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ऑटो सेक्टर में मंदी की एक वजह है ‘यह स्टैण्डर्ड’!

Wednesday - September 11, 2019 2:21 pm , Category : WTN HINDI
1 अप्रैल 2019 से लागू होंगे बीएस-6 मानक
1 अप्रैल 2019 से लागू होंगे बीएस-6 मानक

बीएस-6 स्टैण्डर्ड भी बना ऑटो सेक्टर में मंदी का एक कारण !
 
SEP 11 (WTN) – वैश्विक मंदी को वजह बताएं या फ़िर भारत के घरेलू आर्थिक कारणों को, देश में ऑटो सेक्टर इस समय भयंकर मंदी की मार झेल रहा है। ऑटो सेक्टर में मंदी की कई वजहें गिनाई जा रही हैं। इस बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऑटो सेक्टर में मंदी के लिए युवाओं को ज़िम्मेदार बताया है। वित्त मंत्री के मुताबिक़, युवा अब ख़ुद की गाड़ी ख़रीदने के बजाय ओला-उबर जैसी टैक्सियों में सवारी करना ज़्यादा पसंद करते हैं। वित्त मंत्री के इस बयान के बाद से देश में एक बार फ़िर से चर्चाएं होने लगी हैं कि आख़िर ऑटो सेक्टर में ऐतिहासिक मंदी के लिए कौन-कौन से कारण ज़िम्मेदार हैं?

ऑटोमोबाइल सेक्टर के जानकारों के मुताबिक़, इस सेक्टर में मंदी के लिए कोई एक कारण ज़िम्मेदार नहीं है। कई छोटे-बड़े कारणों के चलते ऑटो सेक्टर में भयंकर मंदी आई है। जानकारों के मुताबिक़, ऑटो सेक्टर में मंदी के लिए बीएस-6 मानक भी एक बड़ी वजह है। आख़िर क्या है बीएस-6 मानक? और ऑटो सेक्टर में मंदी के लिए यह क्यों और कितना ज़िम्मेदार है? आइये इसके बारे में आपको बताते हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में एक अप्रैल 2020 से सिर्फ बीएस-6 (Bharat Stage 6) मानक वाली ही गाड़ियां बिकेंगी। दरअसल, देश में बढ़ते हुए प्रदूषण को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने वाहन निर्माता कम्पनियों को बीएस-6 मानक लागू करने के लिए एक अप्रैल 2020 की तारीख तय कर दी है। सुप्रीम कोर्ट की इस डेडलाइन से स्पष्ट है कि 1 अप्रैल 2020 से सिर्फ़ बीएस-6 मानक वाले वाहन ही बिकेंगे और उनका ही रजिस्ट्रेशन होगा।
 
बता दें कि बीएस के ज़रिए ही भारत सरकार गाड़ियों के इंजन से निकलने वाले धुएं से होने वाले प्रदूषण को रेगुलेट करती है। दरअसल, बीएस के साथ जो नम्बर होता है, उससे ये पता चलता है कि इंजन कितना प्रदूषण फैलाता है। बीएस का जितना बड़ा नम्बर होगा प्रदूषण उतना ही कम होगा। यानी कि बीएस 3 से कम प्रदूषण बीएस 4 में होता है और उससे कम प्रदूषण बीएस 6 में होता है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फ़िलहाल देश में भारत स्टेज-4 मानक वाले दुपहिया और चार पहिया वाहन ही बिक रहे हैं। हालांकि, बीएस-6 लागू होने के बाद भी पहले से सड़कों पर दौड़ रहे बीएस-4 वाहनों पर किसी तरह का बैन नहीं लगाया जाएगा। कहा जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के बीएस-6 पर दिये गये फ़ैसले से धीरे-धीरे ऑटो इंडस्ट्री में मंदी का दौर आया है। अब सरकार भी कह रही है कि ऑटो सेक्टर में मंदी की असली वजहों में से एक BS4 से BS6 में परिवर्तन है।

दरअसल, मोटर व्हीकल कितना प्रदूषण फैलाती है, इसको नापने के लिए भारत स्टेज नाम का एक स्केल बनाया गया है। भारत स्टेज एमिशन स्टैंडर्ड्स को साल 2000 में पेश किया गया था। इस एमिशन स्टैंडर्ड्स को केन्द्र सरकार तय करती है। जैसा कि हमने पहले आपको बताया बीएस का मतलब है भारत स्टेज। भारत स्टेज का सम्बन्ध उत्सर्जन मानकों से है। प्रदूषण कम से कम फैले इसलिए बीएस-6 वाहनों में खास फिल्टर लगेंगे, जिससे इससे 80 से 90 प्रतिशत तक पीएम 2.5 जैसे कण रोके जा सकेंगे और नाइट्रोजन ऑक्साइड पर नियंत्रण लगेगा।
 
दावा है कि भारत स्टेज 6 की गाड़ियां बेहद कम प्रदूषण करती हैं और दुनिया के विकसित देशों में लागू प्रदूषण के नियमों की बराबरी करती हैं। बीएस-6 लागू होने के बाद प्रदूषण को लेकर पेट्रोल और डीज़ल कारों के बीच ज़्यादा अन्तर नहीं रह जाएगा। कहा जा रहा है कि बीएस-6 अपनाने से डीज़ल कारों से 68 प्रतिशत और पेट्रोल कारों से 25 प्रतिशत तक नाइट्रोजन ऑक्साइड का उत्सर्जन कम हो जाएगा। साथ ही डीज़ल कारों से PM का उत्सर्जन 80 प्रतिशत तक कम होने की सम्भावना है। जानकारों के मुताबिक़, बीएस-6 वाहन में हवा में प्रदूषण के कण 0.05 से घटकर 0.01 रह जाएंगे।

दावा किया जा रहा है कि बीएस-4 की तुलना में बीएस-6 में प्रदूषण फैलाने वाले ख़तरनाक पदार्थ काफ़ी कम होंगे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बीएस-4 और बीएस-3 ईंधन में सल्फर की मात्रा 50 पीएम होती है, जबकि बीएस-6 मानकों में यह घटकर 10 पीएम रह जाएगी, जिससे प्रदूषण कम होगा।

वहीं कहा जा रहा है कि बीएस-6 ईंधन क्षमता बढ़ाने से कारें 4.1 लीटर में 100 किलोमीटर से अधिक का माइलेज देंगी। फ़िलहाल हक़ीकत में गाड़ियां उतना माइलेज नहीं देती हैं, जितना दावा कम्पनियों की तरफ़ से किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सभी ऑटो कम्पनियों को बीएस-6 वाले वाहनों को निर्माण करना होगा, जिससे इंजन की क्षमता में वृद्धि होगी और उत्सर्जन पहले की तुलना में कम होगा। अब जबकि कम्पनियां धीरे-धीरे अपनी गाड़ियों को बीएस-4 से बीएस-6 में अपग्रेड कर रही हैं, तो ऐसे में अपग्रेडशन से गाड़ियों की लागत बढ़ जाएगी।

कहा जा रहा है कि इस समय जागरूक ख़रीददार जानते हैं कि गाड़ी ख़रीदने के लिए यदि वे थोड़ा और रूक गये तो उन्हें बीएस-6 स्टैण्डर्ड वाली गाड़ी मिलेगी, जो कि प्रदूषण कम फैलाएगी और माइलेज भी ज़्यादा देगी। ख़रीददार यह भी जानता है कि बीएस-6 मानक वाली गाड़ी को भविष्य में बेंचना ज़्यादा आसान होगा।

जैसा कि आप जानते हैं कि नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू होने के बाद गाड़ियों का पॉल्यूशन सर्टिफिकेट भी बड़ी सख्ती से चेक किया जा रहा है, ऐसे में ख़रीददार शायद यह विचार करके बैठे हैं कि बेहतर होगा कि थोड़ा रूककर बीएस-6 स्टैण्डर्ड की गाड़ी ही ख़रीदी जाए। इन्हीं सब कारणों से कहा जा सकता है कि ऑटो सेक्टर में मंदी के लिए बीएस-6 स्टैण्डर्ड भी एक कारण है।