यदि ‘ऐसा’ हुआ तो आसमान छू सकती हैं तेल की क़ीमतें
Monday - September 30, 2019 3:56 pm ,
Category : WTN HINDI
सऊदी अरब और ईरान के बीच चरम पर पहुंचा तनाव
ईरान के ‘एक ग़लती’ से ध्वस्त हो सकती पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था
SEP 30 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था तेल पर टिकी हुई है। जहां दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था ही पूर्ण रूप से कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है, तो वहीं भारत जैसे देश, जो कि बाहर से तेल आयात करते हैं, उनकी अर्थव्यवस्था के लिए भी तेल सबसे ज़्यादा ज़रूरी है। अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में तेल की क़ीमतों का असर दुनिया भर के देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है, जिससे दुनिया के लोग प्रभावित होते हैं।
पूरी दुनिया में तेल की ज़्यादातर सप्लाई खाड़ी देशों से होती है। लेकिन सालों से खाड़ी का इलाका अशांत बना हुआ है। 90 के दशक में हुए खाड़ी युद्ध से लगातार खाड़ी क्षेत्र में किसी ना किसी कारण से तनाव बना रहता है, जिसके कारण तेल के दामों में उछाल देखने को मिलता रहता है। जैसा कि आप जानते हैं कि काफ़ी लम्बे से समय से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। दोनों ही देशों के बीच आपसी दुश्मनी इस हद तक बढ़ गई है कि किसी भी दिन दोनों देशों के बीच युद्ध छिड़ सकता है।
खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के निकटतम सहयोगी सऊदी अरब की भी ईरान से पुरानी दुश्मनी रही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सऊदी अरब जहां सुन्नी बाहुल्य देश है तो वहीं ईरान शिया बाहुल्य देश है। ऐसे में इन दोनों ही देशों के बीच राजनीतिक कारणों के अलावा धार्मिक कारणों से भी तनाव चरम पर रहता है।
अभी हाल ही में सऊदी अरब में दुनिया की सबसे बड़ी तेल कम्पनी आरामको के दो संयंत्रों में ड्रोन हमले के बाद पूरी दुनिया में तेल की आपूर्ति बाधित हो गई। इन संयंत्रों पर हमले के बाद अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फ़िर से युद्ध की नौबत आ गई थी, क्योंकि अमेरिका और सऊदी अरब को शक है कि तेल संयंत्रों पर हमला ईरान की शह पर यमन विद्रोहियों ने किया था।
इन तमाम घटनाओं के बीच, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने एक साक्षात्कार में चेतावनी दी है कि अगर ईरान को रोकने के लिए पूरी दुनिया एक साथ नहीं आई, तो तेल की क़ीमतें अकल्पनीय रूप से महंगी हो सकती हैं। हालांकि, ईरान को रोकने के लिए उन्होंने कहा कि वह एक सैन्य समाधान की बजाय राजनीतिक समाधान पसंद करेंगे।
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस ने पूरी दुनिया को चेताते हुए कहा, “अगर पूरा विश्व ईरान को रोकने के लिए एक मज़बूत और दृढ़ कार्रवाई नहीं करता है, तो हम आगे बढ़ेंगे, जिससे विश्व के हितों को ख़तरा होगा, क्योंकि इससे पूरी दुनिया को तेल की आपूर्ति बाधित हो जाएगी और यदि ऐसा होता है तो इससे तेल की क़ीमतें अकल्पनीय रूप से बढ़ जाएंगी।”
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 14 सितम्बर को दुनिया के सबसे बड़ी पेट्रोलियम प्रसंस्करण सुविधा पर हमला हुआ था, जिससे वैश्विक तेल की आपूर्ति 5 प्रतिशत तक बाधित हुई थी। अमेरिका और सऊदी अरब को इस हमले में ईरान के षड़यंत्र का शक है। सऊदी अरब का कहना है कि ईरान ने तेल संयंत्रों पर हमलाकर एक तरह से युद्ध छेड़ने का काम किया था।
लेकिन कहा जा सकता है कि तेल संयंत्रों पर हमले के बाद सऊदी अरब ने बहुत बड़े धैर्य का परिचय दिया था, क्योंकि यदि सऊदी अरब बदले की कार्रवाई करते हुई ईरान पर हमला करता तो दोनों देशों की बीच युद्ध छिड़ जाता और इससे तेल की आपूर्ति ठप होने से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो जाती।
यानी कि साफ़ है कि सऊदी अरब तेल की दुनिया की सबसे बड़ी कम्मनी अरामको के दो संयंत्रों पर हमले के बाद ईरान पर आक्रमण करने के मूड़ में था, लेकिन सऊदी अरब जानता था कि खाड़ी में यदि युद्ध छिड़ जाता तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पटरी से उतर जाती। लेकिन इस हमले के बाद तय है कि सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों पर गम्भीर ख़तरा मण्डरा रहा है और यदि ईरान की तरफ़ से फ़िर इस तरह का कोई हमला फ़िर किया गया, तो इस बार हो सकता है कि सऊदी अरब, ईरान पर बदले की कार्रवाई करे। और यदि ऐसा होता है तो इससे पूरी दुनिया की तेल आपूर्ति बुरी तरह से बाधित होगी और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी।
SEP 30 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था तेल पर टिकी हुई है। जहां दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था ही पूर्ण रूप से कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है, तो वहीं भारत जैसे देश, जो कि बाहर से तेल आयात करते हैं, उनकी अर्थव्यवस्था के लिए भी तेल सबसे ज़्यादा ज़रूरी है। अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में तेल की क़ीमतों का असर दुनिया भर के देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है, जिससे दुनिया के लोग प्रभावित होते हैं।
पूरी दुनिया में तेल की ज़्यादातर सप्लाई खाड़ी देशों से होती है। लेकिन सालों से खाड़ी का इलाका अशांत बना हुआ है। 90 के दशक में हुए खाड़ी युद्ध से लगातार खाड़ी क्षेत्र में किसी ना किसी कारण से तनाव बना रहता है, जिसके कारण तेल के दामों में उछाल देखने को मिलता रहता है। जैसा कि आप जानते हैं कि काफ़ी लम्बे से समय से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। दोनों ही देशों के बीच आपसी दुश्मनी इस हद तक बढ़ गई है कि किसी भी दिन दोनों देशों के बीच युद्ध छिड़ सकता है।
खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के निकटतम सहयोगी सऊदी अरब की भी ईरान से पुरानी दुश्मनी रही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सऊदी अरब जहां सुन्नी बाहुल्य देश है तो वहीं ईरान शिया बाहुल्य देश है। ऐसे में इन दोनों ही देशों के बीच राजनीतिक कारणों के अलावा धार्मिक कारणों से भी तनाव चरम पर रहता है।
अभी हाल ही में सऊदी अरब में दुनिया की सबसे बड़ी तेल कम्पनी आरामको के दो संयंत्रों में ड्रोन हमले के बाद पूरी दुनिया में तेल की आपूर्ति बाधित हो गई। इन संयंत्रों पर हमले के बाद अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फ़िर से युद्ध की नौबत आ गई थी, क्योंकि अमेरिका और सऊदी अरब को शक है कि तेल संयंत्रों पर हमला ईरान की शह पर यमन विद्रोहियों ने किया था।
इन तमाम घटनाओं के बीच, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने एक साक्षात्कार में चेतावनी दी है कि अगर ईरान को रोकने के लिए पूरी दुनिया एक साथ नहीं आई, तो तेल की क़ीमतें अकल्पनीय रूप से महंगी हो सकती हैं। हालांकि, ईरान को रोकने के लिए उन्होंने कहा कि वह एक सैन्य समाधान की बजाय राजनीतिक समाधान पसंद करेंगे।
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस ने पूरी दुनिया को चेताते हुए कहा, “अगर पूरा विश्व ईरान को रोकने के लिए एक मज़बूत और दृढ़ कार्रवाई नहीं करता है, तो हम आगे बढ़ेंगे, जिससे विश्व के हितों को ख़तरा होगा, क्योंकि इससे पूरी दुनिया को तेल की आपूर्ति बाधित हो जाएगी और यदि ऐसा होता है तो इससे तेल की क़ीमतें अकल्पनीय रूप से बढ़ जाएंगी।”
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 14 सितम्बर को दुनिया के सबसे बड़ी पेट्रोलियम प्रसंस्करण सुविधा पर हमला हुआ था, जिससे वैश्विक तेल की आपूर्ति 5 प्रतिशत तक बाधित हुई थी। अमेरिका और सऊदी अरब को इस हमले में ईरान के षड़यंत्र का शक है। सऊदी अरब का कहना है कि ईरान ने तेल संयंत्रों पर हमलाकर एक तरह से युद्ध छेड़ने का काम किया था।
लेकिन कहा जा सकता है कि तेल संयंत्रों पर हमले के बाद सऊदी अरब ने बहुत बड़े धैर्य का परिचय दिया था, क्योंकि यदि सऊदी अरब बदले की कार्रवाई करते हुई ईरान पर हमला करता तो दोनों देशों की बीच युद्ध छिड़ जाता और इससे तेल की आपूर्ति ठप होने से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो जाती।
यानी कि साफ़ है कि सऊदी अरब तेल की दुनिया की सबसे बड़ी कम्मनी अरामको के दो संयंत्रों पर हमले के बाद ईरान पर आक्रमण करने के मूड़ में था, लेकिन सऊदी अरब जानता था कि खाड़ी में यदि युद्ध छिड़ जाता तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पटरी से उतर जाती। लेकिन इस हमले के बाद तय है कि सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों पर गम्भीर ख़तरा मण्डरा रहा है और यदि ईरान की तरफ़ से फ़िर इस तरह का कोई हमला फ़िर किया गया, तो इस बार हो सकता है कि सऊदी अरब, ईरान पर बदले की कार्रवाई करे। और यदि ऐसा होता है तो इससे पूरी दुनिया की तेल आपूर्ति बुरी तरह से बाधित होगी और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी।