जानिए कॉरपोरेट सेक्टर को मोदी सरकार द्वारा दी गई राहत से क्या होंगे बदलाव?
Friday - September 20, 2019 4:22 pm ,
Category : WTN HINDI
आर्थिक मंदी में मोदी सरकार ने कॉरपोरेट सेक्टर को दी 'संजीवनी'
दीवाली से पहले कॉरपोरेट सेक्टर में मोदी सरकार के फ़ैसलों से मनी 'दीवाली'!
SEP 20 (WTN) – वैश्विक आर्थिक मंदी के कारण मंदी की मार से जूझ रहा कॉरपोरेट सेक्टर काफ़ी लम्बे से समय से मोदी सरकार से किसी बड़े राहत की उम्मीद कर रहा था। ऑटो सेक्टर की बुरी हालत और उससे जुड़े अन्य उद्योगों और सर्विस सेक्टर में जारी मंदी के कारण चिन्तित केन्द्र सरकार ने मंदी के दौर में कॉरपोरेट सेक्टर को दीवाली से पहले एक बड़ा सहारा दिया है। कहा जा रहा है कि इस सहारे से आर्थिक मंदी से जूझ रहे कॉरपोरेट सेक्टर को संजीवनी मिल गई है। मोदी सरकार के आख़िर वे कौन से फ़ैसले हैं, जिनसे कारण कॉरपोरेट सेक्टर में दीवाली के पहले दीवाली मनाई जा रही है, आइये आपको विस्तार से बताते हैं।
मोदी सरकार ने कॉरपोरेट सेक्टर को राहत देते हुए सबसे पहले कॉरपोरेट इनकम टैक्स में कटौती कर दी है। सरकार के नये फ़ैसले के बाद अब घरेलू कम्पनियों पर बिना किसी छूट के इनकम टैक्स 22 प्रतिशत लगेगा। वहीं इसमें सरचार्ज और सेस जोड़ने के बाद कम्पनी को 25.17 प्रतिशत टैक्स देना होगा। सरकार के इस फैसले से उन सभी बड़ी कम्पनियों को फ़ायदा मिलेगा जो 30 प्रतिशत के कॉरपोरेट टैक्स स्लैब में आती हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कम्पनियां जो भी कमाई करती हैं, कॉरपोरेट टैक्स उस पर ही लगता है। कॉरपोरेट टैक्स के दायरे में प्राइवेट, लिमिटेड या लिस्टेड और बिना लिस्ट वाली सभी तरह की कम्पनियों आती हैं। किसी भी देश में कॉरपोरेट टैक्स को सरकार के राजस्व का एक अहम हिस्सा माना जाता है। जानकारों के मुताबिक़, कॉरपोरेट टैक्स में कमी होने से सरकार को 1.45 लाख करोड़ रुपयों की राजस्व हानि होने की आशंका है, लेकिन इस टैक्स में कमी होने से उद्योगों को फ़िलहाल एक बहुत बड़ी राहत मिल गई है।
आर्थिक मंदी में राहत देने की कड़ी में केन्द्र सरकार ने मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (MAT) में भी कम्पनियों को राहत दी है। सरकार के इस फ़ैसले के बाद अब कम्पनियों को मिनिमम अल्टरनेट टैक्स वर्तमान 18.5 प्रतिशत की जगह पर 15 प्रतिशत की दर से देना होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मिनिमम अल्टरनेट टैक्स उन कम्पनियों पर लगाया जाता है, जो मुनाफा तो कमाती हैं, लेकिन रियायतों के कारण इन पर टैक्स की देनदारी कम होती है।
मिनिमम अल्टरनेट टैक्स की दर 18.5 प्रतिशत की जगह पर 15 प्रतिशत करने से विदेशी कम्पनियों को ज़्यादा फ़ायदा होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विदेश कम्पनियों मिनिमम अल्टरनेट टैक्स ज़्यादा होने के कारण ही भारत में निवेश कम करती हैं। यदि इस टैक्स के कम होने से विदेशी कम्पनियां भारत में ज़्यादा निवेश करती हैं, तो इससे मोदी सरकार का साल 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी का लक्ष्य आसानी से पूरा हो सकता है।
धीमी गति से चल रही अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए मोदी सरकार ने नए निवेश करने वाली घरेलू कम्पनियों को भी राहत दी है। सरकार के फ़ैसले के बाद अब 1 अक्टूबर 2019 के बाद मैन्युफैक्चरिंग कम्पनी स्थापित करने वाले कारोबारियों को 15 प्रतिशत की दर से इनकम टैक्स देना होगा। इसमें सभी तरह के सरचार्ज और सेस लगने के बाद टैक्स की दर 17.10 प्रतिशत हो जाएगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस समय नए निवेशकों को 25 प्रतिशत की दर से टैक्स देना होता है।
जानकारों के मुताबिक़, सरकार के इस फ़ैसले से मोदी सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट मेक इन इण्डिया को सहारा और गति मिल सकती है। सरकार के इस फ़ैसले के बाद कारोबारी अब नई कम्पनियों पर ज़ोर देंगे, जिससे सुस्त पड़ चुकी स्टार्टअप योजना को भी बढ़ावा मिल सकता है। यदि नई कम्पनियां खुलेंगी और स्टार्टअप को गति मिलेगी तो इससे रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे। हालांकि, जो घरेलू कम्पनियां अपना प्रोडक्शन 31 मार्च 2023 के बाद करेंगी, उसे सरकार के इस फ़ैसला का फ़ायदा नहीं मिलेगा।
वहीं सरकार ने शेयर मार्केट में निवेश करने वाले निवेशकों को भी राहत दी है। मोदी सरकार ने निवेशकों को राहत देते हुए कैपिटल गेंस पर से सरचार्ज हटाने का ऐलान किया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले पूर्ण बजट में विदेशी और घरेलू निवेशकों को झटका दिया गया था, जिसमें शेयर मार्केट में निवेश पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस सरचार्ज बढ़ा दिया गया था।
सरकार के इस फ़ैसले से जो शेयर बेचने या इक्विटी म्यूचुअल फण्ड में निवेश करते हैं, उन्हें इससे राहत मिलेगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जब कोई निवेशक शेयर या म्यूचुअल फण्ड बेचता है तो उसे यूनिट में मुनाफा होता है। इस मुनाफे को कैपिटल गेंस कहते हैं और सरकार इसी पर सरचार्ज वसूलती है।
वहीं मोदी सरकार ने 5 जुलाई 2019 से पहले शेयर बायबैक का ऐलान करने वाली लिस्टेड कम्पनियों पर बायबैक टैक्स से छूट देने का भी ऐलान किया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार के इस फ़ैसले का सबसे ज़्यादा फ़ायदा उन कम्पनियों को होगा जो शेयर बायबैक करती हैं। आप जानना चाहते होंगे कि शेयर बायबैक क्या होता है? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जब कोई कम्पनी अपने ही शेयर निवेशकों से खरीदती है तो इसे बायबैक कहते हैं।
बायबैक की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन शेयरों का अस्तित्व ख़त्म हो जाता है। आमतौर पर कम्पनियों की बैलेंसशीट में अतिरिक्त नक़दी होती है, तभी कम्पनियां बायबैक पर जोर देती हैं। किसी भी कम्पनी के पास बहुत ज़्यादा नक़दी का होना अच्छा नहीं माना जाता है। कम्पनी के पास ज़्यादा नक़दी होने का मतलब है कि कम्पनी अपने नक़दी का इस्तेमाल नहीं कर पा रही है। यही कारण है कि बायबैक के जरिए कम्पनी अपने अतिरिक्त नक़दी का इस्तेमाल करती है।
मोदी सरकार द्वारा कॉरपोरेट सेक्टर को दी गई इन सौगातों के बाद शेयर बाज़ार में बहार आ गई। सेंसेक्स जहां 2200 अंक से अधिक मज़बूत हुआ तो वहीं निफ्टी में 600 अंकों से ज़्यादा की बढ़त दर्ज़ की गई। शेयर बाज़ार में इस रौनक की वजह से निवेशकों को कारोबार के दौरान क़रीब 7 लाख करोड़ से अधिक का मुनाफा हुआ है। कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में मोदी सरकार के इन फ़ैसलों का और भी ज़्यादा असर देखने को मिलेगा और आर्थिक मंदी से जूझ रही कम्पनियां जल्द ही ख़ुद को रिकवर कर पाएंगी।
SEP 20 (WTN) – वैश्विक आर्थिक मंदी के कारण मंदी की मार से जूझ रहा कॉरपोरेट सेक्टर काफ़ी लम्बे से समय से मोदी सरकार से किसी बड़े राहत की उम्मीद कर रहा था। ऑटो सेक्टर की बुरी हालत और उससे जुड़े अन्य उद्योगों और सर्विस सेक्टर में जारी मंदी के कारण चिन्तित केन्द्र सरकार ने मंदी के दौर में कॉरपोरेट सेक्टर को दीवाली से पहले एक बड़ा सहारा दिया है। कहा जा रहा है कि इस सहारे से आर्थिक मंदी से जूझ रहे कॉरपोरेट सेक्टर को संजीवनी मिल गई है। मोदी सरकार के आख़िर वे कौन से फ़ैसले हैं, जिनसे कारण कॉरपोरेट सेक्टर में दीवाली के पहले दीवाली मनाई जा रही है, आइये आपको विस्तार से बताते हैं।
मोदी सरकार ने कॉरपोरेट सेक्टर को राहत देते हुए सबसे पहले कॉरपोरेट इनकम टैक्स में कटौती कर दी है। सरकार के नये फ़ैसले के बाद अब घरेलू कम्पनियों पर बिना किसी छूट के इनकम टैक्स 22 प्रतिशत लगेगा। वहीं इसमें सरचार्ज और सेस जोड़ने के बाद कम्पनी को 25.17 प्रतिशत टैक्स देना होगा। सरकार के इस फैसले से उन सभी बड़ी कम्पनियों को फ़ायदा मिलेगा जो 30 प्रतिशत के कॉरपोरेट टैक्स स्लैब में आती हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कम्पनियां जो भी कमाई करती हैं, कॉरपोरेट टैक्स उस पर ही लगता है। कॉरपोरेट टैक्स के दायरे में प्राइवेट, लिमिटेड या लिस्टेड और बिना लिस्ट वाली सभी तरह की कम्पनियों आती हैं। किसी भी देश में कॉरपोरेट टैक्स को सरकार के राजस्व का एक अहम हिस्सा माना जाता है। जानकारों के मुताबिक़, कॉरपोरेट टैक्स में कमी होने से सरकार को 1.45 लाख करोड़ रुपयों की राजस्व हानि होने की आशंका है, लेकिन इस टैक्स में कमी होने से उद्योगों को फ़िलहाल एक बहुत बड़ी राहत मिल गई है।
आर्थिक मंदी में राहत देने की कड़ी में केन्द्र सरकार ने मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (MAT) में भी कम्पनियों को राहत दी है। सरकार के इस फ़ैसले के बाद अब कम्पनियों को मिनिमम अल्टरनेट टैक्स वर्तमान 18.5 प्रतिशत की जगह पर 15 प्रतिशत की दर से देना होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मिनिमम अल्टरनेट टैक्स उन कम्पनियों पर लगाया जाता है, जो मुनाफा तो कमाती हैं, लेकिन रियायतों के कारण इन पर टैक्स की देनदारी कम होती है।
मिनिमम अल्टरनेट टैक्स की दर 18.5 प्रतिशत की जगह पर 15 प्रतिशत करने से विदेशी कम्पनियों को ज़्यादा फ़ायदा होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विदेश कम्पनियों मिनिमम अल्टरनेट टैक्स ज़्यादा होने के कारण ही भारत में निवेश कम करती हैं। यदि इस टैक्स के कम होने से विदेशी कम्पनियां भारत में ज़्यादा निवेश करती हैं, तो इससे मोदी सरकार का साल 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी का लक्ष्य आसानी से पूरा हो सकता है।
धीमी गति से चल रही अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए मोदी सरकार ने नए निवेश करने वाली घरेलू कम्पनियों को भी राहत दी है। सरकार के फ़ैसले के बाद अब 1 अक्टूबर 2019 के बाद मैन्युफैक्चरिंग कम्पनी स्थापित करने वाले कारोबारियों को 15 प्रतिशत की दर से इनकम टैक्स देना होगा। इसमें सभी तरह के सरचार्ज और सेस लगने के बाद टैक्स की दर 17.10 प्रतिशत हो जाएगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस समय नए निवेशकों को 25 प्रतिशत की दर से टैक्स देना होता है।
जानकारों के मुताबिक़, सरकार के इस फ़ैसले से मोदी सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट मेक इन इण्डिया को सहारा और गति मिल सकती है। सरकार के इस फ़ैसले के बाद कारोबारी अब नई कम्पनियों पर ज़ोर देंगे, जिससे सुस्त पड़ चुकी स्टार्टअप योजना को भी बढ़ावा मिल सकता है। यदि नई कम्पनियां खुलेंगी और स्टार्टअप को गति मिलेगी तो इससे रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे। हालांकि, जो घरेलू कम्पनियां अपना प्रोडक्शन 31 मार्च 2023 के बाद करेंगी, उसे सरकार के इस फ़ैसला का फ़ायदा नहीं मिलेगा।
वहीं सरकार ने शेयर मार्केट में निवेश करने वाले निवेशकों को भी राहत दी है। मोदी सरकार ने निवेशकों को राहत देते हुए कैपिटल गेंस पर से सरचार्ज हटाने का ऐलान किया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले पूर्ण बजट में विदेशी और घरेलू निवेशकों को झटका दिया गया था, जिसमें शेयर मार्केट में निवेश पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस सरचार्ज बढ़ा दिया गया था।
सरकार के इस फ़ैसले से जो शेयर बेचने या इक्विटी म्यूचुअल फण्ड में निवेश करते हैं, उन्हें इससे राहत मिलेगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जब कोई निवेशक शेयर या म्यूचुअल फण्ड बेचता है तो उसे यूनिट में मुनाफा होता है। इस मुनाफे को कैपिटल गेंस कहते हैं और सरकार इसी पर सरचार्ज वसूलती है।
वहीं मोदी सरकार ने 5 जुलाई 2019 से पहले शेयर बायबैक का ऐलान करने वाली लिस्टेड कम्पनियों पर बायबैक टैक्स से छूट देने का भी ऐलान किया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार के इस फ़ैसले का सबसे ज़्यादा फ़ायदा उन कम्पनियों को होगा जो शेयर बायबैक करती हैं। आप जानना चाहते होंगे कि शेयर बायबैक क्या होता है? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जब कोई कम्पनी अपने ही शेयर निवेशकों से खरीदती है तो इसे बायबैक कहते हैं।
बायबैक की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन शेयरों का अस्तित्व ख़त्म हो जाता है। आमतौर पर कम्पनियों की बैलेंसशीट में अतिरिक्त नक़दी होती है, तभी कम्पनियां बायबैक पर जोर देती हैं। किसी भी कम्पनी के पास बहुत ज़्यादा नक़दी का होना अच्छा नहीं माना जाता है। कम्पनी के पास ज़्यादा नक़दी होने का मतलब है कि कम्पनी अपने नक़दी का इस्तेमाल नहीं कर पा रही है। यही कारण है कि बायबैक के जरिए कम्पनी अपने अतिरिक्त नक़दी का इस्तेमाल करती है।
मोदी सरकार द्वारा कॉरपोरेट सेक्टर को दी गई इन सौगातों के बाद शेयर बाज़ार में बहार आ गई। सेंसेक्स जहां 2200 अंक से अधिक मज़बूत हुआ तो वहीं निफ्टी में 600 अंकों से ज़्यादा की बढ़त दर्ज़ की गई। शेयर बाज़ार में इस रौनक की वजह से निवेशकों को कारोबार के दौरान क़रीब 7 लाख करोड़ से अधिक का मुनाफा हुआ है। कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में मोदी सरकार के इन फ़ैसलों का और भी ज़्यादा असर देखने को मिलेगा और आर्थिक मंदी से जूझ रही कम्पनियां जल्द ही ख़ुद को रिकवर कर पाएंगी।