क्या 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हो पाएगा हासिल?
Thursday - September 26, 2019 1:25 pm ,
Category : WTN HINDI
प्रधानमंत्री मोदी के लिए चुनौती होगी 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था
प्रधानमंत्री मोदी जुटे 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का टारगेट हासिल करने
SEP 26 (WTN) – दुनिया की सातवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश भारत की अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है। लगातार बढ़ती चुनौतियों के बीच, भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साल 2025 तक भारत की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर यानी कि 5 लाख करोड़ डॉलर करने का लक्ष्य रखा है। भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश के लिए साल 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना एक चुनौती है। हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि उनकी सरकार पूरी मेहनत, योजना और सकारात्मक सोच के साथ इस दिशा में आगे बढ़ रही है कि साल 2025 तक भारत की अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर की हो जाए।
लेकिन क्या 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था तक पहुंचना भारत जैसे विकासशील देश के लिए आसान होगा? आख़िर इस चुनौती को हासिल करने के लिए किस तरह की परेशानियां और चुनौतियां सामने आ सकती हैं, और भारत कैसे इन चुनौतियों से निपट सकता है? आइये इस बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।
भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में काम कर रहे प्रधानमंत्री मोदी के लिए इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सबसे पहले भारी भरकम विदेशी निवेश को भारत में लाना होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि तेज़ी से बदलते भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर, इकोसिस्टम और शहरीकरण में निवेश के कई बेहतरीन मौक़े हैं।
लेकिन विदेशी निवेश तभी सम्भव है जब देश के राजनीतिक स्थायित्व हो, शान्ति का माहौल हो और निवेशकों के हित में सरकारी नियम हों। इतना ही नहीं, विदेशी निवेशकों को मूलभूत सुविधाएं हासिल हों और उन्हें अपने कामों को पूरा करने के लिए सरकारी विभागों के चक्कर ना काटने पड़े। हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी के अभी तक के कार्यकाल में ईज ऑफ़ डूइंग बिजनेस में भारत की रैकिंग में सुधार हुआ है, लेकिन फ़िर भी विदेशी निवेशकों को भारत में आकर्षित करने के लिए नियमों को शिथिल करने के साथ-साथ उन्हें बिजली, पानी और सड़कों की विश्वस्तरीय सुविधा देना होंगी।
हालांकि, जैसा कि आप जानते हैं कि वैश्विक आर्थिक मंदी का गहरा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। इसी कारण से मोदी सरकार ने अर्थव्यवस्था की बेहतरी के लिए देशी और विदेशी कम्पनियों को राहत देने के लिए हाल ही में कई घोषणाएं की हैं। मोदी सरकार ने कॉरपोरेट टैक्स में कटौती करके एक सकारात्मक संदेश देने की कोशिश की है कि भारत की सरकार कॉरपोरेट के साथ है।
प्रधानमंत्री मोदी ख़ुद जानते हैं कि 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य आसान नहीं है। इसलिए वे इसे हासिल करने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। विदेशी निवेशकों को भारत में निवेश के लिए आकर्षित करने के प्रयास में प्रधानमंत्री मोदी का कहना है, “विकास के दस में से सात इंडीकेटर्स जैसे राजनीतिक स्थिरता, करेंसी स्थिरता, हाई क्वालिटी प्रोडक्ट्स, एंटी करप्शन, कम लागत, स्ट्रैटेजिक लोकेशन और आईपीआर में भारत नम्बर वन रहा है और बाक़ी इंडिकेटर में भी ऊपर की जगह पर है।”
प्रधानमंत्री मोदी की बातों से साफ़ ज़ाहिर होता है कि 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने के लिए सबसे ज़रूरी विदेशी निवेश के लिए जो ज़रूरी मापदण्ड हैं उन पर भारत खरा उतर रहा है। यदि प्रधानमंत्री मोदी भारत में विदेशी निवेश को बढ़ाना चाहते हैं तो विदेशी कम्पनियों को इसका अहसास हो कि यदि उन्होंने भारत में निवेश किया तो ग्लोबल बेंचमार्किंग सिस्टम के तहत उनकी इच्छाएं और सपने भारत में पूरे हो सकते हैं। यह तो तय है कि यदि विदेशी कम्पनियों ने भारत में निवेश किया तो वे अपनी तकनीक और भारतीय प्रतिभा के दम पर काफ़ी कुछ भारत में हासिल कर सकती हैं।
जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में निवेश की अपार सम्भावनाएं हैं, ऐसे में भारत में क़रीब 100 लाख करोड़ रुपये यानी कि लगभग 1.3 ट्रिलियन डॉलर आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर ख़र्च होने जा रहे हैं। इसके अलावा भारत के सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी लाखों करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि भारत सरकार ने अपना रक्षा क्षेत्र, निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया है। यानी कि इन सभी क्षेत्रों में मेक इन इण्डिया प्रोजेक्ट के तहत निवेश की अपार सम्भावनाएं हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 2014 में भारत की अर्थव्यवस्था 2 ट्रिलियन डॉलर की थी
और साल 2025 तक मोदी सरकार देश की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर बनाने की दिशा में काम कर रही है। लक्ष्य काफ़ी बड़ा है, और इस बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत के पास क्षमता, साहस और परिस्थितियां हैं।
जैसा कि पहले हमने आपको बताया कि निवेश के लिए विदेश कम्पनियों को अनुकूल वातावरण बहुत ज़रूरी है। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि ग्रोथ के लिए ज़रूरी चार अहम फैक्टर डेमोक्रेसी (Democracy), डेमोग्राफी (Demography), डिमांड (Demand) और डिसाइसिवनेस (Decisiveness) भारत में हैं और इन्हीं चार फैक्टर के कारण विदेशी कम्पनियों को भारत में सुरक्षा और उसके विकास का भरोसा मिलता है।
वहीं विदेशी कम्पनियों को विश्वास दिलाते हुए प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि उनकी सरकार ने बैंकिंग क्षेत्र में सुधार किया है और दिवालिया क़ानून बनाया है जिससे कम्पनियों को किसी भी तरह की वित्तीय परेशानियों का सामना भारत में नहीं करना पड़ेगा।
जैसा कि आप जान ही गये होंगे कि 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने के लिए विदेशी निवेश काफ़ी ज़रूरी है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले पांच सालों में भारत में 28,600 करोड़ डॉलर का विदेशी निवेश हुआ है, जो कि 20 सालों में हुए विदेशी निवेश का 50 प्रतिशत है।
यानी कि कहा जा सकता है मोदी सरकार के प्रयासों के कारण ही विदेशी निवेशकों का भारत में विश्वास बढ़ा है और वे अब पहले की तुलना में ज़्यादा विदेशी निवेश भारत में हो रहा है। यह सही है कि नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद एक भी आतंकी घटना देश में नहीं हुई है, जिससे विदेशी निवेशकों को शान्तिपूर्ण माहौल में व्यापार करने का मौक़ा मिला है। अब देखना होगा कि मोदी सरकार, विदेशी निवेशकों का यह भरोसा आगे भी कायम रख पाती है कि नहीं, और भारत 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का मुश्किल लक्ष्य हासिल कर पाता है कि नहीं?
SEP 26 (WTN) – दुनिया की सातवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश भारत की अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है। लगातार बढ़ती चुनौतियों के बीच, भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साल 2025 तक भारत की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर यानी कि 5 लाख करोड़ डॉलर करने का लक्ष्य रखा है। भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश के लिए साल 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना एक चुनौती है। हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि उनकी सरकार पूरी मेहनत, योजना और सकारात्मक सोच के साथ इस दिशा में आगे बढ़ रही है कि साल 2025 तक भारत की अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर की हो जाए।
लेकिन क्या 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था तक पहुंचना भारत जैसे विकासशील देश के लिए आसान होगा? आख़िर इस चुनौती को हासिल करने के लिए किस तरह की परेशानियां और चुनौतियां सामने आ सकती हैं, और भारत कैसे इन चुनौतियों से निपट सकता है? आइये इस बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।
भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में काम कर रहे प्रधानमंत्री मोदी के लिए इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सबसे पहले भारी भरकम विदेशी निवेश को भारत में लाना होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि तेज़ी से बदलते भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर, इकोसिस्टम और शहरीकरण में निवेश के कई बेहतरीन मौक़े हैं।
लेकिन विदेशी निवेश तभी सम्भव है जब देश के राजनीतिक स्थायित्व हो, शान्ति का माहौल हो और निवेशकों के हित में सरकारी नियम हों। इतना ही नहीं, विदेशी निवेशकों को मूलभूत सुविधाएं हासिल हों और उन्हें अपने कामों को पूरा करने के लिए सरकारी विभागों के चक्कर ना काटने पड़े। हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी के अभी तक के कार्यकाल में ईज ऑफ़ डूइंग बिजनेस में भारत की रैकिंग में सुधार हुआ है, लेकिन फ़िर भी विदेशी निवेशकों को भारत में आकर्षित करने के लिए नियमों को शिथिल करने के साथ-साथ उन्हें बिजली, पानी और सड़कों की विश्वस्तरीय सुविधा देना होंगी।
हालांकि, जैसा कि आप जानते हैं कि वैश्विक आर्थिक मंदी का गहरा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। इसी कारण से मोदी सरकार ने अर्थव्यवस्था की बेहतरी के लिए देशी और विदेशी कम्पनियों को राहत देने के लिए हाल ही में कई घोषणाएं की हैं। मोदी सरकार ने कॉरपोरेट टैक्स में कटौती करके एक सकारात्मक संदेश देने की कोशिश की है कि भारत की सरकार कॉरपोरेट के साथ है।
प्रधानमंत्री मोदी ख़ुद जानते हैं कि 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य आसान नहीं है। इसलिए वे इसे हासिल करने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। विदेशी निवेशकों को भारत में निवेश के लिए आकर्षित करने के प्रयास में प्रधानमंत्री मोदी का कहना है, “विकास के दस में से सात इंडीकेटर्स जैसे राजनीतिक स्थिरता, करेंसी स्थिरता, हाई क्वालिटी प्रोडक्ट्स, एंटी करप्शन, कम लागत, स्ट्रैटेजिक लोकेशन और आईपीआर में भारत नम्बर वन रहा है और बाक़ी इंडिकेटर में भी ऊपर की जगह पर है।”
प्रधानमंत्री मोदी की बातों से साफ़ ज़ाहिर होता है कि 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने के लिए सबसे ज़रूरी विदेशी निवेश के लिए जो ज़रूरी मापदण्ड हैं उन पर भारत खरा उतर रहा है। यदि प्रधानमंत्री मोदी भारत में विदेशी निवेश को बढ़ाना चाहते हैं तो विदेशी कम्पनियों को इसका अहसास हो कि यदि उन्होंने भारत में निवेश किया तो ग्लोबल बेंचमार्किंग सिस्टम के तहत उनकी इच्छाएं और सपने भारत में पूरे हो सकते हैं। यह तो तय है कि यदि विदेशी कम्पनियों ने भारत में निवेश किया तो वे अपनी तकनीक और भारतीय प्रतिभा के दम पर काफ़ी कुछ भारत में हासिल कर सकती हैं।
जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में निवेश की अपार सम्भावनाएं हैं, ऐसे में भारत में क़रीब 100 लाख करोड़ रुपये यानी कि लगभग 1.3 ट्रिलियन डॉलर आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर ख़र्च होने जा रहे हैं। इसके अलावा भारत के सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी लाखों करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि भारत सरकार ने अपना रक्षा क्षेत्र, निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया है। यानी कि इन सभी क्षेत्रों में मेक इन इण्डिया प्रोजेक्ट के तहत निवेश की अपार सम्भावनाएं हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 2014 में भारत की अर्थव्यवस्था 2 ट्रिलियन डॉलर की थी
और साल 2025 तक मोदी सरकार देश की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर बनाने की दिशा में काम कर रही है। लक्ष्य काफ़ी बड़ा है, और इस बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत के पास क्षमता, साहस और परिस्थितियां हैं।
जैसा कि पहले हमने आपको बताया कि निवेश के लिए विदेश कम्पनियों को अनुकूल वातावरण बहुत ज़रूरी है। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि ग्रोथ के लिए ज़रूरी चार अहम फैक्टर डेमोक्रेसी (Democracy), डेमोग्राफी (Demography), डिमांड (Demand) और डिसाइसिवनेस (Decisiveness) भारत में हैं और इन्हीं चार फैक्टर के कारण विदेशी कम्पनियों को भारत में सुरक्षा और उसके विकास का भरोसा मिलता है।
वहीं विदेशी कम्पनियों को विश्वास दिलाते हुए प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि उनकी सरकार ने बैंकिंग क्षेत्र में सुधार किया है और दिवालिया क़ानून बनाया है जिससे कम्पनियों को किसी भी तरह की वित्तीय परेशानियों का सामना भारत में नहीं करना पड़ेगा।
जैसा कि आप जान ही गये होंगे कि 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने के लिए विदेशी निवेश काफ़ी ज़रूरी है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले पांच सालों में भारत में 28,600 करोड़ डॉलर का विदेशी निवेश हुआ है, जो कि 20 सालों में हुए विदेशी निवेश का 50 प्रतिशत है।
यानी कि कहा जा सकता है मोदी सरकार के प्रयासों के कारण ही विदेशी निवेशकों का भारत में विश्वास बढ़ा है और वे अब पहले की तुलना में ज़्यादा विदेशी निवेश भारत में हो रहा है। यह सही है कि नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद एक भी आतंकी घटना देश में नहीं हुई है, जिससे विदेशी निवेशकों को शान्तिपूर्ण माहौल में व्यापार करने का मौक़ा मिला है। अब देखना होगा कि मोदी सरकार, विदेशी निवेशकों का यह भरोसा आगे भी कायम रख पाती है कि नहीं, और भारत 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का मुश्किल लक्ष्य हासिल कर पाता है कि नहीं?