क्या आरबीआई का नया सिस्टम इंटरनेट बैंकिंग फ्रॉड पर लगा पाएगा लगाम?
Thursday - August 8, 2019 2:01 pm ,
Category : WTN HINDI
बैंकिंग फ्रॉड रोकने भारतीय रिज़र्व बैंक की ‘नई पहल’
रिज़र्व बैंक का दावा: बैंकिंग फ्रॉड की घटनाओं को रोकेगा उसका ‘नया सिस्टम’!
AUG 08 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि इंटनरेट के इस युग में मनी ट्रांजैक्शन और शॉपिंग के लिए डिजिटल पेमेण्ट यानि कि इंटरनेट बैंकिग, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और यूपीआई आदि माध्यमों का प्रयोग किया जाता है। लेकिन देखा गया है कि इन आधुनिक तरीक़ों के इस्तेमाल के दौरान ज़रा सी भी लापरवाही से बैंकिंग फ्रॉड का काफ़ी ख़तरा बना रहता है। कई बार बैंकिंग फ्रॉड के कारण लोगों को काफ़ी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इस बारे में कई बार लोगों ने भारतीय रिज़र्व बैंक से इस बारे में शिकायत भी की है और सुझाव भी दिये हैं, जिसके बाद रिज़र्व बैंक ने बैंकिंग फ्रॉड से निपटने के लिए ज़रूरी कद़म उठाए हैं।
बैंकिंग फ्रॉड की बढ़ती घटनाओं और शिकायतों के बाद भारतीय रिज़र्व बैंक ने फ़ैसला लिया है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने और उनकी मॉनिटरिंग करने के लिए सेन्ट्रल पेमेण्ट फ्रॉड इंफोर्मेशन रजिस्ट्री बनाई जाएगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अभी इस तरह के बैंकिंग फ्रॉड सेन्ट्रल फ्रॉड मॉनिटरिंग सेल के पास रिपोर्ट होते हैं। इस बारे में रिज़र्व बैंक का कहना है कि दिनों-दिन डिजिटल पेमेंट में वृद्धि हो रही है, जिसके बाद पेमेण्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में वृद्धि हुई है। इसके कारण फ्रॉड रिस्क मॉनिटरिंग बहुत ज़रूरी हो गई है। रिज़र्व बैंक के पेमेण्ट सिस्टम विजन-2021 के तहत पेमेंट सिस्टम में फ्रॉड के डेटा कलेक्ट करने का लक्ष्य बनाया गया है।
रिज़र्व बैंक के मुताबिक़ यह नई रजिस्ट्री फ्रॉड को ट्रैक करेगी। वहीं पेमेण्ट सिस्टम के भागीदारों की इस रजिस्ट्री तक पहुंच होगी, ऐसा होने से वे फ्रॉड की मॉनिटरिंग कर सकेंगे। इस सिस्टम में ग्राहकों के साथ हुई धोखाधड़ी का डेटा उन्हें भी बताया जाएगा ताकि वे जागरूक हो सकें। जानकारी के अनुसार इस बारे में नियम और अन्य जानकारियां रिज़र्व बैंक अक्टूबर के महीने में जारी करेगा।
डिजिटल बैंकिंग में दिनों-दिन वृद्धि के बाद बैंकिंग फ्रॉड के मामलों में तेज़ी से वृद्धि देखी गई है। रिज़र्व बैंक द्वारा हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 11 सालों में 2.05 लाख करोड़ रुपए के बैंक फ्रॉड देश में हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक़ वित्त वर्ष 2009 से 2019 तक बैंकिंग फ्रॉड के क़रीब 50 हज़ार मामले सामने आए हैं।
बैंकिंग फ्रॉड की घटनाएं लगभग हर बैंक में हुई हैं, लेकिन इस तरह के फ्रॉड में निजी क्षेत्र के बैंक ICICI बैंक में सबसे ज़्यादा शिकायतें सामने आई हैं। इस दौरान ICICI बैंक में फ्रॉड के 6,811 मामले सामने आएं, जिसमें क़रीब 5,033 करोड़ रुपयों का फ्रॉड हुआ। वहीं सरकारी क्षेत्र की सबसे बड़ी बैंक SBI में पिछले 10 साल में फ्रॉड के 6,793 केस सामने आएं हैं।
रिज़र्व बैंक से इस तरह के किसी इंफ्रास्ट्रक्चर का काफ़ी समय से लोगों को इंतज़ार था। डिजिटल पेमेण्ट के जमाने में लोगों के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी आम बात हो गई है। वैसे यह सच है कि इस तरह की धोखाधड़ी डिजिटल पेमेण्ट करने वाले यूज़र्स की लापरवाही के कारण ही होती है, लेकिन फ़िर भी इस तरह की धोखाधड़ी को रोकने, ट्रेस करने और आंकड़े जुटाने के लिए एक सिस्टम की काफ़ी ज़रूरत महसूस की जा रही थी। अब देखना होगा कि रिज़र्व बैंक के इस क़दम के बाद क्या कुछ सुधार बैंकिंग फ्रॉड की घटनाओं में आता है?
AUG 08 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि इंटनरेट के इस युग में मनी ट्रांजैक्शन और शॉपिंग के लिए डिजिटल पेमेण्ट यानि कि इंटरनेट बैंकिग, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और यूपीआई आदि माध्यमों का प्रयोग किया जाता है। लेकिन देखा गया है कि इन आधुनिक तरीक़ों के इस्तेमाल के दौरान ज़रा सी भी लापरवाही से बैंकिंग फ्रॉड का काफ़ी ख़तरा बना रहता है। कई बार बैंकिंग फ्रॉड के कारण लोगों को काफ़ी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इस बारे में कई बार लोगों ने भारतीय रिज़र्व बैंक से इस बारे में शिकायत भी की है और सुझाव भी दिये हैं, जिसके बाद रिज़र्व बैंक ने बैंकिंग फ्रॉड से निपटने के लिए ज़रूरी कद़म उठाए हैं।
बैंकिंग फ्रॉड की बढ़ती घटनाओं और शिकायतों के बाद भारतीय रिज़र्व बैंक ने फ़ैसला लिया है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने और उनकी मॉनिटरिंग करने के लिए सेन्ट्रल पेमेण्ट फ्रॉड इंफोर्मेशन रजिस्ट्री बनाई जाएगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अभी इस तरह के बैंकिंग फ्रॉड सेन्ट्रल फ्रॉड मॉनिटरिंग सेल के पास रिपोर्ट होते हैं। इस बारे में रिज़र्व बैंक का कहना है कि दिनों-दिन डिजिटल पेमेंट में वृद्धि हो रही है, जिसके बाद पेमेण्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में वृद्धि हुई है। इसके कारण फ्रॉड रिस्क मॉनिटरिंग बहुत ज़रूरी हो गई है। रिज़र्व बैंक के पेमेण्ट सिस्टम विजन-2021 के तहत पेमेंट सिस्टम में फ्रॉड के डेटा कलेक्ट करने का लक्ष्य बनाया गया है।
रिज़र्व बैंक के मुताबिक़ यह नई रजिस्ट्री फ्रॉड को ट्रैक करेगी। वहीं पेमेण्ट सिस्टम के भागीदारों की इस रजिस्ट्री तक पहुंच होगी, ऐसा होने से वे फ्रॉड की मॉनिटरिंग कर सकेंगे। इस सिस्टम में ग्राहकों के साथ हुई धोखाधड़ी का डेटा उन्हें भी बताया जाएगा ताकि वे जागरूक हो सकें। जानकारी के अनुसार इस बारे में नियम और अन्य जानकारियां रिज़र्व बैंक अक्टूबर के महीने में जारी करेगा।
डिजिटल बैंकिंग में दिनों-दिन वृद्धि के बाद बैंकिंग फ्रॉड के मामलों में तेज़ी से वृद्धि देखी गई है। रिज़र्व बैंक द्वारा हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 11 सालों में 2.05 लाख करोड़ रुपए के बैंक फ्रॉड देश में हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक़ वित्त वर्ष 2009 से 2019 तक बैंकिंग फ्रॉड के क़रीब 50 हज़ार मामले सामने आए हैं।
बैंकिंग फ्रॉड की घटनाएं लगभग हर बैंक में हुई हैं, लेकिन इस तरह के फ्रॉड में निजी क्षेत्र के बैंक ICICI बैंक में सबसे ज़्यादा शिकायतें सामने आई हैं। इस दौरान ICICI बैंक में फ्रॉड के 6,811 मामले सामने आएं, जिसमें क़रीब 5,033 करोड़ रुपयों का फ्रॉड हुआ। वहीं सरकारी क्षेत्र की सबसे बड़ी बैंक SBI में पिछले 10 साल में फ्रॉड के 6,793 केस सामने आएं हैं।
रिज़र्व बैंक से इस तरह के किसी इंफ्रास्ट्रक्चर का काफ़ी समय से लोगों को इंतज़ार था। डिजिटल पेमेण्ट के जमाने में लोगों के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी आम बात हो गई है। वैसे यह सच है कि इस तरह की धोखाधड़ी डिजिटल पेमेण्ट करने वाले यूज़र्स की लापरवाही के कारण ही होती है, लेकिन फ़िर भी इस तरह की धोखाधड़ी को रोकने, ट्रेस करने और आंकड़े जुटाने के लिए एक सिस्टम की काफ़ी ज़रूरत महसूस की जा रही थी। अब देखना होगा कि रिज़र्व बैंक के इस क़दम के बाद क्या कुछ सुधार बैंकिंग फ्रॉड की घटनाओं में आता है?