ध्वस्त होने की कगार पर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था; चरम पर पहुंची महंगाई
Friday - September 6, 2019 12:05 pm ,
Category : WTN HINDI
महंगाई के कारण पाकिस्तानियों का जीना हुआ बोझिल
आतंक को संरक्षण देकर पाकिस्तान ने बर्बाद कर ली ख़ुद की अर्थव्यवस्था!
SEP 06 (WTN) – आतंक को पनाह और बढ़ावा देने वाले भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान की आर्थिक हालत दिनों-दिन बदतर होती जा रही है। ग़रीबी से लड़ने के बजाय आतंकियों को हथियार मुहैया कराने और कश्मीर में आतंक फैलाने वाले पाकिस्तान में महंगाई इतनी ज़्यादा बढ़ गई है कि वहां के लोगों का जीना दूभर हो गया है। पाकिस्तान में महंगाई की मार ऐसी है कि वहां पर खाने-पीने की वस्तुओं के दाम काफ़ी बढ़ गये हैं। पाकिस्तान सरकार की ओर से जे जारी आंकड़ों के मुताबिक़, अगस्त के महीने में पाकिस्तान में महंगाई पिछले 87 महीनों में सबसे ज़्यादा रही है।
आर्थिक बदहाली की ओर बढ़ रहे पाकिस्तान में महंगाई की हालत यह है कि वहां पर महंगाई की दर 11 प्रतिशत को पार कर 11.6 प्रतिशत हो गई है। दरअसल, आर्थिक कुप्रबंधन के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लगातार ख़राब होती जा रही है। बढ़ते विदेशी क़र्ज़ और अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले लगातार कमज़ोर होती पाकिस्तानी करेंसी के कारण पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (INTERNATIONAL MONETARY FUND) से काफ़ी कठिन शर्तों पर बेलआउट पैकेज लेना पड़ा है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि INTERNATIONAL MONETARY FUND की क़र्ज़ की कठिन शर्तों के कारण ही पाकिस्तान में दिनों-दिन महंगाई बढ़ती ही जा रही है। दरअसल, आईएमएफ ने पाकिस्तान को क़र्ज़ देते समय कई शर्तें रखी हैं; जिसमें टैक्स की दर बढ़ाना, बिजली महंगी करना और पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ाना शामिल है। पाकिस्तान सरकार के इन्हीं क़दमों के कारण वहां पर महंगाई पिछले 87 महीनों में चरम पर पहुंच गई है।
पाकिस्तान की जनता महंगाई के लिए इमरान ख़ान सरकार को दोषी ठहरा रही है। जनता का कहना है कि इमरान ख़ान सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन के कारण ही पाकिस्तान की आर्थिक हालत दिनों-दिन ख़राब होती जा रही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले साल अगस्त में जब इमरान ख़ान प्रधानमंत्री बने थे, तो उस समय वहां पर पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमत क्रमश: 95.24 रुपये प्रति लीटर और 112.94 रुपये प्रति लीटर थी। पर आज की तारीख़ में पाकिस्तान में पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमत क्रमश: 117.83 रुपये और 132.47 रुपये प्रति लीटर है।
इतना ही नहीं, पाकिस्तान में खाद्य तेल की क़ीमतों में भी भारी इजाफ़ा हुआ है। पहले जहां खाद्य तेल की क़ीमतें 180 से 200 रुपये किलो थी, वहीं अब खाद्य तेल की क़ीमतें 200 से 220 रुपये प्रति किलो हो गई हैं। बढ़ी हुई महंगाई का असर दालों की क़ीमतों पर भी पड़ा है, और दालों के दाम भी क़रीब 50 प्रतिशत तक बढ़ गये हैं। बात करें सब्ज़ियों की, तो भारत से व्यापार बंद होने के बाद से पाकिस्तान में सब्जियों की दाम बेतहाशा बढ़ गये हैं जिसके कारण पाकिस्तान में सब्ज़ियां आम लोगों की पहुंच से दूर हो गई हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान के कुल बजट का क़रीब 80 प्रतिशत पैसा क़र्ज़ अदायगी और सेना के बजट पर ख़र्च होता है। बजट की बाक़ी बची 20 प्रतिशत राशि का इस्तेमाल अन्य कामों के लिए किया जाता है। भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने में अपनी ताक़त और पैसा ख़र्च करने वाले पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में काफ़ी उतार-चढ़ाव देखे गये हैं। पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की विकास दर 4.3 प्रतिशत रही है। लेकिन बढ़ते क़र्ज़, बेतहाशा महंगाई और भारत से व्यापार बंद करने के बाद पाकिस्तान की विकास दर आने वाले समय में 3 प्रतिशत से भी कम रह सकती है।
दरअसल, पाकिस्तान की सेना और वहां की राजनीति ही पाकिस्तान की बदहाल होती अर्थव्यवस्था के लिए ज़िम्मेदार है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था अभी भी क़र्ज़ और संरक्षण पर चलती है। जानकारों के मुताबिक़, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में काफ़ी हद तक पारदर्शिता की कमी है। पाकिस्तान की बदहाल होती अर्थव्यवस्था के लिए विदेशी क़र्ज़ काफ़ी मायने रखता है, लेकिन आतंकी संगठनों की फण्डिंग पर निगरानी रखने में नाकामयाब साबित होने के बात पाकिस्तान को विदेश से मिलने वाले क़र्ज़ पर भी सवालिया निशान लगने लगे हैं। वहीं पाकिस्तान की सेना का काफ़ी हस्तक्षेप वहां की राजनीति में रहता है, जिसके कारण भी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर विपरित प्रभाव पड़ता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आतंकी संगठनों की फण्डिंग की निगरानी करने वाली वैश्विक संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने मोदी सरकार की सफ़ल कूटनीति के कारण पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल दिया है, वहीं अब FATF के एशिया पैसिसिफ समूह (एपीजी) ने पाकिस्तान को ब्लैक लिस्टेड कर दिया है।
पाकिस्तान के पास अभी भी समय है कि वो आतंकी संगठनों को पनाह देना बंद करे। एपीजी से ब्लैक लिस्टेड होने के बाद FATF से भी यदि पाकिस्तान ब्लैक लिस्टेड होता है, तो पाकिस्तान को विदेशी क़र्ज़ मिलने में काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। वहीं आईएमएफ की क़र्ज़ की कड़ी शर्तों के कारण पाकिस्तान के सामने आर्थिक स्तर पर काफ़ी चुनौतियां हैं। यदि पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार ने जल्द ही अर्थव्यवस्था की बहाली के लिए कोई सकारात्मक क़दम नहीं उठाए, तो हो सकता है कि जल्द ही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था वैश्विक वित्तीय व्यवस्था से बिल्कुल कट जाए।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को सबसे पहले आतंकी संगठनों और आतंकियों पर बड़ी कार्रवाई करना चाहिए। वहीं इमरान ख़ान को भारत से व्यापार फ़िर से शुरू करना होगा, जिससे दैनिक उपयोग की वस्तुएं पाकिस्तान में सस्ती हो सकें। पाकिस्तान की अर्थव्यस्था को सिर्फ़ अब विदेशी क़र्ज़ ही बचा सकता है। ऐसे में पाकिस्तान को कश्मीर पर भारत से युद्ध के सपने देखने के बजाय अपनी ज़मीन से आतंकियों का ख़ात्मा करना चाहिए, क्योंकि यदि पाकिस्तान आतंकियों को संरक्षण देता रहेगा तो उसकी कमज़ोर होती अर्थव्यवस्था को विदेशी सहायता मिलना धीरे-धीरे बंद हो सकता है।
SEP 06 (WTN) – आतंक को पनाह और बढ़ावा देने वाले भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान की आर्थिक हालत दिनों-दिन बदतर होती जा रही है। ग़रीबी से लड़ने के बजाय आतंकियों को हथियार मुहैया कराने और कश्मीर में आतंक फैलाने वाले पाकिस्तान में महंगाई इतनी ज़्यादा बढ़ गई है कि वहां के लोगों का जीना दूभर हो गया है। पाकिस्तान में महंगाई की मार ऐसी है कि वहां पर खाने-पीने की वस्तुओं के दाम काफ़ी बढ़ गये हैं। पाकिस्तान सरकार की ओर से जे जारी आंकड़ों के मुताबिक़, अगस्त के महीने में पाकिस्तान में महंगाई पिछले 87 महीनों में सबसे ज़्यादा रही है।
आर्थिक बदहाली की ओर बढ़ रहे पाकिस्तान में महंगाई की हालत यह है कि वहां पर महंगाई की दर 11 प्रतिशत को पार कर 11.6 प्रतिशत हो गई है। दरअसल, आर्थिक कुप्रबंधन के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लगातार ख़राब होती जा रही है। बढ़ते विदेशी क़र्ज़ और अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले लगातार कमज़ोर होती पाकिस्तानी करेंसी के कारण पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (INTERNATIONAL MONETARY FUND) से काफ़ी कठिन शर्तों पर बेलआउट पैकेज लेना पड़ा है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि INTERNATIONAL MONETARY FUND की क़र्ज़ की कठिन शर्तों के कारण ही पाकिस्तान में दिनों-दिन महंगाई बढ़ती ही जा रही है। दरअसल, आईएमएफ ने पाकिस्तान को क़र्ज़ देते समय कई शर्तें रखी हैं; जिसमें टैक्स की दर बढ़ाना, बिजली महंगी करना और पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ाना शामिल है। पाकिस्तान सरकार के इन्हीं क़दमों के कारण वहां पर महंगाई पिछले 87 महीनों में चरम पर पहुंच गई है।
पाकिस्तान की जनता महंगाई के लिए इमरान ख़ान सरकार को दोषी ठहरा रही है। जनता का कहना है कि इमरान ख़ान सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन के कारण ही पाकिस्तान की आर्थिक हालत दिनों-दिन ख़राब होती जा रही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले साल अगस्त में जब इमरान ख़ान प्रधानमंत्री बने थे, तो उस समय वहां पर पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमत क्रमश: 95.24 रुपये प्रति लीटर और 112.94 रुपये प्रति लीटर थी। पर आज की तारीख़ में पाकिस्तान में पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमत क्रमश: 117.83 रुपये और 132.47 रुपये प्रति लीटर है।
इतना ही नहीं, पाकिस्तान में खाद्य तेल की क़ीमतों में भी भारी इजाफ़ा हुआ है। पहले जहां खाद्य तेल की क़ीमतें 180 से 200 रुपये किलो थी, वहीं अब खाद्य तेल की क़ीमतें 200 से 220 रुपये प्रति किलो हो गई हैं। बढ़ी हुई महंगाई का असर दालों की क़ीमतों पर भी पड़ा है, और दालों के दाम भी क़रीब 50 प्रतिशत तक बढ़ गये हैं। बात करें सब्ज़ियों की, तो भारत से व्यापार बंद होने के बाद से पाकिस्तान में सब्जियों की दाम बेतहाशा बढ़ गये हैं जिसके कारण पाकिस्तान में सब्ज़ियां आम लोगों की पहुंच से दूर हो गई हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान के कुल बजट का क़रीब 80 प्रतिशत पैसा क़र्ज़ अदायगी और सेना के बजट पर ख़र्च होता है। बजट की बाक़ी बची 20 प्रतिशत राशि का इस्तेमाल अन्य कामों के लिए किया जाता है। भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने में अपनी ताक़त और पैसा ख़र्च करने वाले पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में काफ़ी उतार-चढ़ाव देखे गये हैं। पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की विकास दर 4.3 प्रतिशत रही है। लेकिन बढ़ते क़र्ज़, बेतहाशा महंगाई और भारत से व्यापार बंद करने के बाद पाकिस्तान की विकास दर आने वाले समय में 3 प्रतिशत से भी कम रह सकती है।
दरअसल, पाकिस्तान की सेना और वहां की राजनीति ही पाकिस्तान की बदहाल होती अर्थव्यवस्था के लिए ज़िम्मेदार है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था अभी भी क़र्ज़ और संरक्षण पर चलती है। जानकारों के मुताबिक़, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में काफ़ी हद तक पारदर्शिता की कमी है। पाकिस्तान की बदहाल होती अर्थव्यवस्था के लिए विदेशी क़र्ज़ काफ़ी मायने रखता है, लेकिन आतंकी संगठनों की फण्डिंग पर निगरानी रखने में नाकामयाब साबित होने के बात पाकिस्तान को विदेश से मिलने वाले क़र्ज़ पर भी सवालिया निशान लगने लगे हैं। वहीं पाकिस्तान की सेना का काफ़ी हस्तक्षेप वहां की राजनीति में रहता है, जिसके कारण भी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर विपरित प्रभाव पड़ता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आतंकी संगठनों की फण्डिंग की निगरानी करने वाली वैश्विक संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने मोदी सरकार की सफ़ल कूटनीति के कारण पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल दिया है, वहीं अब FATF के एशिया पैसिसिफ समूह (एपीजी) ने पाकिस्तान को ब्लैक लिस्टेड कर दिया है।
पाकिस्तान के पास अभी भी समय है कि वो आतंकी संगठनों को पनाह देना बंद करे। एपीजी से ब्लैक लिस्टेड होने के बाद FATF से भी यदि पाकिस्तान ब्लैक लिस्टेड होता है, तो पाकिस्तान को विदेशी क़र्ज़ मिलने में काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। वहीं आईएमएफ की क़र्ज़ की कड़ी शर्तों के कारण पाकिस्तान के सामने आर्थिक स्तर पर काफ़ी चुनौतियां हैं। यदि पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार ने जल्द ही अर्थव्यवस्था की बहाली के लिए कोई सकारात्मक क़दम नहीं उठाए, तो हो सकता है कि जल्द ही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था वैश्विक वित्तीय व्यवस्था से बिल्कुल कट जाए।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को सबसे पहले आतंकी संगठनों और आतंकियों पर बड़ी कार्रवाई करना चाहिए। वहीं इमरान ख़ान को भारत से व्यापार फ़िर से शुरू करना होगा, जिससे दैनिक उपयोग की वस्तुएं पाकिस्तान में सस्ती हो सकें। पाकिस्तान की अर्थव्यस्था को सिर्फ़ अब विदेशी क़र्ज़ ही बचा सकता है। ऐसे में पाकिस्तान को कश्मीर पर भारत से युद्ध के सपने देखने के बजाय अपनी ज़मीन से आतंकियों का ख़ात्मा करना चाहिए, क्योंकि यदि पाकिस्तान आतंकियों को संरक्षण देता रहेगा तो उसकी कमज़ोर होती अर्थव्यवस्था को विदेशी सहायता मिलना धीरे-धीरे बंद हो सकता है।