ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी से ‘नाराज़’ होने की ख़बर से गर्माई राजनीति!
Friday - August 30, 2019 3:37 pm ,
Category : WTN HINDI
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ठोंका मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए ‘दावा’
क्या ‘साइड लाइन’ होने पर कुछ बड़ा क़दम उठा सकते हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया?
AUG 30 (WTN) – लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक हार के बाद कांग्रेस पार्टी में सब कुछ सही नहीं चल रहा है। जहां केन्द्रीय स्तर पर अभी तक तय नहीं हो पाया है कि राहुल गांधी के बाद कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष कौन बनेगा, वहीं अब मध्य प्रदेश पीसीसी अध्यक्ष पद के लिए 'घमासान' मच गया है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए अपना दावा पेश कर दिया है, और कहा यह भी जा रहा है कि पीसीसी अध्यक्ष ना बनाए जाने पर सिंधिया पार्टी छोड़ने जैसा 'बड़ा क़दम' भी उठा सकते हैं!
दरअसल, दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में तो 'चर्चा' यहां तक है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से साफ़ कह दिया है कि यदि उन्हें मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बताया जाता है, तो वे कांग्रेस पार्टी में अपने पद से इस्तीफ़ा देकर पार्टी छोड़ देंगे! हालांकि, इस तरह की राजनीतिक 'चर्चाओं' में कितनी सच्चाई है इसके बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है।
लेकिन इस पूरे मामले में सिंधिया समर्थक मंत्रियों और विधायकों का कहना है कि यह एक 'अफवाह' है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सोनिया गांधी को इस तरह का कोई अल्टीमेटम दिया हो। सिंधिया समर्थकों का कहना है कि कुछ लोग ऐसी अफवाह फ़ैला रहे हैं। लेकिन इस सबके बीच, ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थकों ने एक बार फ़िर मांग की है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए।
तमाम राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से दिल्ली में मुलाकात की है। कहा जा रहा है कि कमलनाथ और सोनिया गांधी के बीच चर्चा का मुख्य मुद्दा यही था कि मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कमान किसे सौंपी जाए। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस समय कमलनाथ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दोनों पदों पर काबिज हैं। ऐसे में एक व्यक्ति, एक पद के सिद्धांत के चलते पार्टी को मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पर किसी नये नेता की नियुक्ति करना है।
कमलनाथ की जगह पर किसी दूसरे नेता का मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनना तय है, लेकिन जिस तरह की चर्चाएं ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर की जा रही हैं उससे तो लगता है कि आने वाले समय में मध्य प्रदेश की राजनीति में कुछ 'बड़ा घटनाक्रम' होने जा रहा है। दरअसल, ज्योतिरादित्य सिंधिया को हाल ही में कांग्रेस पार्टी ने महाराष्ट्र में स्क्रीनिंग कमेटी का चेयरमैन बनाया है। यह कमेटी ही महाराष्ट्र में होने जा रहे विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों के नाम तय करेगी। लेकिन सिंधिया को महाराष्ट्र में स्क्रीनिंग कमेटी का चेयरमैन बनाये जाने पर सिंधिया समर्थकों का आरोप है ज्योतिरादित्य सिंधिया को महाराष्ट्र में 'उलझाकर' उन्हें मध्य प्रदेश की राजनीति से दूर करने की कोशिश है।
लेकिन इस सबके बीच, दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 'नाराज़' ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा नेताओं के 'सम्पर्क' में भी हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़, मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद की कमान नहीं मिलने पर ज्योतिरादित्य सिंधिया कुछ ऐसा क़दम उठा सकते हैं, जिससे कांग्रेस पार्टी 'मुसीबत' में आ सकती है।
इधर ज्योतिरादित्य सिंधिया के 'नाराज़' होने की चर्चाओं पर कमलनाथ का कहना है कि उन्हें नहीं लगता है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया नाराज़ हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की मांगों को लेकर कमलनाथ ने कहा, “मैं तो ख़ुद ही यह मांग कर रहा हूं कि मध्य प्रदेश में नया प्रदेश अध्यक्ष चुना जाए। जब मैं मुख्यमंत्री बना था तो तभी मैंने कहा था कि अब नए अध्यक्ष का चुनाव होगा।”
दरअसल, मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की 'गुटबाजी' पूरे भारत में प्रसिद्ध है। जैसा कि आप जानते हैं कि राजनीति में सारा खेल 'वर्चस्व' का है। मध्य प्रदेश की राजनीति के जानकारों के मुताबिक़, कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, अजय सिंह और अरूण यादव जैसे नेताओं के समर्थक नहीं चाहेंगे ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनें।
कयास तो यह भी लगाए जा रहे हैं कि यदि ज्योतिरादित्य सिंधिया को मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनाया गया, तो वे कांग्रेस पार्टी से इस्तीफ़ा देकर भाजपा में शामिल हो सकते हैं! कहा यह भी जा रहा है कि सिंधिया के कांग्रेस से इस्तीफ़ा देने के बाद सिंधिया समर्थक क़रीब 30 कांग्रेस विधायक भी इस्तीफ़ा दे सकते हैं और भाजपा, ज्योतिरादित्य सिंधिया को समर्थन देकर उन्हें मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बना सकती है!
ख़ैर राजनीति में कयास तो लगते ही रहते हैं। लेकिन यदि ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में शामिल होते हैं, तो इसमें आश्चर्य करने जैसी कोई बात नहीं होगी। ऐसा इसलिए, क्योंकि लोकसभा चुनाव में हार के बाद यदि ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बने, तो साफ़तौर पर वे प्रदेश की राजनीति में हाशिये पर चले जाएंगे और आने वाल पांच सालों तक उनके पास बयान देने के अलावा कोई और काम नहीं रहेगा।
हाल ही में अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर जिस तरह से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी लाइन से अलग हटकर मोदी सरकार का 'साथ' दिया है, उससे तो यह कयास लगाए जा रहे हैं कि मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ना बनाए जाने की स्थिति में राजनीति में 'हाशिये' पर जाने से बेहतर ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस से इस्तीफ़ा देकर भाजपा का दामन थाम सकते हैं। ख़ैर यह सब राजनीति की चर्चाएं हैं, आगे-आगे देखिए होता है क्या?
AUG 30 (WTN) – लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक हार के बाद कांग्रेस पार्टी में सब कुछ सही नहीं चल रहा है। जहां केन्द्रीय स्तर पर अभी तक तय नहीं हो पाया है कि राहुल गांधी के बाद कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष कौन बनेगा, वहीं अब मध्य प्रदेश पीसीसी अध्यक्ष पद के लिए 'घमासान' मच गया है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए अपना दावा पेश कर दिया है, और कहा यह भी जा रहा है कि पीसीसी अध्यक्ष ना बनाए जाने पर सिंधिया पार्टी छोड़ने जैसा 'बड़ा क़दम' भी उठा सकते हैं!
दरअसल, दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में तो 'चर्चा' यहां तक है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से साफ़ कह दिया है कि यदि उन्हें मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बताया जाता है, तो वे कांग्रेस पार्टी में अपने पद से इस्तीफ़ा देकर पार्टी छोड़ देंगे! हालांकि, इस तरह की राजनीतिक 'चर्चाओं' में कितनी सच्चाई है इसके बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है।
लेकिन इस पूरे मामले में सिंधिया समर्थक मंत्रियों और विधायकों का कहना है कि यह एक 'अफवाह' है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सोनिया गांधी को इस तरह का कोई अल्टीमेटम दिया हो। सिंधिया समर्थकों का कहना है कि कुछ लोग ऐसी अफवाह फ़ैला रहे हैं। लेकिन इस सबके बीच, ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थकों ने एक बार फ़िर मांग की है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए।
तमाम राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से दिल्ली में मुलाकात की है। कहा जा रहा है कि कमलनाथ और सोनिया गांधी के बीच चर्चा का मुख्य मुद्दा यही था कि मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कमान किसे सौंपी जाए। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस समय कमलनाथ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दोनों पदों पर काबिज हैं। ऐसे में एक व्यक्ति, एक पद के सिद्धांत के चलते पार्टी को मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पर किसी नये नेता की नियुक्ति करना है।
कमलनाथ की जगह पर किसी दूसरे नेता का मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनना तय है, लेकिन जिस तरह की चर्चाएं ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर की जा रही हैं उससे तो लगता है कि आने वाले समय में मध्य प्रदेश की राजनीति में कुछ 'बड़ा घटनाक्रम' होने जा रहा है। दरअसल, ज्योतिरादित्य सिंधिया को हाल ही में कांग्रेस पार्टी ने महाराष्ट्र में स्क्रीनिंग कमेटी का चेयरमैन बनाया है। यह कमेटी ही महाराष्ट्र में होने जा रहे विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों के नाम तय करेगी। लेकिन सिंधिया को महाराष्ट्र में स्क्रीनिंग कमेटी का चेयरमैन बनाये जाने पर सिंधिया समर्थकों का आरोप है ज्योतिरादित्य सिंधिया को महाराष्ट्र में 'उलझाकर' उन्हें मध्य प्रदेश की राजनीति से दूर करने की कोशिश है।
लेकिन इस सबके बीच, दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 'नाराज़' ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा नेताओं के 'सम्पर्क' में भी हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़, मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद की कमान नहीं मिलने पर ज्योतिरादित्य सिंधिया कुछ ऐसा क़दम उठा सकते हैं, जिससे कांग्रेस पार्टी 'मुसीबत' में आ सकती है।
इधर ज्योतिरादित्य सिंधिया के 'नाराज़' होने की चर्चाओं पर कमलनाथ का कहना है कि उन्हें नहीं लगता है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया नाराज़ हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की मांगों को लेकर कमलनाथ ने कहा, “मैं तो ख़ुद ही यह मांग कर रहा हूं कि मध्य प्रदेश में नया प्रदेश अध्यक्ष चुना जाए। जब मैं मुख्यमंत्री बना था तो तभी मैंने कहा था कि अब नए अध्यक्ष का चुनाव होगा।”
दरअसल, मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की 'गुटबाजी' पूरे भारत में प्रसिद्ध है। जैसा कि आप जानते हैं कि राजनीति में सारा खेल 'वर्चस्व' का है। मध्य प्रदेश की राजनीति के जानकारों के मुताबिक़, कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, अजय सिंह और अरूण यादव जैसे नेताओं के समर्थक नहीं चाहेंगे ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनें।
कयास तो यह भी लगाए जा रहे हैं कि यदि ज्योतिरादित्य सिंधिया को मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनाया गया, तो वे कांग्रेस पार्टी से इस्तीफ़ा देकर भाजपा में शामिल हो सकते हैं! कहा यह भी जा रहा है कि सिंधिया के कांग्रेस से इस्तीफ़ा देने के बाद सिंधिया समर्थक क़रीब 30 कांग्रेस विधायक भी इस्तीफ़ा दे सकते हैं और भाजपा, ज्योतिरादित्य सिंधिया को समर्थन देकर उन्हें मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बना सकती है!
ख़ैर राजनीति में कयास तो लगते ही रहते हैं। लेकिन यदि ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में शामिल होते हैं, तो इसमें आश्चर्य करने जैसी कोई बात नहीं होगी। ऐसा इसलिए, क्योंकि लोकसभा चुनाव में हार के बाद यदि ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बने, तो साफ़तौर पर वे प्रदेश की राजनीति में हाशिये पर चले जाएंगे और आने वाल पांच सालों तक उनके पास बयान देने के अलावा कोई और काम नहीं रहेगा।
हाल ही में अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर जिस तरह से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी लाइन से अलग हटकर मोदी सरकार का 'साथ' दिया है, उससे तो यह कयास लगाए जा रहे हैं कि मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ना बनाए जाने की स्थिति में राजनीति में 'हाशिये' पर जाने से बेहतर ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस से इस्तीफ़ा देकर भाजपा का दामन थाम सकते हैं। ख़ैर यह सब राजनीति की चर्चाएं हैं, आगे-आगे देखिए होता है क्या?