कश्मीर मुद्दे पर काम आई प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘कूटनीति’
Tuesday - August 13, 2019 10:11 am ,
Category : WTN HINDI
प्रधानमंत्री मोदी के कारण पाकिस्तान को कश्मीर मुद्दे पर मिली ‘हार’!
कश्मीर मसले पर पूरी दुनिया में ‘अकेला’ पड़ा पाकिस्तान!
AUG 13 (WTN) – कश्मीर मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 'कूटनीति' के कारण पाकिस्तान पूरी दुनिया में 'अकेला' पड़ गया है। जैसा कि आप जानते हैं कि मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35 ए को ख़त्म कर दिया है। भारत सरकार के इस आंतरिक फ़ैसले पर पाकिस्तान ने ऐसा बवाल मचाया जैसे कि यह उसके देश से जुड़ा मामला हो। पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार पूरी कोशिश कर रही है कि कश्मीर के मुद्दे पर उसे अंतर्राष्ट्रीय 'समर्थन' हासिल हो जाए, लेकिन मोदी सरकार की कूटनीति के आगे पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार की सारी कूटनीति 'फेल' साबित हो रही है।
पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर सुपर पावर अमेरिका से समर्थन की 'आशा' की थी, लेकिन अमेरिका ने पाकिस्तान से स्पष्ट शब्दों में कह दिया है कि कश्मीर के मुद्दे पर उसका वही स्टैण्ड हैं जो कि पहले था। अमेरिका के अलावा रूस ने भी भारत का साथ देते हुए कहा कि कश्मीर मुद्दे पर भारत सरकार का फ़ैसला उसका 'आंतरिक मामला' है। पाकिस्तान को आशा थी कि उसकी हर 'ग़लत' हरकत पर उसका साथ देने वाला चीन इस मामले में उसका साथ देगा, लेकिन कश्मीर मुद्दे पर चीन ने संतुलन रूख अपनाते हुए कहा कि दोनों ही देशों, भारत और पाकिस्तान को इस मामले पर 'शान्ति' से काम लेना चाहिए।
कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को मुस्लिम देशों से भी आशा थी कि वे 'खुलकर' पाकिस्तान का साथ देंगे। लेकिन तुर्की के अलावा किसी अन्य मुस्लिम देश ने पाकिस्तान का कश्मीर मुद्दे पर खुलकर साथ नहीं दिया है। जाहिर है कि मोदी सरकार की कूटनीति के आगे पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार की हर चालबाज़ी 'नाकामयाब' साबित हो रही है। पाकिस्तान ने इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उठाने का फ़ैसला लिया है, लेकिन इससे पहले ही उसे एक और 'झटका' मिल गया है।
पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के मौजूदा अध्यक्ष देश पोलैण्ड ने कश्मीर मद्दे पर 'बातचीत' की सलाह दी है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के वर्तमान अध्यक्ष देश पोलैण्ड ने स्पष्ट कह दिया है कि नई दिल्ली और इस्लामाबाद को कश्मीर मुद्दे का समाधान 'द्विपक्षीय स्तर' पर ही सुलझाना होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण कूटनीतिक रिश्तों पर पोलैण्ड ने पहली बार प्रतिक्रिया दी है।
पोलैण्ड की इस प्रतिक्रिया के बाद यूएनएससी में कश्मीर मुद्दा उठाने की पाकिस्तान की कोशिशों पर फ़िलहाल पानी फ़िर गया है। इस महीने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता पोलैण्ड के पास है। आपका जानना ज़रूरी है कि सुरक्षा परिषद के सदस्य देश बारी-बारी से हर महीने अध्यक्षता करते हैं।
दरअसल, मोदी सरकार कश्मीर मुद्दे पर कूटनीति के तहत पूरी दुनिया में यह बताने में 'सफल' रही है कि कश्मीर मुद्दा भारत का आंतरिक मुद्दा है, और कश्मीर के बारे में कोई भी फ़ैसला लेने की आज़ादी भारत सरकार को है। इसी कूटनीति के तहत भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पोलैण्ड के विदेश मंत्री जेसेक जापुतोविक्ज से कुछ दिनों पहले फोन पर बातचीत की थी।
इधर, भारत में पोलैण्ड के राजदूत एडम बुराकोव्सकी का कश्मीर मुद्दे पर कहना है, “पोलैण्ड उम्मीद करता है कि दोनों देश मिलकर द्विपक्षीय स्तर पर इस मुद्दे का समाधान निकाल लेंगे। पोलैण्ड का मानना है कि किसी भी विवाद का समाधान 'शान्तिपूर्ण' तरीक़े से ही किया जा सकता है। यूरोपीय यूनियन की तरह पोलैण्ड भी भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता का पक्षधर है।”
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के वर्तमान अध्यक्ष पोलैण्ड के रूख़ के बाद साफ़तौर से भारत का कश्मीर मुद्दे पर पक्ष 'मज़बूत' हुआ है। ऐसा इसलिए, क्योंकि भारत हमेशा से यही कहता आया है कि कश्मीर का मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच का आंतरिक मुद्दा है, और इस मुद्दे को 1972 के शिमला समझौते और 1999 के लाहौर घोषणा पत्र के तहत ही दोनों देश मिलकर सुलझाएंगे।
मोदी सरकार की कूटनीति के आगे फेल नज़र आ रहे पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भी आख़िरकार 'कबूल' लिया है कि कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को समर्थन मिलना 'मुश्किल' है। कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी का कहना है, “संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के निजी हित भारत से हैं, और इन देशों ने भारत में अरबों का निवेश किया हुआ है। ऐसे में यह देश कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ देंगे यह बेहद मुश्किल है।”
तो स्पष्ट है कि मोदी सरकार की कूटनीति के कारण पाकिस्तान, कश्मीर मुद्दे पर पूरी दुनिया में
'अकेला' पड़ गया है। हालांकि, पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कश्मीर मुद्दा उठाने का प्रयास करेगा, लेकिन मोदी सरकार ने कूटनीतिक स्तर पर कश्मीर मुद्दे की इतने बेहतरीन तरीक़े से लॉबिंग की है, जिसके कारण पाकिस्तान को इस मामले में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हार का ही सामना करना पड़ेगा।
AUG 13 (WTN) – कश्मीर मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 'कूटनीति' के कारण पाकिस्तान पूरी दुनिया में 'अकेला' पड़ गया है। जैसा कि आप जानते हैं कि मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35 ए को ख़त्म कर दिया है। भारत सरकार के इस आंतरिक फ़ैसले पर पाकिस्तान ने ऐसा बवाल मचाया जैसे कि यह उसके देश से जुड़ा मामला हो। पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार पूरी कोशिश कर रही है कि कश्मीर के मुद्दे पर उसे अंतर्राष्ट्रीय 'समर्थन' हासिल हो जाए, लेकिन मोदी सरकार की कूटनीति के आगे पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार की सारी कूटनीति 'फेल' साबित हो रही है।
पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर सुपर पावर अमेरिका से समर्थन की 'आशा' की थी, लेकिन अमेरिका ने पाकिस्तान से स्पष्ट शब्दों में कह दिया है कि कश्मीर के मुद्दे पर उसका वही स्टैण्ड हैं जो कि पहले था। अमेरिका के अलावा रूस ने भी भारत का साथ देते हुए कहा कि कश्मीर मुद्दे पर भारत सरकार का फ़ैसला उसका 'आंतरिक मामला' है। पाकिस्तान को आशा थी कि उसकी हर 'ग़लत' हरकत पर उसका साथ देने वाला चीन इस मामले में उसका साथ देगा, लेकिन कश्मीर मुद्दे पर चीन ने संतुलन रूख अपनाते हुए कहा कि दोनों ही देशों, भारत और पाकिस्तान को इस मामले पर 'शान्ति' से काम लेना चाहिए।
कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को मुस्लिम देशों से भी आशा थी कि वे 'खुलकर' पाकिस्तान का साथ देंगे। लेकिन तुर्की के अलावा किसी अन्य मुस्लिम देश ने पाकिस्तान का कश्मीर मुद्दे पर खुलकर साथ नहीं दिया है। जाहिर है कि मोदी सरकार की कूटनीति के आगे पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार की हर चालबाज़ी 'नाकामयाब' साबित हो रही है। पाकिस्तान ने इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उठाने का फ़ैसला लिया है, लेकिन इससे पहले ही उसे एक और 'झटका' मिल गया है।
पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के मौजूदा अध्यक्ष देश पोलैण्ड ने कश्मीर मद्दे पर 'बातचीत' की सलाह दी है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के वर्तमान अध्यक्ष देश पोलैण्ड ने स्पष्ट कह दिया है कि नई दिल्ली और इस्लामाबाद को कश्मीर मुद्दे का समाधान 'द्विपक्षीय स्तर' पर ही सुलझाना होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण कूटनीतिक रिश्तों पर पोलैण्ड ने पहली बार प्रतिक्रिया दी है।
पोलैण्ड की इस प्रतिक्रिया के बाद यूएनएससी में कश्मीर मुद्दा उठाने की पाकिस्तान की कोशिशों पर फ़िलहाल पानी फ़िर गया है। इस महीने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता पोलैण्ड के पास है। आपका जानना ज़रूरी है कि सुरक्षा परिषद के सदस्य देश बारी-बारी से हर महीने अध्यक्षता करते हैं।
दरअसल, मोदी सरकार कश्मीर मुद्दे पर कूटनीति के तहत पूरी दुनिया में यह बताने में 'सफल' रही है कि कश्मीर मुद्दा भारत का आंतरिक मुद्दा है, और कश्मीर के बारे में कोई भी फ़ैसला लेने की आज़ादी भारत सरकार को है। इसी कूटनीति के तहत भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पोलैण्ड के विदेश मंत्री जेसेक जापुतोविक्ज से कुछ दिनों पहले फोन पर बातचीत की थी।
इधर, भारत में पोलैण्ड के राजदूत एडम बुराकोव्सकी का कश्मीर मुद्दे पर कहना है, “पोलैण्ड उम्मीद करता है कि दोनों देश मिलकर द्विपक्षीय स्तर पर इस मुद्दे का समाधान निकाल लेंगे। पोलैण्ड का मानना है कि किसी भी विवाद का समाधान 'शान्तिपूर्ण' तरीक़े से ही किया जा सकता है। यूरोपीय यूनियन की तरह पोलैण्ड भी भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता का पक्षधर है।”
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के वर्तमान अध्यक्ष पोलैण्ड के रूख़ के बाद साफ़तौर से भारत का कश्मीर मुद्दे पर पक्ष 'मज़बूत' हुआ है। ऐसा इसलिए, क्योंकि भारत हमेशा से यही कहता आया है कि कश्मीर का मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच का आंतरिक मुद्दा है, और इस मुद्दे को 1972 के शिमला समझौते और 1999 के लाहौर घोषणा पत्र के तहत ही दोनों देश मिलकर सुलझाएंगे।
मोदी सरकार की कूटनीति के आगे फेल नज़र आ रहे पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भी आख़िरकार 'कबूल' लिया है कि कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को समर्थन मिलना 'मुश्किल' है। कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी का कहना है, “संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के निजी हित भारत से हैं, और इन देशों ने भारत में अरबों का निवेश किया हुआ है। ऐसे में यह देश कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ देंगे यह बेहद मुश्किल है।”
तो स्पष्ट है कि मोदी सरकार की कूटनीति के कारण पाकिस्तान, कश्मीर मुद्दे पर पूरी दुनिया में
'अकेला' पड़ गया है। हालांकि, पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कश्मीर मुद्दा उठाने का प्रयास करेगा, लेकिन मोदी सरकार ने कूटनीतिक स्तर पर कश्मीर मुद्दे की इतने बेहतरीन तरीक़े से लॉबिंग की है, जिसके कारण पाकिस्तान को इस मामले में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हार का ही सामना करना पड़ेगा।