जानिए क्या है वैश्विक आर्थिक मंदी के कारण और भारत पर पड़ेगा कितना असर?
Friday - August 16, 2019 3:38 pm ,
Category : WTN HINDI
अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के कारण दुनिया पर आर्थिक मंदी का ‘ख़तरा’
वैश्विक आर्थिक मंदी की आहट से ‘सहमी’ दुनिया!
AUG 16 (WTN) – साल 2008 की आर्थिक मंदी से उबरने में पूरी दुनिया को काफ़ी वक़्त लग गया था। लेकिन जब तक दुनिया भर के देशों की अर्थव्यवस्था 2008 की आर्थिक मंदी से उबर और सुधर पाती, तब तक आर्थिक मंदी के कारण दुनिया भर के देशों की जीडीपी पर तो इसका नकारात्मक असर पड़ा ही, इसके कारण लाखों लोगों को अपनी नौकरी भी गंवानी पड़ी थी। जैसे-तैसे दुनिया 2008 की आर्थिक मंदी से उबरी ही थी कि अब एक बार फ़िर से आर्थिक मंदी की आहट से पूरी दुनिया में डर का माहौल है।
अमेरिकी की प्रसिद्ध इंवेस्टमेंट बैंकिंग कम्पनी मॉर्गन स्टेनली ने एक बार फिर से पूरी दुनिया में आर्थिक मंदी के संकेत दिए हैं। मॉर्गन स्टेलनी के मुताबिक़, दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं, अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर के कारण एक बार फ़िर से वैश्विकस्तर पर आर्थिक मंदी की आशंका व्यक्त की जा रही है। पिछले काफ़ी समय से अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर के कारण दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं में मंदी के संकेत देखे जा रहे हैं।
मार्गन स्टेनली की रिपोर्ट के अनुसार, सम्भावित आर्थिक मंदी अगले 9 महीनों में आ जाएगी। अब आपको मन में यह सवाल ज़रूर उठ रहा होगा कि इस सम्भावित आर्थिक मंदी का भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत इस सम्भावित आर्थिक मंदी के दुष्प्रभावों से थोड़ा दूर ही रहेगा। पर मॉर्गन स्टेनली ने भारत सरकार को सलाह दी है कि वैश्विक आर्थिक मंदी से निपटने के लिए सरकार को सचेत रहना होगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वैसे तो वैश्विक आर्थिक मंदी का ज़्यादा दुष्प्रभाव भारत पर नहीं पड़ेगा, लेकिन फ़िर भी सरकार को इसकी अनदेखी किये बिना इससे बचने और निपटने के लिए ज़रूरी क़दम उठाने होंगे। ऐसा नहीं है कि सम्भावित वैश्विक आर्थिक मंदी की जानकारी भारत के अर्थशास्त्रियों को नहीं है। भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने का इस बारे में कहना है कि सम्भावित आर्थिक मंदी का भारत पर ज़्यादा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि नीतिगत तौर पर भारत में सबकुछ सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। सम्भावित आर्थिक मंदी के कारण पूरी दुनिया के सेम्ट्रल बैंक ब्याज दरों में कटौती कर रहे हैं। इसी कड़ी में भारतीय रिज़र्व बैंक ने पिछले दिनों रेपो रेट में 0.35 प्रतिशत की कटौती की थी।
मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि अमेरिका और चीन के बीच एक बार फ़िर से ट्रेड वॉर बढ़ता है, तो इस स्थिति में चीन से आने वाले सामानों पर अमेरिका ड्यूटी बढ़ाकर 25 प्रतिशत तक कर सकता है। यदि अमेरिका ऐसा करता है, तो ऐसा करते ही आने वाले तीन महीनों में ही पूरी दुनिया आर्थिक मंदी का सामना कर रही होगी। जहां तक भारत पर वैश्विक आर्थिक मंदी के असर की बात है तो भारत के सभी क्षेत्रों को आर्थिक मंदी का सामना नहीं करना पड़ेगा। पर भारत का ऑटो सेक्टर धीरे-धीरे आर्थिक मंदी के चपेट में आता दिख रहा है।
जैसा कि आप जानते हैं कि पिछले एक साल से भारत में ऑटो सेक्टर में मंदी का दौर देखा जा रहा है। इस दौरान दोपहिया से लेकर चार पहिया वाहनों तक की बिक्री कम हुई है, वहीं वाहनों की कम बिक्री के कारण उत्पादन पर भी ख़ासा असर पड़ा है। इन्हीं सब कारणों से ऑटो सेक्टर में सेल्स से लेकर प्रोडक्शन तक में हज़ारों लोगों को नौकरियां से हाथ धोना पड़ा है। ऑटो सेक्टर में मंदी का यह आलम है कि कोई कम्पनियों ने वाहनों का उत्पादन या तो रोक दिया, या फ़िर उसमें कमी कर दी है।
जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर जारी है। पर ट्रेड वॉर जारी रहने के बीच भी दोनों देशों के बीच इसे सुलझाने के लिए बातचीत चल रही है, लेकिन इस बातचीत का कोई सकारात्मक परिणाम निकलता नहीं दिख रहा है। इस सबके बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का कहना है कि चीन के साथ जारी ट्रेड टॉक को निरस्त किया जा सकता है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था और अमेरिकी राजनीति के जानकारों का मानना है कि साल 2020 के आख़िर में होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव तक डोनाल्ड ट्रम्प का यही रवैया रह सकता है, और यदि ट्रम्प का यही रूख रहा तो अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर का ख़तरा तब तक बना रहेगा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले दिनों डोनाल्ड ट्रम्प ने एक ट्वीट में कहा था कि वह 1 सितम्बर से चीन से आने वाले 300 बिलियन डॉलर के सामान पर 10 प्रतिशत का टैरिफ लगाएंगे। ट्रम्प ने कहा कि यह टैरिफ 250 बिलियन डॉलर के सामान पर लगने वाले 25 प्रतिशत के टैरिफ से अलग होगा। मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि अगर अमेरिका ने चीन के 300 बिलियन डॉलर सामान पर टैरिफ बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया तो पूरी दुनिया तीन महीनों में ही मंदी आ जाएगी।
साफ़ जाहिर है कि अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर का ख़ामियाज़ा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ सकता है। सभी जानते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प जरा तुनकमिजाज़ हैं। ऐसे में राष्ट्रपति चुनाव और चीन के साथ प्रतिस्पर्धा के चलते ट्रम्प चीनी सामान पर टैरिफ बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर सकते हैं।
ऐसे में देखना होगा कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर इस आर्थिक मंदी का कैसा और कितना असर पड़ता है? वैसे मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट के मुताबिक़, सम्भावित आर्थिक मंदी का ज़्यादा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ेगा, लेकिन जिस तरह से भारतीय ऑटो सेक्टर में मंदी के कारण अफरातफरी मची हुई है, उससे एक डर है कि कहीं वैश्विक आर्थिक मंदी का भारतीय अर्थव्यवस्था पर ज़्यादा नकारात्मक असर ना पड़े।
AUG 16 (WTN) – साल 2008 की आर्थिक मंदी से उबरने में पूरी दुनिया को काफ़ी वक़्त लग गया था। लेकिन जब तक दुनिया भर के देशों की अर्थव्यवस्था 2008 की आर्थिक मंदी से उबर और सुधर पाती, तब तक आर्थिक मंदी के कारण दुनिया भर के देशों की जीडीपी पर तो इसका नकारात्मक असर पड़ा ही, इसके कारण लाखों लोगों को अपनी नौकरी भी गंवानी पड़ी थी। जैसे-तैसे दुनिया 2008 की आर्थिक मंदी से उबरी ही थी कि अब एक बार फ़िर से आर्थिक मंदी की आहट से पूरी दुनिया में डर का माहौल है।
अमेरिकी की प्रसिद्ध इंवेस्टमेंट बैंकिंग कम्पनी मॉर्गन स्टेनली ने एक बार फिर से पूरी दुनिया में आर्थिक मंदी के संकेत दिए हैं। मॉर्गन स्टेलनी के मुताबिक़, दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं, अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर के कारण एक बार फ़िर से वैश्विकस्तर पर आर्थिक मंदी की आशंका व्यक्त की जा रही है। पिछले काफ़ी समय से अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर के कारण दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं में मंदी के संकेत देखे जा रहे हैं।
मार्गन स्टेनली की रिपोर्ट के अनुसार, सम्भावित आर्थिक मंदी अगले 9 महीनों में आ जाएगी। अब आपको मन में यह सवाल ज़रूर उठ रहा होगा कि इस सम्भावित आर्थिक मंदी का भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत इस सम्भावित आर्थिक मंदी के दुष्प्रभावों से थोड़ा दूर ही रहेगा। पर मॉर्गन स्टेनली ने भारत सरकार को सलाह दी है कि वैश्विक आर्थिक मंदी से निपटने के लिए सरकार को सचेत रहना होगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वैसे तो वैश्विक आर्थिक मंदी का ज़्यादा दुष्प्रभाव भारत पर नहीं पड़ेगा, लेकिन फ़िर भी सरकार को इसकी अनदेखी किये बिना इससे बचने और निपटने के लिए ज़रूरी क़दम उठाने होंगे। ऐसा नहीं है कि सम्भावित वैश्विक आर्थिक मंदी की जानकारी भारत के अर्थशास्त्रियों को नहीं है। भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने का इस बारे में कहना है कि सम्भावित आर्थिक मंदी का भारत पर ज़्यादा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि नीतिगत तौर पर भारत में सबकुछ सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। सम्भावित आर्थिक मंदी के कारण पूरी दुनिया के सेम्ट्रल बैंक ब्याज दरों में कटौती कर रहे हैं। इसी कड़ी में भारतीय रिज़र्व बैंक ने पिछले दिनों रेपो रेट में 0.35 प्रतिशत की कटौती की थी।
मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि अमेरिका और चीन के बीच एक बार फ़िर से ट्रेड वॉर बढ़ता है, तो इस स्थिति में चीन से आने वाले सामानों पर अमेरिका ड्यूटी बढ़ाकर 25 प्रतिशत तक कर सकता है। यदि अमेरिका ऐसा करता है, तो ऐसा करते ही आने वाले तीन महीनों में ही पूरी दुनिया आर्थिक मंदी का सामना कर रही होगी। जहां तक भारत पर वैश्विक आर्थिक मंदी के असर की बात है तो भारत के सभी क्षेत्रों को आर्थिक मंदी का सामना नहीं करना पड़ेगा। पर भारत का ऑटो सेक्टर धीरे-धीरे आर्थिक मंदी के चपेट में आता दिख रहा है।
जैसा कि आप जानते हैं कि पिछले एक साल से भारत में ऑटो सेक्टर में मंदी का दौर देखा जा रहा है। इस दौरान दोपहिया से लेकर चार पहिया वाहनों तक की बिक्री कम हुई है, वहीं वाहनों की कम बिक्री के कारण उत्पादन पर भी ख़ासा असर पड़ा है। इन्हीं सब कारणों से ऑटो सेक्टर में सेल्स से लेकर प्रोडक्शन तक में हज़ारों लोगों को नौकरियां से हाथ धोना पड़ा है। ऑटो सेक्टर में मंदी का यह आलम है कि कोई कम्पनियों ने वाहनों का उत्पादन या तो रोक दिया, या फ़िर उसमें कमी कर दी है।
जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर जारी है। पर ट्रेड वॉर जारी रहने के बीच भी दोनों देशों के बीच इसे सुलझाने के लिए बातचीत चल रही है, लेकिन इस बातचीत का कोई सकारात्मक परिणाम निकलता नहीं दिख रहा है। इस सबके बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का कहना है कि चीन के साथ जारी ट्रेड टॉक को निरस्त किया जा सकता है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था और अमेरिकी राजनीति के जानकारों का मानना है कि साल 2020 के आख़िर में होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव तक डोनाल्ड ट्रम्प का यही रवैया रह सकता है, और यदि ट्रम्प का यही रूख रहा तो अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर का ख़तरा तब तक बना रहेगा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले दिनों डोनाल्ड ट्रम्प ने एक ट्वीट में कहा था कि वह 1 सितम्बर से चीन से आने वाले 300 बिलियन डॉलर के सामान पर 10 प्रतिशत का टैरिफ लगाएंगे। ट्रम्प ने कहा कि यह टैरिफ 250 बिलियन डॉलर के सामान पर लगने वाले 25 प्रतिशत के टैरिफ से अलग होगा। मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि अगर अमेरिका ने चीन के 300 बिलियन डॉलर सामान पर टैरिफ बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया तो पूरी दुनिया तीन महीनों में ही मंदी आ जाएगी।
साफ़ जाहिर है कि अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर का ख़ामियाज़ा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ सकता है। सभी जानते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प जरा तुनकमिजाज़ हैं। ऐसे में राष्ट्रपति चुनाव और चीन के साथ प्रतिस्पर्धा के चलते ट्रम्प चीनी सामान पर टैरिफ बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर सकते हैं।
ऐसे में देखना होगा कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर इस आर्थिक मंदी का कैसा और कितना असर पड़ता है? वैसे मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट के मुताबिक़, सम्भावित आर्थिक मंदी का ज़्यादा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ेगा, लेकिन जिस तरह से भारतीय ऑटो सेक्टर में मंदी के कारण अफरातफरी मची हुई है, उससे एक डर है कि कहीं वैश्विक आर्थिक मंदी का भारतीय अर्थव्यवस्था पर ज़्यादा नकारात्मक असर ना पड़े।