यूपीआई यूज़र्स को फ्रॉड से बचाने सरकार ने उठाया ‘बड़ा क़दम’
Wednesday - September 11, 2019 4:17 pm ,
Category : WTN HINDI
यूपीआई में अब यूज़र्स का जोखिम होगा कम
यूपीआई बाज़ार में किसी एक डिजिटल पेमेण्ट कम्पनी का नहीं रहेगा ‘एकाधिकार’!
SEP 11 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि इंटरनेट क्रान्ति आने और मोदी सरकार द्वारा डिजिटल इण्डिया प्रोजेक्ट शुरू करने के बाद से लोग पेमेण्ट के लिए ज़्यादातर नेट बैंकिंग और यूपीआई बेस्ट भीम एप या अन्य एप का इस्तेमाल करने लगे हैं। लेकिन देखा गया है कि यूज़र्स की ग़लतियों के कारण उसे फ्रॉड का सामना करना पडता है। यूपीआई में जोखिमों को कम करने के लिए केन्द्र की मोदी सरकार एक बड़ा क़दम उठाने जा रही है, इससे यूज़र्स को तो इससे फ़ायदा मिलेगा, लेकिन फोनपे और गूगलपे जैसी कम्पनियों को इससे जोर का झटका लग सकता है।
दरअसल, नेशनल पेमेण्ट्स कॉर्पोरेशन ऑफ़ इण्डिया (NPCI) ने डिजिटल पेमेण्ट कम्पनियों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कई तरह की शिकायतें मिलने के बाद इस तरह के दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं ताकि यूपीआई में जोखिमों को कम किया जा सके। NPCI द्वारा लागू महत्वपूर्ण प्रावधानों में से एक में डिजिटल पेमेण्ट कम्पनियों की यूपीआई बाज़ार में हिस्सेदारी की सीमा निर्धारित की गई है। कहा जा रहा है कि इससे फोनपे और गूगलपे जैसी कम्पनियों को बड़ा झटका लग सकता है।
जानकारों के मुताबिक, NPCI के इस फ़ैसले से सीधे तौर से यूपीआई-ओनली कम्पनियों वॉलमार्ट की फोनपे, गूगलपे और जल्द ही लॉन्च होनेवाली वॉट्सएपपे को नुकसान होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पेटीएम इकलौती बड़ी कम्पनी है, जो कि यूपीआई के अलावा अपने वॉलेट और कार्ड्स का समर्थन कर रही है।
NPCI के इस फ़ैसले के बाद अप्रैल 2020 से फोनपे और गूगलपे को अपनी बाज़ार हिस्सेदारी 33 प्रतिशत तक की सीमा में ही रखनी होगी। कहा जा रहा है कि ऐसा करने से इन कम्पनियों की विकास योजनाओं में रुकावट आ सकती है। जैसा कि आप जानते हैं कि बाज़ार में ज़्यादा से ज़्यादा हिस्सेदारी हासिल करने के लिए इन कम्पनियों ने अब तक काफ़ी ज़्यादा निवेश किया है, लेकिन NPCI के हिस्सेदारी सीमित रखने के फ़ैसले से इन कम्पनियों को बड़ा झटका लगा है।
इन कम्पनियों को झटके की बात हम इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि मॉर्गन स्टेलने ने हाल ही में वॉलमार्ट के शेयर्स की क़ीमतों में वृद्धि के लिए फोनपे की सफ़लता को बड़ा श्रेय दिया था। लेकिन NPCI द्वारा बाज़ार में हिस्सेदारी तय करने की नई नीति से कम्पनी के मूल्यांकन और वित्त जुटाने की योजनाओं को भी झटका लगेगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि वह टाइगर ग्लोबल, टेंसेंट, डीएसटी ग्लोबल, सॉफ्टबैंक और अन्य कम्पनियों से क़रीब एक अरब डॉलर जुटाने की प्रक्रिया में है।। कहा जा रहा है कि NPCI द्वारा बाज़ार में हिस्सेदारी तय करने के फ़ैसले के बाद फोनपे को अब वित्त जुटाने की व्यवसायिक रणनीति पर पुर्नविचार करना होगा।
दरअसल, NPCI को चिन्ता है कि गैर-बैंकिंग कम्पनियों से भुगतान के दौरान यूज़र्स को किसी भी तरह की सुरक्षा सम्बन्धित परेशानियों का सामना ना करना पड़े, इसलिए उसने यह क़दम उठाया है। डिजिटल पेमेण्ट क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक़, NPCI के इस क़दम से भारत में डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे को सुरक्षित किया जा सकेगा और किसी भी कम्पनी का इसमें एकाधिकार नहीं रहेगा, जो कि यूज़र्स के लिए और बाक़ी अन्य कम्पनियों के लिए फ़ायदेमंद है।
SEP 11 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि इंटरनेट क्रान्ति आने और मोदी सरकार द्वारा डिजिटल इण्डिया प्रोजेक्ट शुरू करने के बाद से लोग पेमेण्ट के लिए ज़्यादातर नेट बैंकिंग और यूपीआई बेस्ट भीम एप या अन्य एप का इस्तेमाल करने लगे हैं। लेकिन देखा गया है कि यूज़र्स की ग़लतियों के कारण उसे फ्रॉड का सामना करना पडता है। यूपीआई में जोखिमों को कम करने के लिए केन्द्र की मोदी सरकार एक बड़ा क़दम उठाने जा रही है, इससे यूज़र्स को तो इससे फ़ायदा मिलेगा, लेकिन फोनपे और गूगलपे जैसी कम्पनियों को इससे जोर का झटका लग सकता है।
दरअसल, नेशनल पेमेण्ट्स कॉर्पोरेशन ऑफ़ इण्डिया (NPCI) ने डिजिटल पेमेण्ट कम्पनियों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कई तरह की शिकायतें मिलने के बाद इस तरह के दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं ताकि यूपीआई में जोखिमों को कम किया जा सके। NPCI द्वारा लागू महत्वपूर्ण प्रावधानों में से एक में डिजिटल पेमेण्ट कम्पनियों की यूपीआई बाज़ार में हिस्सेदारी की सीमा निर्धारित की गई है। कहा जा रहा है कि इससे फोनपे और गूगलपे जैसी कम्पनियों को बड़ा झटका लग सकता है।
जानकारों के मुताबिक, NPCI के इस फ़ैसले से सीधे तौर से यूपीआई-ओनली कम्पनियों वॉलमार्ट की फोनपे, गूगलपे और जल्द ही लॉन्च होनेवाली वॉट्सएपपे को नुकसान होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पेटीएम इकलौती बड़ी कम्पनी है, जो कि यूपीआई के अलावा अपने वॉलेट और कार्ड्स का समर्थन कर रही है।
NPCI के इस फ़ैसले के बाद अप्रैल 2020 से फोनपे और गूगलपे को अपनी बाज़ार हिस्सेदारी 33 प्रतिशत तक की सीमा में ही रखनी होगी। कहा जा रहा है कि ऐसा करने से इन कम्पनियों की विकास योजनाओं में रुकावट आ सकती है। जैसा कि आप जानते हैं कि बाज़ार में ज़्यादा से ज़्यादा हिस्सेदारी हासिल करने के लिए इन कम्पनियों ने अब तक काफ़ी ज़्यादा निवेश किया है, लेकिन NPCI के हिस्सेदारी सीमित रखने के फ़ैसले से इन कम्पनियों को बड़ा झटका लगा है।
इन कम्पनियों को झटके की बात हम इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि मॉर्गन स्टेलने ने हाल ही में वॉलमार्ट के शेयर्स की क़ीमतों में वृद्धि के लिए फोनपे की सफ़लता को बड़ा श्रेय दिया था। लेकिन NPCI द्वारा बाज़ार में हिस्सेदारी तय करने की नई नीति से कम्पनी के मूल्यांकन और वित्त जुटाने की योजनाओं को भी झटका लगेगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि वह टाइगर ग्लोबल, टेंसेंट, डीएसटी ग्लोबल, सॉफ्टबैंक और अन्य कम्पनियों से क़रीब एक अरब डॉलर जुटाने की प्रक्रिया में है।। कहा जा रहा है कि NPCI द्वारा बाज़ार में हिस्सेदारी तय करने के फ़ैसले के बाद फोनपे को अब वित्त जुटाने की व्यवसायिक रणनीति पर पुर्नविचार करना होगा।
दरअसल, NPCI को चिन्ता है कि गैर-बैंकिंग कम्पनियों से भुगतान के दौरान यूज़र्स को किसी भी तरह की सुरक्षा सम्बन्धित परेशानियों का सामना ना करना पड़े, इसलिए उसने यह क़दम उठाया है। डिजिटल पेमेण्ट क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक़, NPCI के इस क़दम से भारत में डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे को सुरक्षित किया जा सकेगा और किसी भी कम्पनी का इसमें एकाधिकार नहीं रहेगा, जो कि यूज़र्स के लिए और बाक़ी अन्य कम्पनियों के लिए फ़ायदेमंद है।