अब सभी भारतीय क्रिकेट खिलाड़ियों का होगा डोप टेस्ट!
Friday - August 9, 2019 3:35 pm ,
Category : WTN HINDI
NADA के दायरे में आया BCCI
जानिए किन कारणों से NADA के दायरे में आने को BCCI हुआ राजी?
AUG 09 (WTN) – भारत में क्रिकेट एक धर्म की तरह है। हर गली मुहल्ले में खेला जाने वाले खेल क्रिकेट के लिए भारतीयों की भावनाएं अन्य खेलों की तुलना में कुछ अलग ही हैं। दो बार के क्रिकेट विश्व कप विजेता भारत ने दुनिया को क्रिकेट के बेहतरीन खिलाड़ी दिये हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि भारत में क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था बीसीसीआई है। आप यह भी जानते होंगे कि काफ़ी लम्बे समय से बीसीसीआई की स्वायत्तता और उसके अधिकारों को लेकर देश में बहस होती रहती है।
बीसीसीआई की कार्यप्रणाली के आलोचकों की काफ़ी समय से मांग थी कि बीसीसीआई यानी कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को राष्ट्रीय डोपिंग निरोधक एजेंसी (NADA) के दायरे में आना चाहिए। आलोचकों की इस मांग का काफ़ी समय तक बीसीसीआई ने विरोध किया, लेकिन सालों बाद बीसीसीआई आख़िरकार National Anti Doping Agency (NADA) के दायरे में आने को राजी हो गया है। बीसीसीआई के इस फ़ैसले की जानकारी खुद खेल सचिव राधेश्याम जुलानिया ने दी।
खेल सचिव राधेश्याम जुलानिया के मुताबिक़, बीसीसीआई ने यह लिखित में दिया है कि वह अब नाडा की डोपिंग निरोधक नीति का पालन करेगा। बीसीसीआई के सीईओ राहुल जोहरी से मुलाक़ात के बाद जुलानिया ने कहा कि अब सभी क्रिकेटरों का टेस्ट नाडा करेगी, जबकि पहले ऐसा नहीं होता था। बीसीसीआई खुद ही अपने स्तर पर खिलाड़ियों का डोप टेस्ट करती थी। इस पर आपत्ति जताते हुए नाडा ने स्पष्ट किया था कि बीसीसीआई के पास खिलाड़ियों के डोप टेस्ट का अधिकार नहीं है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नाडा के दायरे में आने के मुद्दे पर बीसीसीआई ने तीन मसलों पर चर्चा की थी। जैसे डोप टेस्ट किट्स की गुणवत्ता, पैथालाजिस्ट की काबिलियत और नमूने इकट्ठे करने की प्रक्रिया। कहा जा रहा है कि खेल मंत्रालय और नाडा की तरफ़ से बीसीसीआई को यह आश्वासन दिया गया कि उन्हें ज़रूरत के अनुसार सारी सुविधाएं दी जाएंगी। लेकिन इसके लिए बीसीसीआई को कुछ शुल्क अदा करना होगा, क्योंकि बीसीसीआई दूसरों से अलग नहीं है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अभी तक बीसीसीआई नाडा के दायरे में आने से इनकार करता आया है। बीसीसीआई का इस बारे में दावा रहा था कि वह एक स्वायत्त ईकाई है, और उसकी तरफ़ से सरकार से कोई भी फण्डिंग नहीं ली जाती है। बीसीसीआई का यह तर्क भी था कि वह कोई राष्ट्रीय खेल महासंघ नहीं है जो कि नाडा के अंतर्गत आने के लिए बाध्य हो।
हालांकि, खेल मंत्रालय लगातार बीसीसीआई से कहता आया है कि उसे नाडा के दायरे में खुद को लाना चाहिए। कहा जा रहा है कि बीसीसीआई को नाडा के दायरे में लाने के लिए 'दबाव की रणनीति' के तहत खेल मंत्रालय ने हाल ही में दक्षिण अफ्रीका-ए और महिला टीमों के दौरों की मंज़ूरी रोक दी थी। कहा यह भी जा रहा है कि खेल मंत्रालय ने बीसीसीआई से यह भी कह दिया था कि अगर बोर्ड नाडा के दायरे में आने के लिए राजी नहीं होता है तो सितम्बर में भारत आने वाली दक्षिण अफ्रीकी टीम को वीसा नहीं दिया जाएगा। जानकारों का मानना है कि खेल मंत्रालय के इसी कथित फ़ैसले के बाद बीसीसीआई नाडा के दायरे में आने के लिए तैयार हुआ है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि काफ़ी लम्बे समय से यह मांग की जा रही थी कि सभी क्रिकेट खिलाडियों का भी डोप टेस्ट होना चाहिए वो भी नाडा की तरफ से। जैसा कि आप जानते हैं कि अभी हाल ही में भारत के उभरते युवा बल्लेबाज पृथ्वी शॉ पर डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद आठ महीने का प्रतिबंध लगा है, जिसके बाद कहा जा रहा है कि बीसीसीआई पर यह एक और दबाव बढ़ गया था कि वो खुद को नाडा के दायरे में लाए। कहा जा सकता है कि खेल मंत्रालय की दबाव की रणनीति काम कर गई, और आख़िरकार बीसीसीआई को खुद को नाडा के दायरे में लाना ही पड़ा।
AUG 09 (WTN) – भारत में क्रिकेट एक धर्म की तरह है। हर गली मुहल्ले में खेला जाने वाले खेल क्रिकेट के लिए भारतीयों की भावनाएं अन्य खेलों की तुलना में कुछ अलग ही हैं। दो बार के क्रिकेट विश्व कप विजेता भारत ने दुनिया को क्रिकेट के बेहतरीन खिलाड़ी दिये हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि भारत में क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था बीसीसीआई है। आप यह भी जानते होंगे कि काफ़ी लम्बे समय से बीसीसीआई की स्वायत्तता और उसके अधिकारों को लेकर देश में बहस होती रहती है।
बीसीसीआई की कार्यप्रणाली के आलोचकों की काफ़ी समय से मांग थी कि बीसीसीआई यानी कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को राष्ट्रीय डोपिंग निरोधक एजेंसी (NADA) के दायरे में आना चाहिए। आलोचकों की इस मांग का काफ़ी समय तक बीसीसीआई ने विरोध किया, लेकिन सालों बाद बीसीसीआई आख़िरकार National Anti Doping Agency (NADA) के दायरे में आने को राजी हो गया है। बीसीसीआई के इस फ़ैसले की जानकारी खुद खेल सचिव राधेश्याम जुलानिया ने दी।
खेल सचिव राधेश्याम जुलानिया के मुताबिक़, बीसीसीआई ने यह लिखित में दिया है कि वह अब नाडा की डोपिंग निरोधक नीति का पालन करेगा। बीसीसीआई के सीईओ राहुल जोहरी से मुलाक़ात के बाद जुलानिया ने कहा कि अब सभी क्रिकेटरों का टेस्ट नाडा करेगी, जबकि पहले ऐसा नहीं होता था। बीसीसीआई खुद ही अपने स्तर पर खिलाड़ियों का डोप टेस्ट करती थी। इस पर आपत्ति जताते हुए नाडा ने स्पष्ट किया था कि बीसीसीआई के पास खिलाड़ियों के डोप टेस्ट का अधिकार नहीं है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नाडा के दायरे में आने के मुद्दे पर बीसीसीआई ने तीन मसलों पर चर्चा की थी। जैसे डोप टेस्ट किट्स की गुणवत्ता, पैथालाजिस्ट की काबिलियत और नमूने इकट्ठे करने की प्रक्रिया। कहा जा रहा है कि खेल मंत्रालय और नाडा की तरफ़ से बीसीसीआई को यह आश्वासन दिया गया कि उन्हें ज़रूरत के अनुसार सारी सुविधाएं दी जाएंगी। लेकिन इसके लिए बीसीसीआई को कुछ शुल्क अदा करना होगा, क्योंकि बीसीसीआई दूसरों से अलग नहीं है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अभी तक बीसीसीआई नाडा के दायरे में आने से इनकार करता आया है। बीसीसीआई का इस बारे में दावा रहा था कि वह एक स्वायत्त ईकाई है, और उसकी तरफ़ से सरकार से कोई भी फण्डिंग नहीं ली जाती है। बीसीसीआई का यह तर्क भी था कि वह कोई राष्ट्रीय खेल महासंघ नहीं है जो कि नाडा के अंतर्गत आने के लिए बाध्य हो।
हालांकि, खेल मंत्रालय लगातार बीसीसीआई से कहता आया है कि उसे नाडा के दायरे में खुद को लाना चाहिए। कहा जा रहा है कि बीसीसीआई को नाडा के दायरे में लाने के लिए 'दबाव की रणनीति' के तहत खेल मंत्रालय ने हाल ही में दक्षिण अफ्रीका-ए और महिला टीमों के दौरों की मंज़ूरी रोक दी थी। कहा यह भी जा रहा है कि खेल मंत्रालय ने बीसीसीआई से यह भी कह दिया था कि अगर बोर्ड नाडा के दायरे में आने के लिए राजी नहीं होता है तो सितम्बर में भारत आने वाली दक्षिण अफ्रीकी टीम को वीसा नहीं दिया जाएगा। जानकारों का मानना है कि खेल मंत्रालय के इसी कथित फ़ैसले के बाद बीसीसीआई नाडा के दायरे में आने के लिए तैयार हुआ है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि काफ़ी लम्बे समय से यह मांग की जा रही थी कि सभी क्रिकेट खिलाडियों का भी डोप टेस्ट होना चाहिए वो भी नाडा की तरफ से। जैसा कि आप जानते हैं कि अभी हाल ही में भारत के उभरते युवा बल्लेबाज पृथ्वी शॉ पर डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद आठ महीने का प्रतिबंध लगा है, जिसके बाद कहा जा रहा है कि बीसीसीआई पर यह एक और दबाव बढ़ गया था कि वो खुद को नाडा के दायरे में लाए। कहा जा सकता है कि खेल मंत्रालय की दबाव की रणनीति काम कर गई, और आख़िरकार बीसीसीआई को खुद को नाडा के दायरे में लाना ही पड़ा।