व्यापार में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को मिला भारत से ‘क़रारा जवाब’!
Monday - August 12, 2019 3:27 pm ,
Category : WTN HINDI
GSP लाभ का दर्जा हटने के बाद भी बढ़ा भारत का निर्यात
भारतीय उत्पादों की वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता में हुई वृद्धि
AUG 12 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति है। पूरी दुनिया में अमेरिकी व्यापार की इतना धमक है कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अमेरिकी डॉलर में ही होता है। पूरी दुनिया में अपनी व्यापारिक धौंस जमाने के लिए अमेरिका समय-समय पर अन्य देशों पर दवाब और प्रतिबंध की राजनीति करता रहता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कुछ दिनों पहले अमेरिका ने भारत को जीएसपी सिस्टम (Generalized preferential system) के तहत दिये जाने वाले लाभ को ख़त्म कर दिया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोचा था कि उनके इस दांव से भारत को घाटा होगा। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपित डोनाल्ड ट्रम्प की सोच पूरी तरह से ग़लत साबित हुई है। क्या है यह पूरा मामला? आईये इस बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।
सबसे पहले आपको बताते हैं कि आख़िर जीएसपी सिस्टम (Generalized preferential system) होता क्या है? और अमेरिका के इस सिस्टम से भारत को कैसा लाभ हो रहा था? GSP यानी कि Generalized preferential system अमेरिका द्वारा अन्य देशों को व्यापार में दी जाने वाली तरजीह की सबसे पुरानी और बड़ी प्रणाली है। इसकी शुरुआत साल 1976 में विकासशील देशों में आर्थिक वृद्धि बढ़ाने के लिए अमेरिकी ने की थी। GSP दर्जा प्राप्त देशों को इस सिस्टम के जरिये हज़ारों सामान बिना किसी शुल्क के अमेरिका को निर्यात करने की छूट मिलती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को लगा था कि इस सिस्टम के जरिये भारत अपने उत्पादों को सस्ती क़ीमत पर अमेरिका में बेंच देता है, लेकिन इसके बदले में अमेरिका को भारत में निर्यात करने में कुछ भी लाभ नहीं मिलता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हार्ले डेविडसन बाइक का उदाहरण देते हुआ कहा था कि भारत सरकार अमेरिका की इस बाइक के आयात पर भारी शुल्क लगाती है, जोकि अन्यायपूर्ण है।
इसी तरह के कई अन्य तर्कों को आधार बनाकर अमेरिका ने इसी साल 5 जून को भारतीय उत्पादों को सामान्यीकृत तरजीही प्रणाली (जीएसपी) के तहत मिलने वाली प्रोत्साहन सुविधा को समाप्त कर दिया था। इस सिस्टम के कारण भारत के 1,900 उत्पादों को यह सुविधा मिल रही थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत को दिये GSP दर्जे को समाप्त करते हुए कहा था कि भारत सरकार ने अमेरिका को अपने बाज़ार तक सामान और पहुंच उपलब्ध कराने का आश्वासन नहीं दिया है। हालांकि, कुछ अमेरिकी सांसदों ने राष्ट्रपति ट्रम्प को सलाह दी थी कि भारत से यह दर्जा वापस नहीं लिया जाए, क्योंकि ऐसा करने से अमेरिकी उद्योगपतियों को 30 करोड़ डॉलर का अतिरिक्त शुल्क हर साल देना पड़ेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत को दिये GSP लाभ के दर्जे को समाप्त करने के बाद शायद सोचा था कि इससे भारत को नुकसान होगा, लेकिन हुआ इससे उलटा। दरअसल, अमेरिका को इस व्यवस्था के तहत होने वाली वस्तुओं का भारत से निर्यात इस साल जून के महीने में 32 प्रतिशत बढ़ गया है। TPCI (Trade Promotion Council of India) ने USITC (United States International Trade Commission) के आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा है कि जिन भारतीय वस्तुओं को GSP का लाभ मिल रहा था, उन वस्तुओं का भारत से निर्यात पिछले साल जून के मुक़ाबले बढ़ा है। जहां पिछले साल 2018 में जून महीने में इन वस्तुओं का निर्यात 49.57 करोड़ डॉलर था, वहीं इस साल जून में यह निर्यात बढ़कर 65.74 करोड़ डॉलर पर पहुंच गया।
TPCI के अनुसार GSP लाभ का दर्जा खत्म होने के बाद इस दर्जे से निर्यात की जाने वाली वस्तुओं के निर्यात में 32 प्रतिशत की वृद्धि अपने आप में काफ़ी महत्वपूर्ण है। ऐसा इसलिए, क्योंकि इससे पहले GSP के तहत 19 करोड़ डॉलर के लाभ का दावा किया गया था। GSP के हटने के बाद बाद इस वृद्धि ने 16.17 करोड़ डॉलर के लाभ की भरपाई कर ली है। यानी कि अब सिर्फ़ 2.83 करोड़ डॉलर का लाभ हासिल करना बाक़ी रह गया है। जानकारी के मुताबिक़ जिन उत्पादों के निर्यात में तेज़ी देखी गयी है; उनमें मशीन और उपकरण, चमड़ा और खाल, प्लास्टिर रबर, मोती, एल्यूमीनियम और क़ीमती पत्थर आदि शामिल हैं।
कहा जा रहा था कि अमेरिका से मिलने वाला GSP लाभ का दर्जा ख़त्म होने के बाद भारतीय उत्पादों को अमेरिका में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। लेकिन GSP लाभ का दर्जा ख़त्म होने के बाद भी जिस तरह से भारत का अमेरिका को निर्यात पिछले साल की तुलना में इस साल जून में 32 प्रतिशत बढ़ गया है, यह दर्शाता है कि भारतीय उत्पादों में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता है। यानी कि साफ़ जाहिर होता है कि विश्व की सातवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश भारत अब वैश्विक स्तर पर व्यापारिक प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हो गया है।
AUG 12 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति है। पूरी दुनिया में अमेरिकी व्यापार की इतना धमक है कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अमेरिकी डॉलर में ही होता है। पूरी दुनिया में अपनी व्यापारिक धौंस जमाने के लिए अमेरिका समय-समय पर अन्य देशों पर दवाब और प्रतिबंध की राजनीति करता रहता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कुछ दिनों पहले अमेरिका ने भारत को जीएसपी सिस्टम (Generalized preferential system) के तहत दिये जाने वाले लाभ को ख़त्म कर दिया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोचा था कि उनके इस दांव से भारत को घाटा होगा। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपित डोनाल्ड ट्रम्प की सोच पूरी तरह से ग़लत साबित हुई है। क्या है यह पूरा मामला? आईये इस बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।
सबसे पहले आपको बताते हैं कि आख़िर जीएसपी सिस्टम (Generalized preferential system) होता क्या है? और अमेरिका के इस सिस्टम से भारत को कैसा लाभ हो रहा था? GSP यानी कि Generalized preferential system अमेरिका द्वारा अन्य देशों को व्यापार में दी जाने वाली तरजीह की सबसे पुरानी और बड़ी प्रणाली है। इसकी शुरुआत साल 1976 में विकासशील देशों में आर्थिक वृद्धि बढ़ाने के लिए अमेरिकी ने की थी। GSP दर्जा प्राप्त देशों को इस सिस्टम के जरिये हज़ारों सामान बिना किसी शुल्क के अमेरिका को निर्यात करने की छूट मिलती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को लगा था कि इस सिस्टम के जरिये भारत अपने उत्पादों को सस्ती क़ीमत पर अमेरिका में बेंच देता है, लेकिन इसके बदले में अमेरिका को भारत में निर्यात करने में कुछ भी लाभ नहीं मिलता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हार्ले डेविडसन बाइक का उदाहरण देते हुआ कहा था कि भारत सरकार अमेरिका की इस बाइक के आयात पर भारी शुल्क लगाती है, जोकि अन्यायपूर्ण है।
इसी तरह के कई अन्य तर्कों को आधार बनाकर अमेरिका ने इसी साल 5 जून को भारतीय उत्पादों को सामान्यीकृत तरजीही प्रणाली (जीएसपी) के तहत मिलने वाली प्रोत्साहन सुविधा को समाप्त कर दिया था। इस सिस्टम के कारण भारत के 1,900 उत्पादों को यह सुविधा मिल रही थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत को दिये GSP दर्जे को समाप्त करते हुए कहा था कि भारत सरकार ने अमेरिका को अपने बाज़ार तक सामान और पहुंच उपलब्ध कराने का आश्वासन नहीं दिया है। हालांकि, कुछ अमेरिकी सांसदों ने राष्ट्रपति ट्रम्प को सलाह दी थी कि भारत से यह दर्जा वापस नहीं लिया जाए, क्योंकि ऐसा करने से अमेरिकी उद्योगपतियों को 30 करोड़ डॉलर का अतिरिक्त शुल्क हर साल देना पड़ेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत को दिये GSP लाभ के दर्जे को समाप्त करने के बाद शायद सोचा था कि इससे भारत को नुकसान होगा, लेकिन हुआ इससे उलटा। दरअसल, अमेरिका को इस व्यवस्था के तहत होने वाली वस्तुओं का भारत से निर्यात इस साल जून के महीने में 32 प्रतिशत बढ़ गया है। TPCI (Trade Promotion Council of India) ने USITC (United States International Trade Commission) के आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा है कि जिन भारतीय वस्तुओं को GSP का लाभ मिल रहा था, उन वस्तुओं का भारत से निर्यात पिछले साल जून के मुक़ाबले बढ़ा है। जहां पिछले साल 2018 में जून महीने में इन वस्तुओं का निर्यात 49.57 करोड़ डॉलर था, वहीं इस साल जून में यह निर्यात बढ़कर 65.74 करोड़ डॉलर पर पहुंच गया।
TPCI के अनुसार GSP लाभ का दर्जा खत्म होने के बाद इस दर्जे से निर्यात की जाने वाली वस्तुओं के निर्यात में 32 प्रतिशत की वृद्धि अपने आप में काफ़ी महत्वपूर्ण है। ऐसा इसलिए, क्योंकि इससे पहले GSP के तहत 19 करोड़ डॉलर के लाभ का दावा किया गया था। GSP के हटने के बाद बाद इस वृद्धि ने 16.17 करोड़ डॉलर के लाभ की भरपाई कर ली है। यानी कि अब सिर्फ़ 2.83 करोड़ डॉलर का लाभ हासिल करना बाक़ी रह गया है। जानकारी के मुताबिक़ जिन उत्पादों के निर्यात में तेज़ी देखी गयी है; उनमें मशीन और उपकरण, चमड़ा और खाल, प्लास्टिर रबर, मोती, एल्यूमीनियम और क़ीमती पत्थर आदि शामिल हैं।
कहा जा रहा था कि अमेरिका से मिलने वाला GSP लाभ का दर्जा ख़त्म होने के बाद भारतीय उत्पादों को अमेरिका में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। लेकिन GSP लाभ का दर्जा ख़त्म होने के बाद भी जिस तरह से भारत का अमेरिका को निर्यात पिछले साल की तुलना में इस साल जून में 32 प्रतिशत बढ़ गया है, यह दर्शाता है कि भारतीय उत्पादों में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता है। यानी कि साफ़ जाहिर होता है कि विश्व की सातवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश भारत अब वैश्विक स्तर पर व्यापारिक प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हो गया है।