गाड़ी के दस्तावेज़ दिखाने 15 दिनों का समय देता है नया मोटर व्हीकल एक्ट
Thursday - September 5, 2019 9:36 am ,
Category : WTN HINDI
नये मोटर व्हीकल एक्ट में हैं चालकों के हित में कई प्रावधान
दस्तावेज़ साथ ना होने पर ‘इस नियम’ के कारण ट्रैफिक पुलिस तुरन्त नहीं काट सकती चालान!
SEP 05 (WTN) – नियमों का जानना कई बार काफ़ी ज़रूरी होता है। नियमों की सही जानकारी नहीं होने पर कई बार आपको मानसिक और आर्थिक हानि का सामना करना पड़ सकता है। कुछ ऐसा ही इन दिनों नये मोटर व्हीकर एक्ट के लागू होने के बाद हो रहा है। दरअसल, नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू होने के बाद से पूरे देश में हड़कम्प सा मच गया है। जिन राज्यों में नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू किया गया है, वहां से ख़बरें आ रही हैं कि ड्राइविंग लाइसेंस, गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सर्टीफिकेट (आरसी), थर्ड पार्टी बीमा के दस्तावेज़, पॉल्यूशन अण्डर कंट्रोल सर्टिफिकेट और परमिट सर्टिफिकेट गाड़ी चलाते समय साथ ना होने पर ट्रैफिक पुलिस तत्काल चालान काट रही है। गुरुग्राम में तो एक ट्रैक्टर-ट्रॉली चालक पर ऊपर लिखे कोई भी दस्तावेज़ गाड़ी चलाते समय उपलब्ध ना होने पर उसका 59,000 रूपये का चालान बनाया गया है।
लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नये मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधान के मुताबिक़, गाड़ी चलाते समय यदि चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस, गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सर्टीफिकेट (आरसी), थर्ड पार्टी बीमा के दस्तावेज़, पॉल्यूशन अण्डर कंट्रोल सर्टिफिकेट और परमिट सर्टिफिकेट नहीं है तो यह जुर्म नहीं है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सेन्ट्रल मोटर व्हीकल रूल्स के नियम 139 में प्रावधान किया गया है कि वाहन चालक को ड्राइविंग लाइसेंस, गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सर्टीफिकेट (आरसी), थर्ड पार्टी बीमा के दस्तावेज़, पॉल्यूशन अण्डर कंट्रोल सर्टिफिकेट और परमिट सर्टिफिकेट को पेश करने के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा।
यदि वाहन चालक के पास यह दस्तावेज़ साथ में नहीं हैं, तो ट्रैफिक पुलिस तत्काल उसका चालान नहीं काट सकती है। यदि वाहन चालक सम्बन्धित दस्तावेज़ 15 दिनों के अन्दर दिखाने का दावा करता है, तो ट्रैफिक पुलिस या आरटीओ अधिकारी वाहन का चालान नहीं काटेंगे। वाहन चालक के पास वाहन चलाते समय उपरोक्त दस्तावेज़ नहीं होने पर चालक को 15 दिनों के अन्दर इन दस्तावेज़ों को सम्बन्धित ट्रैफिक पुलिस या अधिकारी को दिखाना होगा।
वहीं नये मोटर व्हीकल एक्ट 2019 की धारा 158 के तहत दुर्घटना होने या किसी विशेष मामलों में इन दस्तावेज़ों को दिखाने का समय 7 दिन का दिया गया है। नये एक्ट के मुताबिक़ वाहन चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस, गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सर्टीफिकेट (आरसी), थर्ड पार्टी बीमा के दस्तावेज़, पॉल्यूशन अण्डर कंट्रोल सर्टिफिकेट और परमिट सर्टिफिकेट ना होने की स्थिति में ट्रैफिक पुलिस चालान काटती है और चालक को यदि इन दस्तावेज़ों को दिखाने के लिए 15 दिनों का समय नही दिया जाता है, तो चालक के पास इस चालान को कोर्ट में ख़ारिज कराने का विकल्प है।
क़ानून के जानकारों के मुताबिक. यदि ट्रैफिक पुलिस ग़ैर क़ानूनी रूप से वाहन चालक का चालान काटती है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वाहन चालक को चालान भरना ही होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्रैफिक पुलिस का चालान कोई कोर्ट का आदेश नहीं है। ट्रैफिक पुलिस द्वारा काटे गये चालान को वाहन चालक कोर्ट में चुनौती दे सकता है। मामला कोर्ट में जाने पर यदि कोर्ट को लगता है कि वाहन चालक के पास सभी ज़रूरी दस्तावेज़ थे, लेकिन उसे दस्तावेज़ों को पेश करने के लिए 15 दिनों का समय नहीं दिया गया है तो कोर्ट उसका जुर्माना माफ़ कर सकता है।
वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्रैफिक पुलिस द्वारा चालान काटते समय एक गवाह के हस्ताक्षर होना ज़रूरी है। चालान कोर्ट में पेश होने पर ट्रैफिक पुलिस को सम्बन्धित गवाह को कोर्ट में पेश करना होता है। अगर ट्रैफिक पुलिस गवाह को कोर्ट में प्रस्तुत नहीं कर पाती है, तो कोर्ट वाहन चालक का चालान माफ़ कर सकती है। देखा गया है कि ज़्यादातर मामलों में ट्रैफिक पुलिस गवाह को पेश ही नहीं कर पाती है, जिसका लाभ कई बार वाहन चालक को मिल जाता है।
तो हमारी आपको सलाह है कि सबसे पहले तो आप गाड़ी से सम्बन्धित सभी दस्तावेज़ अपने साथ लेकर चलें। वहीं गाड़ी के दस्तावेजों की मूल प्रति साथ रखने की आपको ज़रूरत नहीं है। ड्राइविंग लाइसेंस समेत गाड़ी से सम्बन्धित सभी दस्तावेज़ आप डिजीलॉकर या फ़िर एम-परिवहन मोबाइल एप में अपलोड कर सकते हैं।
सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त इन ऐप्स में अपलोड किये गये दस्तावेज़ों को आप चैकिंग के दौरान ट्रैफिक पुलिस को दिखा सकते हैं, जो कि मान्य हैं। वहीं आपके पास गाड़ी से सम्बन्धित दस्तावेज़ हैं लेकिन वे मोबाइल एप में अपलोड नहीं है और ना ही गाड़ी चलाते आपके पास हैं, तो नये मोटर व्हीकल एक्ट के नियमानुसार आप दस्तावेज़ों को दिखाने के लिए 15 दिनों का समय मांग सकते हैं जो कि क़ानूनन आपका हक़ है।
SEP 05 (WTN) – नियमों का जानना कई बार काफ़ी ज़रूरी होता है। नियमों की सही जानकारी नहीं होने पर कई बार आपको मानसिक और आर्थिक हानि का सामना करना पड़ सकता है। कुछ ऐसा ही इन दिनों नये मोटर व्हीकर एक्ट के लागू होने के बाद हो रहा है। दरअसल, नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू होने के बाद से पूरे देश में हड़कम्प सा मच गया है। जिन राज्यों में नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू किया गया है, वहां से ख़बरें आ रही हैं कि ड्राइविंग लाइसेंस, गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सर्टीफिकेट (आरसी), थर्ड पार्टी बीमा के दस्तावेज़, पॉल्यूशन अण्डर कंट्रोल सर्टिफिकेट और परमिट सर्टिफिकेट गाड़ी चलाते समय साथ ना होने पर ट्रैफिक पुलिस तत्काल चालान काट रही है। गुरुग्राम में तो एक ट्रैक्टर-ट्रॉली चालक पर ऊपर लिखे कोई भी दस्तावेज़ गाड़ी चलाते समय उपलब्ध ना होने पर उसका 59,000 रूपये का चालान बनाया गया है।
लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नये मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधान के मुताबिक़, गाड़ी चलाते समय यदि चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस, गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सर्टीफिकेट (आरसी), थर्ड पार्टी बीमा के दस्तावेज़, पॉल्यूशन अण्डर कंट्रोल सर्टिफिकेट और परमिट सर्टिफिकेट नहीं है तो यह जुर्म नहीं है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सेन्ट्रल मोटर व्हीकल रूल्स के नियम 139 में प्रावधान किया गया है कि वाहन चालक को ड्राइविंग लाइसेंस, गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सर्टीफिकेट (आरसी), थर्ड पार्टी बीमा के दस्तावेज़, पॉल्यूशन अण्डर कंट्रोल सर्टिफिकेट और परमिट सर्टिफिकेट को पेश करने के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा।
यदि वाहन चालक के पास यह दस्तावेज़ साथ में नहीं हैं, तो ट्रैफिक पुलिस तत्काल उसका चालान नहीं काट सकती है। यदि वाहन चालक सम्बन्धित दस्तावेज़ 15 दिनों के अन्दर दिखाने का दावा करता है, तो ट्रैफिक पुलिस या आरटीओ अधिकारी वाहन का चालान नहीं काटेंगे। वाहन चालक के पास वाहन चलाते समय उपरोक्त दस्तावेज़ नहीं होने पर चालक को 15 दिनों के अन्दर इन दस्तावेज़ों को सम्बन्धित ट्रैफिक पुलिस या अधिकारी को दिखाना होगा।
वहीं नये मोटर व्हीकल एक्ट 2019 की धारा 158 के तहत दुर्घटना होने या किसी विशेष मामलों में इन दस्तावेज़ों को दिखाने का समय 7 दिन का दिया गया है। नये एक्ट के मुताबिक़ वाहन चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस, गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सर्टीफिकेट (आरसी), थर्ड पार्टी बीमा के दस्तावेज़, पॉल्यूशन अण्डर कंट्रोल सर्टिफिकेट और परमिट सर्टिफिकेट ना होने की स्थिति में ट्रैफिक पुलिस चालान काटती है और चालक को यदि इन दस्तावेज़ों को दिखाने के लिए 15 दिनों का समय नही दिया जाता है, तो चालक के पास इस चालान को कोर्ट में ख़ारिज कराने का विकल्प है।
क़ानून के जानकारों के मुताबिक. यदि ट्रैफिक पुलिस ग़ैर क़ानूनी रूप से वाहन चालक का चालान काटती है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वाहन चालक को चालान भरना ही होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्रैफिक पुलिस का चालान कोई कोर्ट का आदेश नहीं है। ट्रैफिक पुलिस द्वारा काटे गये चालान को वाहन चालक कोर्ट में चुनौती दे सकता है। मामला कोर्ट में जाने पर यदि कोर्ट को लगता है कि वाहन चालक के पास सभी ज़रूरी दस्तावेज़ थे, लेकिन उसे दस्तावेज़ों को पेश करने के लिए 15 दिनों का समय नहीं दिया गया है तो कोर्ट उसका जुर्माना माफ़ कर सकता है।
वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्रैफिक पुलिस द्वारा चालान काटते समय एक गवाह के हस्ताक्षर होना ज़रूरी है। चालान कोर्ट में पेश होने पर ट्रैफिक पुलिस को सम्बन्धित गवाह को कोर्ट में पेश करना होता है। अगर ट्रैफिक पुलिस गवाह को कोर्ट में प्रस्तुत नहीं कर पाती है, तो कोर्ट वाहन चालक का चालान माफ़ कर सकती है। देखा गया है कि ज़्यादातर मामलों में ट्रैफिक पुलिस गवाह को पेश ही नहीं कर पाती है, जिसका लाभ कई बार वाहन चालक को मिल जाता है।
तो हमारी आपको सलाह है कि सबसे पहले तो आप गाड़ी से सम्बन्धित सभी दस्तावेज़ अपने साथ लेकर चलें। वहीं गाड़ी के दस्तावेजों की मूल प्रति साथ रखने की आपको ज़रूरत नहीं है। ड्राइविंग लाइसेंस समेत गाड़ी से सम्बन्धित सभी दस्तावेज़ आप डिजीलॉकर या फ़िर एम-परिवहन मोबाइल एप में अपलोड कर सकते हैं।
सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त इन ऐप्स में अपलोड किये गये दस्तावेज़ों को आप चैकिंग के दौरान ट्रैफिक पुलिस को दिखा सकते हैं, जो कि मान्य हैं। वहीं आपके पास गाड़ी से सम्बन्धित दस्तावेज़ हैं लेकिन वे मोबाइल एप में अपलोड नहीं है और ना ही गाड़ी चलाते आपके पास हैं, तो नये मोटर व्हीकल एक्ट के नियमानुसार आप दस्तावेज़ों को दिखाने के लिए 15 दिनों का समय मांग सकते हैं जो कि क़ानूनन आपका हक़ है।