भविष्य में 11 डिजिट का हो सकता है मोबाइल फोन नम्बर!
Monday - September 23, 2019 11:45 am ,
Category : WTN HINDI
तेज़ी से बढ़ रहे हैं देश में मोबाइल फोन यूज़र्स
जल्द ही 11 डिजिट के हो सकते हैं मोबाइल और लैण्डलाइन नम्बर
SEP 23 (WTN) – यदि हम आपसे कहें कि जल्द ही आपका मोबाइल नम्बर और लैण्डलाइन नम्बर 10 डिजिट की जगह पर 11 डिजिट का होने जा रहा है, तो इसे पढ़कर आप चौक गये होंगे कि आख़िर ऐसा क्यों और कब से होने जा रहा है। आख़िर क्या है यह पूरा मामला? आइये आपको इस बारे में विस्तार से बताते हैं। दरअसल, ट्राई (TRAI) यानी कि टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ़ इण्डिया (Telecom Regulatory Authority of India) ने देश में मोबाइल फोन नम्बर औऱ लैण्डलाइन नम्बर को वर्तमान 10 डिजिट की जगह पर 11 डिजिट का किए जाने के बारे में लोगों के सुझाव आमंत्रित किए हैं।
ट्राई का कहना है कि दिनों-दिन लगातार बढ़ती जनसंख्या के साथ टेलीकॉम कनेक्शन की मांग भी इसी तादात से बढ़ रही है। टेलीकॉम कनेक्शन की बढ़ती मांग से निपटने की ज़रूरतों को देखते हुए ही मोबाइल और लैण्डलाइन नम्बर्स को 10 डिजिट की जगह पर 11 डिजिट किये जाने का विकल्प अपनाए जाने का सुझाव है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्राई ने इस बारे में बाकायदा एक डिस्कशन पत्र जारी किया है, इस डिस्कशन पत्र का टाइटल है 'एकीकृत अंक योजना का विकास'। ट्राई के मुताबिक़, यह योजना मोबाइल और लैण्डलाइन दोनों प्रकार की लाइनों के लिए है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस समय देश में क़रीब 1.2 अरब फोन कनेक्शन हैं। ट्राई के डिस्कशन पत्र में कहा गया है, "अगर मान लिया जाए कि भारत में साल 2050 तक वायरलेस फोन यानी कि मोबाइल फोन की संख्या इतनी बढ़ जाती है कि हर व्यक्ति के पास औसतन दो मोबाइल कनेक्शन होते हैं, तो इस स्थिति में देश में एक्टिव मोबाइल फोन की संख्या ही अकेले 3.28 अरब तक पहुंच जाएगी।"
साफ़ ज़ाहिर है कि लगातार बढती जनसंख्या और लगातार बढ़ते मोबाइल फोन कनेक्शन्स को देखते हुए ट्राई का अनुमान है कि अंकों का यदि 70 प्रतिशत उपयोग भी होता है, तो साल 2050 तक देश में मोबाइल फोन कनेक्शन के लिए करीब 4.68 अरब नम्बर्स की ज़रूरत पड़ेगी। वहीं बढ़ती जनसंख्या और उसी तादात में बढ़ते इंटरनेट कनेक्शन को देखते हुए सरकार ने मशीनों के बीच पारस्परिक इंटरनेट सम्पर्क/ इंटरनेट ऑफ दी थिंग्स के लिए 13 अंकों वाली नम्बर श्रृंखला पहले ही शुरू कर दी है।
ट्राई के मुताबिक़, 9, 8 और 7 डिजिट से शुरू होने वाले 10 डिजिट के मोबाइल नम्बर्स सिर्फ़ 2.1 बिलियन मोबाइल कनेक्शन्स ही दे सकते हैं। ऐसे में भविष्य के लिए 11 डिजिट वाले मोबाइल नम्बर्स की ज़रूरत पड़ेगी। इसलिए इस तरह की योजना है कि 10 डिजिट के मोबाइल नम्बर्स को 11 डिजिट का कर दिया जाए, जिससे भविष्य में होने वाली परेशानी से बचा जा सके।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि देश में यह पहली बार नहीं है कि दूरसंचार के लिए उपयोग में आने वाले लैण्डलाइन और मोबाइल नम्बर्स की समीक्षा हो रही है। इससे पहले साल 1993 में लैण्डलाइन नम्बर्स की और साल 2003 में लैण्डलाइन और मोबाइल नम्बर्स की प्लानिंग की समीक्षा हो चुकी है। देश में मोबाइल फोन की एंट्री के बाद साल 2003 के नम्बरिंग प्लान में 750 मिलियन फोन कनेक्शन के लिए योजना बनाई गई थी। इन 750 मिलियन फोन कनेक्शन्स में 450 मिलियन मोबाइल कनेक्शन और 300 मिलियन लैण्डलाइन फोन कनेक्शन की प्लानिंग थी।
यदि सभी कुछ प्लानिंग के मुताबिक़ ही होता रहा, तो आने वाले दिनों में 10 डिजिट का मोबाइल नम्बर 11 डिजिट का हो जाएगा। वहीं मोबाइल नम्बर के अलावा लैण्डलाइन नम्बर (एसटीडी कोड + लैण्डलाइन म्बर) को भी अपडेट करके 10 डिजिट की जगह पर 11 डिजिट का कर दिया जाएगा।
SEP 23 (WTN) – यदि हम आपसे कहें कि जल्द ही आपका मोबाइल नम्बर और लैण्डलाइन नम्बर 10 डिजिट की जगह पर 11 डिजिट का होने जा रहा है, तो इसे पढ़कर आप चौक गये होंगे कि आख़िर ऐसा क्यों और कब से होने जा रहा है। आख़िर क्या है यह पूरा मामला? आइये आपको इस बारे में विस्तार से बताते हैं। दरअसल, ट्राई (TRAI) यानी कि टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ़ इण्डिया (Telecom Regulatory Authority of India) ने देश में मोबाइल फोन नम्बर औऱ लैण्डलाइन नम्बर को वर्तमान 10 डिजिट की जगह पर 11 डिजिट का किए जाने के बारे में लोगों के सुझाव आमंत्रित किए हैं।
ट्राई का कहना है कि दिनों-दिन लगातार बढ़ती जनसंख्या के साथ टेलीकॉम कनेक्शन की मांग भी इसी तादात से बढ़ रही है। टेलीकॉम कनेक्शन की बढ़ती मांग से निपटने की ज़रूरतों को देखते हुए ही मोबाइल और लैण्डलाइन नम्बर्स को 10 डिजिट की जगह पर 11 डिजिट किये जाने का विकल्प अपनाए जाने का सुझाव है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्राई ने इस बारे में बाकायदा एक डिस्कशन पत्र जारी किया है, इस डिस्कशन पत्र का टाइटल है 'एकीकृत अंक योजना का विकास'। ट्राई के मुताबिक़, यह योजना मोबाइल और लैण्डलाइन दोनों प्रकार की लाइनों के लिए है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस समय देश में क़रीब 1.2 अरब फोन कनेक्शन हैं। ट्राई के डिस्कशन पत्र में कहा गया है, "अगर मान लिया जाए कि भारत में साल 2050 तक वायरलेस फोन यानी कि मोबाइल फोन की संख्या इतनी बढ़ जाती है कि हर व्यक्ति के पास औसतन दो मोबाइल कनेक्शन होते हैं, तो इस स्थिति में देश में एक्टिव मोबाइल फोन की संख्या ही अकेले 3.28 अरब तक पहुंच जाएगी।"
साफ़ ज़ाहिर है कि लगातार बढती जनसंख्या और लगातार बढ़ते मोबाइल फोन कनेक्शन्स को देखते हुए ट्राई का अनुमान है कि अंकों का यदि 70 प्रतिशत उपयोग भी होता है, तो साल 2050 तक देश में मोबाइल फोन कनेक्शन के लिए करीब 4.68 अरब नम्बर्स की ज़रूरत पड़ेगी। वहीं बढ़ती जनसंख्या और उसी तादात में बढ़ते इंटरनेट कनेक्शन को देखते हुए सरकार ने मशीनों के बीच पारस्परिक इंटरनेट सम्पर्क/ इंटरनेट ऑफ दी थिंग्स के लिए 13 अंकों वाली नम्बर श्रृंखला पहले ही शुरू कर दी है।
ट्राई के मुताबिक़, 9, 8 और 7 डिजिट से शुरू होने वाले 10 डिजिट के मोबाइल नम्बर्स सिर्फ़ 2.1 बिलियन मोबाइल कनेक्शन्स ही दे सकते हैं। ऐसे में भविष्य के लिए 11 डिजिट वाले मोबाइल नम्बर्स की ज़रूरत पड़ेगी। इसलिए इस तरह की योजना है कि 10 डिजिट के मोबाइल नम्बर्स को 11 डिजिट का कर दिया जाए, जिससे भविष्य में होने वाली परेशानी से बचा जा सके।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि देश में यह पहली बार नहीं है कि दूरसंचार के लिए उपयोग में आने वाले लैण्डलाइन और मोबाइल नम्बर्स की समीक्षा हो रही है। इससे पहले साल 1993 में लैण्डलाइन नम्बर्स की और साल 2003 में लैण्डलाइन और मोबाइल नम्बर्स की प्लानिंग की समीक्षा हो चुकी है। देश में मोबाइल फोन की एंट्री के बाद साल 2003 के नम्बरिंग प्लान में 750 मिलियन फोन कनेक्शन के लिए योजना बनाई गई थी। इन 750 मिलियन फोन कनेक्शन्स में 450 मिलियन मोबाइल कनेक्शन और 300 मिलियन लैण्डलाइन फोन कनेक्शन की प्लानिंग थी।
यदि सभी कुछ प्लानिंग के मुताबिक़ ही होता रहा, तो आने वाले दिनों में 10 डिजिट का मोबाइल नम्बर 11 डिजिट का हो जाएगा। वहीं मोबाइल नम्बर के अलावा लैण्डलाइन नम्बर (एसटीडी कोड + लैण्डलाइन म्बर) को भी अपडेट करके 10 डिजिट की जगह पर 11 डिजिट का कर दिया जाएगा।