मेन्स इनरवेयर की कम बिक्री दे रही है वैश्विक आर्थिक मंदी का संकेत!
Saturday - August 17, 2019 3:40 pm ,
Category : WTN HINDI
पूरी दुनिया में वैश्विक आर्थिक मंदी की ‘आहट’
जानिए क्या है 'मेन्स अंडरवेयर इंडेक्स' जो कर रहा है आर्थिक मंदी की ओर संकेत?
AUG 17 (WTN) – यदि आपसे कहा जाए कि मेन्स इनरवेयर की बिक्री से वैश्विक अर्थव्यवस्था के मंदी में होने या ना होने का पता चलता है, तो यह पढ़कर आप सोच में पड़ गये होंगे कि आख़िर ऐसा भी हो सकता है क्या? जीहां ऐसा ही होता है, और इसके पीछे क्या अर्थशास्त्र है, आइये इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं। दरअसल, मेन्य इनरवेयर कि बिक्री से भारत समेत पूरी दुनिया में वैश्विक अर्थव्यवस्था के मंदी में जाने की स्थिति को लेकर मिलने वाले संकेत मिलने लगे हैं।
दरअसल, अमेरिकी सेन्ट्रल बैंक फेडरल रिज़र्व के पूर्व चेयरमैन एलन ग्रीनस्पैन ने इनवियर की बिक्री को लेकर एक इंडेक्स साल 1970 में तैयार किया था। इस इंडेक्स को 'मेन्स अंडरवेयर इंडेक्स' कहा जाता है। इसमें पुरुषों के अंडरवेयर की बिक्री में आई गिरावट से अर्थव्यवस्था की ख़राब हालत को दर्शाने के संकेतों का आंकलन किया जाता है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, देश की चार बड़ी मेन्स इनरवेयर कम्पनियों के तिमाही नतीजे 10 साल में सबसे कमज़ोर रहे हैं। तिमाही नतीजे कमज़ोर रहने का अर्थ है कि इन कम्पनियों की बिक्री में कमी आई है, जिसके कारण इनका मुनाफ़ा कम हुआ है। बात करें जॉकी इनरवेयर की तो इसकी बिक्री में सिर्फ़ 2 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है, जो कि साल 2008 के बाद से सबसे कम है। वहीं डॉलर इंडस्ट्रीज की बिक्री में 4 प्रतिशत और वीआईपी क्लॉथिंग में 20 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। वहीं लक्स इंडस्ट्रीज की बिक्री में ना तो वृद्धि दर्ज की गई और ना ही गिरावट दर्ज की गई है।
'मेन्स अंडरवेयर इंडेक्स' का अध्ययन करने वालों का कहना है कि Mens Underwear Index भी वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती का संकेत भारत समेत दुनिया के अन्य देशों में दे रहा है। मेन्स इनरवेयर की बिक्री में कमी से संकेत मिल रहे हैं कि धीरे-धीरे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था सुस्ती की तरफ़ बढ़ रही है। आइये अब आपको बताते हैं कि आख़िर Mens Underwear Index काम किस तरह से करता है।
अर्थशास्त्र के जानकारों के मुताबिक़, 'मेन्स अंडरवेयर इंडेक्स' ने साल 1990, 2001 और 2007 में अमेरिकी मंदी से ठीक पहले भी इसी तरह के संकेत दिए थे। एक उदाहरण के तौर पर आपको समझाते हैं कि यदि मंदी होगी तो ख़र्च में कटौती के लिए बच्चों के माता-पिता उनके डायपर कम बदलते हैं यानी कि डायपर की बिक्री कम हो जाती है। अब जबकि डायपर कम बदलने के कारण बच्चों को रैशेज ज़्यादा होते हैं, इसलिए डायपर रैश क्रीम की बिक्री बढ़ जाती है। इसी तरह से मंदी के दौरान पुरुष खर्चा बचाने के लिए अपने अंडरवेयर की ख़रीदी कम करते हैं, जिसके कारण इसकी बिक्री कम होने लगती है। अंडरवेयर की बिक्री कम होने से 'मेन्स अंडरवेयर इंडेक्स' संकेत देता है कि मंदी की शुरुआत हो चुकी है।
'मेन्स अंडरवेयर इंडेक्स' ही नहीं बल्कि इन दिनों डेटिंग इंडिकेटर की भी बहुत चर्चा हो रही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका में स्थित ऑनलाइन डेटिंग सर्विस Match.com ने डेटिंग और मंदी के बीच एक पैटर्न के बारे में विस्तार से बताया है। इस पैटर्न के मुताबिक़ जब कम्पनियां आर्थिक रूप से मुश्किलों दिनों में होती हैं, तो उस समय कर्मचारियों के बीच डेटिंग बढ़ जाती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि अपने दुखों को बांटने और ग़म को हल्का करने के लिए डेटिंग साइट्स पर लोग साथी ढूंढते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी के दौरान साल 2008 की चौथी तिमाही में डेटिंग साइट की व्यस्तता सात साल में सबसे ज़्यादा थी।
तो साफ़ जाहिर है कि 'मेन्स अंडरवेयर इंडेक्स' और डेटिंग इंडिकेटर संकेत दे रहे हैं कि पूरी दुनिया धीरे-धीरे मंदी की चपेट में आती जा रही है। भारत का ऑटो सेक्टर तो पिछले एक साल से मंदी की मार झेल रहा है। वैसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संकेत दिये हैं कि आर्थिक मंदी से निपटने के लिए ज़रूरी उपाय सरकार की तरफ़ किये जाएंगे। वैसे अमेरिकी की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत पर वैश्विक आर्थिक मंदी का ज़्यादा असर नहीं पड़ेगा, यदि मोदी सरकार पहले ही एहतियातन क़दम उठा ले। अब देखना होगा कि वैश्विक आर्थिक मंदी से निपटने के लिए केन्द्र की मोदी सरकार क्या कुछ क़दम उठाती है, जिससे देश की जनता आर्थिक मंदी के दुष्प्रभाव से बच सके।
AUG 17 (WTN) – यदि आपसे कहा जाए कि मेन्स इनरवेयर की बिक्री से वैश्विक अर्थव्यवस्था के मंदी में होने या ना होने का पता चलता है, तो यह पढ़कर आप सोच में पड़ गये होंगे कि आख़िर ऐसा भी हो सकता है क्या? जीहां ऐसा ही होता है, और इसके पीछे क्या अर्थशास्त्र है, आइये इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं। दरअसल, मेन्य इनरवेयर कि बिक्री से भारत समेत पूरी दुनिया में वैश्विक अर्थव्यवस्था के मंदी में जाने की स्थिति को लेकर मिलने वाले संकेत मिलने लगे हैं।
दरअसल, अमेरिकी सेन्ट्रल बैंक फेडरल रिज़र्व के पूर्व चेयरमैन एलन ग्रीनस्पैन ने इनवियर की बिक्री को लेकर एक इंडेक्स साल 1970 में तैयार किया था। इस इंडेक्स को 'मेन्स अंडरवेयर इंडेक्स' कहा जाता है। इसमें पुरुषों के अंडरवेयर की बिक्री में आई गिरावट से अर्थव्यवस्था की ख़राब हालत को दर्शाने के संकेतों का आंकलन किया जाता है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, देश की चार बड़ी मेन्स इनरवेयर कम्पनियों के तिमाही नतीजे 10 साल में सबसे कमज़ोर रहे हैं। तिमाही नतीजे कमज़ोर रहने का अर्थ है कि इन कम्पनियों की बिक्री में कमी आई है, जिसके कारण इनका मुनाफ़ा कम हुआ है। बात करें जॉकी इनरवेयर की तो इसकी बिक्री में सिर्फ़ 2 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है, जो कि साल 2008 के बाद से सबसे कम है। वहीं डॉलर इंडस्ट्रीज की बिक्री में 4 प्रतिशत और वीआईपी क्लॉथिंग में 20 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। वहीं लक्स इंडस्ट्रीज की बिक्री में ना तो वृद्धि दर्ज की गई और ना ही गिरावट दर्ज की गई है।
'मेन्स अंडरवेयर इंडेक्स' का अध्ययन करने वालों का कहना है कि Mens Underwear Index भी वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती का संकेत भारत समेत दुनिया के अन्य देशों में दे रहा है। मेन्स इनरवेयर की बिक्री में कमी से संकेत मिल रहे हैं कि धीरे-धीरे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था सुस्ती की तरफ़ बढ़ रही है। आइये अब आपको बताते हैं कि आख़िर Mens Underwear Index काम किस तरह से करता है।
अर्थशास्त्र के जानकारों के मुताबिक़, 'मेन्स अंडरवेयर इंडेक्स' ने साल 1990, 2001 और 2007 में अमेरिकी मंदी से ठीक पहले भी इसी तरह के संकेत दिए थे। एक उदाहरण के तौर पर आपको समझाते हैं कि यदि मंदी होगी तो ख़र्च में कटौती के लिए बच्चों के माता-पिता उनके डायपर कम बदलते हैं यानी कि डायपर की बिक्री कम हो जाती है। अब जबकि डायपर कम बदलने के कारण बच्चों को रैशेज ज़्यादा होते हैं, इसलिए डायपर रैश क्रीम की बिक्री बढ़ जाती है। इसी तरह से मंदी के दौरान पुरुष खर्चा बचाने के लिए अपने अंडरवेयर की ख़रीदी कम करते हैं, जिसके कारण इसकी बिक्री कम होने लगती है। अंडरवेयर की बिक्री कम होने से 'मेन्स अंडरवेयर इंडेक्स' संकेत देता है कि मंदी की शुरुआत हो चुकी है।
'मेन्स अंडरवेयर इंडेक्स' ही नहीं बल्कि इन दिनों डेटिंग इंडिकेटर की भी बहुत चर्चा हो रही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका में स्थित ऑनलाइन डेटिंग सर्विस Match.com ने डेटिंग और मंदी के बीच एक पैटर्न के बारे में विस्तार से बताया है। इस पैटर्न के मुताबिक़ जब कम्पनियां आर्थिक रूप से मुश्किलों दिनों में होती हैं, तो उस समय कर्मचारियों के बीच डेटिंग बढ़ जाती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि अपने दुखों को बांटने और ग़म को हल्का करने के लिए डेटिंग साइट्स पर लोग साथी ढूंढते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी के दौरान साल 2008 की चौथी तिमाही में डेटिंग साइट की व्यस्तता सात साल में सबसे ज़्यादा थी।
तो साफ़ जाहिर है कि 'मेन्स अंडरवेयर इंडेक्स' और डेटिंग इंडिकेटर संकेत दे रहे हैं कि पूरी दुनिया धीरे-धीरे मंदी की चपेट में आती जा रही है। भारत का ऑटो सेक्टर तो पिछले एक साल से मंदी की मार झेल रहा है। वैसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संकेत दिये हैं कि आर्थिक मंदी से निपटने के लिए ज़रूरी उपाय सरकार की तरफ़ किये जाएंगे। वैसे अमेरिकी की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत पर वैश्विक आर्थिक मंदी का ज़्यादा असर नहीं पड़ेगा, यदि मोदी सरकार पहले ही एहतियातन क़दम उठा ले। अब देखना होगा कि वैश्विक आर्थिक मंदी से निपटने के लिए केन्द्र की मोदी सरकार क्या कुछ क़दम उठाती है, जिससे देश की जनता आर्थिक मंदी के दुष्प्रभाव से बच सके।