसला लिया है वो अपने आप में ऐतिहासिक है। जैसा कि आप जानते हैं कि भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के एक खण्ड के अलावा सभी खण्डों को ख़त्म कर दिया है। भारत सरकार के इस फ़ैसले पर सबसे ज़्यादा आपत्ति जताई है पाकिस्तान ने। आर्थिक रूप से बदहाली की क़गार पर पहुंच चुके पाकिस्तान ने भारत सरकार के आंतरिक मसले पर मुस्लिम देशों और अपने मित्र देशों से दखलंदाज़ी की गुजारिश की थी। लेकिन आईएमएफ से बेलआउट पैकेज की भीख मांगने वाला पाकिस्तान इस मसले पर अलग-थलग पड़ गया है।
यह सर्वविदित है कि कश्मीर भारत का हिस्सा है और इस पर किसी भी तरह के क़ानून बनाने का हक़ भारत सरकार को है। अपनी सम्प्रभुता के दायरे में भारत सरकार ने कश्मीर पर जो फ़ैसला लिया है वो फ़ैसला लेने का हक़ भारत सरकार को है। लेकिन भारत से हर क्षेत्र में मार खाए पाकिस्तान ने इस मसले पर दुनिया भर में मदद मांगी, लेकिन किसी ने भी पाकिस्तान का साथ नहीं दिया। जम्मू कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, “ भारत अधिकृत जम्मू-कश्मीर अंतर्राष्ट्रीय तौर पर विवादित क्षेत्र है। इस अंतर्राष्ट्रीय विवाद में एक पक्ष होने के कारण पाकिस्तान इस अनुचित क़दम का विरोध करने के लिए हर विकल्प का इस्तेमाल करेगा।”
जैसा कि आप जानते हैं कि पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे को बार-बार अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उठाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अब इस्लामाबाद को इसका क़रारा जवाब मिला है। पाकिस्तान में ही पाकिस्तान सरकार पर सवाल उठ रहे हैं कि पाकिस्तान के इंटेलिजेंस के डायरेक्टर को यह भनक क्यों नहीं लग पाई कि भारत सरकार कश्मीर में क्या करने की योजना बना रही है?
दरअसल, भारत सरकार के जम्मू-कश्मीर का विभाजन करने के फ़ैसले का विरोध पाकिस्तान इसलिए भी मज़बूत तरीक़े से नहीं कर सकता है, क्योंकि 1970 में उसने पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) से एक हिस्सा अलग कर नॉर्दर्न एरिया बना दिया था। बाद में 2009 में पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने नॉर्दर्न एरिया का नाम बदलकर गिलगिट-बाल्टिस्तान कर दिया था। भारत सरकार ने भी जम्मू-कश्मीर से लद्दाख को अलग कर उसे केन्द्र शासित प्रदेश घोषित कर पाकिस्तान को ज़ोरदार तरीक़े से सबक सिखाया है।
कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ खड़े होने वाले इस्लामिक सहयोग संगठन की तरफ़ से भी अनुच्छेद-370 खत्म किए जाने को लेकर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, 4 अगस्त को ही इस्लामिक देशों के संगठन ने कहा था, “भारत अधिकृत जम्मू-कश्मीर में बिगड़ते हालात चिंताजनक हैं।” पाकिस्तान का दोस्त बनकर भी उसे कर्ज़ में डूबाने वाले चीन ने भी अभी तक इस मसले पर चुप्पी साधी हुई है। इस पूरे मामले पर अभी तक चीन की चुप्पी आश्चर्यजनक है, क्योंकि भारत सरकार ने लद्दाख का भी दर्जा बदल दिया है, जबकि चीन लद्दाख के एक बड़े हिस्से जैसे अक्साई चिन पर अपना दावा करता रहता है।
अमेरिका, जिसकी आर्थिक सहायता से पाकिस्तान के ग़रीबों को दो वक़्त की रोटी नसीब हो पा रही है, उसने अनुच्छेद-370 को ख़त्म किया जाने के भारत सरकार के फ़ैसले को भारत सरकार का आंतरिक मामला माना है। अमेरिका के मुताबिक़, “हम जम्मू-कश्मीर के घटनाक्रमों पर क़रीब से नज़र बनाए हुए हैं। हम इस बात का संज्ञान लेते हैं कि जम्मू-कश्मीर का संवैधानिक दर्जा बदलने के फ़ैसले को भारत ने सख्त तौर पर अपना आंतरिक मामला करार दिया है।”
भारत से हर युद्ध में हारे पाकिस्तान को अपनी भारत विरोधी मुहिम में केवल एकमात्र देश तुर्की का साथ मिला है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगान को फोन कर मदद मांगी और उन्होंने कश्मीर में बदलते हालात पर पाकिस्तान को मदद देने का आश्वासन दिया।
जैसा कि आप जानते हैं कि मोदी सरकार की कूटनीति के कारण ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान अब अलग-थलग पड़ता जा रहा है। पाकिस्तान को यदि लगता है कि मुस्लिम देश भारत के अंदरुनी मसले पर पाकिस्तान का खुलकर साथ देंगे तो पाकिस्तान सपने देख रहा है। चीन में उइगर मुस्लिमों के साथ हो रहे अमानवीय अत्याचारों पर सऊदी अरब समेत कई मुस्लिम देशों ने चीन का विरोध नहीं किया तो ऐसे में भारत के आतंरिक मसले पर मुस्लिम देश शायद ही भारत के विरोध में आएं।