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पुरानी और खस्ताहाल गाड़ियों को बेचने पर सरकार देगी पैसा!

Tuesday - August 27, 2019 4:08 pm , Category : WTN HINDI
स्टील स्क्रैप का आयात कम करने मोदी सरकार की प्लानिंग
स्टील स्क्रैप का आयात कम करने मोदी सरकार की प्लानिंग

स्टील स्क्रैप पॉलिसी के लिए जल्द बनेगी गाइडलाइंस, गाड़ियां बेचने पर होगा फ़ायदा!

AUG 27 (WTN) – यदि हम आपसे कहें कि आप अपनी 10 साल पुरानी गाड़ी को बेचे या फ़िर बेकार कण्डीशन में हो चुकी अपनी नई गाड़ी को बेचे तो आपको नई गाड़ी ख़रीदने पर पैसा मिलेगा, तो यह पढ़कर आप सोच में पड़ गये होंगे कि आख़िर ऐसा कौन और क्यों कर रहा है? क्या है यह पूरा मामला? आइये आपको इसकी पूरी जानकारी देते हैं। दरअसल, मोदी सरकार वायु प्रदूषण कम करने और देश में स्टील स्क्रैप का आयात कम करने के लिए 10 साल पुरानी गाड़ियों के लिए स्क्रैपेज पॉलिसी लाने की तैयारी में है। स्क्रैपेज पॉलिसी में सिर्फ़ पुरानी गाड़ियां को बेचने पर ही नहीं बल्कि जर्जर हालत में पहुंच चुकी नई गाड़ियों को बेचने पर भी फ़ायदा मिल सकता है।
 
यानी कि कहा जा रहा है कि स्क्रैपेज पॉलिसी का फ़ायदा अब उन नई गाड़ियों को भी मिलेगा, जो कि खस्ताहाल हो चुकी हैं। दरअसल, स्कैपेज पॉलिसी में गाड़ी की कण्डीशन का पैमाना भी शामिल किया जाएगा और इसमे सिर्फ़ गाड़ियों की उम्र का ही पैमाना शामिल नहीं होगा। नई पॉलिसी में कम समय में ही जर्जर हो चुकीं गाड़ियों को भी फ़ायदा मिलेगा।
 
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, स्क्रैपेज पॉलिसी में 10 साल पुरानी गाड़ी पर 50,000 रुपये तक की छूट प्रस्तावित है। यदि कमर्शियल व्हीकल 10 साल से ज़्यादा पुराना है तो उसे बेचने पर 50 हज़ार रुपये तक की छूट मिल सकती। वहीं 10 साल पुरानी पैसेंजर कार बेचने पर 20 हज़ार रुपये तक की छूट देने का प्रस्ताव है। पॉलिसी में 7 साल पुराने टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर को बेचने पर 5,000 रुपये तक की छूट मिल सकती है, लेकिन यह छूट सिर्फ़ नई गाड़ियों को ख़रीदने पर ही मिल सकती है। वहीं पॉलिसी में नक़द छूट के प्रस्ताव में बदलाव हो सकता है।

मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, स्क्रैपेज पॉलिसी से सम्बन्धित अन्तिम गाइडलाइंस तय करने के लिए सचिवों की एक कमेटी बनाई जाएगी। इस कमेटी में सड़क परिवहन मंत्रालय, स्टील और पर्यावरण मंत्रालय और भारी उद्योग मंत्रालय के अधिकारी शामिल होंगे। पुरानी गाड़ियों की बिक्री के लिए देश में कई जगहों पर स्क्रैपेज सेन्टर बनाए जाएंगे। जानकारी के अनुसार, स्क्रैपेज सेन्टर बनाने के लिए सरकार इंसेंटिव देगी। स्क्रैपेज की ज़िम्मेदारी स्टील सेक्टर की सरकारी कम्पनी MSTC को दी जा सकती है।
 
दरअसल, मोदी सरकार यह सब स्टील स्क्रैप पॉलिसी के अंतर्गत कर रही है, जिसमें सरकार की मंशा है कि स्टील स्क्रैप का आयात कम किया जाए और इसकी घरेलू खपत बढ़ाई जाए। सरकार प्लानिंग कर रही है कि आख़िर किस तरह से स्टील स्क्रैप के आयात को कम किया जाए और साथ ही साथ इसकी घरेलू खपत बढ़ाई जाए।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि स्टील स्क्रैप का आयात घटाने के लिए ज़रूरी है कि देश में स्क्रैप पॉलिसी को अपनाया जाए। इसके लिए शुरू में सरकार की दो से तीन स्टील स्क्रैप प्लांट खोलने की योजना है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि देश में हर साल क़रीब 60 लाख टन स्टील स्क्रैप आयात किया जाता है, जबकि देश में सालाना क़रीब 83 लाख टन स्क्रैप की डिमाण्ड है।

मोदी सरकार की प्लानिंग है कि देश में स्टील की खपत को बढ़ावा दिया जाए। इसके लिए हाउसिंग सेक्टर समेत अन्य सेक्टर्स में इसकी खपत की प्लानिंग है। इसके लिए स्टील के घर बनाना समेत कई योजनाओं पर चर्चा जारी है। लेकिन केन्द्र सरकार की स्क्रैप पॉलिसी पर कुछ राज्यों को आपत्ति है। वैसे राज्य जहां ज़्यादा स्क्रैप निकलने की सम्भावना है, उनको इस बात पर आपत्ति है कि कम्पनसेशन का जो स्ट्रक्चर है उसको बढ़ाया जाए और उनके राज्य में स्क्रैप आधारित स्टील प्लांट खोले जाएं।