आख़िरकार टूट गया गूगल का 10 साल पुराना एक ‘रिश्ता’!
Friday - August 23, 2019 3:53 pm ,
Category : WTN HINDI
गूगल ने बदली अपनी पुरानी परम्परा
अब मिठाई या चॉकलेट के नाम पर नहीं होगा एंड्रॉयड का नाम!
AUG 23 (WTN) – गूगल का एक अनोखा 10 साल पुराना रिश्ता टूट गया है। आप सोच में पड़ गये होंगे कि आख़िर ऐसा क्या हो गया है और गूगल का कौन सा पुराना रिश्ता टूट गया है। दरअसल, गूगल ने किसी मिठाई या चॉकलेट के नाम पर एंड्रॉयड वर्जन का नाम रखने की अपनी पुरानी परम्परा को तोड़ दिया है। इस कड़ी में गूगल ने एंड्रॉयड क्यू का नाम एंड्रॉयड 10 कर दिया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले 10 सालों से गूगल अपने एंड्रॉयड का नाम विभिन्न मिठाई या चॉकलेट के नाम पर रख रही थी। लेकिन गूगल ने इस परम्परा को तोड़ते हुए अपने अगले एंड्रॉयड वर्जन का नाम एंड्रॉयड 10 कर दिया है।
गूगल ने अपने इस क़दम के पीछे काफ़ी तर्क दिये हैं। गूगल का तर्क है कि वो इस बदलाव के साथ एंड्रॉयड को ग्लोबल यूज़र्स से सीधे जोड़ना चाहता है। अभी तक गूगल ने एंड्रॉयड के जितने भी वर्जन लॉन्च किये थे, उन सभी के नाम किसी ना किसी मिठाई या चॉकलेट पर आधारित थे। लेकिन अब एंड्रॉयड के नये वर्जन का नाम किसी मिठाई या चॉकलेट पर आधारित नहीं है, बल्कि इसका नाम सिर्फ़ एंड्रॉयड 10 है।
नाम बदलने के साथ ही गूगल ने एंड्रॉयड का रंग भी बदल दिया है। अब एंड्रॉयड का रंग हरे से बदलकर काला हो गया है। गूगल का दावा है कि ऐसा करने से इसकी विजिबिल्टी बेहतर हो सकेगी। वैसे तो एंड्रॉयड का रंग बदलना गूगल का एक छोटा सा बदलाव है, लेकिन इस बदलाव के पीछे गूगल का तर्क है कि हरा रंग अच्छा नहीं लग रहा था। नाम बदलने और रंग बदलने के बाद गूगल कुछ ही सप्ताह में एंड्रॉयड 10 का फाइनल अपडेट जारी कर देगी।
हमेशा कुछ नया और बदलाव के पक्ष में रहने वाले गूगल का कहना है कि उनकी इंजीनियरिंग टीम हमेशा एंड्रॉयड के हर नये वर्जन के लिए किसी मिठाई या चॉकलेट जैसी किसी मीठी खाने की वस्तु के नाम का इस्तेमाल अल्फाबेट ऑर्डर के आधार पर इंटरनल कोड नेम के रूप में करती रही है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हर साल गूगल के नये एंड्रॉयड वर्जन के नाम को लेकर काफ़ी चर्चाएं होती रहती थीं, लेकिन गूगल ने अब एंड्रॉयड के नये वर्जन को मिठाई या चॉकलेट के नाम पर ना रखकर उसे नम्बर फॉर्मेट में कर दिया है। इस बारे में गूगल का तर्क है कि एक ग्लोबल ऑपरेटिंग सिस्टम के रूप में एंड्रॉयड का नाम स्पष्ट और दुनिया के सभी लोगों से जुड़ा हुआ होना चाहिए। इसलिए गूगल ने एंड्रॉयड के नये वर्जन में सामान्य नम्बर का इस्तेमाल किया है और आगे भी ऐसा ही किया जाएगा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गूगल के एंड्रॉयड के नये वर्जन का नाम अल्फाबेट ऑर्डर में अंग्रेजी के क्यू शब्द से रखा जाना था। हालांकि, कम्पनी का कहना है कि अंग्रेजी के क्यू शब्द से कई मिठाइयों या चॉकलेट के नाम हैं। लेकिन गूगल का कहना है कि उसने 2.5 अरब एक्टिव डिवाइस और एंड्रॉयड 10 वर्जन के बारे में विचार किया, और सोचा कि इसे बदलने का यही सही समय है।
वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह एंड्रॉयड का 10वां साल है और अगले साल यूज़र्स को एंड्रॉयड 11 देखने को मिल सकता है। इतना ही नहीं, आने वाले समय में ऐसे ही कई और वर्जन देखने को मिल सकते हैं। गूगल ने सबसे पहली बार एंड्रॉयड 1.5 को लॉन्च किया था, जिसका नाम कपकेक रखा गया था। इसके बाद गूगल ने एंड्रॉयड 1.6 वर्जन रिलीज किया, जिसका नाम डोनट था। इसके बाद एंड्रॉयड 2.0 आया। वहीं एंड्रॉयड 2.1 वर्जन का नाम इक्लेयर्स रखा गया था।
आगे गूगल ने एंड्रॉयड 2.2- फ्रोयो वर्जन लॉन्च किया फ़िर एंड्रॉयड 2.3, एंड्रॉयड 2.4- जिंजरब्रेड। इसके बाद एंड्रॉयड 3.0, 3.1,3.2- हनीकॉम्ब, एंड्रॉयड 4.0- आइक्रीम सैंडविच, एंड्रॉयड 4.1- जेलीबीन, एंड्रॉयड 4.4- किटकैट, एंड्रॉयड 5- लॉलीपॉप, एंड्रॉयड 6- मार्शमेलो, एंड्रॉयड 7- नोगट, एंड्रॉयड 8- ओरियो और एंड्रॉयड 9- पाई।
सालों तक गूगल के एंड्रॉयड वर्जन और उनके मिठाइयों या चॉकलेट पर आधारित नामों की चर्चा पूरी दुनिया में होती रही। जब भी गूगल के नये एंड्रॉयड वर्जन के लॉन्च होने की चर्चा होती थी, तो सभी के मन में जिज्ञासा होती थी कि गूगल अपने एंड्रॉयड के नये वर्जन का क्या नाम रखने वाला है। गूगल के सीईओ सुन्दर पिचई जब एक बार भारत आये थे, तो उनसे सवाल भी किया गया था कि क्या गूगल के किसी एंड्रॉयड वर्जन का नाम दक्षिण भारत की प्रसिद्ध डिश इडली के नाम पर रखा जाएगा? ख़ैर अब गूगल के एंड्रॉयड के वर्जन का नाम किसी मिठाई या चॉकलेट के नाम पर रखने की परम्परा अब इतिहास हो गई है।
AUG 23 (WTN) – गूगल का एक अनोखा 10 साल पुराना रिश्ता टूट गया है। आप सोच में पड़ गये होंगे कि आख़िर ऐसा क्या हो गया है और गूगल का कौन सा पुराना रिश्ता टूट गया है। दरअसल, गूगल ने किसी मिठाई या चॉकलेट के नाम पर एंड्रॉयड वर्जन का नाम रखने की अपनी पुरानी परम्परा को तोड़ दिया है। इस कड़ी में गूगल ने एंड्रॉयड क्यू का नाम एंड्रॉयड 10 कर दिया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले 10 सालों से गूगल अपने एंड्रॉयड का नाम विभिन्न मिठाई या चॉकलेट के नाम पर रख रही थी। लेकिन गूगल ने इस परम्परा को तोड़ते हुए अपने अगले एंड्रॉयड वर्जन का नाम एंड्रॉयड 10 कर दिया है।
गूगल ने अपने इस क़दम के पीछे काफ़ी तर्क दिये हैं। गूगल का तर्क है कि वो इस बदलाव के साथ एंड्रॉयड को ग्लोबल यूज़र्स से सीधे जोड़ना चाहता है। अभी तक गूगल ने एंड्रॉयड के जितने भी वर्जन लॉन्च किये थे, उन सभी के नाम किसी ना किसी मिठाई या चॉकलेट पर आधारित थे। लेकिन अब एंड्रॉयड के नये वर्जन का नाम किसी मिठाई या चॉकलेट पर आधारित नहीं है, बल्कि इसका नाम सिर्फ़ एंड्रॉयड 10 है।
नाम बदलने के साथ ही गूगल ने एंड्रॉयड का रंग भी बदल दिया है। अब एंड्रॉयड का रंग हरे से बदलकर काला हो गया है। गूगल का दावा है कि ऐसा करने से इसकी विजिबिल्टी बेहतर हो सकेगी। वैसे तो एंड्रॉयड का रंग बदलना गूगल का एक छोटा सा बदलाव है, लेकिन इस बदलाव के पीछे गूगल का तर्क है कि हरा रंग अच्छा नहीं लग रहा था। नाम बदलने और रंग बदलने के बाद गूगल कुछ ही सप्ताह में एंड्रॉयड 10 का फाइनल अपडेट जारी कर देगी।
हमेशा कुछ नया और बदलाव के पक्ष में रहने वाले गूगल का कहना है कि उनकी इंजीनियरिंग टीम हमेशा एंड्रॉयड के हर नये वर्जन के लिए किसी मिठाई या चॉकलेट जैसी किसी मीठी खाने की वस्तु के नाम का इस्तेमाल अल्फाबेट ऑर्डर के आधार पर इंटरनल कोड नेम के रूप में करती रही है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हर साल गूगल के नये एंड्रॉयड वर्जन के नाम को लेकर काफ़ी चर्चाएं होती रहती थीं, लेकिन गूगल ने अब एंड्रॉयड के नये वर्जन को मिठाई या चॉकलेट के नाम पर ना रखकर उसे नम्बर फॉर्मेट में कर दिया है। इस बारे में गूगल का तर्क है कि एक ग्लोबल ऑपरेटिंग सिस्टम के रूप में एंड्रॉयड का नाम स्पष्ट और दुनिया के सभी लोगों से जुड़ा हुआ होना चाहिए। इसलिए गूगल ने एंड्रॉयड के नये वर्जन में सामान्य नम्बर का इस्तेमाल किया है और आगे भी ऐसा ही किया जाएगा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गूगल के एंड्रॉयड के नये वर्जन का नाम अल्फाबेट ऑर्डर में अंग्रेजी के क्यू शब्द से रखा जाना था। हालांकि, कम्पनी का कहना है कि अंग्रेजी के क्यू शब्द से कई मिठाइयों या चॉकलेट के नाम हैं। लेकिन गूगल का कहना है कि उसने 2.5 अरब एक्टिव डिवाइस और एंड्रॉयड 10 वर्जन के बारे में विचार किया, और सोचा कि इसे बदलने का यही सही समय है।
वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह एंड्रॉयड का 10वां साल है और अगले साल यूज़र्स को एंड्रॉयड 11 देखने को मिल सकता है। इतना ही नहीं, आने वाले समय में ऐसे ही कई और वर्जन देखने को मिल सकते हैं। गूगल ने सबसे पहली बार एंड्रॉयड 1.5 को लॉन्च किया था, जिसका नाम कपकेक रखा गया था। इसके बाद गूगल ने एंड्रॉयड 1.6 वर्जन रिलीज किया, जिसका नाम डोनट था। इसके बाद एंड्रॉयड 2.0 आया। वहीं एंड्रॉयड 2.1 वर्जन का नाम इक्लेयर्स रखा गया था।
आगे गूगल ने एंड्रॉयड 2.2- फ्रोयो वर्जन लॉन्च किया फ़िर एंड्रॉयड 2.3, एंड्रॉयड 2.4- जिंजरब्रेड। इसके बाद एंड्रॉयड 3.0, 3.1,3.2- हनीकॉम्ब, एंड्रॉयड 4.0- आइक्रीम सैंडविच, एंड्रॉयड 4.1- जेलीबीन, एंड्रॉयड 4.4- किटकैट, एंड्रॉयड 5- लॉलीपॉप, एंड्रॉयड 6- मार्शमेलो, एंड्रॉयड 7- नोगट, एंड्रॉयड 8- ओरियो और एंड्रॉयड 9- पाई।
सालों तक गूगल के एंड्रॉयड वर्जन और उनके मिठाइयों या चॉकलेट पर आधारित नामों की चर्चा पूरी दुनिया में होती रही। जब भी गूगल के नये एंड्रॉयड वर्जन के लॉन्च होने की चर्चा होती थी, तो सभी के मन में जिज्ञासा होती थी कि गूगल अपने एंड्रॉयड के नये वर्जन का क्या नाम रखने वाला है। गूगल के सीईओ सुन्दर पिचई जब एक बार भारत आये थे, तो उनसे सवाल भी किया गया था कि क्या गूगल के किसी एंड्रॉयड वर्जन का नाम दक्षिण भारत की प्रसिद्ध डिश इडली के नाम पर रखा जाएगा? ख़ैर अब गूगल के एंड्रॉयड के वर्जन का नाम किसी मिठाई या चॉकलेट के नाम पर रखने की परम्परा अब इतिहास हो गई है।