हांगकांग में सैन्य कार्रवाई की आशंका के बीच पूरी दुनिया में ‘अकेला’ पड़ सकता है चीन!
Monday - August 19, 2019 1:12 pm ,
Category : WTN HINDI
लगातार जारी है हांगकांग में चीन विरोधी प्रदर्शन
हांगकांग में प्रदर्शनकारियों पर सैन्य कार्रवाई की ‘आशंका’; अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन को दी ‘चेतावनी’
AUG 19 (WTN) – 'विस्तावरवादी मानसिकता' वाले देश चीन की साम्यवादी सरकार जिस तरह का 'तानाशाही' रवैया उसके स्वायत्तशासी क्षेत्र हांगकांग में अपना रही है, उसकी पूरी दुनिया में उसकी आलोचना हो रही है। चीन की सरकार का जो रवैया हांगकांग में प्रत्यपर्ण बिल का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ है, उससे तो ऐसा लगता है कि इस रवैये के ख़िलाफ़ पूरी दुनिया के देश चीन के ख़िलाफ़ खड़े ना हो जाएं। क्या है यह पूरा मामला? आइये आपको विस्तार से इसके बारे में बताते हैं।
दरअसल, चीनी सरकार के एक बिल के विरोध में हांगकांग में इन दिनों विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है। चीनी सरकार के इस बिल के मुताबिक़ यदि कोई व्यक्ति चीन में अपराध करने के बाद हांगकांग में आता है, तो उसे मुकदमे और सजा के लिए चीन वापस ले जाया जा सकता है। चीन की साम्यवादी सरकार के इसी बिल के विरोध में पिछले काफ़ी दिनों से हांगकांग में विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं, जिसमें हर वर्ग के लोग बढ़ चढ़कर शिरकत कर रहे हैं।
हांगकांग में चल रहे शान्तिपूर्ण प्रदर्शन पर जो 'रूख' चीन की सरकार ने अपनाया है, इससे दुनिया को आशंका है कि चीन की साम्यवादी सरकार इस आंदोलन का दमन उसी तरह से ना करे, जैसा कि उसने 1989 में लोकतंत्र समर्थक आंदोलन का किया था। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 1989 में चीन में साम्यवादी सरकार की जगह पर लोकतंत्र की स्थापना के लिए छात्रों ने बड़े पैमाना पर 'शान्तिपूर्ण' तरीक़े से आंदोलन चलाया था। चीन की राजधानी बीजिंग का थियानमेन चौक इस ऐतिहासिक प्रदर्शन का गवाह था। लेकिन चीन ने साम्यवादी सरकार ने छात्रों के शान्तिपूर्ण प्रदर्शन को काफ़ी 'बेरहमी' से कुचल दिया था।
साल 1989 में छात्रों के लोकतंत्र समर्थन आंदोलन को दबाने के लिए चीन की सरकार ने बीजिंग के थियानमेन चौक पर सेना के टैंकों को सड़कों पर उतार दिया था। चीन सरकार की इस 'बर्बरतापूर्ण' कार्रवाई में क़रीब 10,000 आम नागरिकों की जान चली गई थी। चीन की साम्यवादी सरकार ने जिस बर्बरता से छात्रों के आंदोलन को दबाया था, उसकी आजतक हर कहीं निंदा होती है।
इधर, अब जबकि हांगकांग में चीनी सरकार के ख़िलाफ़ हज़ारों की तादात में प्रत्यर्पण बिल विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं, तो ऐसे में चीन ने हांगकांग सीमा पर 'सैन्य गतिविधियों' को तेज़ कर दिया है। अंतर्राष्ट्रीय मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, चीन की साम्यवादी सरकार ने हांगकांग की सीमा के पास सैन्य टैंकों की 'तैनाती' कर दी है। इधर, चीन सरकार की इन गतिविधियों की पूरी दुनिया में कड़ी निंदा हो रही है।
हांगकांग में प्रदर्शनकारियों पर सैन्य कार्रवाई से आशंकित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। हांगकांग में चीन की गतिविधियों पर नज़र बनाए रखे डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन को 'धमकी' दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों पर थियानमेन चौक जैसी कार्रवाई हुई, तो दोनों देशों के बीच जारी व्यापार वार्ता को समाप्त कर दिया जाएगा।
इधर, हांगकांग में चीन विरोधी प्रदर्शन रूकने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। चीनी सरकार की तमाम 'गम्भीर चेतावनियों' को 'नज़रअंदाज़' करते हुए हर दिन हज़ारों की तादात में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। चीनी सरकार के प्रत्यर्पण बिल का हांगकांग में इतने बड़े पैमाने पर जबरदस्त तरीक़े से विरोध हो रहा है कि पूरा हांगकांग इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गया है। हांगकांग निवासियों का विरोध देखते हुए चीनी सरकार के प्रत्यपर्ण बिल को फ़िलहाल हांगकांग सरकार ने निलम्बित कर दिया है।
वैसे हांगकांग सरकार द्वारा विवादित प्रत्यर्पण बिल की वापसी और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की हिंसक कार्रवाई की जांच के आश्वासन के बाद यहां चल रहा प्रदर्शन रविवार को थोड़ा शांत रहा। हालांकि, प्रदर्शनकारियों की तरफ़ से आंदोलन ख़त्म करने के कोई संकेत नहीं मिले हैं। इधर, हांगकांग के एक नेता कैरी लैन चेंग के मुताबिक़, प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें मान ली गई हैं। इस बारे में एक सरकारी प्रवक्ता का कहना है कि जल्द ही शान्ति और सामाजिक सद्भभाव के लिए सरकार प्रदर्शनकारियों के साथ ईमानदारी के साथ बातचीत करेगी।
लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हांगकांग में चीन सरकार के ख़िलाफ़ चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच, हांगकांग की सीमा से सिर्फ़ सात किलोमीटर की दूरी पर स्थित चीन के शेनझेन शहर के एक बड़े स्पोर्ट्स स्टेडियम में हज़ारों चीनी सैनिकों ने परेड की। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, चीन के विशेष सुरक्षा बल पीपुल्स आर्म्ड पुलिस (PAP) के जवानों के साथ कई बख्तरबंद वाहन भी इस परेड में देखे गए। इस परेड को हांगकांग में लोकतंत्र के समर्थन में हो रहे विरोध प्रदर्शनों से जोड़कर देखा जा रहा है।
शेनझेन शहर में चीनी सेना की मौजूदगी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि चीनी सरकार, हांगकांग में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए किसी बड़ी कार्रवाई के 'मूड' में है। कहा जा रहा है कि यदि हांगकांग में प्रशासन के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन नहीं रुके, तो चीन की साम्यवादी सरकार किसी भी समय प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई कर सकती है, जैसी कार्रवाई उसने 1989 में थियाममेन चौक पर की थी।
यदि चीन की सरकार ने हांगकांग में सैन्य कार्रवाई कर प्रदर्शनकारियों के आंदोलन को दबाया, तो पूरी दुनिया के देश चीन सरकार के ख़िलाफ़ खड़े हो जाएंगे। जहां एक तरफ़ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हांगकांग में सैन्य कार्रवाई होने पर चीन के साथ व्यापार वार्ता ख़त्म करने की 'चेतावनी' दी है, तो वहीं दुनिया के अन्य देश भी अपने-अपने स्तर पर हांगकांग में चीन की सैन्य कार्रवाई के ख़िलाफ़ अपना-अपना विरोध दर्ज करा सकते हैं। यानी कि कहा जा सकता है कि चीन के स्वायत्तशासी क्षेत्र हांगकांग में चीनी सरकारी की सैन्य कार्रवाई उसे पूरी दुनिया में अलग-थलग कर सकती है।
AUG 19 (WTN) – 'विस्तावरवादी मानसिकता' वाले देश चीन की साम्यवादी सरकार जिस तरह का 'तानाशाही' रवैया उसके स्वायत्तशासी क्षेत्र हांगकांग में अपना रही है, उसकी पूरी दुनिया में उसकी आलोचना हो रही है। चीन की सरकार का जो रवैया हांगकांग में प्रत्यपर्ण बिल का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ है, उससे तो ऐसा लगता है कि इस रवैये के ख़िलाफ़ पूरी दुनिया के देश चीन के ख़िलाफ़ खड़े ना हो जाएं। क्या है यह पूरा मामला? आइये आपको विस्तार से इसके बारे में बताते हैं।
दरअसल, चीनी सरकार के एक बिल के विरोध में हांगकांग में इन दिनों विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है। चीनी सरकार के इस बिल के मुताबिक़ यदि कोई व्यक्ति चीन में अपराध करने के बाद हांगकांग में आता है, तो उसे मुकदमे और सजा के लिए चीन वापस ले जाया जा सकता है। चीन की साम्यवादी सरकार के इसी बिल के विरोध में पिछले काफ़ी दिनों से हांगकांग में विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं, जिसमें हर वर्ग के लोग बढ़ चढ़कर शिरकत कर रहे हैं।
हांगकांग में चल रहे शान्तिपूर्ण प्रदर्शन पर जो 'रूख' चीन की सरकार ने अपनाया है, इससे दुनिया को आशंका है कि चीन की साम्यवादी सरकार इस आंदोलन का दमन उसी तरह से ना करे, जैसा कि उसने 1989 में लोकतंत्र समर्थक आंदोलन का किया था। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 1989 में चीन में साम्यवादी सरकार की जगह पर लोकतंत्र की स्थापना के लिए छात्रों ने बड़े पैमाना पर 'शान्तिपूर्ण' तरीक़े से आंदोलन चलाया था। चीन की राजधानी बीजिंग का थियानमेन चौक इस ऐतिहासिक प्रदर्शन का गवाह था। लेकिन चीन ने साम्यवादी सरकार ने छात्रों के शान्तिपूर्ण प्रदर्शन को काफ़ी 'बेरहमी' से कुचल दिया था।
साल 1989 में छात्रों के लोकतंत्र समर्थन आंदोलन को दबाने के लिए चीन की सरकार ने बीजिंग के थियानमेन चौक पर सेना के टैंकों को सड़कों पर उतार दिया था। चीन सरकार की इस 'बर्बरतापूर्ण' कार्रवाई में क़रीब 10,000 आम नागरिकों की जान चली गई थी। चीन की साम्यवादी सरकार ने जिस बर्बरता से छात्रों के आंदोलन को दबाया था, उसकी आजतक हर कहीं निंदा होती है।
इधर, अब जबकि हांगकांग में चीनी सरकार के ख़िलाफ़ हज़ारों की तादात में प्रत्यर्पण बिल विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं, तो ऐसे में चीन ने हांगकांग सीमा पर 'सैन्य गतिविधियों' को तेज़ कर दिया है। अंतर्राष्ट्रीय मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, चीन की साम्यवादी सरकार ने हांगकांग की सीमा के पास सैन्य टैंकों की 'तैनाती' कर दी है। इधर, चीन सरकार की इन गतिविधियों की पूरी दुनिया में कड़ी निंदा हो रही है।
हांगकांग में प्रदर्शनकारियों पर सैन्य कार्रवाई से आशंकित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। हांगकांग में चीन की गतिविधियों पर नज़र बनाए रखे डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन को 'धमकी' दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों पर थियानमेन चौक जैसी कार्रवाई हुई, तो दोनों देशों के बीच जारी व्यापार वार्ता को समाप्त कर दिया जाएगा।
इधर, हांगकांग में चीन विरोधी प्रदर्शन रूकने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। चीनी सरकार की तमाम 'गम्भीर चेतावनियों' को 'नज़रअंदाज़' करते हुए हर दिन हज़ारों की तादात में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। चीनी सरकार के प्रत्यर्पण बिल का हांगकांग में इतने बड़े पैमाने पर जबरदस्त तरीक़े से विरोध हो रहा है कि पूरा हांगकांग इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गया है। हांगकांग निवासियों का विरोध देखते हुए चीनी सरकार के प्रत्यपर्ण बिल को फ़िलहाल हांगकांग सरकार ने निलम्बित कर दिया है।
वैसे हांगकांग सरकार द्वारा विवादित प्रत्यर्पण बिल की वापसी और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की हिंसक कार्रवाई की जांच के आश्वासन के बाद यहां चल रहा प्रदर्शन रविवार को थोड़ा शांत रहा। हालांकि, प्रदर्शनकारियों की तरफ़ से आंदोलन ख़त्म करने के कोई संकेत नहीं मिले हैं। इधर, हांगकांग के एक नेता कैरी लैन चेंग के मुताबिक़, प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें मान ली गई हैं। इस बारे में एक सरकारी प्रवक्ता का कहना है कि जल्द ही शान्ति और सामाजिक सद्भभाव के लिए सरकार प्रदर्शनकारियों के साथ ईमानदारी के साथ बातचीत करेगी।
लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हांगकांग में चीन सरकार के ख़िलाफ़ चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच, हांगकांग की सीमा से सिर्फ़ सात किलोमीटर की दूरी पर स्थित चीन के शेनझेन शहर के एक बड़े स्पोर्ट्स स्टेडियम में हज़ारों चीनी सैनिकों ने परेड की। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, चीन के विशेष सुरक्षा बल पीपुल्स आर्म्ड पुलिस (PAP) के जवानों के साथ कई बख्तरबंद वाहन भी इस परेड में देखे गए। इस परेड को हांगकांग में लोकतंत्र के समर्थन में हो रहे विरोध प्रदर्शनों से जोड़कर देखा जा रहा है।
शेनझेन शहर में चीनी सेना की मौजूदगी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि चीनी सरकार, हांगकांग में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए किसी बड़ी कार्रवाई के 'मूड' में है। कहा जा रहा है कि यदि हांगकांग में प्रशासन के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन नहीं रुके, तो चीन की साम्यवादी सरकार किसी भी समय प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई कर सकती है, जैसी कार्रवाई उसने 1989 में थियाममेन चौक पर की थी।
यदि चीन की सरकार ने हांगकांग में सैन्य कार्रवाई कर प्रदर्शनकारियों के आंदोलन को दबाया, तो पूरी दुनिया के देश चीन सरकार के ख़िलाफ़ खड़े हो जाएंगे। जहां एक तरफ़ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हांगकांग में सैन्य कार्रवाई होने पर चीन के साथ व्यापार वार्ता ख़त्म करने की 'चेतावनी' दी है, तो वहीं दुनिया के अन्य देश भी अपने-अपने स्तर पर हांगकांग में चीन की सैन्य कार्रवाई के ख़िलाफ़ अपना-अपना विरोध दर्ज करा सकते हैं। यानी कि कहा जा सकता है कि चीन के स्वायत्तशासी क्षेत्र हांगकांग में चीनी सरकारी की सैन्य कार्रवाई उसे पूरी दुनिया में अलग-थलग कर सकती है।