शिक्षा संस्थानों को अब शैक्षणिक गतिविधियों की ऑनलाइन जानकारी देना होगा ज़रूरी
Tuesday - September 24, 2019 3:27 pm ,
Category : WTN HINDI
उच्च शिक्षा में सुधार पर पीपुल्स विश्वविद्यालय में आयोजित हुई वर्कशॉप
पीपुल्स विश्वविद्यालय में हुआ NAAC Criteria के दूसरे चरण की वर्कशॉप का आयोजन
SEP 24 (WTN) – किसी भी देश की प्रगति उस देश की शिक्षा प्रणाली पर काफ़ी हद तक निर्भर करती है। ख़ासकर किसी भी देश की उच्च शिक्षा की गुणवत्ता उस देश की सामाजिक और आर्थिक प्रगति की आधारशिला होती है। भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में आज भी उच्च शिक्षा की गुणवत्ता विदेश की तुलना में काफ़ी पीछे है। इसी कारण दुनिया के टॉप 100 विश्वविद्यालयों में एक भी भारतीय विश्वविद्यालय शामिल नहीं है। भारत में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में गुणात्मक सुधार हो सके, इसके लिए NAAC (National Assessment and Accreditation Council) भारतीय विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक और एकेडमिक सुधार के लिए कई सालों से प्रयत्शनील है।
इसी कड़ी में भोपाल स्थित पीपुल्स विश्वविद्यालय में NAAC Criteria के दूसरे चरण के लिए एक वर्कशॉप का आयोजन मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय और पीपुल्स विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। वर्कशॉप में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉ आर.जे. राव, पीपुल्स विश्वविद्यालय के वाइस चांससर डॉ राजेश कपूर, जीवाजी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डी.डी. अग्रवाल और बकरतउल्ला विश्वविद्यालय के NAAC कॉर्डिनेटर डॉ के.बी. पाण्डा विशेष रूप से उपस्थित थे।

वर्कशॉप को सम्बोधित करते हुए पीपुल्स विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ राजेश कपूर ने कहा कि NAAC का उद्देश्य भारत के शिक्षा संस्थनों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का बनाना है। डॉ कपूर ने अपने भाषण में आगे कहा कि मध्य प्रदेश सरकार इस दिशा में प्रयासरत है कि राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को NAAC से मान्यता प्राप्त हो, जिससे राज्य में उच्च शिक्षा के स्तर में सुधार हो सके।

NAAC Criteria के दूसरे चरण के लिए आयोजित वर्कशॉप को सम्बोधित करते हुए बकरतउल्ला विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ आर.जे. राव ने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों को शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए काम करना चाहिए। डॉ राव ने कहा कि विद्यार्थियों को उच्चस्तरीय शिक्षा के मौक़े उपलब्ध कराना शिक्षा संस्थानों की बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है और इस काम के लिए शिक्षा संस्थानों की फैकेल्टी की ज़िम्मेदारी काफ़ी बढ़ जाती है, क्योंकि फैकेल्टी ही विद्यार्थियों को एक अच्छा इन्सान बनाती है जो कि आगे जाकर समाज और देश के लिए कुछ बेहतर कर सकते हैं।
डॉ राव ने शिक्षा संस्थानों को जानकारी देते हुए बताया कि अब सभी शिक्षा संस्थानों को अपने संस्थानों में होने वाली सभी तरह की शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी ऑनलाइन अपलोड करना होगी, जिससे NAAC को इन संस्थानों की ग्रेडिंग करने में तो आसानी हो ही, साथ ही ऐसा करने से शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी हासिल करने का एक सिस्टम बन सके। डॉ राव ने फैकेल्टी को निर्देशित करते हुए कहा कि NAAC की नई पॉलिसी के तहत अब उन्हें अपने शैक्षणिक कार्यों का बाकायदा रिकॉर्ड रखना होगा और उसे NAAC की वेबसाइट पर अपलोड करना होगा, ताकि उसकी जानकारी अन्य लोगों को भी मिल सके।

वहीं जीवाजी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डी.डी. अग्रवाल ने विश्वविद्यालयों से आए प्रतिनिधियों को NAAC की नई कार्यप्रणाली के बारे में समझाते हुए बताया कि अब सभी शिक्षा संस्थानों को साल 2030 तक NAAC से मान्यता हासिल कराना अनिवार्य है। प्रोफेसर अग्रवाल ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षा की परिणात्मकता पर ज़ोर दिया जाएगा, जिससे शिक्षा सही तरीक़े से विद्यार्थियों को मिल सके। प्रोफेसर अग्रवाल ने अपने सम्बोधन में कहा कि शिक्षा संस्थानों और फैकेल्टी को अब अपने शैक्षणिक कार्यों की पूरी जानकारी वेबसाइट पर अपलोड करना होगा, जिससे उस डेटा का विश्लेषण कर NAAC भविष्य में उच्च शिक्षा के लिए नई नीतियां बना सके।

पीपुल्स विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित इस वर्कशॉप में पीपुल्स विश्वविद्यालय के डायरेक्टर (एकेडमिक) डॉ वी.के.पाण्डया, पीपुल्स विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार डॉ नीरजा मल्लिक, वर्कशॉप के कॉर्डिनेटर और पीपुल्स विश्वविद्यालय के डीन (स्टूडेण्ट वेलफेयर) अखिलेश मित्तल के साथ-साथ पीपुल्स विश्वविद्यालय और कई विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। इस वर्कशॉप का संचालन फारिया इहतेशाम और साहिबा ख़ान ने किया।
SEP 24 (WTN) – किसी भी देश की प्रगति उस देश की शिक्षा प्रणाली पर काफ़ी हद तक निर्भर करती है। ख़ासकर किसी भी देश की उच्च शिक्षा की गुणवत्ता उस देश की सामाजिक और आर्थिक प्रगति की आधारशिला होती है। भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में आज भी उच्च शिक्षा की गुणवत्ता विदेश की तुलना में काफ़ी पीछे है। इसी कारण दुनिया के टॉप 100 विश्वविद्यालयों में एक भी भारतीय विश्वविद्यालय शामिल नहीं है। भारत में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में गुणात्मक सुधार हो सके, इसके लिए NAAC (National Assessment and Accreditation Council) भारतीय विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक और एकेडमिक सुधार के लिए कई सालों से प्रयत्शनील है।
इसी कड़ी में भोपाल स्थित पीपुल्स विश्वविद्यालय में NAAC Criteria के दूसरे चरण के लिए एक वर्कशॉप का आयोजन मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय और पीपुल्स विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। वर्कशॉप में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉ आर.जे. राव, पीपुल्स विश्वविद्यालय के वाइस चांससर डॉ राजेश कपूर, जीवाजी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डी.डी. अग्रवाल और बकरतउल्ला विश्वविद्यालय के NAAC कॉर्डिनेटर डॉ के.बी. पाण्डा विशेष रूप से उपस्थित थे।

वर्कशॉप को सम्बोधित करते हुए पीपुल्स विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ राजेश कपूर ने कहा कि NAAC का उद्देश्य भारत के शिक्षा संस्थनों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का बनाना है। डॉ कपूर ने अपने भाषण में आगे कहा कि मध्य प्रदेश सरकार इस दिशा में प्रयासरत है कि राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को NAAC से मान्यता प्राप्त हो, जिससे राज्य में उच्च शिक्षा के स्तर में सुधार हो सके।

NAAC Criteria के दूसरे चरण के लिए आयोजित वर्कशॉप को सम्बोधित करते हुए बकरतउल्ला विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ आर.जे. राव ने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों को शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए काम करना चाहिए। डॉ राव ने कहा कि विद्यार्थियों को उच्चस्तरीय शिक्षा के मौक़े उपलब्ध कराना शिक्षा संस्थानों की बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है और इस काम के लिए शिक्षा संस्थानों की फैकेल्टी की ज़िम्मेदारी काफ़ी बढ़ जाती है, क्योंकि फैकेल्टी ही विद्यार्थियों को एक अच्छा इन्सान बनाती है जो कि आगे जाकर समाज और देश के लिए कुछ बेहतर कर सकते हैं।
डॉ राव ने शिक्षा संस्थानों को जानकारी देते हुए बताया कि अब सभी शिक्षा संस्थानों को अपने संस्थानों में होने वाली सभी तरह की शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी ऑनलाइन अपलोड करना होगी, जिससे NAAC को इन संस्थानों की ग्रेडिंग करने में तो आसानी हो ही, साथ ही ऐसा करने से शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी हासिल करने का एक सिस्टम बन सके। डॉ राव ने फैकेल्टी को निर्देशित करते हुए कहा कि NAAC की नई पॉलिसी के तहत अब उन्हें अपने शैक्षणिक कार्यों का बाकायदा रिकॉर्ड रखना होगा और उसे NAAC की वेबसाइट पर अपलोड करना होगा, ताकि उसकी जानकारी अन्य लोगों को भी मिल सके।

वहीं जीवाजी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डी.डी. अग्रवाल ने विश्वविद्यालयों से आए प्रतिनिधियों को NAAC की नई कार्यप्रणाली के बारे में समझाते हुए बताया कि अब सभी शिक्षा संस्थानों को साल 2030 तक NAAC से मान्यता हासिल कराना अनिवार्य है। प्रोफेसर अग्रवाल ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षा की परिणात्मकता पर ज़ोर दिया जाएगा, जिससे शिक्षा सही तरीक़े से विद्यार्थियों को मिल सके। प्रोफेसर अग्रवाल ने अपने सम्बोधन में कहा कि शिक्षा संस्थानों और फैकेल्टी को अब अपने शैक्षणिक कार्यों की पूरी जानकारी वेबसाइट पर अपलोड करना होगा, जिससे उस डेटा का विश्लेषण कर NAAC भविष्य में उच्च शिक्षा के लिए नई नीतियां बना सके।

पीपुल्स विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित इस वर्कशॉप में पीपुल्स विश्वविद्यालय के डायरेक्टर (एकेडमिक) डॉ वी.के.पाण्डया, पीपुल्स विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार डॉ नीरजा मल्लिक, वर्कशॉप के कॉर्डिनेटर और पीपुल्स विश्वविद्यालय के डीन (स्टूडेण्ट वेलफेयर) अखिलेश मित्तल के साथ-साथ पीपुल्स विश्वविद्यालय और कई विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। इस वर्कशॉप का संचालन फारिया इहतेशाम और साहिबा ख़ान ने किया।