मंदी से निपटने के लिए इनकम टैक्स में कटौती कर सकती है मोदी सरकार!
Tuesday - October 1, 2019 3:57 pm ,
Category : WTN HINDI
मोदी सरकार ले सकती है इनकम टैक्स में कटौती का फ़ैसला, बाज़ार में आएगी रौनक
बाज़ारों में रौनक लौटाने मोदी सरकार की बड़ी प्लानिंग
OCT 01 (WTN) – वैश्विक आर्थिक मंदी से भारतीय अर्थव्यवस्ता भी अछूती नहीं रही है। ऑटो सेक्टर से लेकर टैक्सटाइल सेक्टर पर मंदी का सबसे ज़्यादा असर हुआ है। लगातार जारी आर्थिक मंदी से कम्पनियों को राहत देने के लिए मोदी सरकार ने कॉरपोरेट टैक्स में कटौती कर कॉरपोरेट सेक्टर को राहत देने की कोशिश की है, कहा जा रहा है कि इसके परिणाम आने वाले समय में देखने को मिलेंगे। लेकिन आर्थिक मंदी की मार कम्पनियों के साथ-साथ आम टैक्स पेयर को भी भुगतना पड़ रही है। मंदी की मार से छोटे व्यापारियों और टैक्स पेयर्स को बचाने के लिए कहा जा रहा है कि अब मोदी सरकार कॉरपोरेट टैक्स घटाने के बाद इनकम टैक्स में कटौती करने की तैयारी कर रही है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, वित्त मंत्रालय में राजस्व विभाग के अंतर्गत आने वाले सीबीडीटी डिपार्टमेंट, जो कि इनकम टैक्स से जुड़ी नीतियों को तय करता है, में बैठकों का दौर चल रहा है। कहा जा रहा है कि इन बैठकों में यह चर्चा की जा रही है कि किस तरह के आम टैक्स पेयर्स को इनकम टैक्स में कटौती का लाभ दिया जाए। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि इस बैठक का जो आधार बनाया गया है, वो टास्क फोर्स की सिफारिश को बनाया गया है।
दरअसल, डायरेक्ट टैक्स में बदलाव को लेकर टास्क फोर्स ने अपनी सिफारिश पिछले महीने सौंप दी थी, और उस सिफारिश को आधार बनाते हुए इसमें बदलाव की समीक्षा की जा रही है कि आख़िर किस तरीक़े से इनकम टैक्स में बदलाव किया जाए। कहा जा रहा है कि इनकम टैक्स कटौती का यदि फ़ैसला लिया जाता है, तो इसमें छोटे और मझोले करदाताओं को राहत दी जा सकती है।
अर्थशास्त्र के जानकारों का मानना है कि सरकार यह पूरी कवायद इसलिए कर रही है ताकि इनकम टैक्स में कटौती करने से छोटे और मझोले टैक्सपेयर्स को राहल मिले, जिससे उनके पास पहले की तुलना में ज़्यादा पैसा बचे। जब पहले की तुलना में ज़्यादा पैसा बचेगा तो छोटे और मझोले टैक्सपेयर्स इन पैसों से ख़रीदी करेंगे, जिससे बाज़ार में ख़रीदी की रौनक आएगी और पैसा मार्केट में आएगा।
कहा जा रहा है कि इसी मंशा को लेकर टास्क फोर्स की उस सिफारिश को आधार बनाकर इनकम टैक्स में कटौती जा सकती है, जिसमें कहा गया है कि पांच लाख रुपये तक की सालाना आमदनी पर किसी भी तरह का इनकम टैक्स नहीं लगाया जाना चाहिए। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि अभी 2.50 लाख रुपये तक की सालाना आमदनी टैक्स फ्री है।
वहीं यदि टास्क फोर्स की सिफारिश को मान लिया जाता है, तो 5 लाख रुपये तक की सालाना आमदनी टैक्स फ्री रहेगी यानी कि 5 लाख रुपये तक की सालाना आमदनी पर किसी भी तरह का इनकम टैक्स नहीं देना पड़ेगा। वहीं सालाना आमदनी 5 लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक 10 प्रतिशत इनकम टैक्स का प्रावधान है। यदि ऐसा होता है तो इससे छोटे और मझोले टैक्स पेयर्स के पास पहले की तुलना में ज़्यादा पैसा बचेगा, जिसका उपयोग वे निवेश या ख़रीदी में करेंगे जिससे मंदी की मार झेल रही अर्थव्यवस्था को सहारा मिलेगा।
वहीं टास्क फोर्स की सिफारिश है कि 10 लाख रुपये से 20 लाख रुपये तक की सालाना आमदनी पर 20 प्रतिशत और 20 लाख रुपये से 2 करोड़ रुपये तक की सालाना आमदनी पर 30 प्रतिशत टैक्स लगाया जाना चाहिए। टास्क फोर्स की सिफारिश में एक महत्वपूर्ण बात यह कही गई है कि 2 करोड़ रुपये से ज़्यादा की सालाना आमदनी पर 35 प्रतिशत की दर से इनकम टैक्स लगाया जाना चाहिए, लेकिन सिफारिश में यह भी कहा गया है कि हर तरह के सरचार्ज को हटाया जाना चाहिए।
अब टास्क फोर्स की इन्हीं सिफारिशों पर समीक्षा की जा रही है कि क्या इनकम टैक्स में कटौती करना व्यहवारिक होगा कि नहीं, क्योंकि सरकार इनकम टैक्स में कटौती का कोई भी फ़ैसला अपने खजाने की हालत देखने के बाद ही लेगी। यानी कि यदि मोदी सरकार को लगता है कि इनकम टैक्स में कटौती करने से सरकारी खजाने पर बोझ नहीं पड़ेगा, तो हो सकता है कि बाज़ार में रौनक लाने के लिए मोदी सरकार देश की जनता को इनकम टैक्स कटौती का तोहफा दे सकती है।
OCT 01 (WTN) – वैश्विक आर्थिक मंदी से भारतीय अर्थव्यवस्ता भी अछूती नहीं रही है। ऑटो सेक्टर से लेकर टैक्सटाइल सेक्टर पर मंदी का सबसे ज़्यादा असर हुआ है। लगातार जारी आर्थिक मंदी से कम्पनियों को राहत देने के लिए मोदी सरकार ने कॉरपोरेट टैक्स में कटौती कर कॉरपोरेट सेक्टर को राहत देने की कोशिश की है, कहा जा रहा है कि इसके परिणाम आने वाले समय में देखने को मिलेंगे। लेकिन आर्थिक मंदी की मार कम्पनियों के साथ-साथ आम टैक्स पेयर को भी भुगतना पड़ रही है। मंदी की मार से छोटे व्यापारियों और टैक्स पेयर्स को बचाने के लिए कहा जा रहा है कि अब मोदी सरकार कॉरपोरेट टैक्स घटाने के बाद इनकम टैक्स में कटौती करने की तैयारी कर रही है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, वित्त मंत्रालय में राजस्व विभाग के अंतर्गत आने वाले सीबीडीटी डिपार्टमेंट, जो कि इनकम टैक्स से जुड़ी नीतियों को तय करता है, में बैठकों का दौर चल रहा है। कहा जा रहा है कि इन बैठकों में यह चर्चा की जा रही है कि किस तरह के आम टैक्स पेयर्स को इनकम टैक्स में कटौती का लाभ दिया जाए। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि इस बैठक का जो आधार बनाया गया है, वो टास्क फोर्स की सिफारिश को बनाया गया है।
दरअसल, डायरेक्ट टैक्स में बदलाव को लेकर टास्क फोर्स ने अपनी सिफारिश पिछले महीने सौंप दी थी, और उस सिफारिश को आधार बनाते हुए इसमें बदलाव की समीक्षा की जा रही है कि आख़िर किस तरीक़े से इनकम टैक्स में बदलाव किया जाए। कहा जा रहा है कि इनकम टैक्स कटौती का यदि फ़ैसला लिया जाता है, तो इसमें छोटे और मझोले करदाताओं को राहत दी जा सकती है।
अर्थशास्त्र के जानकारों का मानना है कि सरकार यह पूरी कवायद इसलिए कर रही है ताकि इनकम टैक्स में कटौती करने से छोटे और मझोले टैक्सपेयर्स को राहल मिले, जिससे उनके पास पहले की तुलना में ज़्यादा पैसा बचे। जब पहले की तुलना में ज़्यादा पैसा बचेगा तो छोटे और मझोले टैक्सपेयर्स इन पैसों से ख़रीदी करेंगे, जिससे बाज़ार में ख़रीदी की रौनक आएगी और पैसा मार्केट में आएगा।
कहा जा रहा है कि इसी मंशा को लेकर टास्क फोर्स की उस सिफारिश को आधार बनाकर इनकम टैक्स में कटौती जा सकती है, जिसमें कहा गया है कि पांच लाख रुपये तक की सालाना आमदनी पर किसी भी तरह का इनकम टैक्स नहीं लगाया जाना चाहिए। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि अभी 2.50 लाख रुपये तक की सालाना आमदनी टैक्स फ्री है।
वहीं यदि टास्क फोर्स की सिफारिश को मान लिया जाता है, तो 5 लाख रुपये तक की सालाना आमदनी टैक्स फ्री रहेगी यानी कि 5 लाख रुपये तक की सालाना आमदनी पर किसी भी तरह का इनकम टैक्स नहीं देना पड़ेगा। वहीं सालाना आमदनी 5 लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक 10 प्रतिशत इनकम टैक्स का प्रावधान है। यदि ऐसा होता है तो इससे छोटे और मझोले टैक्स पेयर्स के पास पहले की तुलना में ज़्यादा पैसा बचेगा, जिसका उपयोग वे निवेश या ख़रीदी में करेंगे जिससे मंदी की मार झेल रही अर्थव्यवस्था को सहारा मिलेगा।
वहीं टास्क फोर्स की सिफारिश है कि 10 लाख रुपये से 20 लाख रुपये तक की सालाना आमदनी पर 20 प्रतिशत और 20 लाख रुपये से 2 करोड़ रुपये तक की सालाना आमदनी पर 30 प्रतिशत टैक्स लगाया जाना चाहिए। टास्क फोर्स की सिफारिश में एक महत्वपूर्ण बात यह कही गई है कि 2 करोड़ रुपये से ज़्यादा की सालाना आमदनी पर 35 प्रतिशत की दर से इनकम टैक्स लगाया जाना चाहिए, लेकिन सिफारिश में यह भी कहा गया है कि हर तरह के सरचार्ज को हटाया जाना चाहिए।
अब टास्क फोर्स की इन्हीं सिफारिशों पर समीक्षा की जा रही है कि क्या इनकम टैक्स में कटौती करना व्यहवारिक होगा कि नहीं, क्योंकि सरकार इनकम टैक्स में कटौती का कोई भी फ़ैसला अपने खजाने की हालत देखने के बाद ही लेगी। यानी कि यदि मोदी सरकार को लगता है कि इनकम टैक्स में कटौती करने से सरकारी खजाने पर बोझ नहीं पड़ेगा, तो हो सकता है कि बाज़ार में रौनक लाने के लिए मोदी सरकार देश की जनता को इनकम टैक्स कटौती का तोहफा दे सकती है।